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पहलु खान हत्या मामले में 6 बरी, 2017 में गाय-संबंधित अपराध सबसे ज्यादा

एलिसन सलदानहा,

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राजस्थान पुलिस ने 1 अप्रैल, 2017 को डेयरी किसान पहलु खान की हुई हत्या के खिलाफ जांच बंद कर दिया है। छह लोगों पर पहलू खान की हत्या का आरोप था। यहां यह जान लेना जरूरी है कि 45 फीसदी या 78 में से 35 गाय-संबंधित हिंसा अकेले इसी वर्ष दर्ज किए गए हैं, जैसा कि ऐसी हिंसा का रिकॉर्ड रखने वाले इंडियास्पेंड के डेटाबेस से पता चलता है।

 

पिछले 8 वर्षों के दौरान कैसे भारत में हुई गाय संबंधित हिंसा में वृद्धि

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वर्ष 2017 की पहली घटना करीब छह महीने पहले, 1 अप्रैल को दर्ज की गई थी, जब हरियाणा के रहने वाले खान को राजस्थान के अलवर जिले में गाय सतर्कता सदस्यों ने बुरी तरह पीटा था। बाद में दो दिन के बार अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

 

छह संदिग्धों की रिहाई की खबर सार्वजनिक होने के बाद, बेहरोर के गांव में खान परिवार से मुलाकात के लिए जाने वाले कार्यकर्ताओं को हिंदूवादी संगठनों की ओर से वहां तक न जाने की चेतावनी दी गई। पूर्व नौकरशाह और शांति कार्यकर्ता हर्ष मंदर द्वारा परिकल्पित सौहार्द संगठन‘कारवां-ए-मोहब्बत’ वर्तमान में एक देशव्यापी सफर पर उन लोगों के घरों तक जा रही है, उन परिवारों से मिल रही है, जिन्हें या जो मार दिया गया है या जो निशाने पर हैं। इनमें से ज्यादातर मुस्लिम या दलित हैं।

 

 

मानव अधिकार कार्यकर्ता जॉन दयाल ने सड़क पर चलते हुए इंडियास्पेंड को बताया, “हमें बताया गया है कि अलवर के इलाकों में हमारे ‘करवां-ए-मोहब्बत’ का स्वागत लाठियों से होगा। बेहरर के सभी स्थानों पर हमने सार्वजनिक बैठकों की व्यवस्था की थी, लेकिन हो नहीं पाया। क्योंकि वहां खतरा था और हमसे कहा गया है कि ‘कृपया यहां मत आओ’।

 

हालांकि राजस्थान सरकार ने शाम को पूरे राज्य में सुरक्षित रास्ते का आश्वासन दिया। इन खतरों की वजह से हम अपनी यात्रा को रोक नहीं पाएंगे-हम नफरत का मुकाबला करने के लिए यहां हैं।”14 सितंबर, 2017 को बाद में, मंडर के समूह ने राजस्थान में प्रवेश किया, उन्हें राज्य पुलिस का संरक्षण मिला।

 

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शांति कार्यकर्ता हर्ष मंदर के कारवां को हिंदूवादी संगठनों द्वारा मिले धमकियों के बाद 14 सितंबर 2017 की रात राजस्थान में प्रवेश करने के लिए पुलिस संरक्षण प्राप्त हुआ है।

 

1 सितंबर को, खान की हत्या की जांच करने वाली अपराध एजेंसी ‘सीआईडी-सीबी’ ने अपने निष्कर्ष अलवर पुलिस को भेजा और  मामले में आरोपियों ( ओम यादव (45), हुकम चंद यादव (44), सुधीर यादव (45), जगमल यादव (73), नवीन शर्मा (48) और राहुल सैनी (24) ) को बरी कर दिया, जैसा कि हिंदुस्तान टाइम्स ने 14 सितंबर, 2017 की अपनी रिपोर्ट में बताया है।

 

अपने बयान में खान ने पुलिस को इन लोगों के नाम दिए थे जो उन पर हमला करने में शामिल थे, जैसा कि  इंडियन एक्सप्रेस ने 14 सितंबर, 2017 की रिपोर्ट में बताया है।

 

 

सीआईडी-सीबी की रिपोर्ट के बाद, अलवर पुलिस ने छह फरार संदिग्ध आरोपियों पर 5,000 रुपए के इनाम को रद्द कर दिया।

 

यह जांच अपराध स्थान से 4 किमी दूर रथ गौशाला के कर्मचारियों के बयान और मोबाइल फोन के रिकॉर्ड पर आधारित थी, जैसा कि हिंदुस्तान टाइम्स में बताया गया है।

 

गौशाला कर्मचारी ने कहा कि हमले के समय छह अभियुक्त गौशाला में मौजूद थे। हिंदुस्तान टाइम्स में उद्धृत पुलिस की रिपोर्ट कहती है, “छह लोगों के कॉल रिकार्ड विवरण…आगे इसका समर्थन करते हैं।” जिसमें यह भी पाया गया कि संदिग्ध में से एक शख्स, जगमले यादव, गौशाला के संरक्षक थे।

 

6 सितंबर, 2017 को, प्रत्येक जिले में ऐसे अपराध को रोकने या निगरानी करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने एक “नोडल अधिकारी” की नियुक्ति का आदेश दिया था। इससे पहले अप्रैल में, पहलू खान की मृत्यु के कुछ दिन बाद शीर्ष अदालत ने भाजपा शासित राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड और कांग्रेस संचालित कर्नाटक सहित केंद्र और छह राज्यों से जवाब मांगा था और गाय-संरक्षण समूहों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा था।

 

2010 के बाद से 87 फीसदी मृत मुसलमान हैं !

 

वर्ष 2010 से ( हमारे डेटाबेस का प्रारंभ बिंदु ) बंगाल और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मौत के साथ, पूरे भारत में गौ-संबंधित हिंसा में 30 लोग मारे गए हैं। इस संबंध में  इंडियास्पेंड ने 1 सितंबर, 2017 की रिपोर्ट में विस्तार से बताया है। इन 78 हमलों में कम से कम 210 लोग घायल हो गए थे, जिनमें 18 महिलाएं शामिल थीं। इनमें से पांच का यौन शोषण हुआ था।

 

वर्ष 2010-17 में, गौ संबंधित हिंसाओं में से 53 फीसदी ( 75 में से 42 ) मामलों में मुस्लिम निशाने पर थे और 78 घटनाओं में 87 फीसदी (30 में से 26) मुस्लिमों की मौत हुई है, जैसा कि आंकड़े बताते हैं।

 

हमारे डेटाबेस से पता चला है कि, 46 फीसदी दर्ज किए गए मामलों में से ( 78 में से 36 ) पुलिस ने पीड़ितों / बचे लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं।

 

अंग्रेजी मीडिया में रिपोर्ट के संग्रह और सामग्री विश्लेषण के माध्यम से बनाए गए डेटाबेस से पता चलता है कि इस तरह की 97 फीसदी घटनाएं, मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के सत्ता में आने के बाद हुई है।

 

आधे के अधिक या 52 फीसदी गौ संबंधित हिंसा ( 75 घटनाओं में से 39 ) की घटनाएं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा शासित राज्यों से मिली हैं, जैसा कि 31 अगस्त, 2017 तक दर्ज हिंसा के आंकड़ों पर हमारे विश्लेषण से पता चला है।

 

29 जून, 2017 को, ज्यादातर मुस्लिम और दलितों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हमलों के बाद, सरकार की धीमी प्रतिक्रिया और चुप्पी के खिलाफ भारतीय शहरों, लंदन और न्यूयॉर्क में हुए विरोध के एक दिन बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में साबरमती आश्रम के शताब्दी समारोह में बोलते हुए इस मामले की आलोचना की थी।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “गौ भक्ति के नाम पर लोगों को मारना अस्वीकार्य है। महात्मा गांधी यह कभी स्वीकार नहीं करते। किसी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। हम अहिंसा के देश में हैं। हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। “

 

15 जुलाई, 2017 को संसद में मानसून सत्र की शुरूआत से एक दिन पहले, भाजपा की अखिल भारतीय बैठक में प्रधान मंत्री ने एक बार फिर गाय से जुड़ी हिंसा की आलोचना की और राज्य सरकारों को उन पर कार्रवाई करने की बात कही, जैसा कि इंडियास्पेंड 28 जुलाई, 2017 की रिपोर्ट में कहा गया है।

 

(सलदानहा सहायक संपादक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़ी हैं। )

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 14 सितंबर 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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