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पिछले 11 वर्षों में भारत वैश्विक सूचकांक पर 16 स्थान नीचे

विपुल विवेक,

 

वर्ष  2008 के वैश्विक वित्तीय गिरावट के बाद से विश्व भर में व्यापार में गिरावट हुई है। पिछले 11 वर्षों से 2015 तक अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स कंपनी डीएचएल द्वारा लाए गए वैश्विक सूचकांक पर भारत 16 स्थान नीचे आया है। 140 देशों के इस सूचकांक पर भारत 62वें से 78वें स्थान पर आया है।

 

2011 में यह पहली बार जारी किया गया था। पंकज घामवाट और स्टीवन ए. ऑल्टमैन (दोनों न्यू यॉर्क विश्वविद्यालय स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस, अमेरिका में मैनेजमेंट पढ़ाते हैं) द्वारा तैयार किए गए इस चौथे ग्लोबल कनेक्टेसिनेस इंडेक्स 2016 को 15 नवंबर, 2016 को जारी किया गया था।

 

व्यापार, पूंजी, सूचना और लोगों के अंतर्राष्ट्रीय प्रवाह द्वारा मापे गए  सूचकांक में तुलनीय देशों के समूह के बीच भारत को बद्तर स्थान दिया गया है जिसमें मध्य और दक्षिण एशिया में पड़ोसियों, और ब्रिक्स के सदस्य (ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका) शामिल थे। इस रिपोर्ट के लेखकों ने जॉर्जिया, तुर्की, नेपाल, पाकिस्तान, आर्मेनिया, उजबेकिस्तान, कजाखस्तान, बांग्लादेश, अजरबैजान, किर्गिज गणराज्य और श्रीलंका के साथ भारत को मध्य और दक्षिण एशिया समूह में चिन्हित किया है।

 

पिछले 11 वर्षों में भारत की 16 स्थानों की गिरावट इन 16 देशों में दूसरा सबसे बद्तर परिवर्तन रहा है। 2005 और 2015 के बीच 43 स्थान के छलांग के साथ जॉर्जिया का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा है। जॉर्जिया 11 वर्षों में 99वें स्थान से 56वें स्थान पर आया है। जबकि 19 स्थानों की गिरावट के साथ श्रीलंका का प्रदर्शन सबसे बद्तर रहा है। श्रीलंका 67वें स्थान से 86वें पर आया है।

 

ग्लोबल कंनेक्टेडनेस इंडेक्स: केंद्र/दक्षिण एशिया और ब्रिक्स

Source: DHL Global Connectedness Index 2005-15

 

सूचकांक गहराई और चौड़ाई पर पैरामीटर को मापता है, जबकि चौड़ाई अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं की घरेलू अर्थव्यवस्थाओं के आकार की तुलना करती है।

 

वर्ष 2015 में, भारत 140 देशों के बीच गहराई पर 21वें और चौड़ाई पर 21वें स्थान पर रहा है।

 

11 वर्ष से 2015 तक 140 देशों में गहराई पर 140 देशों में 133 के अपरिवर्तित रैंक की सहायता से 2005 और 2015 के बीच रैंक में बदलाव के कारण भारत गहराई पर पांचवें स्थान पर रहा है। 2005 में, चौड़ाई पर छह रैंक की गिरावट के कारण, 16 तुलनीय देशों में रैंक में बदलाव से यह 12वें रैंक पर रहा है।

 

ग्लोबल कंनेक्टेडनेस इंडेक्स: गहराई केंद्र/दक्षिण एशिया और ब्रिक्स, 2005-15

Source: DHL Global Connectedness Index 2016; Note: Depth evaluates the extent to which countries’ international flows are distributed globally or more narrowly focused

 

ग्लोबल कंनेक्टेडनेस इंडेक्स: चौड़ाई केंद्र/दक्षिण एशिया और ब्रिक्स, 2005-15

Source: DHL Global Connectedness Index 2016; Note: Breadth compares countries’ international flows to the sizes of their domestic economies

 

देश के सकल घरेलू उत्पाद के हिस्से के रूप में व्यापार प्रवाह निर्यात द्वारा मापा जाता है, देश की सकल फिक्स्ड पूंजी और अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार में निवेश के हिस्से के रूप में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश द्वारा पूंजी, अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के शेयरों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय संपर्क और लोगों द्वारा जानकारी और आबादी के हिस्से के रुप में विश्वविद्यालय के छात्रों और प्रवासियों को मापा जाता है।

 

चार घटकों पर, 140 देशों में से भारत व्यापार पर 13 स्थान नीचे आया है। 2013 में यह 46 स्थान पर से 2015 में 59 स्थान पर आया है। पूंजी के मामले में पांच स्थान की गिरावट हुई है, यानी 72 देशों में से 55वें स्थान से 60वें स्थान पर आया है। जानकारी के मामले में तीन अंकों की गिरावट हुई है, यानी 42 से 45 स्थान पर आया है और 102 देशों में लोगों पर एक स्थान की गिरावट हुई है। इस मामले में 80 से 81वें स्थान पर आया है।

 

ग्लोबल कंनेक्टेडनेस इंडेक्स: घटक केंद्र/दक्षिण एशिया और ब्रिक्स, 2005-15

(विवेक विश्लेषक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 16 फरवरी, 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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