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दिल्ली 2015 का एक्जिट पोल : एएपी स्पष्ट रूप से आगे

सौम्या तिवारी,

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए एग्जिट पोल्स (चुनावी अनुमानों ) से  एक ही स्पष्ट विजेता सामने आता है -अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में  आम आदमी पार्टी (आप)।

 

अनुमानों के अनुसार से  70 विधानसभा सीटों में से एएपी को 35 से  53 सीटों तक मिल सकती हैं,  दो चुनावी अनुमानों ने पूरी दिल्ली विधानसभा से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के सफाया होने की भविष्यवाणीभी की है।

 

अरविंद केजरीवाल के लिए एक चुनौती के रूप में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर  से किरण बेदी की अचानक के साथ वर्ष  2015  दिल्ली के  मुख्यमंत्री के पद के लिए एक भीषण राजनैतिक  संघर्ष का गवाह रहा।

 

एग्ज़िट पोल्स  2015: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सीट की हिस्सेदारी

 

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इससे पहले एक अध्ययन में, इंडिया स्पेंड ने दिल्ली की सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों और तीन दलों में से प्रत्येक ने 2014 के लोकसभा चुनाव में  कैसा प्रदर्शन  किया  इसका विश्लेषण किया था।  इंडिया स्पेंड के संस्थापक न्यासी(ट्रस्टी) और चुनावी डाटा (आंकड़े )  विश्लेषक, प्रवीण चक्रवर्ती, ने अपने एक  अध्ययन में  यह पाया कि भाजपा को 60 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में अधिकतम वोट मिले थे ।

 

स्पष्ट रूप से विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल्स  एक अलग तस्वीर खींच रहे हैं।

 

अब हम देखते हैं कि 2013 में चुनावी पूर्वानुमान कितने सटीक थे । एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार  जिसमे विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों की कुल गणना की गई थी भाजपा ने अधिकतम संख्या में सीटें प्राप्त की थी।  लेकिन यहां भी एक दिलचस्प मोड़ में 2013  में भाजपा को सबसे अधिक संख्या में सीटें तो मिली लेकिन एएपी कांग्रेस के समर्थन के साथ सरकार बनाने में कामयाबी हासिल हुई।

 

एग्जिट पोल्स बनाम वास्तविक परिणाम  2013

 

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एग्जिट पोल्स में 2013 दिल्ली राज्य विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की गिरावट अंदाज़ा नहीं लगाया था । और एएपी को भी कम आंका गया था। इस चुनाव, हालांकि, इस बार चुनावों में  भाजपा और आप के बीच एक करीबी संघर्ष है।

 

भारतीय जनता पार्टी का तुरुप का इक्का रहीं मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में किरण बेदी। हालाँकि एएपी को  भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे के आंदोलन से भारी सफलता मिली है, लेकिन  भाजपा उसी आंदोलन से एक नेता (बेदी) को अपनी ओर करने में कामयाब रही । तो, क्या बेदी के आने से  भाजपा को वास्तव में कोई लाभ होगा ?  10 फरवरी को हमे अंतिम परिणाम पता चल ही जाएगा।

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