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बजट 2017: हरित ऊर्जा लक्ष्यों में भारत पिछड़ा

मुक्ता पाटिल,

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ग्रीन हाउस गैसों के मामले में भारत की छवि अच्छी नहीं है। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा  ग्रीन उत्पादक देश है। आपोक बता दें कि ग्रीन हाउस गैसें दुनिया को गर्म करने के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं। भारत ने अगले छह वर्षों में अपनी अक्षय ऊर्जा क्षमता करीब चौगुना करने का वादा किया है। हम बता दें कि वर्तमान में भारत अपने लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहा है।

 

हमारे विश्लेषण के अनुसार, अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बजट 2017 को  नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र के लिए आसान (हमने यहां बताया है कि यह क्यों समस्या है) बनाने, कौशल विकास में तेजी लाने और नए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सहित नए वित्तीय मुद्दों पर विचार करने के लिए काम करना होगा।

 

वर्तमान में भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार कार्यक्रम है। कार्यक्रम के तहत 2022 तक 175 गीगावॉट क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जो  वर्तमान के 46 गीगावॉट का चार गुना है। साथ ही भारत ने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित उदेश्य के योगदान के साथ तेजी से गरमाते ग्रह को ठंडा करने के लिए 2015 पेरिस समझौते पर वादे किए हैं।

 

पिछले साढ़े चार वर्षों में (अप्रैल 2012-अक्टूबर 2016) भारत ने करीब 21 गीगावॉट का नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की है, जिसमें से 14.3 गीगावॉट, या 68 फीसदी केवल पिछले ढाई वर्षों में जोड़ा गया है। 2017-18 में कुछ और प्रगति देखने मिल सकती है जैसा कि इंडियास्पेंड ने 2 जनवरी, 2017 को विस्तार से बताया है।

 

महत्वाकांक्षी लक्ष्य और धन भी, लेकिन योजनाएं पटरी पर नहीं

 

नई दिल्ली के ऊर्जा और संसाधन संस्थान के वर्ष 2015 के इस पेपर के अनुसार, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों को तैनात करने के लिए, सरकार ने सब्सिडी, राजकोषीय प्रोत्साहन, अधिमान्य टैरिफ, बाजार तंत्र और कानून और नीतियों के माध्यम से अक्षय खरीद दायित्वों जैसे सकारात्मक कार्रवाई के एक मिश्रण पर ध्यान केंद्रित किया है।

 

यह सभी उपाय केंद्रीय बजट से प्रभावित हैं।

 

3 वर्षों में नवीकरणीय बजट में 2.6 गुना वृद्धि

Source: Union Budgets 2015-16 & 2016-17

 

वर्ष 2013-14 और 2014-15 के बीच, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के लिए वास्तविक बजट दोगुना हुआ है जबकि 2016-17 के लिए 14,193 करोड़ रुपए का अनुमानित बजट वर्ष 2015-16 के लिए 5,677 करोड़ रुपए के संशोधित अनुमान का 2.5 गुना था।

 

एमएनआरई एक वार्षिक परिणाम बजट भी प्रकाशित करता है, जो परिव्यय के खिलाफ मंत्रालय की उपलब्धियों का विवरण करता है । यहां कुछ निष्कर्ष दिए गए हैं, जो मंत्रालय ने 2015-16 के लिए अपने ‘आउटकम बजट’ में प्रकाशित किया है।

 

नवीकरणीय परिव्यय और उपलब्धियां: धीमी प्रगति, लक्ष्य दूर

Source: Ministry for New and Renewable Energy; Installed capacity refers to grid-interactive power. *Bio includes Biomass/Cogeneration/Gasification

 

सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़ी परिव्यय के बावजूद, लक्ष्यों और उपलब्धियों के बीच एक स्पष्ट अंतर है। उदाहरण के लिए, वित्तीय वर्ष 2016-17 में सौर क्षमता का 12,000 मेगावाट स्थापित करने के लक्ष्य के मुकाबले दिसंबर 2016 तक केवल 2,150 मेगावाट की स्थापित किया गया है।

 

वित्तीय अनुसंधान ऊर्जा नीति पर ध्यान केंद्रित करने वाली एक फर्म ‘इक्वीटोरियलस’ के मैनेजिंग पार्टनर जय शारदा कहते हैं, “हम मानते हैं कि इस असमानता मुख्य रूप से छत पर लगने वाले सौर ऊर्जा संयंत्रों के  कारण है, जहां प्रगति धीमी रही है।”

 

शारदा कहते हैं, “छत पर लगने वाले सौर ऊर्जा संयंत्रों के को तेजी से अपनाने के लिए बजटीय प्रोत्साहन हो सकता है। हाल ही में कई राज्यों ने छत सौर नीतियां तैयार की है। एक बार जब वे प्रचालित हो जाएंगे, तब हम भी इस क्षेत्र में एक उच्च प्रगति देखेंगे।”

 

छत सौर परियोजना 2022 तक भारत के 100 गीगावाट के सौर लक्ष्य का 40 फीसदी प्रदान करेगा। दिसम्बर 2016 के इस एमएनआरई अद्यतन के अनुसार, नवंबर 2016 तक, सौर छत क्षमता का केवल 0.5 मेगावाट, स्थापित किया गया था, जबकि 3 गीगावॉट की मंजूरी दी गई थी।

 

लेवी के रूप में स्वच्छ ऊर्जा कर लेती है सरकार, लेकिन आधे के कम होता है स्थानांतरण

 

स्वच्छ पर्यावरण उपकर (पहले स्वच्छ ऊर्जा उपकर के रूप में जाना जाता था), कार्बन का कोयला, लिग्नाइट और पीट पर लगाया जाने वाला टैक्स का प्रकार वर्ष 2016 के बजट में 200 रुपए प्रति टन से 400 रुपए प्रति टन तक दोगुना हुआ है।

 

उपकर से मिली आय  राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा निधि (एनसीईएफ) को हस्तांतरित किया जाना चाहिए, जिससे स्वच्छ ऊर्जा पहल  और स्वच्छ ऊर्जा में निधि अनुसंधान को वित्त और बढ़ावा मिलेगा।

 

लेकिन 54,336.17 करोड़ रुपए की कुल उपकर संग्रह से आधे से भी कम एनसीईएफ को स्थानांतरित किया गया है। स्थानांतरित 25,810.46 करोड़ रुपए में से केवल 9,021.04 करोड़ रुपए वास्तव में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वितरित किया गया था।

 

स्वच्छ ऊर्जा उपकर दोगुना, लेकिन स्थानांतरित नहीं

 

सतत विकास पर ध्यान देने वाली एक गैर सरकारी संगठन इंटरनेश्नल इंस्टट्यूट ऑफ ससटेनबल डेवल्पमेंटस ग्लोबल सब्सिडीज इंनिशिएटिव द्वारा की गई एक समीक्षा के अनुसार, अधिकांश राशि अन्य मंत्रालयों के बजटीय खामियों या उन कार्यक्रमों के लिए दिया गया है, जो सीधे तौर पर स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े नहीं हैं।

 

शारदा कहते हैं, “बजट से किसी की भी उम्मीद अक्षय ऊर्जा के लिए स्वच्छ पर्यावरण उपकर के तहत एकत्रित की गई राशि अधिक प्रभावी ढंग से तैनात करना है। हम मानते हैं कि यह अक्षय ऊर्जा स्पेस में और अधिक निजी, विशेष रूप से विदेशी, निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नीति निर्माताओं द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है।”

 

निवेश की गति को ध्यान में रखते हुए कुशल श्रम का योग

 

वर्ष 2015 के इतिहास में यह पहला साल था जब नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विकासशील देशों द्वारा किया गया निवेश विकसित देशों के पार गया है।

 

वर्ष 2017-18 के लिए भारत का बजट, 2022 तक 175 गीगावॉट की अक्षय क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य की दौड़ में निवेश की इस गति को रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा। यह सस्ते वित्तपोषण के विकल्प के बिना नहीं हो सकता है।

 

वर्ष 2015 में रोजगार सृजन के मामले में चीन और ब्राजील के साथ भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सबसे बड़ा नियोक्ता रहा है।

 

नई दिल्ली स्थित काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वाइरन्मन्ट एंड वाटर के नवंबर 2016 के इस तथ्य पत्र के अनुसार, वर्ष 2022 तक भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 11 लाख रोजगार और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में 183,500 नौकरियों के अवसर प्रदान करेगा।

 

रोजगार सृजन के इस पैमाने को तैयार करने के लिए कौशल विकास की जरुरत होगी जिसके लिए बजट की आवश्यकता होगी। सरकार का पहले ही, सूर्यमित्र नामक जगह में एक कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यह कार्यक्रम सौर ऊर्जा के राष्ट्रीय संस्थान द्वारा चलाए जा रहे हैं।

 

जीएसटी की तुलना में नवीकरणीय ऊर्जा का भविष्य, मूल्यह्रास में कमी

 

जीएसटी सभी वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाने वाला एक अप्रत्यक्ष कर है।

 

सरकार का प्रस्ताव है कि, बिजली की बिक्री या खपत पर लगने वाला कर जीएसटी से बाहर रहना चाहिए। हालांकि, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र पर जीएसटी के कार्यान्वयन का उनकी उत्पादन लागत पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

 

अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विभिन्न प्रकारों पर जीएसटी का प्रभाव

 

जीएसटी के कार्यान्वयन से पवन उत्पादित बिजली के लिए 30-40 पैसे  और सौर ऊर्जा के लिए 40-50 पैसे की दर में वृद्धि हो सकती है, जैसा कि 23 जनवरी, 2017 के द मिंट में प्रकाशित इस रिपोर्ट में बताया गया है।

 

पवन क्षेत्र में एक और चालू वित्त वर्ष में प्रोत्साहन, जिसे त्वरित मूल्यह्रास ( एडी ) कहा जाता है और जो अधिक आसानी से अपने निवेश से लिखने के लिए, निवेशकों को प्रथम वर्ष में मूल्यह्रास मूल्य का 80 फीसदी का दावा करने की अनुमति देता है, उसमें अप्रैल 2017 से 40 फीसदी की कमी हुई है।

 

बढ़े हवा प्रतिष्ठानों के लिए, एडी महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। अन्य योजनाएं जैसे कि जनरेशन आधारित प्रोत्साहन (जहां अनुमोदित टैरिफ पर योग अक्षय ऊर्जा जनरेटर के लिए भुगतान किया जाता है) या किसी अन्य रुप में एक बजट का दबाव एडी प्रोत्साहन में 40 प्रतिशत अंकों की कमी के लिए बनाने के लिए होगा।

 

इंडियास्पेंड के ‘बजट प्राइमर’ का यह दूसरा लेख है। पहला लेख आप यहां पढ़ सकते हैं। हम अपने ट्वीटर टाइमलाइन पर यहां 01 फरवरी, 2017 को बजट के दौरान दिए गए बयानों की तथ्यात्मक समीक्षा करेंगे।

 

(पाटिल विश्लेषक हैं और इंडियस्पेंड के साथ जुड़ी हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 30 जनवरी 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। हमसे respond@indiaspend.org पर संपर्क किया जा सकता है। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार रखते हैं।

 
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