Home » Cover Story » भारतीय खाते हैं ज्यादा नमक, डब्लूएचओ की सीमा से 119% ज्यादा

भारतीय खाते हैं ज्यादा नमक, डब्लूएचओ की सीमा से 119% ज्यादा

देवानिक साहा,

salt_620

 

पूरी दुनिया में जिंदगी और नमक के बीच स्वाद एक रिश्ता बनाता है। भारत में यह रिश्ता बीमारियों की ओर  बढ़ता है। एक औसत भारतीय प्रतिदिन 10.98 ग्राम नमक का  सेवन करता है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा प्रति दिन पांच ग्राम की सिफारिश की सीमा से 119 फीसदी ज्यादा है। यह जानकारी जॉर्ज इंस्ट्टयूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ (जीआईजीएच) द्वारा जर्नल ऑफ हाइपरटेंशन में प्रकाशित एक शोध में सामने आई है। इस शोध का इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण में एक बात तो साफ है कि भारत में उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं का सबसे बड़ा कारण नमक का अधिक सेवन है। उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं हृदय रोग का भी एक प्रमुख कारण है। वर्ष 2010 से 2013 के बीच भारत में दर्ज  मौतों में से हृदय रोग से मरने वाले 23 फीसदी लोग हैं।

 

अध्ययन में 29 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों से 227,214 भारतीय वयस्कों के नमक के सेवन की मात्रा के आंकड़े जुटाए गए। इन व्यस्कों की आयु 19 वर्ष से अधिक थी। अध्ययन के अनुसार, औसत नमक की खपत का स्तर प्रति दिन प्रति व्यक्ति 5.22 से 42.30 ग्राम के बीच थी।भारतीयों के औसत आहार में नमक की मात्रा के लिए प्रारंभिक आंकड़े वर्ष 1986 से 2015 के नवंबर तक किए गए विभिन्न अध्ययनों से लिए गए हैं। अंतिम विश्लेषण के लिए कम से कम 21 विभिन्न अध्ययनों  पर विचार किया गया है। इनमें  24 घंटे मूत्र संग्रह रिपोर्ट, 24 घंटे आहार तालिका सर्वेक्षण और खाद्य प्रश्नावली सर्वेक्षण शामिल थे।

 

डब्लूएचओ का मानना है कि उच्च सोडियम की खपत (प्रति दिन 2 ग्राम से अधिक, प्रतिदिन 5 ग्राम नमक के बराबर) और अपर्याप्त पोटेशियम का सेवन (प्रतिदिन 3.5 ग्राम से कम) से उच्च रक्तचाप और हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

 

पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में नमक का सेवन ज्यादा

 

विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों के बीच नमक के खपत में विस्तृत अंतर देखा गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात के शहरी क्षेत्रों में सबसे कम नमक खपत होने की रिपोर्ट दर्ज की गई है। इन राज्यों में प्रतिदिन -6-7 ग्राम नमक खपत की रिपोर्ट की गई है। महाराष्ट्र को छोड़कर हरियाणा और सभी उपर्युक्त में राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में कम खपत की रिपोर्ट दर्ज हुई है।

 

देश भर में नमक का सेवन

rural-urban

Source: Study by Australia-based George Institute of Global Health, published in the Journal of Hypertension

 

सभी राज्यों में से त्रिपुरा में सबसे अधिक नमक खपत की रिपोर्ट दर्ज हुई है। यहां ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रतिदिन 13.14 ग्राम नमक खपत की रिपोर्ट दर्ज हुई है।

 

इस अध्ययन के प्रमुख लेखक क्लेयर जॉनसन के अनुसार, “पिछले 30 वर्षों में  औसत भारतीय आहार में परिवर्तन हुआ है। भारतीय अब  दालों, फलों और सब्जियों का कम सेवन करते हैं। प्रसंस्कृत और फास्ट फूड की ओर झुकाव अधिक बढ़ा है। इस प्रकार, उनका भोजन अब नमक, शक्कर और हानिकारक वसा से भरा हुआ है। इससे उच्च रक्तचाप, मोटापा और दिल का दौरा और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ता है।”

 

अधिक नमक का सेवन हृदय रोगों का खतरा

 

जनगणना कार्यालय द्वारा प्रकाशित मौत सांख्यिकी के कारण 2010-13 के अनुसार, 2010 से 2013 के दौरान 23 फीसदी मौतें हृद्य रोग के कारण हुई हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों में 21.5 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 29.2 फीसदी मौतें हुई है। भारत में सबसे अधिक मौतें हृदय रोग के कारण होती हैं। बड़ा कारण क्रॉनिक फेफड़े का रोग है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने अक्तूबर 2016 में विस्तार से बताया है।

 

विशिष्ट रोगों से होने वाली मौतें, 2010-13

Source: Causes of Death Statistics 2010-13, Census of India

 

जीआईजीएच के अध्ययन से पता तलता है कि महिलाओं की तुलना में पुरुष और ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहरी क्षेत्र के लोग ज्यादा नमक का सेवन करते हैं। जीआईजीएच अध्ययन द्वारा किए गए अवलोकन के साथ जनगणना रिपोर्ट का मिलान किया जाए तो निष्कर्ष साफ है।

 

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की मौत हृदय रोग के कारण ज्यादा होती है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों को हार्ट अटैक होने की संभावना 1.5 गुना अधिक होती है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने जून 2015 में विस्तार से बताया है।

 

ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में विशिष्ट रोगों से होने वाली मौत, 2010-2013

Source: Causes of Death Statistics 2010-13, Census of India

 

अध्ययन कहता है कि, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ की खपत में वृद्धि से नमक के सेवन की संभावना बढी है, विशेष रुप से शहरी क्षेत्रों में। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में नमकीन अचार के व्यापक उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षाकृत खपत का स्तर बढ़ सकता है।

 

हृदय रोग का इलाज महंगा होता है, जिससे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। भारत में हृदय रोग से प्रभावित परिवार अपने स्वास्थ्य पर कुल घरेलू बजट का 27 फीसदी खर्च करता है। किसी हृहय रोग की बीमारी वाले सदस्य के बिना परिवार की तुलना में हृदय रोग के साथ वाले परिवार पर 4.5 गुना अधिक आर्थिक बोझ पड़ता है। यह जानकारी अप्रैल 2014 में ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड इंटरनेश्नल हेल्थ में प्रकाशित हुए अध्ययन में सामने आई है।

 

नमक की खपत कम हो, इसके लिए जरूरी है अधिक प्रयास

 

भारत सहित डब्ल्यूएचओ के सदस्य देशों ने गैर-संक्रामक रोगों को रोकने के लिए वर्ष 2025 तक औसत आबादी में नमक की खपत 30 फीसदी की कमी का लक्ष्य तय किया है।

 

जीआईजीएच, भारत के कार्यकारी निदेशक, प्रोफेसर विवेक झा के अनुसार, “हमे एक देशव्यापी शैक्षिक कार्यक्रम की जरूरत है। हमें लोगों यह समझाने की जरुरत है कि क्या खाएं और कैसे अपने आहार में नमक कम करें। इसमें निवेश की जरूरत है और हृदय रोग और उच्च रक्तचाप की दर को देखते हुए इसपर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।”

 

जीआईजीएच ने केंद्र की सहभागिता के साथ “भारत के लिए राष्ट्रीय साल्ट न्यूनीकरण कार्यक्रम” डिजाइन किया है। यह कार्यक्रम  भारत के विशिष्ट सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया गया है।

 

यह कार्यक्रम दुकानों, सड़क विक्रेताओं, रेस्तरां श्रृंखला, खाद्य निर्माताओं और उपभोक्ताओं को कवर करते हुए भारत सरकार के लिए एक व्यापक नीति प्रतिक्रिया और कार्य योजना का विकास करेगा।

 

नमक कम करने के लिए डब्ल्यूएचओ की सिफारिशें

 

डब्लूएचओ ने नमक का सेवन कम करने के लिए विशिष्ट सिफारिशें की हैं। इससे हृदय रोग और अन्य बीमारियों का जोखिम भी कम होगा।

 

  • वयस्कों के लिए: वयस्कों को प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक (सिर्फ एक चम्मच के तहत) का उपभोग करना चाहिए।
  • बच्चों के लिए: वयस्कों की तुलना में 2 से 15 साल के बच्चों के लिए नमक का सेवन उनकी ऊर्जा आवश्यकताओं को देखते हुए तय हो। बच्चों के लिए यह सिफारिश, विशेष रूप से स्तनपान की अवधि (0-6 महीने) या जारी स्तनपान (6-24 महीने) के साथ पूरक अवधि को संबोधित नहीं करता है।
  • सभी नमक जिनका सेवन किया जाता है, वे आयोडीनयुक्त हो या “मजबूत” आयोडीन के साथ हो। यह भ्रूण और युवा बच्चे में स्वस्थ मस्तिष्क के विकास के लिए आवश्यक है।

(साहा एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। वह ससेक्स विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज़ संकाय से वर्ष 2016-17 के लिए जेंडर एवं डिवलपमेंट के लिए एमए के अभ्यर्थी हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 7 नवम्बर 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। हमसे respond@indiaspend.org पर संपर्क किया जा सकता है। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार रखते हैं।

 
__________________________________________________________________

 

“क्या आपको यह लेख पसंद आया ?” Indiaspend.com एक गैर लाभकारी संस्था है, और हम अपने इस जनहित पत्रकारिता प्रयासों की सफलता के लिए आप जैसे पाठकों पर निर्भर करते हैं। कृपया अपना अनुदान दें :

 

Views
2574

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *