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भारत के 27 खेल निकायों में से केवल 1 निकाय का अध्यक्ष है एक एथलीट

देवानिक साहा,

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2015 में केरल में हुए 35 वें राष्ट्रीय खेलों में हिस्सा लेते एथलीट। अध्ययन किए गए 27 में से केवल भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ही है जिसके अध्यक्ष पूर्व राष्ट्रीय एथलीट हैं। Juwai Teer Result देखे

 

भारतीय मैराथन धावक ओ पी जैशा ने कहा है कि वह रियो ओलंपिक के गर्म और नम दिन में बेहोश हो गई थी क्योंकि कोई भी भारतीय खेल अधिकारी उसे पानी या ग्लूकोज देने के लिए मौजूद नहीं था और यह एक चेतावनी है कि  भारत में खेल महासंघ अक्सर खेल की आवश्यकताओं के प्रति अनभिज्ञ हैं।

 

एथलीटों के बजाय नेताओं द्वारा भारतीय खेल संघ प्रबंधित करने के संबंध में काफी कुछ लिखा गया है। यहां विवरण के स्पष्ट आंकड़े हैं :

 

  • केवल एक खेल संघ – केवल भारतीय एथलेटिक्स महासंघ – में ही अध्यक्ष के रूप में एक पूर्व राष्ट्रीय एथलीट है।
  • केवन नौ खेल संघों के शासी निकाय पर पूर्व या वर्तमान खिलाड़ी हैं।
  • 12 खेल संघों ने उनके अध्यक्षों और सदस्यों के कार्यकाल के संबंध में कोई विवरण उपलब्ध नहीं कराया है।
  • केवल दो खेल संघों के पास भविष्य के लिए किसी भी प्रकार की योजना मौजूद है।
  • खेल संघों के शासी निकायों में महिलाओं के आंकड़े 2 फीसदी से 8 फीसदी के बीच है। केवल हॉकी इंडिया, 34 फीसदी महिला प्रतिनिधित्व के साथ, अपवाद है।

यह इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज, एक सलाहकार, द्वारा की गई नई रिपोर्ट, गवर्नेंस ऑफ स्पोर्ट्स इन इंडिया : 2016 की प्रमुख निष्कर्ष है। रिपोर्ट में 27 खेल संघों और महासंघों (भारतीय ओलंपिक संघ सहित) से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। आईओए के सदस्यों में 38 राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) शामिल हैं।

 

26 एनएसएफ द्वारा प्रस्तुत किए गए इन 38 एनएसएफ , खेल और व्यवस्था – जिसकी रिपोर्ट जांच करता है – हाल ही में संपन्न रियो 2016 ओलंपिक खेलों में चित्रित किया गया है। प्रमुख निष्कर्षों को पांच प्रमुख वर्गों में बांटा गया है :

 

1. संघों और महासंघों की समावेश और गठन

 

  • नौ खेल संघ आम जनता के लिए अपने उद्देश्यों का खुलासा करने में नाकाम रहे हैं ।
  • 10 खेल संघ मे आम जनता के लिए अपना गठन / चार्टर उपलब्ध कराने में नाकाम रहे हैं।
  • 10 खेल संघ ने अपना संचालन कानून सार्वजनिक नहीं किया है, जिसमें अध्यक्ष, सदस्यों और अन्य पदाधिकारियों की भूमिका और कर्तव्य शामिल हैं।

2. संघों और महासंघों की संरचना

 

  • अध्यक्ष के रुप में केवल एक खेल संघ में पूर्व राष्ट्रीय एथलीट है।
  • कम से कम आठ खेल संघ ऐसे है जहां उनकी शासी निकाय पर महिला प्रतिनिधित्व नहीं है। इसमें वे चार एनएसएफ शामिल नहीं है जिन्होंने उनके शासी निकाय की कोई जानकारी नहीं दी है।
  • अन्य खेल संघों में 2 से 8 फीसदी महिलाएं निकाय का गठन करती हैं। इसमें हॉकी इंडिया शामिल नहीं है, जो 34 फीसदी महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती है।
  • केवल नौ खेल संघों के शासी निकायों में पूर्व या वर्तमान खिलाड़ी हैं।

3. शासी निकाय

 

  • 11 खेल संघों ने रोटेशन, कार्यकाल यहां तक कि उनके शासी निकाय के सदस्यों की कार्यकाल सीमा से संबंधित जानकारी नहीं दी है।
  • 12 खेल संघों ने उनकी अध्यक्षों और सदस्यों की कार्यकाल सीमा के संबंध में कोई ब्यौरा नहीं दिया है। शेष 15 खेल संघों में से केवल छह ने अपने अध्यक्षों के कार्यकाल की सीमा तय की है।

4. वित्तीय खुलासे और रणनीति

 

  • केवल दो खेल संघ – अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (सामरिक योजना 2014-17) और भारतीय गोल्फ संघ (Tee20 सामरिक योजना 2013-2020) ने उनके संबंधित खेल में सुधार के लिए एक रणनीतिक योजना तैयार की है।
  • कम से कम 16 खेल संघ सार्वजनिक क्षेत्र में और / या एक नियमित तौर पर वित्तीय बयान प्रकाशित नहीं करते हैं।
  • केवल एक खेल संघ – अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ – ने एक प्रतिष्ठित लेखा परीक्षक द्वारा अपने वित्तीय वक्तव्यों का लेखा परीक्षित कराया है।
  • केवल एक खेल संघ – टेबल टेनिस महासंघ भारत – ने मुख्य कार्मिक के पारिश्रमिक विवरण का खुलासा किया है।

रिपोर्ट कहती है कि अधिकांश एसएएस और एनएसएफ की आय 100 करोड़ रुपए से कम है जबकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने वित्त वर्ष 2015-16 में 1,266 करोड़ रुपये की कमाई की है।

 

खेल संघों की आय, 2015

Source: Governance of Sports in India, 2016

 

5. हितों के टकराव का प्रबंधन

 

  • केवल एक खेल संघ – हॉकी इंडिया – ने संघर्ष के हित नीति को अपनाया है।
  • किसी भी खेल संघ ने किसी भी हित के टकराव या शासी निकाय के सदस्य या अध्यक्ष से संबंधित लेन-देन का खुलासा नहीं किया है।

रिपोर्ट में छह प्रमुख सिफारिशों की रूपरेखा तैयार की गई है जिससे भारत में खेल के प्रशासन में सुधार लाया जा सकता है :

 

i. डिजाइन राणनीति / भविष्य के लिए रोडमैप : आईओए और सभी खेल संघों को एक रणनीतिक रोडमैप को अपनाना चाहिए जो सार्वजनिक क्षेत्र में खोला जा सके। योजना के क्रियान्वयन पर नजर रखनी चाहिए और नियमित रूप से बताया जाना चाहिए।

 

ii. चुनाव और उत्तराधिकार की योजना के पुनर्गठन : खेल संघों को उनकी संरचना में निर्धारित करने के लिए संशोधन करना चाहिए: अधिकतम कार्यकाल सीमा और सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए सेवानिवृत्ति की सीमा (जैसे कि अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष) तय करनी चाहिए। एक बार सीमा तक पहुंचने पर, भविष्य नियुक्तियों के लिए नहीं माना जाना चाहिए ।

 

iii. पारदर्शी बनें : एसएएस सार्वजनिक डोमेन में अपने वित्तीय वक्तव्यों, कार्यकारी परिषद और प्रशासनिक कर्मचारियों, बजट, खर्च और पारिश्रमिक विवरण के प्रोफाइल डालना चाहिए।

 

iv. हित के संघर्ष को कम करना चाहिए : खेल संघों को हित के संघर्ष का खुलासा और सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसा न हो।

 

v. परिषद में सदस्य और महिला – प्रतिनिधित्व में वृद्धि : परिषदों पर विविधता को बढ़ाने के लिए यह महत्वपूर्ण है।

 

vi. आईओए और अधिक पारदर्शी होना चाहिए: आईओए अपने बजट और किसी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में अपनी भागीदारी के लेखा परीक्षित वित्तीय विवरण का खुलासा करना चाहिए । इन घटनाओं के लिए, यह भाग लेने वाले खिलाड़ियों, गैर खिलाड़ी कर्मचारियों, अधिकारियों और डॉक्टरों और व्यय का एक ब्रेक -अप सहित खुलासा करना चाहिए ।

 

(साहा एक स्वतंत्र पत्रकार और इंस्ट्टयूट ऑफ डिवलपमेंट स्टडीज़, ससेक्स विश्वविद्यालय में एमए जेंडर एवं डिवलपमेंट कैन्डिडेट 2016-17 हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 24 अगस्त 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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