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नीतीश के साथ बिहार है विकास की राह पर?- II

प्राची सालवे एवं सौम्या तिवारी,

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  • देश के गरीब राज्यों में बिहार के माध्यमिक विद्यालयों में सबसे कम नामंकन हुआ है।
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  • गरीब राज्यों में बिहार का अपराध दर सर्वाधिक पाया गया है।
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  • बिहार में शिशु मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान में बिहार कई दूसरे राज्यों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
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  • गरीब राज्यों में बिहार का मातृ मृत्यु सबसे बेहतर पाया गया है।

 

इंडियास्पेंड ने इस लेख के पहले भाग में बताया है कि किस प्रकारराज्य में होने वाले चुनाव से पहले सबका ध्यान बिहार पर ही केंद्रित है जोकि देश का तीसरा सर्वाधिक आबादी वाला राज्य ( फिलिपींस देश की आबादी के बाराबर ) है।

 

हमने देखा कि किस प्रकार आर्थिक एवं बुनियानी ढ़ाचे के विकास मामले में बिहार अब भी काफी पिछड़ा हुआ है।

 

यहां हम बिहार के सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के आंकड़े की तुलना अन्य ईएजी राज्यों के साथ कर विकास के दूसरे पहलू पर चर्चा करेंगे। गौरतलब है कि देश के आठ राज्यों, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड, ओडिसा, उतरांचल एवं उत्तर प्रदेश की पहचान ईएजी राज्य के रुप में की गई है।

 

बिहार में सक्षरता दर सबसे कम

 

2011 की जनगणना के मुताबिक देश में बिहार राज्य की साक्षरता दर सबसे कम है : बिहार की 104 मिलियन जनता में से 64 फीसदी लोग निरक्षर हैं। यह आंकड़े मलावी, दो कांगो एवं सुडान सहित कई गरीब अफ्रीकन देशों की साक्षरता दर से भी नीचे है।

 

भारतीय सक्षरता दर 74 फीसदी है।

 

प्राथमिक स्तर पर ( आयु 6-15, कक्षा 1-8 ) बिहार का नामंकन अनुपात 100 से कम है जबकि 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए शिक्षा अनिवार्य बानाया गया है।

 

( सकल नामांकन अनुपात या जीईआर का तात्पर्य बिना आयु का ध्यान दिए, शिक्षा के एक विशिष्ट स्तर में नामांकन से है, जोकि एक अधिकारिक रुप से मान्यता प्राप्त स्कूल के आयुवर्ग की जनसंख्या को व्यक्त करती है। यदि नमांकन जल्दी या देरी से होता है या किसी कक्षा में दोबारा पढ़ाया जाता है तो कुल नमांकन उस आयुवर्ग की जनसंख्या से अधिक हो सकती है जो आधिकारिक तौर पर 100 से अधिक अनुपात के लिए अग्रणी शिक्षा के स्तर से मेल खाती है। )

 
सकल नामांकन आनुपात, प्राथमिक (%)
 

Source: District Information System for Education (primary) 2013-14

 

बिहार में साल 2014-15 में माध्यमिक स्तर ( आयु – 15-16, कक्षा 9-10 ) की शिक्षा के लिए जीईआर 60 दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि शिक्षा की तय अनिवार्य आयु ( 6-14 वर्ष ) के उपर अधिक बच्चे पढ़ने नहीं जाते हैं।
 
सकल नामांकन अनुपात, माध्यमिक (%)
 

Source: Unified District Information System for Education (secondary) 2013-14

 
 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा, 2013-14 (%)
 

 
स्कूलों में शौचालयों की सुविधा, 2013-14 (%)
 

Source: District Information System for Education (primary) 2013-14; Figures in %

 

2013-14 के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में केवल 58 फीसदी स्कूलों में लड़के एवं लड़कियों के लिए अलग शौचालयों की व्यवस्था है। वहीं केवल 88 फीसदी स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था पाई गई है जोकि ईएजी राज्यों में से सबसे कम है। माना गया है कि बुनियादी व्यवस्थाओं की कमी, विशेष कर शौचालय, के कारण ही स्कूलों में नामांकन कम होते हैं।

 

31 मार्च 2015 तक बिहार में स्वच्छ विद्यालय अभियान के तहत केवल 31.7 फीसदी काम ही पूरा किया गया है।

 

मप्र, उप्र, छत्तीसगढ़, ओडिसा, राजस्थान के मुकाबले बिहार में शिशु मृत्यु दर बेहतर

 

साल 2013 मेंशिशु मृत्यु दर ( आईएमआर )मामले में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन सबसे बुरा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में प्रति 1000 जीवित बच्चों पर 54 मृत बच्चों का अनुपात दर्ज किया गया है।

 
शिशु मृत्यु दर, 2013
 

Source: Census of India, 2011

 

42 शिशु मृत्यु दर के साथ बिहार का अन्य ईएजी राज्यों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन रहा है। साल 2010 में बिहार में शिशु मृत्यु दर 48 दर्ज किया गया था जबकि 2013 के आंकड़ों के मुताबिक यह गिर कर 42 तक पहुंच गया है। यह आंकड़े पड़ोसी देश जैसे-बांग्लादेश, नामीबिया, म्यांमार और पाकिस्तान के मुकाबले भी काफी बेहतर हैं।

 

इतने सुधार के बावजूद शिशु मृत्यु दर मामले में बिहर, दक्षिण के राज्यों, कर्नाटक ( 31 ), महाराष्ट्र ( 24 ), गुजरात ( 36 ) एवं केरला ( 12 ) से काफी पिछड़ा हुआ है।

 

बिहार में शहरी शिशु मृत्यु दर 33 है जबकि 42 ग्रामीण शिशु मृत्यु दर राज्य के लिए गंभीर समस्या का विषय बना हुआ है।

 

हालांकि बिहार के ग्रामीण इलाकों में शिशु मृत्यु दर में अधिक गिरावट दर्ज की गई है। 2010 में जहां यह आंकड़े 49 दर्ज किए गए वहीं 2013 में यह गिरकर 42 दर्ज की गई है। इसी अवधि के दौरान शहरी इलाकों में यह आंकड़े 38 से गिर कर 33 दर्ज की गई है।

 

अधिकतर बच्चों की मृत्यु डायरिया जैसी गंभीर बिमारी के कारण होती है। डायरिया के शिकार बच्चों को मौखिक पुनर्जलीकरण समाधान ( ओरल रीहायड्रेशन सल्यूशन, ओआरएस) के ज़रिए मृत्यु दर को और कम किया सकता है। साथ ही डिप्थीरिया , काली खांसी , टेटनस और खसरा के टीकाकरण को अनिवार्य कर शिशु मृत्यु दर में और सुधार लाया जा सकता है।

 

गरीब राज्यों में बिहार में सबसे कम मातृ मृत्यु दर

 

ईएजी के अन्य राज्यों के मुकाबले बिहार में मातृ मृत्यु दर ( एमएमआर) कम दर्ज की गई है। 2013 के आंकड़ों के मुताबिक प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर 219 मातृ मृत्यु के आंकड़े दर्ज की गई है। ओडिसा के मुकाबले बिहार में मातृ मृत्यु दर में काफी तेजी से गिरावट हुई है। 2007-09 में यह आंकड़े 261 दर्ज की गई थी।

 

हालांकि यदि राष्ट्रीय औसत से तुलना की जाए तो राज्य का मातृ मृत्यु दर काफी अधिक है। देश का मातृ मृत्यु दर 178 दर्ज किया गया है।
 
मातृ मृत्यु दर, 2013
 

Source: Press Information Bureau

 

संस्थागत कारकों का सुदृढ़ीकरण से प्रसव के दौरान महिलाओं की मृत्यु में कमी देखी गई है। घरों में प्रसव होने के मामले में भी कमी देखी गई है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो 2011 में घरों में होने वाले प्रसव में 47 फीसदी मामले दर्ज किए गए थे जबकि 2012 में यह आंकड़े 42 फीसदी दर्ज की गई है। सुरक्षित प्रसव एवं संस्थागत प्रसव में भी सुधार देखी गई है। सुरक्षित प्रसव 59.9 फीसदी से बढ़ कर 64.5 फीसदी देखा गया है जबकि संस्थागत प्रसव के मामले 51 फीसदी से बढ़कर 55.7 फीसदी दर्ज की गई है।

 

कानून एवं अपराध गंभीर चिंता का विषय

 

30 के आंकड़ों के साथ ईएजी के अन्य राज्यों के मुकाबले बिहार अपराध मामले में दूसरे स्थान पर है। देश की जनसंख्या में बिहार की हिस्सेदारी 8.6 फीसदी है जबकि हिंसापूर्ण अपराध के लिए 10 फीसदी जिम्मेदार माना गया है।

 

( राष्ट्रीयअपराधरिकॉर्डब्यूरो के मुताबिक अपराध दर को100,000 की आबादी पर अपराध की प्रति संख्या के रुप में परिभाषित किया गया है। अपराध दर, क्षेत्र में हुई घटनाओं की संख्या को रहने वाले लोगों की संख्या से भाग करने के बाद आने वाले परिणाम को 100,000 से गुना करने के बाद अपराध दर निकाला जाता है। )

 
ईएजी राज्यों में हिंसापूर्ण अपराध, 2013
 

Source: National Crime Records Bureau; *crime rate is the no. of crimes committed against every 100,000 people

 

वर्ष 2012 में 25.1 के मुकाबले 2013 में बिहार में अपराध दर में 30.5 की वृद्धि दर्ज की गई है। इस आंकड़े से साफ है कि राज्य में अब अधिक लोग अपराध की रिपोर्ट कर रहे हैं।

 

कम से कम 17 फीसदी मामले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के खिलाफ की गई है। वर्ष 2013 में बिहार में 3,441 हत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा देश में हुए कुल हत्या का 10 फीसदी है।

 

वर्ष 2013 के आंकड़ों के मुताबिक बिहार की राजधानी पटना में सर्वाधिक हत्या के मामले ( 286 ) दर्ज किए गए हैं। वहीं मोतिहारी में सबसे अधिक हत्या के प्रयास के मामले ( 719 ) दर्ज किए गए हैं।

 
बच्चों के खिलाफ अपराध, 2013
 

Source: National Crime Records Bureau; *crime rate is the no. of crimes committed against every 100,000 children

 

गरीब राज्यों के मुकाबले, बच्चों के खिलाफ अपराध मामले में बिहार दूसरे स्थान पर है। इस मामले में बिहार में 3.57 प्रति 100,000 बच्चे के आंकड़े दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़े राष्ट्रीय औसत आंकड़े की तुलना में कम हैं। राष्ट्रीय औसत 13.23 दर्ज की गई है। गरीब राज्यों में सबसे अधिक बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले छत्तीसगढ़ में दर्ज किए गए हैं। छत्तीसगढ़ में यह आंकड़े 37.68 देखे गए हैं।
 
महिलाओं के खिलाफ अपराध, 2013
 

Source: National Crime Records Bureau; *crime rate is the no. of crimes committed against every 100,000 women

 

बिहार में महिलाओं के खिलाफ सबसे कम, 28 प्रति 100,000 महिलाएं, मामले दर्ज किए गए हैं।देश की 52.2 औसत संख्या एवं अन्य गरीब राज्यों के मुकाबले बिहार में कम अपराध दर होने का एक मुख्य कारण बिहार की उच्च जनसंख्या ( 104 मिलियन, जिसमें से 49.8 मिलियन महिलाएं हैं ) हो सकता है।

 

13,600 से अधिक महिलाओं के खिलाफ अपराध मामले के साथ बिहार ईएजी राज्यों में पांचवे स्थान पर है।

 

आपत्तीसूचना: राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े वास्तविकताओं से अलग हो सकते हैं। इंडियास्पेंड ने पहले ही अपनी रिपोर्ट में बताया है कि किस प्रकार बिहार के पड़ोसी राज्य, उत्तर प्रदेश में अपराध एवं अन्य आंकड़ों में हेरफेर पाया गया है।

 

लेख का पहला भाग आप यहां पढ़ सकते हैं।

 

लेख के अगले एवं अंतिम भाग में हम अनुसूचित जाति एवं जनजाति की स्थिति पर चर्चा करेंगे।

 

( सालवे एवं तिवारी इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक हैं )

 

यह लेख मूलत: 18 अगस्त 2015 को अंग्रेजी में indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 
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