Home » Cover Story » पीसीयू के मुनाफे में भारी गिरावट, सरकारी खजाने में 20,000 करोड़ रुपए कम आए

पीसीयू के मुनाफे में भारी गिरावट, सरकारी खजाने में 20,000 करोड़ रुपए कम आए

प्रभप्रीत सिंह सूद,

psu_620

नई दिल्ली स्थित भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) का मुख्यालय। वर्ष 2014-15 में, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों द्वारा हुए नुकसान में से एक तिहाई से अधिक के लिए बीएसएनएल को जिम्मेदार माना जा रहा है। पांच साल में पहली बार 2014-15 में पीसीयू मुनाफे में गिरावट हुई है।

 

पिछले पांच सालों में पहली बार ऐसा हुआ है। भारत के राज्य स्वामित्व वाली कंपनियों के मुनाफे में गिरावट आई है। सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2015 में मुनाफों में करीब 20 फीसदी की गिरावट हुई है। 77 सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) में मुनाफे में नुकसान की सूचना दर्ज की गई है। इससे सरकारी खजाने में 20,000 करोड़ रुपए कम आए हैं।

 

आंकड़ों पर नजर डालें तो मुनाफा 1.28 लाख करोड़ रुपए से गिर कर 1.03 लाख करोड़ रुपया हो गया है। 2013-14 की तुलना में मुनाफे में इस गिरावट की गंभीरता को इस वर्ष 2016 में स्वतंत्रता दिवस के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उदघोषणा की पृष्ठभूमि देखनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि “नई संस्कृति” ने एयरलाइन एयर इंडिया,  और टेलीकॉम कंपनी भारत सच्चर निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के प्रदर्शन में सुधार में मदद की है।

 

भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय ने 235 पीएसयू कंपनियों का सर्वेक्षण किया है, जिनमें केंद्र सरकार या अन्य सरकारी कंपनियों की कम से कम 51 फीसदी हिस्सेदारी है। सर्वेक्षण में पाया गया कि मुनाफे में गिरावट उस वर्ष हुई है जिस वर्ष भारत की अर्थव्यवस्था में 7.3 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2013-14 में यह आंकड़े 4.7 फीसदी थे।

 

सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां: बड़ी तस्वीर

Source: Department of Public Enterprises, Ministry of Heavy Industries & Public Enterprises

 

रोहतक में इंडियन इंस्ट्टयूट ऑफ मैनेजमेंट के पूर्व निदेशक पी रमेशन कहते हैं, “पिछले वर्षों में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सरकारी कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी होती थी, लेकिन आज की तारीख में ऐसा नहीं है।”

 

वर्ष 2015-16 में, भारत में 298 पीसीयू में  खनन (कोल इंडिया लिमिटेड, तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम), निर्माण (इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम), सेवाएं (बीएसएनएल, एयर इंडिया), बिजली (नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन) और कृषि (राष्ट्रीय बीज निगम) शामिल हैं। इनमें से 63 का अब तक परिचालन शुरू नहीं किया गया है।

 

पिछले वर्ष की तुलना में, 2014-15 में बिजली के अलावा, अन्य क्षेत्रों में पीसीयू में मुनाफे में गिरावट या नुकसान में वृद्धि की सूचना दर्ज की गई है।

 

सेक्टर अनुसार पीएसयू में लाभ / हानि


 

वर्ष 2014-15 में पीएसयू से सरकारी खजाने में 20,000 करोड़ रुपए कम आए

 

पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2014-15 में, सरकारी कंपनियों ने सरकारी खजाने में 20,000 करोड़ रुपए कम का योगदान दिया है। गौर हो कि पहले के वर्षों में इन कंपनियों ने 2.2 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे।

 

यहां तक कि ओएनजीसी, कोल इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑयल और एनटीपीसी जैसी मुनाफा कमाने वाली टॉप कंपनियों में भी 13 फीसदी की मंदी देखी गई है।

 

मुनाफा कमाने वाली टॉप 10 कंपनियां, 2014-15

Source: Department of Public Enterprises, Ministry of Heavy Industries & Public EnterprisesHover to see percentage share in total profits

 

मुनाफे में गिरावट के लिए एक प्रमुख कारण वैश्विक मंदी था। साथ ही एक अन्य कारण अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में गिरावट होना भी माना जा रहा है। तेल की कीमतों में गिरावट के कारण निर्यात आय में 29 फीसदी की गिरावट हुई है और इसका प्रभाव विनिर्माण कंपनियों पर भी हुआ है।

 

2014 में, राजस्व के अनुसार मानी गई भारत की सबसे बड़ी कंपनी इंडियन ऑयल के पूर्व निदेशक आनंद कुमार कहते हैं, “तेल की कीमतों में गिरावट से सबसे अधिक प्रभाव स्टील उद्योग पर पड़ा है जो टर्नओवर के हिसाब से सबसे बड़ी मानी जाती है।” स्टील उद्योग की करीब 10 फीसदी मांग पेट्रोलियम उद्योग से आती है, जो कच्चे तेल की कीमतें गिरने से भारी नुकसान का सामना कर रही है।

 

अगर देखा जाए तो पूरी दुनिया धीरे-धीरे आर्थिक मंदी से उबर चुकी है। फिर भी, वर्ष 2014-15 में भारत से कोयले और धातु जैसी मुख्य माल की मांग में गिरावट हुई है।

 

नीचे से 10 कंपनियों के नुकसान का दायरा 85 फीसदी तक

 

वर्ष 2014-15 में, सभी पीएसयू में से सिर्फ 10 पीएसयू के घाटे को अगर देखा जाए तो यह कुल नुकसान का 85 फीसदी हो जाता है। यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वर्ष की तुलना में यह 27000 करोड़ रुपए या 4,000 करोड़ रुपए अधिक है। बीएसएनएल, एयर इंडिया और महानगर टेलिफोन निगम लिमिटेड सबसे अधिक नुकसान में हैं।

 

सबसे अधिक घाटे में चल रहे 10 पीएसयू, 2014-15

Source: Department of Public Enterprises, Ministry of Heavy Industries & Public EnterprisesHover to see percentage share in total losses

 

रमेशन कहते हैं कि यह कंपनियां प्रतिस्पर्धा के साथ मुकाबला नहीं कर सकती हैं। रमेशन का कहना है, “आज की तारीख में टेलिकॉम उद्योग में बीएसएनएल नाम मात्र का खिलाड़ी है। एयर इंडिया की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। एयर इंडिया ने काफी समय पहले ही ‘मार्केट लीडर’ जैसी शाख खो दी है।”

 

वैसे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वित्तिय वर्ष 2015-16 में एयर इंडिया ने 100 करोड़ रुपए का वर्तमान मुनाफा कमाया है। लेकिन FactChecker.in की अगस्त 2016 की रिपोर्ट के अनुसार यह एयर इंडिया के संचित नुकसान का 0.0023 गुना है, जो अब 44,000 करोड़ रुपए से अधिक है। गौर हो कि ये आंकड़े भारत के वार्षिक स्वास्थ्य बजट के बराबर हैं। एयर इंडिया की उधारी 38,000 करोड़ रुपए की है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने सितंबर 2015 में विस्तार से बताया है।कोच्ची  में भवन रॉयल इंस्ट्टयूट ऑफ मैनेजमेंट के डीन हरिंद्रन भास्करन कहते हैं कि पीएसयू तकनीक के मामले में भी पीछे है।

 

पीएसयू की श्रम-शक्ति में 50,000 की गिरावट, फिर भी कर्मचारियों अधिक भुगतान

 

पिछले एक वर्ष में पीएसयू की श्रम-शक्ति में 50,000 की गिरावट हुई है। जबकि इसी अवधि के दौरान कर्मचारियों पर प्रति व्यक्ति खर्च में 10 फीसदी की वृद्धि हुई है।

 

पीएसयू के कर्मचारी और उनके वेतन पर खर्च

Source: Department of Public Enterprises, Ministry of Heavy Industries & Public EnterprisesFigures for salaries are total emoluments

 

1991 में आर्थिक सुधारों के बाद यह उम्मीद की गई थी कि निजी क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा पीएसयू को प्रेरित करेगी। लेकिन पुरानी समस्याएं अब भी जारी हैं।

 

कोयला मंत्रालय के पूर्व सचिव आलोक परती कहते हैं, “सरकार की हालत पिछली सीट पर बैठे ड्राइवर जैसी है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, जो सरकार के निर्देशन में काम करती हैं, उनमें जवाबदेही तय करने के लिए दबाव बनाया जा सकता है, लेकिन कई मामलों में मंत्रालय हुक्म चलाती है।”

 

वर्ष 2011 में पीएसयू में सुधारों के लिए सुझाव देते हुए एसके रूंगटा समिति कहती है, “सरकार का अधिक हस्तक्षेप कार्यप्रणाली को रूढिवादी बनाता है। इससे जोखिम के खिलाफ संस्थागत ढांचा तो विकसित होता है, लेकिन परिणाम दूसरे दर्जे के आते हैं।”

 

समिति ने तीन वर्ष के लिए पीएसयू प्रमुखों की निश्चित अवधि की सिफारिश की। साथ ही अगले पांच वर्षों में 50 से अधिक कंपनियों को शेयर बाजारों में सूचीबद्ध करने का सुझाव भी दिया है।

 

कुमार कहते हैं कि, “यह (रूंगटा रिपोर्ट) अब नौकरशाही के गलियारों में धूल खा रही होगी। कोई भी कर्ता-धर्ता या राजनेता नाराजगी मोल लेना नहीं चाहते।”

 

विनिवेश योजना पुनर्जीवित, लेकिन वर्ष 2015-16 के लक्ष्य में 66 फीसदी की कमी

 

इससे पहले इस साल, भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा,  बुनियादी सुविधाओं के लिए पैसे जुटाने के लिए सरकार को पीएसयू की “परिसंपत्तियों” का लाभ उठाना चाहिए। हालांकि, वर्ष 2015-15 के लिए 69,500 करोड़ रुपए के लक्ष्य का एक-तिहाई से थोड़ा अधिक प्राप्त हुआ है।

 

परती ने कहा कि शेयर बेचने की सरकार की योजना से कंपनियों को थोड़ा ही फर्क पड़ेगा। वह कहते हैं कि “ये सरकारी कंपनियां ही रहेगीं और इन कंपनियों को सरकारी विभागों के रूप में चलाया जाना सबसे बड़ी खामी है।”

 

(सूद एक बंगलूर स्थित स्वतंत्र पत्रकार और 101Reporters.com के सदस्य है। 101Reporters.com जमीनी स्तर पर पत्रकारों का एक अखिल भारतीय नेटवर्क है।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 20 अक्तूबर 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। हमसे respond@indiaspend.org पर संपर्क किया जा सकता है। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार रखते हैं।

 
__________________________________________________________________

 

“क्या आपको यह लेख पसंद आया ?” Indiaspend.com एक गैर लाभकारी संस्था है, और हम अपने इस जनहित पत्रकारिता प्रयासों की सफलता के लिए आप जैसे पाठकों पर निर्भर करते हैं। कृपया अपना अनुदान दें :

 

Views
2518

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *