Home » Cover Story » मल्टीड्रग-प्रतिरोधी टीबी के इलाज में भारत कैसे बचा सकता है 532 करोड़ रुपए ?

मल्टीड्रग-प्रतिरोधी टीबी के इलाज में भारत कैसे बचा सकता है 532 करोड़ रुपए ?

डेनी जॉन,

mdrtb_620

तपेदिक (टीबी) के बारे में जागरुकता पैदा करने के लिए एक परिवार से बातचीत करती एक फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मचारी। एक नए अध्ययन के मुताबिक, केंद्रीय देखभाल की तुलना में मल्टीड्रग-प्रतिरोधी टीबी के लिए विकेंद्रीकृत देखभाल अतिरिक्त 1,058 रोगियों का इलाज कर सकती है, रोगियों को 3,824 गुणवत्ता समायोजित जीवन वर्ष का लाभ प्रदान कर सकती है और और 2,165 मौतों को टाल सकती है।

 

भारत में मल्टीडिग-प्रतिरोधी टीबी (एमडीआर-टीबी) के प्रबंधन के लिए, केंद्रीकृत देखभाल ( विशेष तपेदिक (टीबी) देखभाल केंद्रों पर उपलब्ध )  की तुलना में विकेंद्रीकृत देखभाल ( स्थानीय समुदाय में स्थित है जहां रोगी रहता है ) लागत प्रभावी होता है। यह जानकारी एक नए अध्ययन में सामने आई है।

 

यह भारत सरकार के संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) द्वारा अनुशंसित टी-टीबीरिस थेरेपी के लिए अस्पताल में भर्ती करने का विकल्प प्रदान कर सकता है।

 

एमडीआर-टीबी टीबी का अधिक शक्तिशाली रूप है, जो कम से कम दो सबसे शक्तिशाली टीबी-टीबी दवाओं, आइसोनियाजिड और राइफैम्पिसिन पर प्रतिक्रिया नहीं देता है और यह अधिक महंगा इलाज है।

 

वर्ष 2017 में, 48,000 से अधिक रोगियों ने आरएनटीसीपी के तहत एमडीआर-टीबी के लिए इलाज शुरू किया और केंद्रीकृत देखभाल की तुलना में विकेन्द्रीकृत देखभाल संभवतः देश के प्रति केस 1,666.50 डॉलर ( 108,878 रु) की बचत के आधार पर  80 मिलियन डॉलर (523 करोड़ रु) की बचत कर सकता है, जैसा कि इंडियन जर्नल ऑफ टबर्क्यलोसिस में प्रकाशित सितंबर 2017 की अध्ययन में बताया गया है।

 

स्वास्थ्य आर्थिक मॉडलिंग अध्ययन में पाया गया कि केंद्रीय देखभाल की तुलना में मल्टीड्रग-प्रतिरोधी टीबी के लिए विकेंद्रीकृत देखभाल से अतिरिक्त 1,058 रोगियों का इलाज हो सकता है, रोगियों को 3,824 गुणवत्ता समायोजित जीवन वर्ष का लाभ प्रदान कर सकती है और और 2,165 मौतों को टाल सकती है।

 

हर तरह की देखभाल के तहत आबादी के अनुपात के आधार पर, विकेन्द्रीकृत और केंद्रीकृत देखभाल के बीच का अंतर 23 फीसदी और 94 फीसदी के बीच हो सकता है।

 

मल्टीड्रग-प्रतिरोधी क्षय के लिए देखभाल की लागत

Cost Of Care For Multidrug-Resistant Tuberculosis
Cost Head Centralised care Decentralised care Cost Difference Difference (In %)
Total programme cost(Rs crore) 1,058.57 538.29 520.28 49.15
Cost per patient cured (Rs) 262,934.28 85,609.38 177,324.90 67.44
Cost per death averted (Rs) 68,913.18 33,577.33 35,335.85 51.28

 

परिदृश्य विश्लेषण: मल्टीड्रग-प्रतिरोधी क्षय के लिए केन्द्रीकृत बनाम विकेंद्रीकृत देखभाल

Scenario Analysis: Centralised Vs Decentralised Care For Multidrug-Resistant Tuberculosis
Coverage rate scenario Centralised care(Rs crore) Decentralised care(Rs crore) Cost Difference(Rs crore) Difference (In %)
90%:10% 952.72 53.83 898.89 94.35
80%:20% 846.86 107.66 739.20 87.29
70%:30 % 741.00 161.49 579.51 78.21
60%:40% 635.14 215.32 419.83 66.10
50%: 50% 529.29 269.15 260.14 49.15
40%:60% 423.43 322.98 100.45 23.72
30%:70% 317.57 376.81 -59.23 -18.65
20%:80% 211.71 430.63 -218.92 -103.40
10%:90% 105.86 484.46 -378.61 -357.66

Source: Author’s calculations, cited in this study

 

विकेंद्रीकृत देखभाल, गैर-विशेष या परिधीय स्वास्थ्य केंद्रों द्वारा, सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मचारी या नर्सों, गैर-विशिष्ट डॉक्टरों, सामुदायिक स्वयंसेवकों या उपचार समर्थकों द्वारा स्थानीय समुदाय में प्रदान की जाती है, जहां रोगी रहता है। देखभाल रोगी के घर, कार्यस्थल या स्थानीय स्थानों जैसे कि सामुदायिक केंद्र पर हो सकती है।

 

उपचार और देखभाल में डायरेक्ट ऑब्ज़ेड थेरपी (डीओटी) शामिल है, जिसमें ड्रग्स, मरीज सहयोग और इंजेक्शन शामिल हैं और कुछ मामलों में उपचार के शुरुआती चरण के दौरान या किसी भी इलाज की जटिलताओं के कारण कम से कम एक महीने के अस्पताल में भर्ती होने का एक संक्षिप्त चरण भी शामिल हो सकता है।

 

तुलनात्मक रुप से केंद्रीकृत देखभाल आंत्र रोगी उपचार है और देखभाल विशेष रूप से विशिष्ट दवा प्रतिरोधी टीबी केंद्रों द्वारा या गहन उपचार चरण के दौरान टीम या टीबी क्षयरोग के उपचार के लिए जब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है, तब प्रदान की जाती है। बाद में मरीज विकेन्द्रीकृत देखभाल प्राप्त कर सकता है।

 

2.8 मिलियन मामलों में से 15 फीसदी एमडीआर के साथ दुनिया में सबसे ज्यादा टीबी का बोझ भारत पर है और अगर देश में एमडीआर-टीबी के प्रबंधन की मौजूदा प्रथाएं जारी रहती हैं तो निकट भविष्य में यह संख्या निरंतर बने रहने की संभावना है। सभी जरुरतमंदों तक एमडीआर-टीबी थेरेपी पहुंचाने के तरीकों में से एक भारत में विकेंद्रीकृत देखभाल मॉडल के ऊपर एमडीआर-टीबी रोगियों (गंभीरता के आधार पर) के अनुपात को बदलने की रणनीति हो सकती है।

 

बदतर व्यवस्था में डब्ल्यूएचओ की ओर से विकेंद्रीकृत देखभाल की सिफारिश

 

Xpert® MTB / RIF- के उपयोग, ( जो दवा प्रतिरोधी टीबी के लिए परीक्षण है ) का देशों में विस्तार हुआ है। इससे अधिक रोगियों का निदान होगा और एमडीआर-टीबी उपचार के लिए नामांकित किया जाएगा। संसाधन बद्तर सेटिंग्स में, विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों में विकेन्द्रीकृत देखभाल के सशर्त कार्यान्वयन का सुझाव दिया गया है। दिशानिर्देशों के मुताबिक, “विकेन्द्रीकृत स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में प्रदान किए जाने वाले उपचार और देखभाल, उन रोगियों के लिए उपचार और देखभाल के पैमाने पर एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है जो एमडीआर-टीबी उपचार के लिए पात्र हैं”।

 

ये दिशानिर्देश हाल के साक्ष्यों पर आधारित हैं, जो दिखाते हैं कि इलाज की सफलता केंद्रीय देखभाल के साथ तुलना में विकेंद्रीकृत देखभाल में बढ़ी है। इसके अलावा, मृत्यु दर और उपचार की विफलता के कारण जोखिम दोनों प्रकार की देखभाल में समान थे।

 

उदाहरण के लिए, इथियोपिया एंबुलेट्री सर्विस डिलीवरी मॉडल में, एमडीआर-टीबी रोगियों का इलाज पहले दिन से फॉलो-अप केंद्रों पर आउट पेशेंट स्तर पर किया जाता है। ये केंद्र प्रत्यक्ष अवलोकन के तहत दी जाने वाली दवाओं और स्वास्थ्य श्रमिकों द्वारा सख्त पालन करने के साथ नैदानिक ​​या सामाजिक मानदंडों के आधार पर अस्थायी प्रवेश की सिफारिश कर सकता है। इस दृष्टिकोण ने 75 फीसदी से अधिक की सफलता की सफलता दर दिखाया, जो कि वैश्विक औसत 52 फीसदी से अधिक है, और इस कार्यक्रम में इलाज के लिए एमडीआर-टीबी रोगियों की संख्या में वृद्धि हुई है।

 

इसी तरह, 2011 में दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी राष्ट्रीय एमडीआर-टीबी विकेंद्रीकरण नीति के बाद, चिकित्सकों का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एमडीआर-टीबी उपचार शुरू करने और  प्रशिक्षित नर्सों द्वारा फॉलो-अप के साथ  दक्षिण अफ्रीका में अधिकांश एमडीआर-टीबी रोगी उनके स्थानीय क्लिनिक पर इलाज करा रहे हैं।

 

(जॉन एक सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवर है और दिल्ली स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था ‘कैंपबेल कोलाबोरेशन’ के साथ एविडन्स सिन्थिसिस  स्पेशलिस्ट के रूप में काम करते हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 20 अक्टूबर 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। हमसे respond@indiaspend.org पर संपर्क किया जा सकता है। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार रखते हैं।

 
__________________________________________________________________

 

“क्या आपको यह लेख पसंद आया ?” Indiaspend.com एक गैर लाभकारी संस्था है, और हम अपने इस जनहित पत्रकारिता प्रयासों की सफलता के लिए आप जैसे पाठकों पर निर्भर करते हैं। कृपया अपना अनुदान दें :

 

Views
2257

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *