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भारत में सड़क पर होने वाली दुर्घटनाएँ चीन की तुलना में दुगनी

अमित भंडारी,

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भारत की जनसँख्या चीन से ९९ मिलियन कम है, साथ ही वहां पर भारत की तुलना में वाहनों की भी संख्यों ज्यादा होने के बावजूद भारत में सड़क – दुर्घटनाओं में मरनें वालों की संख्या दुगनी है |

 

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स्रोत: भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2013

 

भारत के सड़क परिवहन और हाइवेज मंत्रालय की रिपोर्ट;भारत में सड़क दुर्घटनाएँ वर्ष 2013 के अनुसार भारतीय सड़कों पर प्रतिदिन 377 लोग मरते है जो की विश्व में सड़क – दुर्घटनाओं में मरने वालों की सबसे ज्यादा संख्या है , उक्त मरने वालों की बहु-संख्या ज्यादातर असुरक्षित ड्राइविंग और लापरवाही के कारण होती है | अभिनेता सलमान के केस से और नीचे दिया अन्क्ध से उक्त तथ्य स्पस्ट हो जातें है|

 

भारत के 21वी सदी में प्रवेश के बाद वैसे तो चाइना ने भारत को बहुत से क्षत्रों में पीछे छोड़ दिया ,लेकिन हम इस बात से यह खुशफहमी पाल सकतें है कि भारत में सड़कों की दशा बहुत अच्छी न होने के बावजूद –भारत में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या चीन से कम रही है |

 

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स्रोत: भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2013

 

भारत में अल्कोहल और नशीली दवाओं के कारण 6463 लोग मरे और 20,081 घायल हुआ | जबकि तुलनात्मक रूप से 1713 लोग ब्रिटेन में हताहत हुआ वहां की सडको पर |

 

अभिनेता सलमान जैसे व्यक्ति का नशें में तेज गति से गाड़ी चलाते हुआ सड़क की पटरी पर सोय लोगों को मार और घायल कर देने वाले केस से मीडिया का ध्यान निरंतर बढती सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं की तरफ गया है लेकिन प्रत्येक 5 मे से 2 सड़क दुर्घटनायेँ अत्यन्त तेज़ गति से वाहनो चलाने के कारण वर्ष 2013 में 56,529 लोग अकाल मृत्यु के ग्रास बने – जो की कुल सड़क दुर्घटनाओं में हताहत होने वालो का 41% है |

 

सवारी वाहनो में मान्य लोगो से ज्यादा सवारियों को बैठा कर चलाना (ओवर क्राउडिंग) और मालवाही वाहनों में ओवर लोडिंग और जगह से ज्यादा रक्खी लोहे की सरियाँ इत्यादि से होने वाली दुर्घटनाओं में क्रमश: 20.8% और 7.1 % लोग कुल सड़क दुर्घटनाओं में हताहत हुए | इन सब अकाल मौतों का कारण मानवीय गलतियाँ है अगर सुरक्षा के नियमों की अवहेलना न की जावे तो बहुत कीमती मानव जीवन बाख सकतें है |

 

किसका दोष सबसे ज्यादा: चालक / ड्राईवर

 

भारत में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में 78% लोग ड्राईवर की गलतियों से हताहत होते हैं | देखे टेबिल 3 :-

 

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स्रोत: भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2013

 

उपरोक्त सड़क दुर्घटनाओं के मुख्य कारणों के अलावा अन्य एक चौथाई से कम कारण निम्न हैं – जैसे की गाड़ितों में कोई खराबी या उनका जरजर होना, पैदल चलने वाले के लिए सड़क पर पटरियों का न होना, साइकिल चालकों का तेज गति से चलने वाली बड़ी गाड़ियों से घबराकर अपना संतुलन खो देना और सड़कों की स्थिति अच्छी न होना / उनमें गड्ढे या मैन होल का खुला होना इत्यादि मुख्य कारण हैं |

 

सड़क दुर्घटनाओं में से 3 चौथाई चालकों की गलतियों और उनके द्वारा सड़क परिवहन के लिए मान्य नियमों का न पालन करना पाया गया है |

 

आसान तरीका : 5 प्रतिशत सड़कों पर ध्यान देने की जरुरत

 

भारत में होने वाले सड़क हादसों को, यहाँ की 5 प्रतिशत से कम सड़कों पर सघनता से प्रयत्न करके कम किया जा सकता है|

 

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स्रोत: भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2013

 

भारत में वर्ष 2013 में 60% सड़क दुर्घटनाएँ राष्ट्रीय और राज्यमार्गों पर हुई| भारत में कुल सड़कों में से राष्ट्रीय राज्यमार्ग 1.58% और राज्य मार्ग 3.38% हैं, देखे टेबिल 4 :-

 

इन राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर उचित यातायात नियंत्रण सख्ती से ट्रेफिक नियमों का पालन और आपातकालीन व्यवस्थाएँ होनी चाहिए जिससे की काफी सड़क दुर्घटनाएँ रोकी जा सकती हैं|

 

भारत में कुल सड़क दुर्घटनाओं में से 37% शहरी क्षेत्रों और शेष 63% ग्रामीण इलाकों में घटित होती हैं जो कि भारत के शहरी और ग्रामीण इलाकों की जनसंख्या का सामान्य औसत है |

 

सड़क दुर्घटनाओं के मुख्य पीड़ित वर्ग : दुपहिया वाहन चालक और उनका परिवार/दोस्त|

 

सड़क पर हताहत होने वाले सबसे ज्यादा दुपहिया वाहन चालक और उसपे सवार लोग होते हैं – वर्ष 2013 में दुपहिया वाहन दुर्घटनाओं में 39,353 लोग हताहत हुए – दुपहिया वाहन दुर्घटनाएँ कुल घटनाओं का एक चौथाई से ज्यादा होती हैं देखे चार्ट 5 :-

 

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स्रोत: भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2013

 

इतनी बड़ी संख्या में दुर्घटनाओं में दुपहिया वाहन दुर्घटना होने का कारण कम चौड़ी और व्यवस्थित सड़कों का न होना और दुपहिया वाहनों का काफी संख्या में सड़कों पर चलायमान होना हैं और उनपर सवार चालक अन्य दूसरी सवारियों का असुरक्षित तरीके से बैठा होना होता है – जबकि इनकी अपेक्षा 4 पहिया वाहनों में सवारी ज्यादा सुरक्षित होती है |

 

उपरोक्त दुपहिया वाहनों की दुर्घटनाओ को काफी कम किया जा सकता है अगर हेलमेट को कानूनी रूप से चालक और अन्य सवारी के लिए जरूरी कर दिया जाए|

 

कुछ बड़े शहरों में सिविल सोसाइटी द्वारा हेलमेट कानूनन जरूरी किए जाने को लेकर आंदोलन होते रहते हैं लेकिन जैसे चौपहिया वाहनों के चालको के लिए सुरक्षा बेल्ट को जरूरी कर दिया गया है, उसी तरह दुपहिया वाहनों के चालकों के लिए हेलमेट को नए वाहन खरीदते समय अतिरिक्त सामानों में शामिल कर लेना चाहिए |

 

सड़कों पर पैदल चलने वाले लोगों की 12,536 मौते हुई इसमे कारण बेतरतीब ढंग से सड़क पर वाहनों का चलना और दोनों तरफ से यातायात नियमों का न पालन करना होता है| इसके अलावा पैदल चलने वालो के लिए सड़क के दोनों किनारों पर चौड़ी पटरी – गलियों और पैदल मार्गियों के लिए क्रॉसिंग का सब जगह होना जरूरी है |

 

भण्डारी एक पत्रकार रिसर्चर और वित्त विशेषज्ञ हैं| आप बि0 टेक० (IIT- BHU) और MBA IIM अहमदाबाद| इंडस्पेंड एक स्वायत्तशासी जनहितकारी आंकड़ा आधारित पत्रकारिता के क्षेत्र में देश में पहली पहल है|

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फोटो क्रेडिट : फ्लिकर/कर्स्टन

 
 

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