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पंजाब में नई सरकार के लिए बड़ी चुनौतियां, सुस्त विकास दर, बेरोजगारी, और नशे से निजात

इंडियास्पेंड टीम,

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पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह विधानसभा चुनाव में 117 सीटों में से 77 जीतने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए। वर्ष 2012 में पार्टी ने 46 सीटें जीती थी।

 

पंजाब में 16 मार्च,2017 को सत्ता संभालने जा रही नई सरकार के सामने राज्य में धीमी आर्थिक वृद्धि, युवाओं की अधिक बेरोजगारी, बड़ी संख्या में युवाओं का नशे का आदी होना, सेकेंडरी स्कूल से पहले बड़ी संख्या में छात्रों के पढ़ाई छोड़ने जैसी कई चुनौतियां हैं।

 

11 मार्च, 2017 को कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस पार्टी ने पंजाब विधान सभा चुनाव में 117 में से 77 सीटों के साथ जीत हासिल की थी। वर्ष 2012 में पार्टी को 46 सीटें मिली थी। राज्य में वर्ष 2012-17 तक सरकार चलाने वाले शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) की सीटों की संख्या इस बार 56 से घटकर मात्र 15 रह गई।

 

पंजाब में वर्ष 2014-15 में प्रति व्यक्ति आमदनी 96,638 रुपये थी, जो अग्रिम अनुमानों के अनुसार, 2015-16 में बढ़कर 101,498 रुपये पर पहुंचने की संभावना है, लेकिन इस वृद्धि से बहुत सी आर्थिक और सामाजिक समस्याएं खत्म नहीं होती। इस बारे में इंडियास्पेंड ने 2017 के जनवरी महीने की एक रिपोर्ट में विस्तार से बताया है।

 

कांग्रेस की नई सकार के कमान संभालने के साथ हम आपको देश के 11वें सबसे धनी राज्य, पंजाब में बड़े मुद्दों और कांग्रेस की ओर से अपने चुनावी घोषणापत्र में बताए गए उनके समाधानों पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं।

 

लड़खड़ाती कृषि व्यवस्था

 

पंजाब सरकार के डेटा के अनुसार, राज्य में नौ वर्षों में कृषि वृद्धि की दर लगातार कम हो रही है। यह दर वर्ष 2005-06 में 0.95% थी, वर्ष 2014-15 में -3.4% हो गई। 2011 की जनगणना के अनुसार इससे कृषि से जुड़ी कार्यशील जनसंख्या के 63 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

 

पंजाब में कृषि विकास दर-2005-16

Source: Economic & Statistical Organisation, Punjab government

 

हालांकि वर्ष 2015-16 में पंजाब में ‘राष्ट्रीय कृषि वृद्धि दर’ से अधिक कृषि वृद्धि दर दर्ज  होने की संभावना है, लेकिन कृषि आधारित गणना के डेटा के अनुसार, वर्ष 2005-06 से 2010-11 तक के पांच वर्षों में खेतों का औसत आकार 3.9 हेक्टेयर से घटकर 3.7 हेक्टेयर रह गया। ‘एशिया पैसिफिक जर्नल ऑफ रिसर्च’ की ओर से वर्ष 2016 के अध्ययन में पाया गया है कि बहुत से युवाओं की अब खेती में दिलचस्पी नहीं है।

 

पंजाब के लिए वर्ष 2015-16 में हुए आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, शोध एवं विकास की कमी और सिंचाई की सुविधाओं का उपयोग और उत्पादन बढ़ाने में अक्षमता से कृषि क्षेत्र में वृद्धि कम रही है।

 

कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में कहा गया है कि कृषि की अधिक वृद्धि के लिए पार्टी किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना जारी रखेगी। कृषि उत्पाद बाजारों में सुधार किया जाएगा। अधिक उत्पादन देने वाले बीजों की किस्मों के विकास में सहायता की जाएगी। नहरों से होने वाली सिंचाई की व्यवस्था को सुधारा जाएगा। फसलों के विविधीकरण में निवेश के लिए किसानों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। उत्पादन के लिए आधुनिक वेयरहाउस अधिक संख्या में बनाए जाएंगे और कृषि उत्पादन के लिए बेहतर परिवहन सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।

 

घोषणापत्र में गड़बड़ी को कम करने के लिए कृषि सब्सिडी के सीधे ट्रांसफर और फसलों के खराब होने के लिए मुआवजा बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति एकड़ करने जैसी अन्य योजनाओं की भी बात है।

 

युवाओं में अधिक बेरोजगारी

 

पंजाब के युवाओं में बेरोजगारी दर- 18 और 29 वर्षों के बीच बेरोजगार श्रम बल का अनुपात- 16.6% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 10.2% है। पंजाब में भारत की आठवीं सबसे अधिक युवा बेरोजगारी दर भी है।

 

युवा बेरोजगारी दर, 2015-16

Source: Labour BureauNote: For persons between 18-29 years in percentage

 

‘इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली’ के 2014 के पेपर के अनुसार, कृषि में मशीनों के अधिक उपयोग और इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी फर्मों में काम करने के लिए जरूरी कौशल नहीं होने के कारण पंजाब के ग्रामीण इलाकों के शिक्षित युवा अधर में लटके हुए हैं।

 

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस समिति (पंजाब स्टेट कांग्रेस कमेटी) की ओर से सूचना के अधिकार के जरिए प्राप्त किए गए आंकड़ों के हवाले से 3 फरवरी, 2014 को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा था कि शिरोमणि अकाली दल के सत्ता में रहने के दौरान वर्ष 2007 से 2014 के बीच लगभग 18,770 फैक्टरियां बंद हुईं।  अमृतसर में 8,053 फैक्टरियों पर ताला लगा और तरन तारन, मोगा, रोपड़ और मंसा जिलों में कोई नए उद्योग शुरू नहीं हुए।

 

अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में स्थित विचार मंच ‘सीएटीओ इंस्टीट्यूट’ की 2012 की कमेंटरी के अनुसार, पंजाब की गिरती वृद्धि दर के पीछे बढ़ती सब्सिडी के कारण सरकारी निवेश के लिए धन की कमी एक बड़ा कारण है।

 

‘वॉल स्ट्रीट जनरल’ ने 2011के मई में रिपोर्ट दी थी कि किसानों को मुफ्त बिजली जैसी लोक लुभावन नीतियां भी मंदी के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं। कांग्रेस के घोषणापत्र में कहा गया है कि वह किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना जारी रखेगी।

 

‘सीएटीओ इंस्टीट्यूट’ के वर्ष 2012 के पेपर के अनुसार, प्रतिबंधात्मक कानूनों के कारण जमीन की बढ़ी हुई कीमतें, कृषि पर जोर की वजह से उच्च शिक्षा की अनदेखी, 1990 के दशक से निवेश दर राष्ट्रीय औसत से कम होने और भ्रष्टाचार पंजाब में धीमी औद्योगिक वृद्धि के अन्य कारण हैं।

 

क्या कहता है घोषणापत्र: कांग्रेस के घोषणापत्र में कहा गया है कि सरकार ‘घर घर रोजगार’, यानी प्रत्येक परिवार में एक नौकरी उपलब्ध कराएगी। इसके लिए, होजरी, टेक्सटाइल, खेलों के सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, लकड़ी के काम, इलेक्ट्रिकल, हाथ के औजार, हल्की मशीनों के पुर्जे जैसे लघु और मध्यम आकार के औद्योगिक समूहों में नई जान डालने का प्रस्ताव है। इसके अलावा पंजाब में इकाइयां लगाने के लिए वैश्विक और घरेलू निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश की जाएगी। घोषणापत्र में कहा गया है कि सरकार पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों के आधार पर कंपनियों का चयन करेगी।

 

इस तरह से इन नई नौकरियों के सृजन किए जाने तक, सभी बेरोजगारों को प्रति माह 2,500 रुपये का बेरोजगारी भत्ता देने का भी वादा किया गया है।

 

उद्योग को आकर्षित करने के लिए घोषणापत्र में 5 रुपये प्रति यूनिट पर बिजली देने, पानी पर सब्सिडी और सीवरेज की सुविधा के भी वादे हैं। इसमें एक्साइज, टैक्स नीति और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए प्रशासन में सुधार के भी सुझाव हैं।

 

कठिन है नशे से निजात पाना

 

‘ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ और नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए कार्य करने वाले स्वयंसेवी संगठन ‘सोसाइटी ऑफ प्रमोशन ऑफ यूथ एंड मासेज’ के शोधकर्ताओं की ओर से किए गए वर्ष 2015 में ‘पंजाब ओपिओइड डिपेंडेंस सर्वे’ के अनुसार, पंजाब में लगभग 230,000 लोग अफीम पर निर्भर हैं और 860,000 अफीम का सेवन करने वाले व्यक्ति हैं।

 

इसके आदी 80% व्यक्तियों ने इसे छोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन इस समस्या में 35% को ही पेशेवर सहायता मिल सकी। इंडियास्पेंड की फरवरी 2017 की रिपोर्ट के अनुसार, अफीम पर निर्भर व्यक्ति नशीले पदार्थों पर प्रति दिन 1,400 रुपये खर्च करते हैं या पूरे राज्य में यह खर्च अनुमानित 7,575 करोड़ रुपये प्रति वर्ष का है।

 

क्या कहता है घोषणापत्र: कांग्रेस के घोषणापत्र में एक ‘शून्य सहनशीलता नीति’ का सुझाव दिया गया है। इसमें नशीले पदार्थों के व्यापार में शामिल लोगों के मामलों की जल्द सुनवाई करने, उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए एक नया कानून बनाने के प्रस्ताव के साथ ही ‘इस बुराई से बड़ा नुकसान’ उठाने वालों के लिए पुनर्वास के लिए एक नीति पेश करने की भी बात है।

 

इसमें युवाओं के लिए बड़े स्तर पर रोजगार के सृजन के लिए अधिक निवेश के साथ आर्थिक उत्पादकता बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। अंत में, इसमें शिक्षा नीति में बड़े बदलाव का प्रस्ताव है, जिससे युवाओं को भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था से लाभ मिल सके।

 

प्राथमिक शिक्षा की अनदेखी और स्कूल छोड़ने की समस्या

 

‘राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 2015-16’ के डेटा के अनुसार, 2011 में महिला साक्षरता दर 70.7% थी, जो 2015-16 में 11 प्रतिशत बढ़कर 81.4% पर पहुंच गई। पुरुष साक्षरता दर में धीमी वृद्धि हुई है। यह वर्ष 2011 में 80.4% से बढ़कर वर्ष 2015-16 में 87.5% पर है।

 

लेकिन साक्षरता और सामान्य शिक्षा बजट बढ़ने के बावजूद, प्राथमिक स्तर पर औसत वार्षिक पढ़ाई छोड़ने की दर 2014-15 में 1.3% से बढ़कर 2015-16 में 3.1% पर पहुंच गई।

 

डिस्ट्रिक्ट इनफॉमेशन फॉर सिस्टम एजुकेशन( डीआईएसई) के डेटा के अनुसार पंजाब में 2015-16 में प्राथमिक आयु के 84% छात्रों का नामांकन प्राथमिक स्कूल में हुआ था, लेकिन माध्यमिक आयु के स्कूली छात्रों के केवल आधे (51.6%) का ही माध्यमिक स्कूल में नामांकन हुआ।

 

हालांकि, राज्य में सीखने के स्तर अन्य भारतीय राज्यों से अधिक हैं, लेकिन बहुत से छात्र पिछड़ गए हैं, और अन्य ग्रेड स्तर पर नहीं सीखते। उदाहरण के लिए वर्ष 2016 में ग्रामीण पंजाब में परिवारों में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि ग्रेड III के आधे से कम (48.7%) बच्चे गणित में घटाने का सवाल हल कर सकते थे, जबकि केवल 35.2% ही ग्रेड II स्तर का पाठ पढ़ सकते थे।

 

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की मई 2016 की रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा के कमरों की कमी, मौजूदा कक्षाओं में छात्रों की अधिक संख्या और बिजली या पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी, कुछ ऐसे कारण हैं जिनसे छात्र पढ़ाई छोड़ देते हैं या कक्षाओं में नहीं जाते।

 

क्या कहता है  घोषणापत्र: कांग्रेस के घोषणापत्र में राज्य में शिक्षा में सुधार के लिए बहुत से प्रावधानों का जिक्र है। इनमें राज्य के सकल घरेलू उत्पादन का 6% शिक्षा पर खर्च करना, शुरुआती बचपन की देखभाल और शिक्षा पर जोर, गुणवत्ता वाली शिक्षा को बढ़ावा, डिजिटल शैक्षिक कार्यक्रम, शिक्षकों की पर्याप्त संख्या में नियुक्ति, गैर-शिक्षण कार्यों में उनके खर्च होने वाले समय को कम करना और सभी छात्रों को स्कूल के लिए मुफ्त परिवहन शामिल हैं।

 

कमजोर स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था और स्वास्थ्य बीमा का दायरा कम होने की वजह से पंजाब मोटापे और कमजोर पोषण के एक दोहरे बोझ का सामना कर रहा है। पुरुषों में मोटापा (27.8%) और महिलाओं में (31.3%) है। वर्ष 2015 में समाप्त हुए दशक में क्रमशः 5.6 और 1.4 प्रतिशत बढ़ा है। इससे अधिक व्यक्तियों में गैर-संचारी रोगों का जोखिम पैदा हुआ है, इस स्थिति से निपटने में राज्य की स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था तैयार नहीं दिखती।

 

इसके साथ ही, रक्त की कमी वाले पुरुषों का अनुपात वर्ष 2005 (13.6%) से 2015 (25.9%) के बीच दोगुना हो गया है। रक्त की कमी वाली महिलाओं का अनुपात 38% से बढ़कर 53.5% पर पहुंच गया।

 

फरवरी 2017 में ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन’ द्वारा नए सरकारी डेटा के विश्लेषण के अनुसार, बच्चों में वेस्टिंग (लंबाई के अनुसार कम वजन) वर्ष 2005 में 9.2% से बढ़कर वर्ष 2015 में 15.6% हो गया है। प्रत्येक चार में से एक बच्चा अभी भी स्टंटेड (आयु के अनुसार कम लंबाई) हैं।

 

वर्ष 2014 में ‘प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी’ के एक अध्ययन के अनुसार, पंजाब की सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में खाली पद और अनुपस्थिति से सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य देखभाल सेवा में सुधार होना मुश्किल हो रहा है। इसके परिणाम में, निजी स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं पर निर्भरता अधिक है। बाहरी रोगी के लिए 83फीसदी और भर्ती रोगी के लिए 66 फीसदी, जिससे पंजाब में एक बार अस्पताल जाने के चिकित्सा खर्च का औसत देश में सबसे अधिक है।

 

पंजाब में स्वास्थ्य बीमा का दायरा भी कम है, लगभग 5.6%, जबकि पूरे देश का औसत 15.2% है।

 

क्या कहता है  घोषणापत्र: कांग्रेस के घोषणापत्र में सभी के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा का वादा है, इसमें 18 वर्ष से कम और 60 वर्ष से अधिक के व्यक्तियों के लिए प्रीमियम का खर्च राज्य सरकार उठाएगी।

 

इसमें प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पर्याप्त चिकित्सा और गैर-चिकित्सा कर्मचारियों के साथ मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों के रूप में विकसित करने का भी वादा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए प्रत्येक वर्ष डॉक्टरों की नियुक्ति करने का प्रस्ताव दिया गया है।

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 15 मार्च 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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