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बाल विवाह और समय पूर्व प्रसव पर अगर लग जाए रोक तो भारत को वार्षिक उच्च शिक्षा बजट के बराबर आर्थिक लाभ

देवानिक साहा,

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भारत यदि बाल विवाह और समय पूर्व प्रसव पर रोक लगा दे तो अगले सात वर्षों में स्वास्थ्य देखभाल और संबंधित लागतों में 5 बिलियन डॉलर यानी 33,500 करोड़ रुपए बच सकता है। यह जानकारी विश्व बैंक और एक अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र ‘इंटरनैश्नल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वूमन’ की एक नई रिपोर्ट में सामने आई है।

 
बचने वाला यह रकम देश के 33,32 9 करोड़ रुपए के 2017-18 उच्च शिक्षा बजट के बराबर है।रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर वर्ष 2030 तक 18 देशों में 17 बिलियन डॉलर (1.14 लाख करोड़ रुपए) की बचत हो सकती है।
 

इसमें से बड़ी आबादी के कारण भारत की हिस्सेदारी 10 बिलियन डॉलर ( 62 फीसदी ) होगी। बाल विवाह और समय पूर्व प्रसव पर रोक लगने से जनसंख्या वृद्धि में कमी होगी, जो बदले में सरकारी बजट पर दबाव कम करेगा। बाल विवाह खत्म करते हुए 106 देशों में जनसंख्या वृद्धि कम करने से वर्ष 2030 से प्रति वर्ष  566 बिलियन डॉलर बचत की जा सकती है।

 

बाल वधुएं हिंसा और दुर्व्यवहार का सामना करती हैं। साथ ही एचआईवी / एड्स और अन्य यौन संचारित बीमारियों से पीड़ित होने की संभावना भी ज्यादा होती है। इसके अलावा स्कूल छोड़ने और किशोरावस्था में ही बच्चे को जन्म देने संभावना भी बढ़ती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, किशोरावस्था में गर्भावस्था से एनीमिया, मलेरिया, एचआईवी और अन्य यौन संचारित संक्रमण, प्रसवोत्तर रक्तस्राव और मानसिक विकार जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

 

शहरी भारत में कानूनी आयु से पहले शादी करने वाली लड़कियों का अनुपात वर्ष 2001 में 1.78 फीसदी था। यह बढ़कर  वर्ष 2011 में 2.45 फीसदी हो गया है। जबकि इसी अवधि के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 2.75 फीसदी से कम हो कर 2.43 फीसदी हुआ है। 13 राज्यों से 70 जिलों में समय से पहले विवाह जैसी कई घटनाओं की सूचना दी गई है, जो देश में होने वाले बाल विवाह का 21 फीसदी है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने 9 जून, 2017 को विस्तार से बताया है।

 

10 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 1.7 करोड़ भारतीय बच्चों का विवाह हुआ है।  उनके साठ लाख बच्चे पैदा हुए हैं और वे भारत की 47% आबादी बनाते हैं और वे वर्तमान में विवाहित हैंइस संबंध में इंडियास्पेंड ने 9 मार्च 2015 को विस्तार से बताया है। इन विवाहित बच्चों में 76 फीसदी या 127 लाख लड़कियां हैं। यह आंकड़े  इस तथ्य को मजबूत करता है कि लड़कियां अब भी काफी अधिक वंचित हैं।

 

विश्व बैंक-आईसीआरडब्ल्यू अध्ययन इस समस्या के लिए एक आर्थिक आयाम जोड़ता है, जो भारत और अन्य देशों के लिए बाल विवाह और समय पूर्व प्रसव को समाप्त करने के कठिन काम के लिए एक प्रोत्साहन की बात हो सकती है।

 

बाल विवाह और समय पूर्व प्रसव के उन्मूलन से संभावित बचत

Source: Economic Impacts of Child Marriage: Global Synthesis Report

Note: *Projections; For a list of the 17 countries please refer to the report.

 

बाल विवाह और समय पूर्व प्रसव समाप्त होने के बाद, पहले कुछ सालों में स्कूल में प्रवेश करने वाले नए बच्चों की संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जैसा कि अध्ययन में बताया गया है। धीरे-धीरे, समय के साथ बढ़ते हुए जनसंख्या के आकार में कमी आएगी।

 

देश में 15 से 19 साल के आयु वर्ग की करीब 280,000 विवाहित लड़कियों ने पहले ही चार बच्चों को जन्म दिया है, जो वर्ष 2001 में 170,000 के आंकड़े के साथ 65 फीसदी की वृद्धि है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने 10 मई, 2016 को विस्तार से बताया है।

 

 

रिपोर्ट कहती है कि “ यह मानकर कि देरी से विवाह करने वाली कुछ लड़कियां भी अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने में सक्षम हैं, बाल विवाह को खत्म करना, परिवारों और सरकारों के लिए लागत की भरपाई कर सकता है। यदि लड़कियां बचपन में विवाह नहीं करती हैं और शिक्षा जारी रखती हैं तो यह परिवारों (आउट-ऑफ-पॉकेट और अवसर लागत) और सरकारों ( देखते हुए कि कई लड़कियां सार्वजनिक माध्यमिक विद्यालयों में भाग लेंगी) दोनों के लिए लागत को स्थिर करेगा। ये अतिरिक्त लागतें कुछ दूसरे लाभों को संतुलित करेंगी”।

 

प्रति 1,000 पुरुषों पर कम से कम 1,403 महिलाओं ने किसी भी शैक्षणिक संस्था में भाग नहीं लिया है। यह अनुपात 17 वर्ष की आयु से 30-34 वर्ष आयु समूह तक तेजी से बढ़ता है, जहां यह आंकड़ा 2009 है, वहां इसका अर्थ है किसी शैक्षणिक संस्थान में शामिल नहीं होने वाले प्रति पुरुष पर दो महिलाओं का आंकड़ा है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने 28 नवंबर, 2015 को विस्तार से बताया है।

 

किसी शैक्षणिक संस्था में न जाने वाली महिलाओं और पुरुषों का अनुपात

Source: Census 2011

 

विकासशील देशों में, जहां अच्छी शिक्षा तक लड़कियों की पहुंच कम है, वहां उनका विवाह जल्द होने की संभावना होती है, जैसा कि विश्व बैंक के शिक्षा विभाग के एक सलाहकार क्विंटिन वोडन ने मई 2014 में अपने इस लेख में बताया है।

 

हालांकि, अध्ययन में कहा गया है कि बाल विवाह से संबंधित निवेश निर्णयों के लिए आर्थिक खर्च एकमात्र तर्क नहीं होना चाहिए, लेकिन यह एक विचार करने योग्य मुद्दा है।

 

अध्ययन में कहा गया है कि बाल विवाह को समाप्त करने के लिए कई देशों में पर्याप्त निवेश की कमी होने की संभावना इस तथ्य से है कि इस अभ्यास को खत्म करने का आर्थिक मामला अभी तक सशक्त रुप से सामने नहीं आया है।

 

(साहा एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। वह ससेक्स विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज़ से जेंडर एंड डिवलपमेंट में एमए हैं।)

 

यह लेख मूलतअंग्रेजी में 13 जुलाई 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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