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बड़ी कंपनियां अपनी सामाजिक जिम्मेदारी पर देती हैं कम ध्यान

श्रेया खेतान,

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इंदौर: कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के लिए भारत की शीर्ष 100 कंपनियों की प्रतिबद्धता सतही है और कुछ ही विकास परियोजनाओं में समुदाय को शामिल करते हैं, कुछ ही स्थानीय समुदायों पर अपने व्यापार के प्रभाव का आकलन करते हैं, कुछ ही विविधता सुनिश्चित करने या बाल श्रम को प्रतिबंधित करने वाले आपूर्तिकर्ताओं का चयन करने की नीतियों का खुलासा करते हैं, जैसा कि ‘इंडिया रिस्पॉन्सिव बिजनेस फोरम’ (आईआरबीएफ) द्वारा सार्वजनिक प्रकटीकरण के विश्लेषण से पता चलता है।

 

आईआरबीएफ द्वारा भारत की शीर्ष 100 कंपनियों के व्यवसायों द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक  समुदाय एक विकास में भागीदार होने के बजाय ‘चैरिटी के लिए पात्र’ बने हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक भी कंपनी ने अपनी सीएसआर नीति तैयार करते समय हितधारक परामर्श का खुलासा नहीं किया है।

 

भारत में, 500 करोड़ रुपये के न्यूनतम शुद्ध संपत्ति वाली कंपनियां या 1000 करोड़ रुपये तक की कुल बिक्री करने वाली कंपनियां या कम से कम 5 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाने वाली कंपनियों को सीएसआर पर तत्काल वित्तीय वर्षों के तीनों के दौरान कंपनी द्वारा बनाई गई औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2 फीसदी खर्च करना होगा।

 

99 कंपनियों में से केवल 15 ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) परियोजना की योजना से पहले समुदाय की समस्याओं का पता लगाने के तंत्र की सूचना दी है। 99 कंपनियों में से 27 ने कहा  कि उनके पास सीएसआर परियोजनाओं के तीसरे पक्ष मूल्यांकन के लिए एक प्रणाली है, जैसा कि विश्लेषण में पाया गया है।

 

आईबीआरएफ प्रत्येक वर्ष इंडिया बिजनेस रिस्पान्सबिलिटी इंडेक्स जारी करता है, जो पांच उपायों पर बाजार पूंजीकरण द्वारा शीर्ष 100 कंपनियों द्वारा बनाई गई सार्वजनिक प्रकटीकरण का विश्लेषण करता है – कार्यस्थल में गैर-भेदभाव के प्रति प्रतिबद्धता, कर्मचारी प्रतिष्ठा और मानवाधिकारों का सम्मान, सामुदायिक विकास, आपूर्ति श्रृंखला में सम्मिलन और व्यापारिक हितधारकों के रूप में समुदाय, जो व्यापक रूप से व्यापार के सामाजिक पर्यावरण और आर्थिक जिम्मेदारियों पर 2011 राष्ट्रीय स्वैच्छिक दिशानिर्देशों पर आधारित हैं।

 

रिपोर्ट ने राष्ट्रीय स्वैच्छिक दिशा निर्देशों और सूचकांक के पीछे सेबी (एसईबीआई) के तर्क का हवाला दिया, ” कंपनियां सामाजिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण घटक हैं, वे केवल अपने शेयरधारकों को राजस्व और लाभप्रदता परिप्रेक्ष्य से नहीं बल्कि बड़े समाज के लिए भी जवाबदेह हैं, जो कि इसके शेयरधारक भी हैं।”

 

सूचकांक केवल पॉलिसी का विश्लेषण करता है, लेकिन कंपनी का वास्तविक क्रियान्वयन या प्रदर्शन का नहीं। यह सेबी को सार्वजनिक प्रकटीकरण में दी गई जानकारी को स्वतंत्र रूप से मान्य नहीं करता है।

 

2013 और 2016 के बीच प्रकटीकरण में वृद्धि हुई है, जो कंपनियों में बढ़ते खुलेपन को दिखा रहा है, लेकिन वे  “पिछले एक साल में रिपोर्टिंग में अधिक सावधान” बन गए हैं, जैसा कि रिपोर्ट के प्रमुख अनुसंधान टीम से जुड़े और सामुदायिक भागीदारी पर काम करने वाले नई दिल्ली स्थित, गैर-लाभकारी संस्था ‘प्रेक्सिस इंडिया’ में शोध और क्षमता निर्माण के निदेशक, प्रदीप नारायणन कहते हैं-“कुछ ही प्रकटीकरण आपूर्ति श्रृंखला की समग्रता से संबंधित थे।”

 

रिपोर्ट कहती है, “समग्र डेटा, खासकर जब कॉर्पोरेट इंडिया के मुनाफे के साथ देखा जाता है, व्यापार और शेयरधारकों के हितों और समुदायों और श्रमिकों के बीच दूरी को दर्शाता है। ” केवल छह कंपनियों ने केवल दो उपायों के लिए शीर्ष बैंड में स्कोर किया है – गैर-भेदभाव और सामुदायिक विकास।

 

और यह तब होता है जब सूचकांक “कंपनियों के पक्ष में पहले से पक्षपातपूर्ण” हैं। नारायणन कहते हैं, “सबसे पहले क्योंकि हम सिर्फ नीति प्रतिबद्धता को देखते हैं और कार्यान्वयन नहीं करते हैं, और दूसरा क्योंकि हम केवल कंपनी के स्वयं के प्रकटीकरण पर गौर करते हैं। “

 

सेबी की बिजनेस रिस्पान्सबिलिटी रिपोर्ट के तहत यह प्रकटीकरण एकमात्र खुलासा है, जो समझने में सहायता करता है कि क्या व्यवसाय अपने मुख्य कार्य में जिम्मेदार प्रथाओं का पालन करता है और सिविल सोसाइटी संगठनों के लिए जानकारी के स्रोत के रूप में समुदायों, मीडिया और सरकार के लिएसेवा करने में मदद कर सकता है (इनमें से कुछ इन संगठनों से धन प्राप्त कर सकते हैं )।

 

नारायणन ने कहा, ” अक्सर बिजनेस रिस्पान्सबिलिटी रिपोर्ट में उठे सवालों पर कंपनियों को गौर करना चाहिए  और अधिक जिम्मेदार होने की दिशा में काम करना चाहिए। “

 

समुदायों पर व्यावसायिक प्रभाव के विश्लेषण की कम प्रतिबद्धता

 

रिपोर्ट में यह भी विश्लेषण किया गया है कि कैसे कंपनियां समुदायों और उनके कारोबारी परिचालन से प्रभावित पर्यावरण के साथ सहभागिता करती हैं।

 

लगभग 44 कंपनियां (2016 से 22 फीसदी अधिक थी) ने उन संसाधनों की मौजूदगी की सूचना दी, जो प्राकृतिक संसाधनों के उचित उपयोग को बढ़ावा देती हैं।

 

कंपनी परियोजनाओं से प्रभावित लोगों को समान या बेहतर रहने की स्थिति और सेवाएं प्रदान करने के लिए कंपनियों में प्रतिबद्धता की कमी है। 95 में से कम से कम 90 कंपनियां ने ऐसी किसी नीति की रिपोर्ट नहीं की, जैसा कि रिपोर्ट में पाया गया है। किसी भी कंपनी ने अपनी परियोजनाओं से उत्पन्न स्थानीय रोजगार की सूचना नहीं दी है।

 

किसी भी कंपनी ने परियोजनाओं में सामुदायिक भागीदारी की तलाश करने के लिए सिस्टम की मौजूदगी का खुलासा नहीं किया है। 13 ने स्थानीय संस्कृतियों के लिए मान्यता और सम्मान के लिए नीतियों का खुलासा किया है, और छह ने कहा कि उनके पास सार्वजनिक सुनवाई और समुदाय के लिए परियोजना प्रभावों के संचार की मान्यता के लिए नीतियां हैं, जैसा कि रिपोर्ट में पाया गया है।किसी भी कंपनी ने परियोजनाओं में सामुदायिक भागीदारी की तलाश करने के लिए सिस्टम की मौजूदगी का खुलासा नहीं किया है। 13 ने स्थानीय संस्कृतियों के लिए मान्यता और सम्मान के लिए नीतियों का खुलासा किया है, और छह ने कहा कि उनके पास सार्वजनिक सुनवाई और समुदाय के लिए परियोजना प्रभावों के संचार की मान्यता के लिए नीतियां हैं, जैसा कि रिपोर्ट में पाया गया है।

 

निम्नलिखित आंकड़े 2016 और 2017 के बीच समुदायों पर प्रभाव का आकलन करने के लिए व्यवसायों की प्रतिबद्धता में परिवर्तन को दर्शाते हैं।

 

screenshot_Graph

Figure: Recognition of the need to assess business impact on communities and means to minimise the negative impacts [2016 (n=100), 2017 (n=99)]

 

कुछ कंपनियां ही बोर्ड पर नीतियों का करती हैं खुलासा

 

सभी 24 कंपनियों ने अपनी भर्ती प्रक्रिया के भाग के रूप में गैर-भेदभाव के प्रति प्रतिबद्धता का खुलासा किया, जबकि आईआरबीएफ द्वारा 2018 की रिपोर्ट में 100 में से 50 ने गैर-भेदभाव सुनिश्चित करने के लिए सिस्टम और तंत्र के बारे में खुलासा किया। बोर्ड पर विविधता सुनिश्चित करने के लिए केवल 27 ने नीतियों का खुलासा किया, जिनमें से 7 विविधता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले कदम और तंत्र के संबंध में बताया।

 

रिपोर्ट के अनुसार, केवल 19 कंपनियों ने विकलांग लोगों के साथ नीतियों का खुलासा किया। कार्यस्थल में विविधता के मामले में, 96 कंपनियों ने महिला कर्मचारियों की संख्या का खुलासा किया, जबकि 15 कंपनियों ने एससी और एसटी कर्मचारियों की संख्या का खुलासा किया।

 

आईआरबीआई की रिपोर्ट में बोर्ड पर कर्मचारियों और श्रमबल की संख्या का खुलासा करने वाली कंपनियों की संख्या

 

कर्मचारी अधिकार कान्ट्रैक्ट  कर्मचारियों तक नहीं जाते

 

68 कंपनियों ने कर्मचारियों के लिए संघ की स्वतंत्रता को मान्यता की बात की, जबकि 54 ने सामूहिक सौदेबाजी के सिद्धांत को मान्यता दी, जैसा कि रिपोर्ट कहती है। लेकिन कुछ (99 में से 24) ने न्यूनतम मजदूरी को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता का खुलासा किया, जबकि 6 कंपनियां रिपोर्ट करती हैं कि वे अच्छे जीवन यापन करने लायक मजदूरी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके अलावा, ये नीतियां अनुबंधित कर्मचारियों तक नहीं जा पाती हैं ।   केवल 6 कंपनियों ने स्पष्ट रूप से अपनी नीतियों में कहा है कि संविदात्मक कर्मचारियों के लिए सामाजिक लाभ बढ़ाए हैं।

 

(खेतान लेखक/संपादक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़ी हैं। )

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 05 अप्रैल, 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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