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भारत के गरीब ग्रामीण खो सकते हैं ग्रीन जॉब का अवसर

भास्कर त्रिपाठी,

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अगले पांच वर्षों में, तीन गुना नवीकरणीय के लिए भारत की स्वच्छ ऊर्जा पर जोर है और इससे 330,000 नौकरियों की संबावना है। इस बारे में पहले भी इंडियास्पेंड ने अगस्त, 2017 की रिपोर्ट में बताया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या अक्षय ऊर्जा की ये नौकरियां, भारत में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करने में मदद करेंगी?

 

थिंक टैंक ‘वर्ल्ड रिसोर्सेस इनिशिएटिव’ (डब्लूआरआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर  संविदात्मक कर्मचारियों को स्थिरता और अन्य लाभ के साथ नवीकरणीय क्षेत्र स्थायी नौकरियों की पेशकश करते हैं, तभी देश के श्रम-शक्ति का 80 फीसदी बनाने की उम्मीद है। यह सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण भारत के अकुशल और अर्द्ध कुशल श्रमिकों को प्रशिक्षित करना होगा। इसमें महिला श्रमिकों को भी शामिल करने की जरूरत है।

 

इस डर के कारण हैं कि हाल के दिनों में नौकरियों की प्रयाप्त उपलब्धता में गरीब पीछे रह जाएंगे। वर्ष 2016 में, भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र ने 385,000 कर्मचारी नियुत्त किया है, लेकिन अधिकतर अनुबंध पर थे।

 

भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली सरकार वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट (जीडब्ल्यू) अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लिए पेरिस जलवायु समझौते 2015 के लिए प्रतिबद्ध है। यह 100 मिलियन बल्ब (प्रत्येक 100 वाट पर) को ऊर्जा देने और कार्बन उत्सर्जन जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता को कम करने के लिए पर्याप्त है।

 

कुल लक्ष्य में से 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा से आएगा और पवन ऊर्जा से 60 गीगावॉट आएगा। देश ने अगस्त 2017 तक 58 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित की है। यह वृद्धि भारत के ग्रामीण गरीबों के आसरे खेती के लिए एक विकल्प प्रदान कर सकती है, जैसा कि डब्ल्यूआरआई रिपोर्ट में कहा गया है।

 

2022 तक सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में नौकरियां

Source: Council on Energy, Environment and Water and National Research Development Corporation

 

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश में पर्याप्त नौकरियों का उत्पादन न करने के लिए आलोचना का सामना कर रही है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2018 तक भारत में 18 मिलियन लोग बेरोजगार होंगे। समस्या के समाधान का एक रास्ता स्वच्छ ऊर्जा की ओर जाता है।

 

डब्लूआरआई भारत के ऊर्जा कार्यक्रम के निदेशक और इस पर रिपोर्ट के प्रमुख लेखक, भारत जयराज ने एक बयान में कहा है, ” अगर नीति निर्माता सही फैसला नहीं लेंगे, तब तक यह विकास ग्रामीण गरीबों को पीछे छोड़ देगा, जो कि हजारों नई नौकरियों को हासिल करने में असमर्थ हैं। अब व्यापार में नेताओं और सरकार के लिए एक स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र का निर्माण करने का समय है जो पूरे भारत में गरीब समुदायों को बिजली और रोजगार दे सकता है। “

 

अधिकांश अक्षय ऊर्जा की नौकरी संविदात्मक, इसमें कोई लाभ या स्थिरता नहीं

 

डब्ल्यूआरआई ने नीति निर्माताओं, स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (आईपीपी), ऑफ-ग्रिड उद्यमों और वर्तमान कर्मचारियों से संपर्क किया और जानने की कोशिश की कि ग्रीन जॉब गरीबी उन्मूलन में किस प्रकार मदद कर सकता है। अध्ययन के अनुसार, एक अच्छे काम के लिए चार प्रॉक्सी उपाय हैं- आय की विश्वसनीयता, स्वास्थ्य लाभ, कर्मचारी सुरक्षा नीतियां, और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के अवसर।अध्ययन कहता है कि, इससे ग्रामीण श्रमिकों की उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने की प्रयाप्त संभावना है।

 

डब्ल्यूआरआई ने पाया कि इस क्षेत्र में अधिकांश नौकरियां संविदात्मक हैं और लाभ या स्थिरता की पेशकश नहीं करते हैं। स्थायी नौकरियों में गरीबी को कम करने की क्षमता है, लेकिन अच्छी नौकरी के लिए इस क्षेत्र में बहुत अधिक काम करने जरूरत है, जो किसी व्यक्ति की भलाई और विकास के लिए अवसर प्रदान कर सकता है।

 

उदाहरण के लिए, साक्षात्कार लिए गए ऑफ़-ग्रिड उद्यमों ने सीधे स्थायी कर्मचारियों के मासिक वेतन को बैंक खातों में जमा कराया था। हालांकि, आईपीपी अपने कर्मचारियों के भुगतान के लिए चेक और नकदी का इस्तेमाल करते हैं। वे ठेकेदारों के माध्यम से भुगतान करते हैं। साइट पर काम कर रहे दैनिक मजदूर को आम तौर पर नकद में भुगतान मिलता है।

 

रिपोर्ट कहती है, “सीधे-जमा बैंक खाते से बैंकधारकों को बैंक ऋण तक पहुंच मिलती है, जिसे ग्रामीण लोग बीमारी, शादी और घर के सामानों की खरीद से जुड़े खर्चों का इस्तेमाल करते हैं।”

 

डब्लूआरआई द्वारा साक्षात्कार लिए गए सभी उद्यमों ने प्रति माह 15,000 कमाने वाले स्थायी कर्मचारियों को कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) प्रदान किया है। कानून द्वारा अनुमोदित, ईएसआई एक सामाजिक बीमा योजना है जो कि आपदाओं, जैसे कि बीमारी, मातृत्व, अस्थायी या स्थायी शारीरिक विकलांगता, मजदूरी के नुकसान या कमाई क्षमता के कारण रोजगार की चोट के कारण मृत्यु में मजदूरों के हितों की सुरक्षा करता है। ( कुछ ऑन-साइट दुर्घटनाओं और वित्तीय सहायता और वार्षिक स्वास्थ्य जांच सहित कुछ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच की कवरेज की पेशकश करते हैं। )

 

लेकिन आईआरपीपी और साक्षात्कार लिए गए परियोजना डेवलपर्स के साथ यह स्थिति नहीं थी, जैसा कि डब्ल्यूआरआई अध्ययन कहता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ” उन्होंने परियोजना निष्पादन के दौरान थोड़े समय के लिए काम करने वाले लोगों को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान नहीं की है।”  अल्पकालिक संविदात्मक श्रमिक स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में लगे कुल कर्मचारियों में से लगभग 80 फीसदी हैं।

 

नौकरी कौशल के विकास के अवसरों के क्षेत्र में अकुशल और अर्द्ध कुशल श्रमिकों को प्लांट के संचालन और रखरखाव के लिए औपचारिक और दीर्घकालिक अनुबंधों को सुरक्षित करने में मदद मिल सकती है। वर्तमान में, निर्माण के लिए तैयार किए जाने वाले लोगों की तुलना में ऐसे कुछ ही हैं, जैसा कि अध्ययन में बताया गया है।

 

भारत में, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की नौकरियां, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों, वैश्विक समग्र का 4.6 फीसदी है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने अगस्त 2017 की रिपोर्ट में बताया है।

 

प्रशिक्षण संस्थान अपर्याप्त हैं: ग्रीन क्षेत्र के नियोक्ता

 

अध्ययन के लिए साक्षात्कार किए गए अक्षय ऊर्जा नियोक्ताओं ने कहा कि अकुशल श्रमिकों में पूर्णकालिक पदों के लिए आवश्यक तकनीकी योग्यता और कौशल की कमी थी। लेकिन ज्यादातर प्रशिक्षण संस्थान माध्यमिक विद्यालय शिक्षा के बिना आवेदकों को स्वीकार करने से इनकार करते हैं, जिससे 60 फीसदी गरीब भारतीय बाहर होते हैं जो या तो अनपढ़ हैं या केवल प्राथमिक स्कूल पूरा कर चुके हैं।

 

शहरी केंद्रों में कई प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं, जो गरीब ग्रामीण श्रमिकों के लिए नामांकन मुश्किल बनाते हैं। अध्ययन के मुताबिक, महिला श्रमिकों को अतिरिक्त लिंगीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। घर के काम, बच्चों की देखभाल और लिंग मानदंडों ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए उन्हें लगभग असंभव बना दिया है।

 

यहां तक ​​कि अगर गरीब ग्रामीण श्रमिक मौजूदा प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूरा करने में कामयाब होते हैं, तो उनकी नौकरी पाने की संभावना नहीं है। डब्लूआरआई के बिजली प्रशासन पहल के प्रबंधक और रिपोर्ट के सह-लेखक, पमली डेका ने एक बयान में कहा है कि “संस्थानों का पाठ्यक्रम अक्सर उद्योग की जरूरतों के अनुरूप नहीं होता है, जिससे स्नातकों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली नौकरियों को सुरक्षित करना मुश्किल हो जाता है।

 

उन्होंने कहा कि अध्ययन में पाया गया कि कई स्वच्छ ऊर्जा नियोक्ता अपने नए कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना पसंद करते हैं क्योंकि प्रशिक्षण संस्थानों संतोषजनक ढंग से ऐसा करने में असमर्थ रहते हैं।

 

डब्लूआरआई ने सिफारिश की कि  अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की स्थिरता सुनिश्चित करने और ग्रामीण समुदायों को अवसर प्रदान करने के लिए निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं को अकुशल और अर्द्ध कुशल श्रमिकों के बीच क्षमता बनाना चाहिए।

 

इसने आगे यह सुझाव दिया गया कि सरकारी अधिकारियों को स्वच्छ-ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार के लिए गरीब और कम शिक्षित लोगों ( विशेष रूप से अर्द्ध कुशल और अकुशल ) लोगों को तैयार करने के लिए सार्वजनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाना चाहिए।

 

करीब 240 मिलियन भारतीयों में मूलभूत बिजली सेवाओं की कमी हैं। नई नौकरियों का निर्माण करने के अलावा, भारत की स्वच्छ ऊर्जा पर जोर भारत के सबसे गरीब ग्रामीण समुदायों में ऊर्जा पहुंच में सुधार ला सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे बच्चों को स्कूल के बाद अध्ययन करने के लिए अधिक समय मिलेगा अधिक उत्पादकता होगा और परिवारों के लिए आमदनी मिलेगी  और स्वास्थ्य के परिणामों में सुधार होगा।

 

(त्रिपाठी प्रमुख संवाददाता हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 20 दिसंबर 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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