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भारतीय रसोई में तेल की मांग; उत्पादन में गिरावट, आयात में वृद्धि

सुकन्या भट्टाचार्य,

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कोलकाता के सड़क के किनारे तिपहिया वाहन पर खाद्य तेल की खाली कंटेनर लोड करता एक शख्स। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, एक दशक से 2015 तक भारत का खाद्य तेल का आयात दोगुना हुआ है।

 

ग्रामीण क्षेत्रों में खाना पकाने के लिए माध्यम के रुप में तेल के इस्तेमाल से वृद्धि होने से 2015 तक एक दशक में भारत का खाद्य तेल आयात दोगुना से भी अधिक हुआ है। यह जानकारी उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों में सामने आई है।

 

2004 से 2012 के बीच ग्रामीण घरों में तेल की खपत में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है, और शहरी परिवारों में 29 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2005 से 2012 के बीच, तिलहन के उत्पादन में 7 फीसदी की गिरावट हुई है। यह जानकारी खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के विभाग की अगस्त 2015 की रिपोर्ट में सामने आई है।

 

एक दशक में भारत के खाद्य तेल आयात में वृद्धि

Source: Department of Food and Public Distribution, Ministry of Consumer Affairs. *According to news reports.

 

भारतीय खाद्य तेल का अधिक मात्रा में कर रहे हैं इस्तेमाल

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Source: National Sample Survey Organisation reports; 68th, 66th and 61st rounds.

 

कीमतों और उपलब्धता के आधार पर खाद्य तेल की भारतीय उपयोग विविध है लेकिन मांग निरंतर दिखाई दे रही है, जो कि बढ़ती जनसंख्या और बढ़ती समृद्धि का संभावित परिणाम है।

 

आईसीआरए, एक प्रबंधन परामर्श, के मई 2016 की इस रिपोर्ट के अनुसार, “विकास सरकारी नीतियों, जोकि तिलहन उत्पादन, घरेलू प्रसंस्करण और आयात से संबंधित है उनके द्वारा भी संचालित किया जाता है। ये सभी देश में खाद्य तेल की कीमत और मांग को प्रभावित करते हैं।”

 

“भारत की जनसंख्या 1971 में 541 मिलियन (या 54.1 करोड़) से बढ़ कर 2001 में 1.02  बिलियन होने और वर्तमान में 1.28 बिलियन हुआ है; और पिछले तीन दशकों के दौरान प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई है। हाल तक भारत में खपत वृद्धि बाधारहित हुई है। हाल ही के वर्षों में खपत वृद्धि परिवर्तनशील रहा है, उसका मुख्य कारण उत्पादों का उच्च कीमत होना है।”

 

भारतीय तिलहन उत्पादन में गिरावट

 

खाद्य तेल का उत्पादन तिलहन से होता है, और खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग की रिपोर्ट सुझाव देते हैं कि 2015 तक एक दशक के दौरान खाद्य तेल के बीज के उत्पादन में एक मिलियन टन की गिरावट हुई है।

 

एक दशक में तिलहन उत्पादन में गिरावट

Source: Department of Food and Public Distribution, Ministry of Consumer Affairs

 

तिलहनों के उत्पादन के स्थिरता के लिए कुछ कारण हैं :

 

  • सरकार के अनुसार, अनियमित बारिश मुख्य कारण है।
  • किसानों की रुचि तिलहन में कम हो रही है ; लागत के अनुसार मुनाफा नहीं है।
  • भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद की इस नवंबर 2014 की रिपोर्ट के अनुसार, तिलहन उत्पाद करने वाले खेत चावल और गेहूं की ओर रुख कर रहे हैं।

मांग में वृद्धि के साथ, घरेलू निर्माताओं की रक्षा के लिए आयात पर लगते हैं कर

 

सितंबर 2015 की टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू उद्योग को बचाने के लिए, सरकार ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी की है, कच्चे खाद्य तेल पर 7.5 फीसदी से बढ़कर 12.5 फीसदी और 2014-2015 में रिफाइंड तेल पर 15 फीसदी से 20 फीसदी की वृद्धि हुई है।

 

अब भारत की खाद्य तेल की मांग में आयात की दो-तिहाई की हिस्सेदारी है, जिसकी बढ़ती जनसंख्या और आय की वृद्धि जारी होने के साथ कम होना संभव नहीं है। आयात पर लगाए गए करों का भुगतान उपभोक्ताओं द्वारा किए जाने की संभावना होती है।

 

(भट्टाचार्य इंडियास्पेंड के साथ इंटर्न हैं)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 08 जुलाई 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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