Home » Cover Story » निम्न-मध्यम आय वाले देशों में स्वास्थ्य पर निजी खर्च के मामले में भारत छठा सबसे बड़ा देश

निम्न-मध्यम आय वाले देशों में स्वास्थ्य पर निजी खर्च के मामले में भारत छठा सबसे बड़ा देश

विपुल विवेक,

oop_620

 

वर्ष 2014 में निम्न-मध्यम आय समूह वाले 50 देशों में स्वास्थ्य पर खर्च करने में भारत छठवें स्थान पर है। यह जानकारी ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ द्वारा हाल ही के दो अध्ययनों पर इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आई है। विश्लेषण के मुताबिक, निम्न-मध्यम आय वाले नागरिकों की तुलना में भारतीयों ने 27.4 प्रतिशत ज्यादा खर्च किया है। निम्न-मध्यम आय वाले नागरिकों के लिए यह आंकड़े 38.2 फीसदी हैं।

 

‘द लैंसेट’ ने 184 देशों में स्वास्थ्य पर सार्वजनिक और निजी खर्च पर दो अध्ययन किया है। यह अध्ययन 19 अप्रैल, 2017 को प्रकाशित हुआ है। पहले अध्ययन में दिखाया गया है कि  कुल स्वास्थ्य व्यय आर्थिक विकास के साथ अलग-अलग होता है, लेकिन इसमें देशों के बीच काफी भिन्नता है। दूसरे अध्ययन में उम्मीद जताई गई है कि कम आय वाले देशों में सरकारी व्यय को काफी हद तक बढ़ाने की आवश्यकता होगी, क्योंकि इन देशों में निजी प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च में उतनी जल्दी वृद्धि नहीं होगी, जितनी होनी चाहिए।

 

हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि, सर्वेक्षण में किए गए सभी 184 देशों में, स्वास्थ्य पर खर्च करने में बांग्लादेशियों के साथ भारतीयों का स्थान छठवें नंबर पर है। 65.6 फीसदी पर, भारतीयों द्वारा स्वास्थ्य पर निजी खर्च 28.15 फीसदी के विश्व औसत से 37.45 प्रतिशत अंक ज्यादा है।

 

स्वास्थ्य खर्च पैटर्न, 2014

Source: Evolution and patterns of global health financing 1995–2014: development assistance for health, and government, prepaid private, and out-of-pocket health spending in 184 countries, published in The Lancet on April 19, 2017

 

हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि, बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और पाकिस्तान से बने दक्षिण एशिया के क्षेत्र में भारतीयों और बांग्लादेशियों का स्वास्थ्य व्यय औसत 55.4 फीसदी की तुलना में 10.2 प्रतिशत अधिक है।

 

स्वास्थ्य व्यय पैटर्न: दक्षिण एशिया में भारत

Source: Evolution and patterns of global health financing 1995–2014: development assistance for health, and government, prepaid private, and out-of-pocket health spending in 184 countries, published in The Lancet on April 19, 2017

 

ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) में भी स्वास्थ्य पर भारत सबसे ज्यादा खर्च वाला देश है। यह ब्रिक्स समूह के 34.6 फीसदी व्यय करने की तुलना में 31 प्रतिशत ज्यादा खर्च करता है।

 

स्वास्थ्य व्यय पैटर्न: ब्रिक्स देशों में भारत

Source: Evolution and patterns of global health financing 1995–2014: development assistance for health, and government, prepaid private, and out-of-pocket health spending in 184 countries, published in The Lancet on April 19, 2017

 

ब्रिक्स देशों में भारत सरकार का लोगों के स्वास्थ्य पर कम योगदान

 

वर्ष 2014 में, 184 देशों में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च के मामले में भारत 147 वें स्थान पर था। हम बता दें कि भारत का स्थान पाकिस्तान से एक पायदान नीचे था। वर्ष 2014 में अपने नागरिकों पर 31.3 फीसदी के कुल स्वास्थ्य व्यय पर भारत सरकार का योगदान 55% फीसदी के विश्व औसत से 23.7 प्रतिशत अंक कम था, जैसा कि हमारे विश्लेषण से पता चलता है।

 

वर्ष 2014 में, 50 कम-मध्यम-आय वाले देशों में भारत 39वें स्थान पर था। 47.2 फीसदी के समूह औसत से भारत 15.9 प्रतिशत अंक कम खर्च करता है। दक्षिण एशिया सुपर क्षेत्र के पांच देशों में भारत में कुल स्वास्थ्य व्यय का सरकार का हिस्सा पाकिस्तान (32.1 फीसदी) से भी कम है और भूटान (70.7 फीसदी) के आधे से भी कम है।

 

ब्रिक्स देशों में, भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च किया है। भारत के लिए आंकड़ा वर्ष में 47 फीसदी के समूह औसत से 15.7 प्रतिशत अंक कम रहा है, जैसा कि हमारे विश्लेषण से पता चला है।

 

‘द लैंसैट’ के रिसर्च में वर्ष1995 और वर्ष 2014 के बीच 184 देशों में आर्थिक विकास और स्वास्थ्य खर्च के बीच के संबंधों का अध्ययन किया गया है।

 

शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि औसतन, आर्थिक विकास और स्वास्थ्य व्यय विश्व स्तर पर साथ-साथ नहीं चलते हैं। प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च में सरकार की हिस्सेदारी बढ़ जाती है, जबकि आर्थिक विकास के साथ जेब के व्यय में गिरावट होती है।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 1995 की तुलना में वर्ष 2014 में कुल स्वास्थ्य व्यय के एक हिस्से के रूप में स्वास्थ्य पर भारत सरकार ने चार प्रतिशत अंक अधिक खर्च किया है और भारतीयों ने अपनी जेबों में से पांच प्रतिशत अंक खर्च किया है।

 

भारत स्वास्थ्य व्यय पैटर्न, 1995-2014

Source: World Health Organization

 

10 सालों में स्वास्थ्य पर निजी खर्च वजह से 5.06 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे पहुंचे

 

पिछले 10 सालों से वर्ष 2014 तक, स्वास्थ्य पर जेब खर्च से 5.06 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे पहुंच गए हैं, जैसा कि नई दिल्ली के औद्योगिक विकास संस्थान के शैलेंद्र कुमार हुड्डा द्वारा राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 68 वें और 71 के दौर के विश्लेषण से पता चलता है।

 

इनमें से करीब 27 फीसदी लोग उत्तर प्रदेश से हैं। राज्य में 70% से अधिक आंत्र रोगी उपचार निजी प्रदाताओं से प्राप्त होते हैं और राज्य प्रायोजित स्वास्थ्य बीमा के लाभार्थियों की या तो पहचान नहीं की गई है या केवल एक छोटे से अनुपात का नामांकन किया गया था। 30 फीसदी परिवारों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत नामांकित किया गया था, जबकि राष्ट्रीय औसत 58 फीसदी था। अस्पताल में भर्ती के केवल 7 फीसदी मामलों को पूर्ण या आंशिक बीमा सहयोग प्राप्त हुआ, जबकि राष्ट्रीय औसत 29 फीसदी का है।

 

हुड्डा के अनुसार, स्वास्थ्य सुविधाओं के सार्वजनिक प्रावधान के मुकाबले, बीमा-आधारित सरकारी पहल कुल घरेलू खर्च के हिस्से के रूप में जेब स्वास्थ्य खर्च को कम करने में काफी असफल रहे हैं। जिलों में ऐसे परिवार जहां केंद्रीय और राज्य सरकारों के बीमा पॉलिसियों का अधिक भारी लक्ष्य है, उनकी गरीबों की तुलना में गरीबी रेखा से नीचे गिरने की संभावना अधिक है, जहां गरीबों के स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत नामांकन कम है।

 

16 मार्च, 2017 को जारी नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के अनुसार, भारत सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य व्यय में सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 फीसदी तक वृद्धि करना है। हम बता दें कि वर्ष 2015 में यह जीडीपी का 1.16 फीसदी था। विश्व स्वास्थ्य संगठन जीडीपी के 5 फीसदी खर्च करने की सिफारिश करता है

 

वर्ष 2040 तक भारत में स्वास्थ्य में निजी खर्च में गिरावट के संकेत

 

वर्ष 1995-2014 के आंकड़ों के आधार पर 2040 के लिए ‘द ’के अनुमानों पर हमारे विश्लेषण के अनुसार, भारतीयों को औसत वैश्विक गिरावट (1.4 प्रतिशत अंक) की तुलना में 2040 (11.3 प्रतिशत अंक) से ज्यादा खर्च किए जाने वाले स्वास्थ्य खर्च में गिरावट देखने की संभावना है।

 

‘द लैंसेट’का पूर्वानुमान में वर्ष 2015 से अगले 25 वर्षों के लिए आर्थिक विकास और स्वास्थ्य व्यय पैटर्न के बीच संबंध का अनुमान लगाने के लिए 1980-2015 (1 994-2014 के दौरान स्वास्थ्य व्यय आंकड़े) के दौरान 184 देशों के लिए आर्थिक डेटा का इस्तेमाल किया गया था।

 

फिर भी,  वर्ष 2040 में 54.3 फीसदी भारतीय का वैश्विक औसत (24.9 फीसदी) की तुलना में अपनी जेबों से 29.4 फीसदी और कम मध्यम आय समूह औसत (35.2 फीसदी) की तुलना में 19.1 प्रतिशत अंक अधिक खर्च करने का पूर्वानुमान किया गया है।

 

कुल स्वास्थ्य व्यय में, स्वास्थ्य जेब खर्च का हिस्सा के रुप में वर्ष 2040 में दुनिया के 184 देशों में भारत का 11 वां स्थान होने का अनुमान है। जबकि निचले मध्यम आय वर्ग में नौवां सबसे बड़ा, दक्षिण एशिया सुपर क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा और ब्रिक्स समूह में सबसे बड़ा है स्थान होने का अनुमान किया गया है।

 

2040 के लिए स्वास्थ्य व्यय पैटर्न अनुमान: दक्षिण एशिया में भारत

Source: Future and potential spending on health 2015–40: development assistance for health, and government, prepaid private, and out-of-pocket health spending in 184 countries, published in The Lancet on April 19, 2017

 

2040 के लिए स्वास्थ्य व्यय पैटर्न अनुमान: ब्रिक्स में भारत

Source: Future and potential spending on health 2015–40: development assistance for health, and government, prepaid private, and out-of-pocket health spending in 184 countries, published in The Lancet on April 19, 2017

 

वर्ष 2040 में कुल स्वास्थ्य व्यय में सरकार के हिस्से में अनुमानित वृद्धि दक्षिण एशिया सुपर क्षेत्र (12.5 प्रतिशत अंक) के लिए 12.4 प्रतिशत अंकों की औसत वृद्धि से कम है, लेकिन वैश्विक (6.1 प्रतिशत अंक) औसत और और निम्न-मध्यम-आय वर्ग (9.7 प्रतिशत अंक) वृद्धि से अधिक है।

 

2040 में भी स्वास्थ्य पर भारत का सार्वजनिक खर्च वैश्विक औसत से कम

 

वर्ष 2040 में कुल स्वास्थ्य व्यय में भारत सरकार का हिस्सा 18.35 प्रतिशत अंकों के मुकाबले वैश्विक औसत (62.05 फीसदी), निचला मध्यम समूह औसत (52.6 फीसदी) 8.9 प्रतिशत अंक और ब्रिक्स समूह की औसत 10.1 प्रतिशत अंक से कम होगा, जैसा कि ‘द लैंसेट’का के रिपोर्ट पर हमारे विश्लेषण से पता चलता है।

 

ब्रिक्स देशों में, भारत सरकार को वर्ष 2040 में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर कम से कम खर्च करने का अनुमान है। जबकि विश्व बैंक के द्वारा यह अनुणान लगाया गया है कि यह 2014 में 39 से 2040 में 36 तक जाएगा और विश्व में 147 से 143 तक जाएगा।

 

(विवेक विश्लेषक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं। )

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 08 मई 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। हमसे respond@indiaspend.org पर संपर्क किया जा सकता है। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार रखते हैं।

 
__________________________________________________________________

 

“क्या आपको यह लेख पसंद आया ?” Indiaspend.com एक गैर लाभकारी संस्था है, और हम अपने इस जनहित पत्रकारिता प्रयासों की सफलता के लिए आप जैसे पाठकों पर निर्भर करते हैं। कृपया अपना अनुदान दें :

 

Views
2890

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *