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भारत में 35 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं दोपहर 3 से रात के 9 बजे के बीच

चैतन्य मल्लापुर,

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भारतीय सड़कों पर दोपहर के घंटे बहुत ज्यादा जानलेवा होते हैं। सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं इसी वक्त होती हैं। सरकार की एक नई रिपोर्ट कहती है कि 480,652 में से 85,834 दुर्घटनाएं यानी लगभग 18 फीसदी दोपहर के 3 बजे से रात के 9 बजे के बीच हुई हैं। इस रिपोर्ट में इन घंटों के दौरान होने वाली मौतों या जख्मी होने का भी उल्लेख किया गया है।

 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा अगस्त 2017 में आई रिपोर्ट भारत में सड़क दुर्घटनाएं-2016 के अनुसार भारत में वर्ष 2005 से वर्ष 2016 के बीच कम से कम 1,550,098 लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में हुई है।

 

वर्ष 2016 में, भारत में करीब हर दिन 1331 दुर्घटनाएं हुईं थीं,यानी हर घंटे 55 दुर्घटनाएं हुई हैं। इन दुर्घटनाओं में 150,785 लोग मारे गए। यानी हर घंटे 17 या हर तीसरे मिनट एक मौत। 494,624 लोग घायल भी हुए। मारे गए लोगों में से 25 फीसदी या 38,076 लोगों की उम्र 25 से 35 वर्ष की आयु के बीच थी। इसी उम्र के लोगों की मौत सबसे ज्यादा हुई है।

 

वर्ष 2016 में, शाम 6 से 9 बजे के घंटे दूसरे सबसे ज्यादा दुर्घटना होने वाले घंटे थे। इन घंटों में दुर्घटनाओं की संख्या 84,555 दर्ज की गई है।  भारत में अधिकांश दुर्घटनाएं 3 बजे से 9 बजे के बीच हुई। वर्ष 2016 में सभी सड़क दुर्घटनाओं में से 35 फीसदी इन्हीं घंटों में दर्ज की गई।

 

समय के अनुसार हुई सड़क दुर्घटनाएं

Source: Road Accidents in India 2016

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़क दुर्घटनाओं का एक महत्वपर्ण कारण ‘चालकों का दोष’ है। वर्ष 2016 में, सड़क पर हुई कुल दुर्घटनाओं में से 403,598 या 84 फीसदी चालकों के दोष के कारण ही है।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 121,126 मौत या सभी मौतों का 80 फीसदी गलत ड्राइविंग की वजह से हुई।

चालकों के दोष में सबसे महत्वपूर्ण कारण गाड़ी की तेज गति रही है। जिस कारण कुल 403,598 दुर्घटनाओं का 66 फीसदी या 268,341 दुर्घटनाएं हुईं। कुल 121,126 मौतों में से 61 फीसदी या 73,896 तेज गति के कारण हुई हैं। दुर्घटनाओं का दूसरा बड़ा कारण ओवरटेकिंग है। 7.3 फीसदी दुर्घटनाएं की वजह ओवर टेकिंग और 7.8 फीसदी मौत की वजह भी ओवरटेकिंग। साथ ही सड़क पर गलत तरफ गाड़ी चलाना भी अन्य मुख्य कारण रहा है। इससे 4.4 फीसदी दुर्घटनाएं और 4.7 फीसदी की मौत हुई हैं।

 

गाड़ी चालकों के कारण  दुर्घटनाएं

Source: Road Accidents in India 2016

 

वर्ष 2016 में, शराब / ड्रग्स के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या 14,894 दर्ज की गई है, जबकि इसी कारण से हुई मृत्यु की संख्या 6,131 है। यानी प्रतिदिन 41 दुर्घटनाएं और 17 मृत्यु का आंकड़ा रहा है। गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन का उपयोग करने के कारण 4,976 दुर्घटनाएं और 2,138 लोगों के मृत्यु के आंकड़े दर्ज किए गए हैं। या दूसरे शब्दों में कहा जाए तो मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के कारण रोजाना 14 दुर्घटनाएं और 6 मौतें हुई हैं।

 

2016 में, सभी वाहनों की हुई कुल दुर्घटनाओं में से 34 फीसदी दुर्घटनाएं दोपहिया वाहनों की हुई, हर घंटे 19 दुर्घटना का आंकड़ा

 

वर्ष 2016 में कम से कम ​​162,280 दोपहिया दुर्घटनाओं की सूचना मिली थी, जो वाहनों में सबसे ज्यादा है – करीब 34 फीसदी। जबकि होने वाले कुल दर्घटनाओं में कार, ​​जीप और टैक्सियों की हिस्सेदारी 24 फीसदी ( लगभग 113,267) रही है। वहीं  ट्रकों, टेम्पो, ट्रैक्टरों और अन्य व्यक्त वाहनों की हिस्सेदारी 21 फीसदी ( लगभग101,085 ) रही है।

 

वर्ष 2016 में, दोपहिया दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मौतें हुई हैं। लगभग 52,500 यानी रोजाना 144 या हर घंटे 6। कारों, टैक्सियों, वैन और हल्के मोटर वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं का स्थान इसके बाद रहा है। संख्या है करीब 26, 923।

 

वर्ष 2016 में, हेलमेट न पहनने के कारण कम से कम 10,135 दोपहिया वाहन सवारों की मौत हुई है। यानी रोजाना 28 मृत्यु का आंकड़ा रहा है।  जबकि सीट बेल्ट न पहनने के कारण 5,638  लोगों की मौत हुई है। हर रोज रोजाना 15।

 

वाहन के प्रकार के अनुसार दुर्घटनाएं


 

सड़क इस्तेमाल करने वालों के अनुसार दुर्घटना

Source: Road Accidents in India 2016

 

दक्षिणी राज्य तमिलनाडु ने 2016 में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाओं की सूचना दी है। यह संख्या है  71,431 ।  यानी प्रतिदिन 196 या हर घंटे आठ का आंकड़ा रहा है। मध्य प्रदेश में 53,972 और, कर्नाटक में 44,403 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। ये राज्य दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे हैं।

 

राज्य अनुसार दुर्घटनाएं एवं मृत्यु, 2016

Source: Road Accidents in India 2016

 

वर्ष 2016 में, सड़क दुर्घटनाओं के कारण देश के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य, उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा मौत की सूचना मिली है करीब 19,320। यानी रोजाना 53 या हर घंटे 2 मौत। जबकि, सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों का आंकड़ा तमिलनाडु में 17,218, महाराष्ट्र में 12,935 और कर्नाटक में 11,13 दर्ज हुए हैं।

 

10 लाख से ज्यादा आबादी वाले करीब 50 शहरों में से, 2016 में चेन्नई में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाओं के मामले दर्ज किए गए। संख्या है 7,486 और इस शहर में मौत के आंकड़े हैं 1,183 ।

 

दुर्घटना गंभीरता के मामले में ( प्रति दुर्घटना पर सड़क दुर्घटना संबंधित मौत ) 69.9 फीसदी मामलों के साथ लुधियाना का प्रदर्शन सबसे बद्तर रहा है।  67.1 फीसदी के साथ अमृतसर, 58.4 फीसदी के साथ आसनसोल-दुर्गापुर का प्रदर्शन भी खराब रहा है। इस संबंध में कोच्चि के आंकड़े 6.6 फीसदी पर सबसे कम रहे हैं।

 

भारत ने वर्ष 2014 में प्रति 100,000 की आबादी पर 11 सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा दर्ज किया था और दूसरे स्थान पर रहा था जबकि इस संबंध में रूस के आंकड़े 19, अमेरिका के 10 और मॉरीशस के लिए 11 का आंकड़ा दर्ज किया गया था।

 

चोट के मामले में, भारत ने प्रति 100,000 की आबादी पर 39 का आंकड़ा दर्ज किया है, जबकि अमेरिका ने 526, ​​जापान ने 451 और दक्षिण कोरिया ने 443 का आंकड़ा दर्ज किया है।

 

अंतरराष्ट्रीय तुलना: 2014 में सड़क दुर्घटना संबंधित मृत्यु और घायलों की संख्या

Source: Road Accidents in India 2016

 

भारत में सड़क पर चलने वाले 80 फीसदी लोग असुरक्षित महसूस करते हैं

 

नई दिल्ली स्थित गैर लाभकारी संस्था ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ की जुलाई 2017 की रिपोर्ट, रोड सेफ्टी इन इंडिया – पब्लिक पर्सेप्शन सर्वे के मुताबिक सड़कों पर चलने वाले लगभग 80 फीसदी लोग खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, 10 शहरों के 2,166 उत्तरदाताओं में से 54 फीसदी ने महसूस किया कि सड़कों की खराब स्थिति और और दोषपूर्ण डिजाइन दुर्घटनाएं बुलाते हैं। जबकि 74 फीसदी ने कहा है कि मौतों और चोटों के लिए सड़क ठेकेदारों और इंजीनियरों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

 

भारत की पूर्व योजना आयोग द्वारा 2014 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ रिपोर्ट कहती है, भारत में सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक लागत इसकी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3 फीसदी है।

 

रिपोर्ट कहती है, “2015-16 में भारत की जीडीपी 136 लाख करोड़ रुपये (2,092 बिलियन) के साथ, यह रकम 4.07 लाख करोड़ रुपए (62.6 बिलियन) के मौद्रिक नुकसान में बदल जाते हैं। विडंबना यह है कि यह रकम भारत में सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नोडल एजेंसी, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के बजट का पांच गुना है। “

 

(मल्लापुर विश्लेषक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं। )

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 21 सितंबर 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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