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भारत के श्रमिक कम प्रशिक्षित

अभीत सिंघ सेठी,

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  • भारत के एक तिहाई नल मिस्त्री ( प्लंबर ) ग्राहकों की शिकायत का ठीक प्रकार संचालन नहीं कर सकते हैं।
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  • देश के कम से कम 60 फीसदी प्लंबर पाइपलाइन ज्ञान के साथ वास्तविक स्थितियों का संचालन करने में सक्षम नहीं हैं।
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  • करीब 40 फीसदी प्लंबर आपातकालीन स्वास्थ्य और सुरक्षा स्थिति को संभालने के लिए तैयार नहीं हैं।


 

यह कुछ मुख्य बिंदु हैं जो एसपाइरिंग माइंड्स ( सलाहकारी संस्था ) की स्किलस : पलंबर 2015 रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में प्रशिक्षित प्लंबर के ज्ञान एवं कौशल के बीच के अंतर पर प्रकाश डाला गया है।

 

ज्ञान एवं कौशल के बीच में होने वाला अतंर मजदूर वर्ग की खराब कुशलता के साथ राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली दो मुख्य समस्याओं का संकेत देता है – 12 मिलियन लोगों के लिए रोज़गार तलाशना जो श्रमिक संख्या में शामिल होने के लिए तैयार हैं एवं यह सुनिश्चित करना कि जिन्हें रोज़गार मिला है वह अपने काम में सुयोग्य हैं।

 

वर्तमान में रोज़गार एवं कुशलता के बीच बेमेलपन दिखाई देता है जिसे तकनीकी रुप से क्षमता में कमी कहा जाता है।

 

वर्ष 2014 में श्री राम सेंटर के आई आर, एच आर, आर्थिक एवं सामाजिक विकास द्वारा किए गए एक अन्य अध्ययन के मुताबिक राज मिस्त्री की योग्यता में 55 फीसदी का अंतर, ऑटो यांत्रिकी के लिए 48 फीसदी एवं प्लंबर के लिए 44 फीसदी योग्यता अंतर देखा गया है। जबकि टेलिवीज़न मेकैनिक एवं बढ़ई के में 48 फीसदी एवं 39 फीसदी का योग्यता अंतर देखा गया है।

 
चुने व्यवसायों में योग्यता अंतर ( % )
 

 

श्री राम सेंटर द्वारा किए गए अध्ययन में ज्ञान एवं कौशल के बीच के अंतर पर प्रकाश डालते हुए बताया गया है कि किसी प्रकार दो तिहाई ऑटो यांत्रिकी के पास वाहन के पुर्जो के संबंध में कोई ज्ञान नहीं है।

 

दो-तिहाई राजमिस्त्री एवं बढ़ई सुरक्षा नियमों से अनजान हैं। इस अध्ययन में लिए गए उत्तरदाताओं के पास कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं था लेकिन इनमें से अधिक उत्तरदाताओं ने प्रशिक्षण लेने की इच्छा ज़ाहिर की है।

 
भारत में औपचारिक प्रशिक्षण क्यों नहीं दे सकता बेहतर परिणाम
 

एसपाइरिंग माइंड की रिपोर्ट कहती है कि “औपचारिक प्रशिक्षण से कार्यकर्ता के योग्यता की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती है। यह कहा गया है कि श्रम बल को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए जोकि व्यावहारिक प्रवीणता के साथ-साथ सैद्धांतिक ज्ञान पर भी बराबर ज़ोर डालता है”।

 

How The Majority Of Plumbers Failed Analytical Reasoning

 

Sample test question: You reach a customer’s home and he tells you that the sink in his bathroom is draining water at a very slow rate, but the tub and toilet are draining normally. Which of the following will you check first to diagnose this problem?

A) I will check if the main drain or the sewer line is blocked causing the water from sink to drain slowly.


B) I will check if the faucet of the bathroom sink is leaking.


C) I will check if the underground piping near the bathroom sink is leaking.


D) I will check if the drain pipe connected to the bathroom sink is clogged.

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The answer is D.

 

As the Aspiring Minds report said: “The plumber needs to troubleshoot. Interestingly, the plumber can rule out option A and C simply by analytical reasoning: if either of these options were true, drainage for everything in the bathroom will slow down. Yet, 44.5% candidates choose this option. Between option B and D, the candidate needs to use simple plumbing knowledge to identify D.”

 
     

 
यह रिपोर्ट कहती है कि इस विशलेषण से हमें पता चलता है कि वर्तमान में प्लंबर के पास किन कौशल की कमी है एवं किन क्षेत्रों में प्रशिक्षण की आवश्यकता है। हमें विश्वास है कि इससे प्रशिक्षण केंद्रों को बेहतर कार्यक्रम विकास करने में मदद मिलेगी एवं पाठ्यक्रम और शिक्षा शास्त्र दोनों पर बेहतर प्रभाव पड़ेगा। यह सभी स्टेकहोल्डर के लिए दिशा-निर्देश भी प्रदान करेगी कि उद्योग के लिए क्या आवश्यक है। बदले में यह उद्योग को बेहतर कार्यक्रम बनाने में मदद करेगी।
 

भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा अधिकृत द इंडिया स्किल रिपोर्ट, 2014 के अनुसार “श्रम बल की मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण उनकी गुणवत्ता होती है।”

 

भारत में रोज़गार और कौशल विरोधाभास का होगा विकास

 

एसपाइरिंग माइंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक “दुनिया भर में रोज़गार विरोधाभास मौजूद है: कई पद रिक्त होते हैं जो भरे नहीं जाते और कुछ लोग होते हैं जिनके पास नौकरी नहीं होती है।” रिपोर्ट कहती है कि यह विशेष रुप से भारत के लिए सच है एवं यह समस्या ज्ञान उद्योगो, कुशल ट्रेडों और व्यवसायों में शामिल है। एसपाइरिंग इंडिया की एक अन्य रिपोर्ट के आधार पर इंडियास्पेंड ने पहले ही बताया था कि किस प्रकार केवल 7 फीसदी इंजीनियरों के पास ही मूल इंजीनियरिंग कौशल मौजूद है।

 
वर्तमान में केवल 2 फीसदी (करीब 9 मिलियन ) भारतीय श्रमिक औपचारिक रुप से प्रशिक्षित हैं। जैसा कि भारत ज़रुरतमंदों को रोज़गार प्राप्त कराने में ज़ोर-शोर से लगा है , रोज़गार एवं कौशल विरोधाभास तेज़ी से स्पष्ट हो जाएगा।
 

राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के अनुसार आने वाले दशक में हर वर्ष करीब 12.8 मिलियन लोग भारतीय रोज़गार बाज़ार में शामिल होने की उम्मीद में हैं। हालांकि पिछले हफ्ते ही ए वी राजवाडे ने अंग्रेज़ी अखबार, द मिंट में लिखा कि हर वर्ष करीब 5.8 मिलियन की कमी के साथ, करीब सात मिलियन लोगों को ही रोज़गार मिल पाता है।

 

इंडियास्पेंड ने पहले ही अपनी खास रिपोर्ट में बताया है कि वर्ष 2022 के अंत तक विभिन्न क्षेत्रों में करीब 347 मिलियन कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।

 

2022 तक संभावित टॉप पांच उद्योग एवं नौकरियां
 

 

एनएसडीसी के अनुसार वर्ष 2022 तक संरचनात्मक क्षेत्र 103 मिलियन श्रमिकों की आवश्यकता होगी। 38 मिलियन के साथ अनऔपचारिक क्षेत्र ( वर्तमान में भारतीय श्रम बल का 90 फीसदी शामिल ) दूसरा सबसे बड़ा रोज़गार जनित्र होगा। 26 मिलियन के आंकड़ों के साथ कपड़ा एवं वस्त्र क्षेत्र तीसरे स्थान पर होगा।

 

इन आवश्यकताओं के लिए भारत के उभरते श्रम बल को बेहतर रुप से तैयार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन आरंभ किया है। इस मिशन का उदेश्य वर्ष 2022 तक 4 मिलियन भारतीयों को प्रशिक्षित करना है।

 

( सेठी इंडियास्पेंड के साथ एक नीति विश्लेषक है )

 

अतिरिक्च रिसर्च: चैतन्य मल्लापुर

 

यह लेख मूलत: 14 सितंबर 2015 को अंग्रेज़ी में indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
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