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भारत के शहरों में बच्चे कुपोषित और वयस्क मोटापे से ग्रस्त

स्वागता यदवार,

Kids 620

 

‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन’ (एनआईएन) द्वारा किए गए एक हाल के अध्ययन के मुताबिक भारत अब पोषण और अति पोषण के दो मुद्दों से निपट रहा है। ये दोनों ही गैर-संचारी रोगों का बोझ बढ़ा रहे हैं।

 

शहरी इलाकों में, पांच से कम उम्र के बच्चों में, 25 फीसदी कम वजन वाले थे, 29 फीसदी स्टंड थे और 16 फीसदी वेस्टेड ( कद के अनुसार कम वजन ) थे। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों के बच्चों में कुपोषण का प्रसार कम है। लेकिन विकसित देशों की तुलना में यह अधिक है।

 

दूसरी ओर, भारत के शहरों के वयस्क मधुमेह, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल और मोटापा यानी ज्यादातर जीवनशैली के रोगों का सामना कर रहे हैं। तीन वयस्कों में से एक उच्च रक्तचाप से ग्रस्त है, चार में से एक मधुमेह और तीन में से एक उच्च कोलेस्ट्रॉल और मोटापे का शिकार है।

 

गैर संचारी रोगों जैसे हृदय रोग, मधुमेह, श्वसन रोग, कैंसर और अन्य भारत में होने वाले 60 फीसदी मौतों के कारण हैं। इनमें से 55 फीसदी समयपूर्व होते हैं। एक गैर-लाभकारी संस्था वर्ल्ड इकानॉमिक फोरम के अनुसार, वर्ष 2012 और 2030 के बीच इन बीमारियों के कारण भारत को 4.58 ट्रिलियन डॉलर (311.9 ट्रिलियन रुपए) का नुकसान है।

 

इस पैमाने की पहली जांच में, एनआईएन, जो भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के तहत चल रही है, ने देश के शहरी आबादी के आहार और पोषण का आकलन करने के लिए 16 राज्यों में 52,577 घरों से 172,000 लोगों को शामिल किया है। इसका उद्देश्य भी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापे और डिस्लेपीडिमिया या ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल के असंतुलन के प्रसार का अध्ययन करना था।

 

वर्ष 2015-16 में किए गए अध्ययन में यह भी पाया गया कि हर पांच पुरुषों में से एक धूम्रपान करने वाला था । तीन में से एक का नियमित रुप से शराब का सेवन करता था।

 

अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के बच्चे ज्यादा जोखिम में

 

अध्ययन में पाया गया है कि बच्चों में, एक से तीन की उम्र के बीच केवल 57 फीसदी और चार और छह वर्ष की आयु वर्ग में से 68 फीसदी लोगों ने पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और कैलोरी का सेवन किया है। शहरी भारत में, 16 फीसदी बच्चों का वजन जन्म के वक्त कम था, जो उन्हें संक्रमण और यहां तक ​​कि शुरुआती मौत के जोखिम में डालता है। इस बारे में नवंबर, 2016 में इंडियास्पेंड ने अपनी रिपोर्ट में बताया था।

 

समस्या का पता मां की खराब पोषण स्थिति से लगाया जा सकता है । गर्भावस्था के दौरान बद्तर पोषण से समस्या और बढ़ जाती है। अध्ययन में पाया गया कि केवल 56 फीसदी गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और कैलोरी मिल पाती है।

 

बद्तर संकेतकों के लिए अन्य कारण शिशु और युवा बच्चों के भोजन (आईवाईसीएफ) प्रथाएं हैं। केवल 42 फीसदी महिलाओं ने प्रसव के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू किया, जबकि चार माताओं में से एक ने जन्म के तुरंत बाद शहद, ग्लूकोज / चीनी -पानी और बकरी के दूध जैसे पूर्व-दूधिया जैसे भोजन दिए हैं। इन्हें स्तनपान में देरी के कारण से जोड़ा गया है।

 

प्रति व्यक्ति कम आय वाले, अनपढ़ माता पिता और शौचालय की सुविधा नहीं होने वाले अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति परिवारों में पांच वर्ष की आयु के कम बच्चों में स्टंटिंग, कम वजन और वेस्टिंग होने की संभावना ज्यादा है।

 

उदाहरण के लिए, अनुसूचित जनजाति के 34.4 फीसदी और अनुसूचित जाति के 39.4 फीसदी बच्चे पीड़ित हैं जबकि अन्य के लिए यह आंकड़े 26.8 फीसदी रहे हैं। इसी तरह, अशिक्षित पिता के 38.6 फीसदी बच्चे स्टंड हैं, जबकि कॉलेज तक शिक्षा प्राप्त पिता के बीच स्टंड बच्चों के आंकड़े 20.5 फीसदी हैं।

 

डब्ल्यूएचओ मानक के अनुसार, भारत के आधे से अधिक शहरी वयस्कों का वजन अधिक

 

शहरी पुरुष और महिला दोनों ने उच्च बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की सूचना दी, जो डब्ल्यूएचओ मानक के अनुसार 23 से कम होनी चाहिए। एनआईएन के पास अलग-अलग मानदंड हैं और उन अध्ययनों में पाया गया कि 34 फीसदी पुरुषों का वजन अधिक है (25 से ज्यादा बीएमआई ), 13 फीसदी कम वजन (18.5 से कम बीएमआई ) के थे। । महिलाओं में, 44 फीसदी मोटापे से ग्रस्त थीं और 11 फीसदी कम वजन की थी।

 

डब्ल्यूएचओ एशियाई मानकों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में 52 फीसदी पुरुषों और 59 फीसदी महिलाओं का वजन अधिक है।

 

राज्यों में राजस्थान में अधिक वजन वाले पुरुष (42.6 फीसदी) और पुडुचेरी में सबसे अधिक वजन वाली महिलाएं (59.8 फीसदी) हैं।

 

शहरी व्यस्कों में अधिक वजन और मोटापा

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शहरी आबादी में ज्यादा लोग उच्च रक्तचाप, मधुमेह और उच्च कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित

 

उच्च रक्तचाप शहरी भारत में 31 फीसदी पुरुषों और 26 फीसदी महिलाओं के बीच देखा गया है। उच्च रक्तचाप का निदान किया जाता है जब सिस्टोलिक संख्या 140 मिमी एचजी से अधिक और 90 मिमी एचजी पर डायस्टोलिक होती है। इस संबंध में केरल में पुरुषों में 38.4 फीसदी और महिलाओं में 31.4 फीसदी उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। बिहार में ये आंकड़े कम हैं, पुरुषों में 22.2फीसदी और महिलाओं में 15.7 फीसदी उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं।

 

शहरी पुरुष और महिलाओं में उच्च रक्तचाप

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22 फीसदी शहरी पुरुषों और 19 फीसदी शहरी महिलाओं में शर्करा की मात्रा 126 मिलीग्राम / डीएल से अधिक पाया गया है। पुडुचेरी में पुरुषों में 34 फीसदी और महिलाओं में 29.8 फीसदी  में मधुमेह का प्रसार उच्चतम पाया गया है।मध्य प्रदेश में पुरुषों में 12 फीसदी और उड़ीसा में महिलाओं में 12.6 फीसदी मधुमेह का प्रसार देखा गया और यह सबसे कम है।

 

ज्यादातर मधुमेह पीड़ित 60 से 70 आयु वर्ग में थे और सबसे कम 18 से 30 साल के आयु वर्ग में।

 

शहरी पुरुषों और महिलाओं में मधुमेह

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शहर में 22.3 फीसदी पुरुष और 22.4 फीसदी महिलाओं में कुल कोलेस्ट्रोल का उच्च स्तर  200 मिलीग्राम / डीएल से अधिक  पाया गया है। इसमें  सबसे ज्यादा जोखिम 50 से 70 वर्ष के आयु वर्ग में देखा गया। केरल में पुरुषों में 33.5 फीसदी और महिलाओं 38.6 फीसदी में कुल कोलेस्ट्रॉल के उच्चतम स्तर की सूचना मिली है। जबकि पुरुषों में12.5 फीसदी और महिलाओं में 10.8 फीसदी का न्यनूतम स्तर उत्तर प्रदेश का रहा है।

 

शहरी पुरुष और महिलाओं में उच्च कोलेस्ट्रोल स्तर

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थोड़ी देर व्यायाम या पैदल चलना सबसे लोकप्रिय

 

औमतौर पर शहरी भारत में 63 फीसदी पुरुष दिन में आठ घंटे काम में लगे रहते हैं। इनमें से ज्यादातर अपनी सीट पर बैठ कर ही काम करते हैं। महिलाओं में, 72 फीसदी दिन में आठ घंटे से कम काम करती हैं, ज्यादातर घर के कामकाज जैसे खाना पकाने, बागवानी और घर का रखरखाव का कम करती हैं।  हालांकि, विश्व बैंक के मुताबिक, 27 फीसदी भारतीय महिलाएं राष्ट्रीय कार्यबल का हिस्सा हैं।

 

सर्वेक्षण में शामिल लोगों में, 28 फीसदी पुरुष जो व्यायाम करते थे, चलना या टहलना पसंद करते हैं, जबकि 4 फीसदी योग और 2 फीसदी फर्श पर व्यायाम करते हैं। वहीं महिलाओं में, 15 फीसदी व्यायाम करती हैं, जिसमें 11 फीसदी टहलना और 3 फीसदी योग करना पसंद करती हैं। 23 फीसदी पुरुषों और 12 फीसदी महिलाओं द्वारा दैनिक व्यायाम कार्यक्रम दर्ज किया गया है।

 

मधुमेह और उच्च रक्तचाप मोटापे, शराब और तम्बाकू से जुड़ा हुआ

 

सोलह प्रतिशत वयस्क सिगरेट, बिड़ी और सिगार जैसे तम्बाकू उत्पादों से धूम्रपान कर रहे थे, जबकि 25 फीसदी धूम्रपान करने वाले तम्बाकू उत्पादों के आदी रहे थे और 30 फीसदी पुरुषों में शराब की लत देखी गई।

 

जो लोग तम्बाकू या शराब का सेवन कर रहे थे, वे करीब दस साल से इसके आदि रहे हैं। अध्ययन में महिलाओं द्वारा धूम्रपान और शराब का सेवन का उल्लेख भी नहीं किया गया है, हालांकि वर्ष 2016 के ‘ग्लोबल वयस्क तम्बाकू सर्वेक्षण’ (जीएटीएस) अनुसार, 15 वर्ष से अधिक उम्र के भारतीय महिलाओं में से 6.5 फीसदी तंबाकू का उपभोग करती हैं।

 

अध्ययन में मधुमेह और मोटापे, शारीरिक निष्क्रियता, उच्च कोलेस्ट्रॉल और शराब और तंबाकू उपभोग के साथ उच्च रक्तचाप के बीच प्रत्यक्ष संबंध पाया गया है।

 

अध्ययन ने अनुशंसा की है कि समुदायों को मोटापे, उच्च रक्तचाप और मधुमेह के कारणों और परिणामों के बारे में विशेष रूप से पोषण के संदर्भ में, सूचना शिक्षा का उपयोग करना, और व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) के तरीकों के बारे में संवेदनशील होना चाहिए।

 

(यादवार प्रमुख संवाददाता हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़ी हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 9 अक्टूबर 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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