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भारत में कारोबार करना हुआ आसान, लेकिन फिर भी देश का प्रदर्शन बद्तर

इंडियास्पेंड टीम,

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देश में कोई भी उद्यम शुरू करने के लिए औसत समय कम हुआ है। स्थायी बिजली कनेक्शन लेने में सुविधा बढ़ा दी गई है। ऐसा करके भारत ने पिछले साल देश में व्यापार करने की रैंकिग में सुधार किया है। वर्ष 2016 के विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 190 देशों की सूची में भारत का स्थान 131वां से 130वां हुआ है। हालांकि, इन आंकड़ों पर इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि अन्य प्रमुख मापदंडों पर भारत का प्रदर्शन अब भी खराब है।

 

पहले की तुलना में अब भारत तेजी से प्रदान करता है बिजली, लेकिन अन्य समस्याएं जस की तस

Source: World Bank

Note: For time taken to get electricity, data prior to 2008, and for time to resolve insolvency, data prior to 2012 are unavailable.

 

भारत में व्यापार करने में सुविधाओं की तुलना करने के लिए इंडियास्पेंड ने पांच मापदंडों का पर सात क्षेत्रों से 10 देशों को परखा है। ये देश हैं दक्षिण और पूर्व एशिया (चीन सहित), विकसित देश, उप सहारा अफ्रीका, भारत जैसे कम मध्यम आय वाले देश (1026 डॉलर और 4035 डॉलर के बीच प्रति व्यक्ति आय के साथ) और यूरोपीय संघ। अधिकांश मामलों में  उप-सहारा अफ्रीका के सबसे करीब दिखते हुए भारत निम्न स्थान पर रहा है।

 

विश्वस्तर पर भारत उप सहारा अफ्रीका के आंकड़ों के करीब

Source: World Bank

Note: For time taken to get electricity, data prior to 2008, and for time to resolve insolvency, data prior to 2012 are unavailable.

 

उद्योग से जुड़े सभी महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने के लिए जो पांच संकेतक चुने गए उनमें समय का मामला बहुत महत्वपूर्ण है। इनमें शामिल हैं: (1) एक व्यवसाय शुरू करना, (2) एक गोदाम का निर्माण करना और पानी और सीवरेज कनेक्शन, टेलीफोन लाइन और सुरक्षा उपायों के साथ औद्योगिक परिसर तैयार करना, (3) बिजली की स्थायी व्यवस्था करना  (4) कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करना और ( 5) अगर कोई व्यवसाय विफल रहता है तो दिवालियेपन के मामले को हल करना।

 

हमने वर्ष 2007 से 2016 के दशक के दौरान इन मापदंडों की तुलना तीन देश समूहों के साथ की है : (1) पड़ोसी एशियाई देश (2) विकसित देशों और (3) अलग-अलग विकसित देशों के समूह।

 

प्रारंभ समय और बिजली की उपलब्धता में भी सुधार लेकिन आदर्श स्थिति नहीं

 

सबसे उन्नत पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं और जापान की तुलना में भारत में कारोबार शुरु होने में दोगुना समय लेता है, लगभग26 दिन । जो सबसे उन्नत चार देश सबसे कम समय लेता है, वह है 6 दिनों के साथ अमरीका, 5 दिनों के साथ ब्रिटेन, 11 दिनों के साथ जर्मनी और 11 दिनों के साथ जापान । हालांकि, वर्ष 2014 के आंकड़ों की तुलना में भारत में निश्चित रुप से सुधार हुआ है। वर्ष 2014 में नया प्रोजेक्ट शुरु करने में 34 दिनों का समय लग रहा था।

 

विकसित देशों से भारत अब भी दूर

Source: World Bank

 

एक ऐसा क्षेत्र जहां भारत ने काफी सुधार किया है, वह है व्यवसायों के लिए बिजली का प्रावधान । इस मामले में यह तीन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आगे निकल गया है और इस दृष्टि से यह केवल जर्मनी से पीछे है। वर्ष 2009-12 में नए उद्यम के लिए बिजली प्रदान करने का समय 60 दिन से बढ़ कर 2013-14 में 100 दिन हुआ और फिर धीरे-धीरे 2016 में 46 दिन तक पहुंचा है। इस संबंध में 18 दिन के समय के साथ दक्षिण कोरिया सबसे ऊपर है।

 

मालगोदाम, विवाद समाधान और दिवालियेपन से निपटने में भारत अब भी काफी पीछे

 

भारत में कंपनियां एक मालगोदाम के निर्माण के लिए करीब आधे साल का समय लेती हैं। पानी, टेलीफोन और सुरक्षा प्रावधानों के साथ मुंबई में इसकी लागत 50 लाख रुपए (75,000 डॉलर) की आती है। यह लगभग उतना की समय है, जितना जापान लेता है और अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे विकसित पश्चिमी देशों द्वारा लिए जाने वाले समय का दोगुना है। इस संबंध में दक्षिण एशिया सबसे पीछे है, यहां तक ​​कि अफ्रीकी देशों की तुलना में भी सुस्त।

 

हर देश में औद्योगिक और वाणिज्यिक विवाद उत्पन्न होते हैं। खासकर जब कंपनियों और सरकार के बीच हितों का संघर्ष होता है। कम से कम समय में इन संघर्षों का समाधान करना स्वस्थ और बढ़ती अर्थव्यवस्था का संकेत है।

 

औसतन, विकसित देशों की तुलना में विवादों को सुलझाने के लिए भारत तीन गुना अधिक समय लेता है। भारत की न्यायिक व्यवस्था विलंब से फैसला सुनाती है। निचली न्यायालयों के साथ उच्च न्यायालयों में भी न्यायधीशों की कमी है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने मई 2015 और दिसंबर 2015 में विस्तार से बताया है।

 

औसत एशियाई देशों की तुलना में भारत में व्यापार करने की सुविधा

Source: World Bank

Note: Data in years has been converted to days for consistency.

 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) का उनके द्वारा वितरित कुल ऋण का 9 फीसदी तक पहुंचने के बाद वर्ष 2015-16  के आर्थिक सर्वेक्षण के एक पूरे खंड में ऋण के कारण तनावपूर्ण अवस्था में पहुँची कंपनियों तथा बैंकों की जुड़वाँ बैलेंस शीट की समस्या पर जोर दिया गया था। आरबीआई के नियमों के मुताबिक किसी भी बैंक का एनपीए कुल दिए कर्ज का 15फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। वर्तमान में, उनका एनपीए कुल दी गई अग्रिम राशि का 12 फीसदी से ज्यादा हो गया है।

 

भारत में दिवालियेपन को हल करने के लिए औसतन चार साल और चार महीने लगते हैं, जबकि बांग्लादेश में चार साल, पाकिस्तान में दो साल और सात महीने और चीन और श्रीलंका में एक वर्ष और आठ महीने का समय लगता है। जापान सात महीनों में दिवालियापन के मुद्दों को हल करता है, जो विश्लेषण में शामिल किए गए क्षेत्रों और दस देशों के औसत से बहुत कम है।

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 6 मार्च 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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