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भारत का तेजी से बढ़ता राज्य: मेघालय

प्राची सालवे एवं संजना पंडित,

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अगरतला, भारत के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा की राजधानी, में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रदर्शन के लिए उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्य, अरुणाचल प्रदेश में प्रतीक्षा करती नृतिकाएं।

 

* 2013-14 में 9.7 फीसदी की वृद्धि दर के साथ, भारत का सबसे तेजी से बढ़ता राज्य मेघालय है। मेघालय का वृद्धि दर मध्यप्रदेश (9.5 फीसदी) से अधिक है। अरुणाचल प्रदेश गुजरात से अधिक तेजी से बढ़ा है।

 

* एक बड़े राज्य, कर्नाटक, की तुलना में पूरे पूर्वोत्तर में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या (12.8 मिलियन) कम है। कर्नाटक में 12.9 मिलियन लोग गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं।

 

* त्रिपुरा के शहरी क्षेत्रों में भारत की सबसे अधिक बेरोजगारी दर, 25.2 फीसदी, दर्ज की गई है जबकि वर्ष 2011-12 में नागालैंड में यह आंकड़े 23.8 फीसदी दर्ज किए गए थे। 7 फीसदी के साथ, सबसे अधिक बेरोज़गारी दर, सबसे बड़े राज्य जम्मू-कश्मीर के शहरी क्षेत्र में दर्ज की गई है।

 

आठ पूर्वोत्तर राज्य – अरुणाचल प्रदेश, असम , मणिपुर, मेघालय, मिजोरम , नागालैंड, सिक्किम (2002 में जोड़ा गया) और त्रिपुरा- बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत के बाकी हिस्सों की तुलना में इन राज्यों में शिक्षा दर तेज़ी से बढ़ रही है, कृषि पर निर्भरता घट रही है और आमतौर पर फल-फूल रहे हैं। यह निष्कर्ष इंडियास्पेंड के अनुसंधान में सामने आया है। लेकिन यह भी पता चला है कि इस विकास से रोजगार और आजीविका के पर्याप्त अवसर उत्पन्न नहीं हो रहे हैं।

 

एक और बात स्पष्ट है कि हालांकि पूर्वोत्तर राज्यों को अक्सर एक साथ जोड़ कर देखा जाता है, लेकिन हमने कई मामलों में व्यापक मतभेद पाया है ;  उदाहरण के लिए,  मणिपुर में उच्च गरीबी दर और सिक्किम की समृद्धि देखी जा सकती है। कुछ आर्थिक सूचकांक भारत के सर्वोच्च है और कुछ भारत के सबसे कम हैं।

 

आज,  तीन भाग श्रृंखला लेख के पहले भाग में, हम पूर्वोत्तर के आर्थिक संकेतकों का विश्लेषण करेंगे जैसे कि सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी), बेरोज़गारी और गरीबी रेखा से नीचे की आबादी।

 

सेवाओं एवं उद्योग द्वारा संचालित विकास

 

वर्ष 2013-14 में, मेघालय,  त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश जीएसडीपी में सबसे अधिक विकास दर दर्ज की गई है।

 

जीएसडीपी में मेघालय की वृद्धि 9.7 फीसदी दर्ज की गई है जोकि बिहार के आंकड़ों के बराबर है। बिहार के लिए यह आंकड़े 9.1 फीसदी दर्ज किए गए हैं।

 

8.9 फीसदी की जीएसडीपी वृद्धि दर के साथ,अरुणाचल प्रदेश गुजरात से भी तेजी से बढ़ा है। गुजरात के लिए यह आंकड़े 8.7 फीसदी दर्ज की गई है।

 

सकल राज्य घरेलू उत्पाद में वृद्धि, वर्ष 2004-05 के स्थिर मूल्यों पर आधारित

 

सभी आठ राज्यों के लिए औद्योगिक क्षेत्र की हिस्सेदारी में वृद्धि हुई है जबकि कृषि और संबंधित गतिविधियों की हिस्सेदारी में गिरावट हुई है।मिजोरम में,  उदाहरण के लिए,  कृषि और संबंधित गतिविधियों के लिए विकास दर में गिरावट हुई है। 2010-11 में जहां यह आंकड़े 16.4 फीसदी थे वहीं 2013-14 में यह आंकड़े 0.07 फीसदी दर्ज की गई है।

 

शहरी क्षेत्रों में अधिक बेरोज़गारी

ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों के शहरी क्षेत्रों में बेरोज़गारी अधिक है और राष्ट्रीय पैटर्न के साथ कतार में है।

 

पूर्वोत्तर भारत में बेरोज़गारी दर

 

समरबिन उम्दोर , नॉर्थ इस्टर्न हिल विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर, शिलांग टाइम्स में लिखते हैं, “विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि, स्थानीय आबादी के लिए रोजगार के अवसर के अनुरूप विकास के साथ नहीं किया गया है। अन्य औपचारिक क्षेत्रों में रोजगार सृजन की कमी को देखते हुए, कृषि के बाहर रोजगार की सबसे कम उत्पादकता अनौपचारिक क्षेत्र में है, विशेष रूप से अनौपचारिक निर्माण, खुदरा व्यापार और परिवहन में।”

 

वर्ष 2011-12 में, 25.2 फीसदी के साथ त्रिपुरा के शहरी क्षेत्रों में सबसे अधिक बेरोजगारी दर दर्ज की गई है। यह भारत में सर्वोच्च बेरोज़गारी दर है। इस संबंध में नागालैंड के आंकड़े 23.8 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर है जबकि मणिपुर के लिए यह 7.1 फीसदी है।

 

2011-12 में, मेघालय में भारत का दूसरा सबसे कम बेरोजगारी दर (गुजरात के बाद) दर्ज किया गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में 0.4 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 2.8 फीसदी दर्ज किया गया था।

 

एक चेतावनी: ग्रामीण भारत में बेरोजगारी की दर, शहरों की तुलना में हमेशा कम होती है। सामान्य तौर पर, रोजगार दर पर्याप्त रूप से वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं, लेकिन केवल एक संकेत प्रदान करते हैं।

 

गरीबी असमान रुप से फैली: मणिपुर सबसे गरीब, सिक्किम सबसे समृद्ध

 

उत्तर-पूर्व में व्यापक रूप से गरीबी की दरें अलग-अलग हैं जो बड़े पैमाने पर अशांति और विद्रोह को दर्शाते हैं।

 

मणिपुर में 36.9 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं (शहरी क्षेत्रों में प्रति माह 1,170 रुपए एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 1,118 रुपए प्रति परिवार खर्च करने की क्षमता) जहां उग्रवादी समूहों ने अर्थव्यवस्था पर खासा प्रभाव डाला है जबकि सिक्किम में 8.2 फीसदी जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे रहती है (शहर में 1,226 रुपये , ग्रामीण क्षेत्रों में 930 रुपये) जहां भरपूर मात्रा में जल विद्युत से आय में वृद्धि हुई है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने पहले भी रिपोर्ट किया है।

 

भारत में मेघालय और सिक्किम में गरीबी में काफी गिरावट दर्ज की गई है।

 

उदाहरण के लिए, वर्ष 2009-10 में सिक्किम में गरीबी रेखा से नीचे की आबादी का प्रतिशत 13.1 फीसदी थी और 2011-12 में यह गिरकर 8.2 फीसदी हुआ है। इसकी तुलना में, बिहार और मध्य प्रदेश में गरीबी- गरीबी कम करने वाले सबसे सफल राज्य – इसी अवधि के दौरान 36.7 फीसदी से गिरकर 31.7 फीसदी एवं 37.7 फीसदी से गिरकर 29.4 फीसदी हुआ है।

 

इसी तरह, 2009-10 में मेघालय में गरीबी रेखा से नीचे की आबादी का प्रतिशत 17.1 फीसदी था जो कि 2011-12 में गिरकर 11.9 फीसदी हुआ है।

 

गरीबी रेखा के नीचे जनसंख्या, 2011-12

 

 

गरीबी रेखा के नीचे जनसंख्या, 2011-12

 

 

गरीबी रेखा के नीचे जनसंख्या, पूर्वोत्तर राज्य एवं बाकी हिस्सा

 

 

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान (एनआईआरडी) के अनुसार हालांकि गरीबी रेखा से नीचे के लोगों की संख्या राष्ट्रीय औसत से कम हो सकती है, इन राज्यों में गरीबी की तीव्रता बहुत अधिक है।

 

पूर्वोत्तर में गरीबी,  भारत के बाकी राज्यों की तरह , शहरी तुलना में ग्रामीण क्षत्रों में अधिक है: गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 12.8 मिलियन लोगों में से 11.6 मिलियन लोग गाँवों में रहते हैं।

 

एनआईआरडी के अनुसार कम विकसित कृषि और अकुशल श्रम गरीबी के दो मुख्य कारण हैं।

 

बुनियादी सुविधाओं सहित , इस क्षेत्र की विकास चुनौतियों का सामना करने के लिए,  केंद्र सरकार ने 2004 में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय बनाया है। 2015-16 में मंत्रालय को 2362 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार केंद्र सरकार से अनुदान और केंद्रीय करों में अपने हिस्से के साथ अपने कुल राजस्व का 79 फीसदी बनाता है।

 

कुछ अनुदान, जैसे कि मंत्रालय द्वारा दी गई, राजनीति से प्रभावित होते हैं। उदाहरण के लिए, 2010-11 से 2012-13 तक , अरुणाचल प्रदेश को कुल आवंटन का लगभग 19 फीसदी के साथ उच्चतम अनुदान प्राप्त हुआ था।  बाद में, जब सरकार 2015 के नगा शांति समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहती थी नागालैंड के लिए आवंटन (20 फीसदी) की वृद्धि हुई थी और अरुणाचल प्रदेश के नीचे आ गया था।

 

(सालवे इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक है। पंडित इंडियास्पेंड के साथ इंटर्न हैं एवं सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई की छात्रा हैं।)

 

यह तीन श्रृंखला लेख का पहला भाग है। कल दूसरा भाग प्रकाशित किया जाएगा।

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 01 फरवरी 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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