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माओवादी हिंसा में जबरदस्त उभार : छत्तीसगढ़ में काफी संख्या में सुरक्षा-बल के जवान शहीद

चैतन्य मल्लापुर,

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छत्तीसगढ़ के रायपुर में माओवादी हमले में शहीद साथी जवानों को अंतिम सलामी देते हुए केन्द्रीय रिजर्व पुलिस फ़ोर्स के जवान |

 

काफी समय के शान्ति के बाद, गत तीन दिनों में माओवादी हिंसा का तेज़ उभार  देखा गया है- ये वामपंथी अतिवादी भारत की आतंरिक सुरक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं |

 

—11 अप्रैल, 2014 को मओवादिओं ने छत्तीसगढ़ विशेष सुरक्षा बल के सात जवानों को एक मुठभेड़ में सुकमा जिले में मार डाला – यह जिला राज्य के दक्षिणी आदिवासी अन्तस्थल बस्तर क्षेत्र में आता हैं |

 

—अगले दिन 12 अप्रैल को मओवादिओं ने 17 एंटी लैंड माइन व्हीकल को जला डाला, उसके बाद 13 अप्रैल को दक्षिणी छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक मुठभेड़ में सीमा सुरक्षा बल के एक जवान को मार दिया |

 

पिछले पांच सालों में हमारे 460 सुरक्षा बल के जवान नक्सली हिंसा में मारे जा चुके हैं | ऐसा लोकसभा को प्रेषित जानकारी और इंडियास्पेंड के विश्लेषण से पता चलता है | 10 राज्यों के सुरक्षा बलों को अलर्ट करते हुए भविष्य में और हमलों के बारे में सचेत किया गया है |

 

DNA की रिपोर्ट के अनुसार उक्त हिंसक हमले भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही कार्रवाई के प्रतिरोध स्वरुप एक कूटनीतिक प्लान (टैक्टिकल काउंटर ओफ्फेंसिवे कोम्पैन: TCOC/ ht-dt. 14 अप्रैल 2015 लखनऊ) के तहत नक्सलियों द्वारा किये जा रहे हैं |

 

भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित छत्तीसगढ़ में अब तक 235 सुरक्षा बल के जवान मरे जा चुके हैं, अन्य नक्सली हिंसा से प्रभावित राज्यों/ जिलों के तुलना में | ऐसा लगता है कि छत्तीसगढ़ अतिहिंसक चक्र में फंस गया है | इसके साथ ही, अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ में लगभग 2,014 नक्सलियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 147 नक्सली मरे गए |

 

नक्सली हिंसा में मारे गये सुरक्षा बल: 2011 से राज्यानुसार

 

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Source: Lok Sabha (1) & (2); Figures for 2015 up to February 15.

 

नक्सली दर्शन/ सिद्धांत एक उग्र सुधारवादी  राजनीतिक आन्दोलन है, जो कि भारत की सरकार को हिंसा बल के प्रयोग से उखाड़ फेंकना चाहता है | उक्त माओवादी हिंसा में भारत के एक बड़े भू-क्षेत्र जो कि बहुत खनिज सम्पदा और आच्छादित जंगलों और घने आदिवासी क्षेत्र में फैला है– महाराष्ट्र से प. बंगाल तक |

 

जैसा कि इंडियास्पेंड ने पूर्व में रिपोर्ट किया कि 21 मिलियन आदिवासी जनसँख्या में लगभग 7 मिलियन आदिवासी ऐसे हैं जिनको विकास के नाम पर हुए सरकारी/ गैरसरकारी प्रोजेक्ट्स के कारण अपने मूल जन्म स्थानों से विस्थापित होना पड़ा | दरअसल नक्सली इन विस्थापित आदिवासियों के आन्तरिक विस्थापन विक्षोभ का एक कूटनीतिक टूल के रूप में इस्तमाल करते है |

 

अब तक  वर्ष 2011 से 15 फ़रवरी 2015 तक लगभग 6000 नक्सली हिंसा की घटनाएँ हो चुकी हैं, जिसमे मरने वाले 1,300 नागरिक और 343 नक्सली हैं | इसी दौर में 7,120 नक्सलियों को राज्य सरकारों ने गिरफ्तार भी किया है |

 

Source: Lok Sabha (1) & (2)

 

केंद्र सरकार ने संसद में कहा है कि नक्सलियों का सम्बन्ध विदेशी माओवादी साथियों से है | ये विदेशी देश– फिलीपींस, जर्मनी ,फ्रांस, और टर्की हैं | नक्सल आन्दोलन का उद्गम स्थल प. बंगाल का नक्सलबारी है, उस स्थान के नाम से ही नक्सल शब्द आया है , जहाँ यह आन्दोलन 1967 में शुरू हुआ | ये नक्सली एक तथाकथित संगठन, कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ माओवादी पार्टीज एंड ओर्गनाइजेसन ऑफ़ साउथ एशिया – के सदस्य हैं |

 

सन 2011 से झारखण्ड राज्य में सबसे ज्यादा 1807 नक्सल घटनाएँ हुईं | छत्तीसगढ़ 1631 घटनायों से दूसरे  नंबर पर और 836 घटनायें बिहार, 581 ओडिशा , 392 महाराष्ट्र में हुईं |

 

भारत की माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया जो कि नक्सलवादियों का मुख्य संगठन है , इससे 74 मोर्चे जुड़े हैं जिनका 16 भारतीय राज्यों में फैलाव है ऐसा भारत सरकार और राज्य कहते हैं |

 

जब भी भारतीय सुरक्षा बल नक्सलियों पर जोरदार हमला करते हैं, उस समय से कुछ काल के लिए नक्सली शांत होकर अपने आका-संगठन के गुप्त स्थानों में छुप  जाते हैं, इनमे ज्यादातर असलहों से लैस नक्सली कैडर होता है |

 

निम्नलिखित चार्ट –उन नामों को दर्शाते हैं –जोकि 74 नक्सलियों के मोर्चा संगठनों के नामों को दिखाता है |

 

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Source: Lok Sabha

 
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