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बजट 2017 में राजनीतिक चंदे पर चोट, आयकर में राहत, ग्रामीण विकास पर जोर

इंडियास्पेंड टीम,

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कोलकाता में अपने सब्जी की खेती के लिए पानी का पंप ले जाता एक किसान। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के आवंटन में वृद्धि और कृषि ऋण के लिए वृद्धि लक्ष्य के साथ आज चौथा बजट पेश किया है।

 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज संसद में चौथा बजट पेश किया है। यह बजट नोटबंदी से मिले पीड़ा पर मरहम सा प्रतीत होता है: जेटली ने दुनिया के सबसे बड़े रोजगार सृजन योजना के लिए परिव्यय में बढ़ोतरी की है, ग्रामीण भारत में गरीबी कम करने की कोशिश में कृषि ऋण के लिए लक्ष्य में वृद्धि की है और छोटे और मध्यम उद्यमों और वेतनभोगी भारतीयों के लिए कर लाभ की पेशकश की है।

 

जेटली ने राजनीतिक पार्टी फंडिंग में सुधार प्रक्रिया भी शुरु की है – इसका संकेत प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने दिसम्बर 31, 2016 को दिए अपने भाषण में दिया था। प्रस्तावित सुधार के तहत राजनीतिक पार्टियां एक व्यक्ति से 2,000 रुपए से अधिक नकद चंदा नहीं ले सकती हैं। हम बता दें कि अब तक नकद चंदा लेने की सीमा 20,000 रुपए थी, यानी यह सीमा 90 फीसदी कम की गई है।

 

बजट भाषण के तुरंत बाद मोदी ने कहा, “यह बजट अर्थ व्यवस्था को मजबूत बनाने, किसानों की आय सुधारने और नागरिकों को बेहतर जीवन का स्तर प्रदान करने की ओर एक कदम है।”

 

350,000 रुपए से नीचे के आय वालों के लिए 2,500 रुपए की अतिरिक्त छूट के साथ, सरकार ने ढाई से पांच लाख रुपए के स्लैब के लिए व्यक्तिगत आय कर की दर 10 फीसदी से 5 फीसदी की है। वित्त मंत्री ने उन व्यक्तिगत करदाताओं के लिए भी 12,500 रुपए के लाभ की घोषणा की है जिनकी प्रति वर्ष आय 5 लाख रुपए से ज्यादा है।

 

यानी 3,00,000 रुपए सालाना आय वाले व्यक्ति को आय कर का भुगतान नहीं करना होगा और 450,000 रुपए सालाना आय वाले व्यक्ति, जो मौजूदा आयकर कानून के तहत 150,000 रुपए की कटौती कराते हैं उन्हें भी आय कर का भुगतान नहीं करना होगा।

 

50 करोड़ रुपए सालाना तक का कारोबार करने वाली कंपनियों पर कंपनी आयकर की दर 30 फीसदी से घटा कर 25 फीसदी कर दी गई है। वित्त मंत्री का कहना है कि इस कदम से भारत की 96 फीसदी कंपनियों को फायदा मिलेगा।

 

इस बार भी बजट में ग्रामीण विकास का ज्यादा जोर

 

जेटली ने कहा कि, 2017-18 में ग्रामीण, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 1,87,223 करोड़ रुपए का आवंटन होगा – पिछले वर्ष की तुलना में 24 फीसदी ज्यादा है।

 

2017-18 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम(मनरेगा), का बजट 48,000 करोड़ रुपए किया जा रहा है। यह अब तक की सबसे बड़ी राशि है। 2016-17 में इस कार्यक्रम के तहत 38,500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, यानी 25 फीसदी की वृद्धि। हम बता दें कि मनरेगा कार्यक्रम नौकरी चाहने वालों को प्रति वर्ष 100 दिन के रोजगार का आश्वासन देती है।

 

वर्ष 2019 तक 10 लाख लोगों को गरीबी से बाहर निकालने और 50,000 ग्राम पंचायतों क गरीबी मुक्त बनाने के लिए अंत्योदय योजना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 

पांच साल में किसानों की आय को दोगुना करने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए, अगले वित्त वर्ष के लिए कृषि ऋण लक्ष्य बढ़ा कर 10 लाख करोड़ किया गया है।

 

वित्त मंत्री ने नोटबंदी के लाभ से संबंध में भी चर्चा की और कहा कि अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव क्षणिक होगा और आने वाले वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) बड़ा, स्पष्ट और वास्तविक होगा।

 

जेटली ने नोटबंदी के बाद बैंको में जमा की गई राशि के संबंध में भी कुछ जानकारी सूचीबद्ध की: करीब 1 करोड़ बैंक खातों में 200,000 से 80 लाख रुपए (503000 रुपए के औसत जमा के साथ)  के बीच राशि जमा कराई गई है और 3.3 करोड़ रुपये की औसत जमा के साथ 148,000 खातों में 80 लाख से ज्यादा जमा कराए गए हैं।

 

1924 के बाद से पहली बार संयुक्त बजट (रेल बजट सहित) पेश करते हुए, वित्त मंत्री ने 1.31 लाख करोड़ रुपए के अनुमानित व्यय में से रेलवे पर पूंजीगत खर्च के लिए बजट से 55,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया है।

 

जेटली ने कहा कि 2017-18 के लिए कुल व्यय का 21,47,0000 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है, पूंजीगत व्यय में 25 फीसदी की वृद्धि होगी। केंद्र की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 4.1 लाख करोड़ रुपए दिए जाएंगे।

 

सरकार के पिछले साल के 4.25 करोड़ लाख रुपए के मुकाबले इस साल कम, 3.48 लाख करोड़ रुपए, उधार लेने की उम्मीद है।

 

दिन भर के हमरे ट्वीट:

 

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यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 01 फरवरी 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुई है।

 

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