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भारत समलैंगिकता के विरोध- स्वरूप संसार के तानाशाहों, धार्मिक – अतिवादियों के साथ

इंडियास्पेंड टीम,

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संयुक्त राष्ट्र संघ के समलिंगी कर्मचरियों को लाभ पहुँचाने वाले नियम का विरोध करने पर भारत की काफी आलोचना हो रही है|

 

भारत के लिये वह समय अत्यन्त उलझन भरा था– जब वह संसार की कई  सरकारों के साथ 24 मार्च, 2015 को संयुक्त राष्ट्र में वोट डालने के दिन उनके पक्ष में रहना पड़ा|

 

भारत द्वारा ऊक्त योजनाओं का विरोध करते समय उसका साथ विश्व के 40 देशों ने दिया– उसमे कई तानाशाह देश और एक पार्टी शासन करने वाला चीन तथा न्यूनतम स्वतन्त्रता का पक्षधर रूस भी शामिल था |

 

अगर इकोनोमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के डेमोक्रेसी इंडेक्स 2014पर गौर करें तो पता चलता है कि कई ऐसे देशजिन्होंने ऊक्त समलैंगिक लाभार्थ निमयोंका विरोध किया,वो लोकतान्त्रिक मूल्यों में भारत से पीछे हैं|

 

Sources: UN Web TV , EIU Democracy Index 2014 data courtesy of Shakti Krishnan; *Three countries that voted against the benefits–Brunei, Solomon Islands & Somalia–weren’t part of the Democracy Index; View raw data here.  

 

समलैंगिक लाभार्थ नियमों के पक्ष में यूनाइटेड नेशन्स में वोट देने वाले 80 देशों में दक्षिण अफ्रीका भी है,जो कि समलैंगिक संबन्धों को कानूनी मान्यता देने में सबसे आगे रहा है |यहाँ समलैंगिक शादीशुदा जोड़ों को बच्चों को गोद लेने की भी कानूनी मान्यता है,और समलैंगिक जोड़ों को देश में कहीं भी नौकरी पाने में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों का भी नियमन करता है |

 

संयुक्त राष्ट्रकी बजट कमेटी में 80 देशों के बीच हुए इस मतदान में लाभ देने के पक्ष में 43 देश रहे और 37 ने खुद को अलग कर लिया. संयुक्त राष्ट्र के समलैंगिक कर्मचारियों को लाभ मिलते रहेंगे|

 

इंटरनेशनल लेसबियन,गे,उभयलिंगी (बाई सेक्सुअल) ट्रांस एंड इंटर सेक्स एसोसिएशन की रिपोर्ट-2014 के अनुसार–“यह आश्चर्य का विषय है कि  उक्त पक्षधर देशों में से 10 देश,जैसे-लाइबेरिया,सियारा लीओनभी हैं,जो समलैंगिक संबंधोंको कानूनन अपराध की श्रेणी में शुमार करते हैं |

 

Sources: UN Web TV , “State-sponsored homophobia” by International Lesbian, Gay, Bisexual, Trans and Intersex Association, Pew Research; Note: Same-sex marriage isn’t legal in all parts of USA, UK & Mexico; View raw data here.

 

समलैंगिकताविरोधियों के हारने से समलैंगिक संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों को  को सामान्य लैंगिक जोड़ों के समान ही सुविधाएँ पाने के हकदार होंगे| उन्हें लाभ मिलेगा, जिन्होंने उन देशों में शादी की है, जिन्होंने समलैंगिकता को कानूनी मान्यता दे रखीहै–चाहे वो उनका अपना मूल देश न हो|

 

विदेशों मे स्थिति

 

भारत विश्व के 78 देशों में से एक है–जिन्होंने समलैंगिकता को संगीन  अपराध की श्रेणी में रखा है– जिसमे दंड स्वरूप जुर्माना, मृत्युदंड, आजीवन कारावास या जेल हो सकती है |

 

जैसा की नीचे दिए चार्ट से साफ दिखता है, विश्व की 39% आबादी ऐसे देशों में रहती है, जहां पर समलैंगिकता कानूनन अपराध है |उक्त देशों में प्रमुख 5 पाँच देश-ईरान,सऊदी अरब,येमन, मारितनिया और सूडान–ऐसे राष्ट्र है जो समलैंगिकता के लिये मृत्युदण्डकी वकालत करते हैं |

 

विश्व में 20 ऐसे देश हैं , जो सम्लंगी विवाह को मान्यता देते हैं– इनमे नीदरलैंड ने सर्वप्रथम वर्ष 2000 में मान्यता दी थी | 16 अन्य देश– ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी– ये देश समलैंगिक नागरिक यूनियन, गे तथा लेसबियन– लोगों को घरेलू– पार्टनर्शिप की भी मान्यता देते हैं– अगर ऐसे समान स्वभाव वाले लोग शादी न भी करना चाहें तो |

 

Sources: World Bank, Pew Research, “State-sponsored homophobia” by International Lesbian, Gay, Bisexual, Trans and Intersex Association; Note: Same-sex marriage isn’t legal in all parts of USA, UK & Mexico; View raw data here.

 

भारत सरकार ने कहा कि वह समलैंगिक या समान सेक्स लाभार्थी योजनाओं के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस तरह से यूएन सेक्रेटरी जनरल बन काई मून ने समलैंगिकता को स्थापित किया है, वह आपत्तिजनक  होने के साथ–साथ एक पक्षीय भी है– क्यूंकि उसने सदस्य देशों से बिना सलाह मशविरा लिये किया है |

 

भारत अपने उक्त विरोध को न्यायसंगत कह सकता है, लेकिन उसका यह निर्णय असंगत देशों के साथ होकर शालीनता से हटकर दिखता है |

 

Image Credit: Flickr/KavitaKapoor
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