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बिहार में बदलता सियासी रंग

सौम्या तिवारी,

620 Nitish

 

बिहार में हो रहे विधानसभा चुनाव से सियासी हलचल बढ़ गई है। हाल ही में बिहार के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आलंकारितापूर्वक अपने प्रतिद्वंद्वी नीतीश कुमार से पूछा कि वह ऐसे लोगों का साथ क्यों दे रहें हैं जिनके कारण जेपी यानी जयप्रकाश नारायण को गिरफ्तार किया गया था।

 

देश के दूसरे सर्वाधिक आबादी वाले राज्य में जैसे – जैसे राजनीतिक संग्राम अपने नतीजे के ओर बढ़ रहा है वैसे – वैसे ही 38 वर्ष पुराना जेपी आंदोलन जिसे आमतौर पर बिहार आंदोलन के नाम से जाना जाता है, फिर से सुर्खियों में आ रहा है।

 

जयप्रकाश नारायण ( या जेपी ) एक क्रांतिकारी समाजवादी नेता थे जिन्होंने 1977 में कांग्रेस के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया था।

 

1977 में आपातकाल के बाद हुए आम चुनाव में पहली बार कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी थी और इसका श्रेय जेपी को ही जाता है।

 

1977 के चुनाव के बाद जनता पार्टी ( कांग्रेस विरोधी पार्टी ) ने दिल्ली की बागडोर संभाली लेकिन दो जनता पार्टी केवल दो साल ही सत्ता पर टिक पाई।

 

1977 में कुल 324 सीटों में से जनता पार्टी  ने 214 सीटों पर जीत हासिल किया था।

 

1980 के दशक तक जनता पार्टी, बिहार में भी कमज़ोर पड़ती नज़र आई। इस समय तक बिहार में कई दूसरे गुट और दल उभर कर सामने आए। मौजूदा तारीख में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल (यूनाइटेड) बिहार के दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियां हैं। यह दोनों पार्टियां जनता गठबंधन से अलग हुई गुटों द्वारा बनाई गई थीं एवं 1990 में बिहार की महत्वपूर्ण राजनीतिक दलों के रुप में उभरी।

 

इस साल तक दोनों पार्टियां को जाति वोट बैंक एवं एक-दूसरे के विपक्षी के रुप में जाना जाता था। इस वर्ष बिहार में हो रहे विधानसभा चुनाव में दोनों ही पार्टियां कांग्रेस के साथ सहयोगी हैं।

 

इसे विडंबना ही कहा जा सकता है क्योंकि 1970 के दशक में कांग्रेस के ” शासक ” शासन के विरोध के रुप में ही जनता पार्टी उभरा था।

 

1972 से बिहार राज्य विधानसभा में प्रमुख पार्टियां

 

Acronyms: INC (Indian National Congress); INC (U) (Indian National Congress United), BJS (Bharatiya Jana Sangh), CPI (Communist Party of India), CPM (Communist Party (Marxist)), NCO (National Congress Organization), SOP (Samyukta Socialist Party), SWA (Swatantra Party), JNP (Janata Party), JNP (JP) Janata Party (Jai Prakash), JNP (SC) (Janata Party (Secular- Charan Singh)), JNP (SR) (Janata Party (Secular- Raj Narain)), BJP (Bharatiya Janata Party), LKD (Lok Dal), ICS (Indian Congress Socialist), JD (Janata Dal), JD(S) (Janata Dal Secular), JD(U) (Janata Dal United), SAP (Samata Party), BSP (Bahujan Samaj Party), NCP (Nationalist Congress Party).

 

2015 के चुनावों की कहानी : नए गठबंधन

 

2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में कुछ बड़े गठबंधन देखने को मिले हैं – जद (यू), राजद और कांग्रेस के एक महागठबंधन।

 

तीन पार्टियों का महागठबंधन बिहार में भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा), लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) , राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ( आरएलएसपी  ) और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा ( सेक्युलर) सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ( राजग) के विरुद्ध चुनाव में खड़े हैं।

 

अन्य समूह में हैं समाजवादी धर्मनिरपेक्ष मोर्चा जिसमें समाजवादी पार्टी ( सपा) , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और जन अधिकार पार्टी ( JAP ) शामिल हैं, एवं लेफ्ट अलायंस जिसमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) , मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा ),  भाकपा (माले ), भारत की सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ( एसयूसीआई ) ( कम्युनिस्ट ), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (एफबी)और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी)शामिल हैं।

 

लोकसभा- सदस्य के मामले में बिहार चौथे स्थान पर है। 80 सदस्यों के साथ उत्तर प्रदेश पहले, 48 की संख्या के साथ महाराष्ट्र दूसरे एवं 43 सदस्यों के साथ पश्चिम बंगाल तीसरे स्थान पर है। लोकसभा सदस्यों की संख्या के कारण भी बिहार को राष्ट्रीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण समझा जाता है।

 

Main State Parties in Bihar State Assembly since 1972
State Parties 1972 1977 1980 1985 1990 1995 2000 Oct-05 Feb-05 2010
FBL 0 0 0 0 0 0 0
MUL 0 0 0 0
BKD 0
RPI 0 0
RSP 0 0 0 0 0
ICJ 0
BSP 0 2
IML 0
JMM 19 10 12 0
ICS 0
JPP 2
SP 2 0
SHS 0 0
CPI (ML) 6 5
JP 0
RJD 124 54 75 22
SAP 34
SJP (RASHTRIYA) 0
UGDP 0
JD (U) 88 55 115
LJP 10 3

 

Note: Blanks in the table show years when these parties did not contest elections or were not present. 0 shows no seats won. Acronyms: FBL (All India Forward Bloc), MUL (Indian Union Muslim League), BKD (Bharatiya Kranti Dal), RPI (Republican Party of India), RSP (Revolutionary Socialist Party), ICJ (Indian Congress Jagjivan), BSP (Bahujan Samaj Party), IML (Indian Union Muslim League), JMM (Jharkhand Mukti Morcha), ICS (Indian Congress Socialist), JPP (Jharkhand People’s Party), SP (Samajwadi Party), SHS (Shiv Sena), CPI (ML) (Communist Party (Marxist-Leninist)), JP (Janata Party), RJD (Rashtriya Janata Dal), SAP (Samata Party), SJP (RASHTRIYA) (Samajwadi Janata Party (Rashtriya), UGDP (United Goans Democratic Party), JD(U) (Janata Dal United), LJP (Lok Jan Shakti Party).

 

जनता पार्टी से टूट कर बनी हुई दूसरी पार्टियां, नए दल और नए गठबंधन बना रही हैं। राष्ट्रीय एवं राज्य चुनावों में प्रदर्शन के आधार पर उनकी स्थिति राष्ट्रीय या राज्य पक्षों के बीच बदलती रहती है।

 

जद (यू) और राजद का अधिक तीव्रता से बिहार में सीट केंद्रित करने का एक मुख्य कारण वर्ष 2000 में बिहार और झारखंड का अलग होना है।

 

राष्ट्रीय पार्टी – भारत में पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता तभी मिलती है जब लोकसभा चुनावों में पार्टी के उम्मीदवार चार से अधिक राज्यों में चुनाव लड़ते हैं। पार्टी को चार या चार से अधिक राज्यों में राज्य पार्टी का दर्जा मिला होना चाहिए। इसके अलावा पिछले लोकसभा चुनाव में कुल सीटों में कम से कम 2 फीसदी सीटों पर जीत हासिल होनी चाहिए।

 

राज्य पार्टी – पार्टी को राज्य पार्टी की मान्यता तभी मिलाती है जब पार्टी का उस राज्य से विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कम से कम 6 फीसदी वोट शेयर हो। इसके अलावा उस राज्य से लोकसभा में कम से कम एक सदस्य हो एवं राज्य की विधानसभा में दो सदस्य हो।

 

( तिवारी इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक हैं। )
 
यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 15 अक्तूबर 2015 indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 
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