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मुफ्त पेट्रोल से मुफ्त वाईफाई तक – छोटे से गोवा के लिए बड़े-बड़े वादे

प्राची सालवे एवं एलिसन सलदनहा,

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People participate in a voters’ awareness campaign ahead of Goa assembly polls in Panaji. Our examination of party manifestos in the state’s first three-cornered election provides an insight into the intensity of the battle.

 

गोवा में एक तरफ चुनावी सरगर्मी जोरों पर है। दूसरी तरफ वादों की बहार है। राज्य में तीन मुख्य राजनीतिक पार्टियां वोट के बदले तरह-तरह की सुविधाएं देने का वादा कर रही हैं। कांग्रेस ने गोवा के छात्रों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस होने पर हर महीने पांच लीटर मुफ्त पेट्रोल देने का वादा किया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने राज्य भर में मुफ्त वाई-फाई का वादा किया है। इस मामले में और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी पीछे नहीं है। भाजपा ने सप्ताह में सातों दिन के चौबिस घंटे निर्बाधित बिजली देने का वादा किया है। साथ ही उच्च गति वाले ब्रॉडबैंड इंटरनेट देने की बात भी कही है।

 

राज्य के 10 लाख मतदाता या तो अपना मत देकर फिर से राज्य की बागडोर भाजपा के ही हाथों में देंगे या फिर किसी दूसरी पार्टी का विकल्प चुनेंगे। राजनीतिक पार्टियों के घोषणापत्र को पढ़ने से गोवा में चुनावी सरगर्मी का पता चलता है। गोवा भारत के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है। वर्ष 2014-15 में, प्रति व्यक्ति आय के मामले में यह पहले स्थान है और साक्षरता के मामले में चौथे स्थान पर है।

 

सोशल मीडिया पर जारी किए गए एक वीडियो में भाजपा ने यह दावा किया है कि पिछले वर्षों में यानी इस शासनकाल में उसने अपने सारे वादे पूरे किए हैं और यदि इस बार भी जनता भाजपा को चुनती है तो राज्य में परिवहन व्यवस्था के बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ उत्तरी गोवा के मोपा में एक नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना से भाजपा ने युवाओं के लिए रोजगार की भी बात कही है।

 

लेकिन मोपा में जमीन को लेकर अन्य पार्टियों ने सवाल उठाए हैं।कांग्रेस और आप, दोनों ही पार्टियों ने आरोप लगाया है कि वह जमीन स्थानीय आदिवासियों से धोखाधड़ी कर हासिल की गई है। आप पार्टी ने कहा है कि वह आगे की जांच होने तक  मोपा में सभी योजनाओं विरोध करेगी।

 

ग्रामीण बेरोजगारी गंभीर चिंता का विषय, किसी पार्टी के पास कोई समाधान नहीं?

 

वर्ष 2014 के बाद से जब से सुप्रीम कोर्ट ने खनन पर से प्रतिबंध हटाया है, वर्ष 2015-16 में, गोवा की ग्रामीण बेरोजगारी की दर 11.3 फीसदी से बढ़ कर 13.8 फीसदी हुई है। हम बता दें कि वर्ष 2014 के दो साल पहले खनन पर प्रतिबंध लगाया गया था। हालांकि 2014 में यह प्रतिबंध हटाया गया है, लेकिन अब भी सख्त शर्तों के तहत इसकी अनुमति दी गई है।

 

घोषणापत्रों में इस समस्या का कोई स्पष्ट समाधान पेशकश नहीं है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसके कारण, गोवा में आसानी से व्यापार करने की रैंकिंग वर्ष 2015 में 19 से फिसल कर 2016 में 21 हुआ है।

 

आप ने अपने घोषणापत्र में पांच सालों में, मौजूदा और नए उद्योगों और उद्यमशीलता का समर्थन करके 50,000 रोजगार के अवसर पैदा करने का वादा किया गया है।

 

पार्टी ने कहा है कि वह एक “एकल खिड़की मंजूरी” और कंपनियों के लिए कर में राहत देगी जिससे गोवा में “पर्यावरण के अनुकूल” व्यवसाय और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेंगे।

 

कांग्रेस के घोषणापत्र में सभी निजी उद्यमों और सरकारी नौकरियों में गोवा के निवासियों के लिए रोजगार आरक्षित करने का वादा किया गया है। गोवा के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और प्रोत्साहन प्रदान करने का वादा भी किया गया है, ताकि उद्योगों में उन्हें रोजगार मिल सके।

 

भाजपा ने कहा कि यह पर्यटन क्षेत्र के विस्तार से गोवा में रोजगार के भरपूर मौके पैदा होंगे।

 

प्रमुख क्षेत्रों के लिए किए गए वादे

 

क्या गोवा फिर से भारत का सबसे बड़ा लौह अयस्क निर्यातक और साफसुथरा राज्य बन सकता है?

 

गोवा में खनन उद्योग सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। हालांकि, भाजपा के घोषणापत्र में गोवा के बीमार खनन उद्योग का कोई जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन आप और कांग्रेस दोनों ने पारिस्थितिकी के अनुकूल कानून का पालन करने के वादे के साथ जल्द से जल्द खनन कार्य को पुनः आरंभ करने का प्रस्ताव रखा है।

 

वर्ष 2012 तक गोवा भारत का सबसे बड़ा लौह अयस्क निर्यातक था। लेकिन बड़े पैमाने पर अवैध खनन का पर्दाफाश होने की इस रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2012 में इस पर प्रतिबंध लगाया था। इस प्रतिबंध के बाद धेर सारे लोग बेरोजगार हो गए थे क्योंकि राज्य में बड़े पैमाने पर दूसरे रोजगार के अवसरों का अभाव है। या फिर गोवा के लोगों के पास अन्य नौकरियों के लिए शैक्षिक योग्यता नहीं है।

 

‘आप’ ने गोवा को भारत का पहला ‘भ्रष्टाचार मुक्त और प्रदूषण मुक्त “खनन राज्य बनाने का वादा किया है। और साथ ही खनन माफिया से 36,000 करोड़ रुपए की वसूली करने का वादा किया है। पार्टी ने कहा कि इस अवैध खनन की निगरानी के लिए ड्रोन की मदद ली जाएगी।

 

आप पार्टी के घोषणापत्र के अनुसार, जो लोग खनन प्रतिबंध से प्रभावित हुए हैं, विशेष रुप से ट्रक ड्राइवर, मशीन मालिक और किसान, उनकी मदद के लिए आप पार्टी 400 करोड़ रुपये का एक मुआवजा कोष बनाएगी। इसकी पहली किस्त शासन के पहले दो वर्षों में मुआवजा पैकेज के रूप में वितरित किया जाएगा।

 

कांग्रेस ने भी सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशों को स्वीकार करके खनन बहाल करने का वादा किया है। प्रतिबंध से प्रभवित लोगों के लिए पार्टी ने स्थायी माइनिंग फंड प्रस्तावित किया है। साथ ही खनन ट्रकों और उपकरणों के लिए ठेकेदारों का किराया समाप्त करने की बात भी की है। हम बता दें कि 2012 की इस रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस 2747 करोड़ रुपए के अवैध खनन कारोबार के सामने आने के बाद वर्ष 2012 में राज्य में पिछला विधानसभा चुनाव हार गई थी। अवैध खनन के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिगंबर कामत समेत कई कांग्रेस नेताओं के नाम उछले थे।

 

खनन के साथ, पर्यटन क्षेत्र के लिए भी वादे

 

खनन गतिविधि ठप होने के साथ, पर्यटन गोवा का शीर्ष नियोक्ता बन गया है। वर्तमान में 10.2 फीसदी लोग इस कम में लगे हैं।

 

आप पार्टी ने सरकार बनने के बाद छह महीने के भीतर गोवा के समुद्र तटों पर शैक बनाने का लाइसेंस जारी करने के लिए ‘एकल खिड़की मंजूरी “प्रणाली का प्रस्ताव दिया है। साथ ही नए शौचालय और सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात भी की है।

 

कांग्रेस ने पांच साल की अवधि के लिए लाइसेंस की पेशकश करने का वादा किया है। भाजपा ने पारिस्थितिक, घटना, चिकित्सा, विरासत, धार्मिक, एडवेंचर और विलेज पर्यटन को प्रोत्साहित करने के अलावा सभी पर्यटक स्थानों पर कपड़े बदलने के कमरे और शौचालय बनाने का वादा किया है। पार्टी ने मानसून मौसम के दौरान रक्षा एक्सपो जैसी “मेगा घटनाओं” के लिए गोवा को एक “पसंदीदा ठिकाना” बनाने का वादा किया है।

आप और कांग्रेस दोनों ने चल रहे कैसीनो को समाप्त करने का वादा किया है। हम बता दें कि यहां कैसीनो करीब 24 वर्षों से चल रहे हैं। जबकि सत्तारूढ़ भाजपा ने इस  विवादास्पद मुद्दे से परहेज किया है। कुछ समय पहले जुआ के बुरे प्रभावों के कारण स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन के बाद स्थानीय लोगों के कैसीनो में प्रवेश पर प्रतिबंधित लगाया गया है। कैसीनो पर जुआ को बढ़ावा देने और मांडोवी नदी को प्रदूषित करने का आरोप लगाया गया है।

 

राज्य में स्वास्थ्य सेवा के लिए कई वादे, राज्य के लोगों के स्वास्थ्य में गिरावट

 

गोवा में नि:शुक्ल निदान और उपचार के साथ 400 क्लीनिक बनाने की आम आदमी पार्टी के इस वादे का मुकाबला करने के लिए, कांग्रेस ने नए चिकित्सा-दावे योजना के साथ गोवा के निवासियों के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा की पेशकश करने का वादा किया है। यह चिकित्सा योजना सूचीबद्ध निजी अस्पतालों और सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में इलाज की अनुमति देती है।

 

हालांकि, अनुपात के अनुसार किसी भी अन्य राज्य की तुलना में गोवा में अधिक सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं। साथ ही यहां डॉक्टरों की भी कोई कमी नहीं है लेकिन ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यहां पांच वर्ष से आयु का हरेक पांचवा बच्चा स्टंड यानी उम्र की तुलना में कम कद का है। बढ़ते मोटापे, विशेष रूप से जीवन शैली की बीमारियों के साथ पोषाहार मुददे भी गंभीर बन रहे हैं।

कांग्रेस ने डायलिसिस, फिजियोथैरेपी, तेजी से निदान के लिए “स्टेट ऑफ आर्ट” सेवाओं का वादा किया है। साथ ही हर तालुका स्तर के अस्पतालों पर पैथोलॉजी लैब और सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर फार्मेसियों बनाने का वादा भी किया गया है।

 

विशेष जरूरतों, जैसे कि आत्मकेंद्रित,  एसपर्जेर, डाउन सिंड्रोम आदि जैसे लोगों, अलग विकलांग व्यक्तियों और

वरिष्ठ नागरिकों के लिए समर्थन सेवाओं, उपचार और चिकित्सा का वादा किया गया है।

 

भाजपा ने सरकारी कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय बीमा कार्यक्रम का विस्तार और सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का वादा किया है।

 

महिलाओं के लिए वादे

 

आम आदमी पार्टी के घोषणापत्र में पांच महिला पुलिस स्टेशन, सभी अस्पतालों में केवल विंग, और महिलाओं के खिलाफ अपराध से निपटने के लिए फास्ट ट्रैक अदालत बनाने का वादा किया गया है। साथ ही एकल या विवाहित महिलाओं, विधवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए भत्ता दोगुना करने का वादा भी किया गया है।

 

इन भत्तों में वृद्धि करने की पेशकश के अलावा, कांग्रेस के घोषणापत्र में स्व-सहायता समूहों के लिए 50,000 रुपये की वित्तीय सहायता का उल्लेख किया गया है।

 

भाजपा ने मुद्रास्फीति के लिए महिलाओं और बच्चों के उद्देश्य से बनाए गए कार्यक्रम के लिए यानी लाभार्थियों के लिए अधिक पैसे की पेशकश रखी है।

 

कांग्रेस ने सभी कल्याणकारी योजनाओं को थोक मूल्य सूचकांक या जीवन सूचकांक की लागत से जोड़ने का वादा किया है।

 

अंग्रेजी, कोंकणी या मराठी: भाषा का पेचीदा मुद्दा

 

पार्टी के घोषणापत्रों में भाषा के पेचीदा मुद्दे की चर्चा की गई है और राज्य के स्कूलों में शिक्षा के माध्यम पर पार्टियों ने अपना पक्ष रखा है।

 

कांग्रेस ने कानून को बदल कर माता-पिता के निर्णय पर छोड़ने की बात कर विवाद को हल करने की बात की है। साथ ही क्षेत्रीय भाषा, कोंकणी, का चयन करने वालों के लिए प्रोत्साहन की पेशकश भी की है।

 

आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को हल करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन करने का वादा किया है।

 

इस संबंध में भाजपा के घोषणापत्र में कुछ भी नहीं कहा गया है। भाजपा समर्थित पहली मरठी हिंदू संगठन, महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के एक गुट ने जनवरी 2017 में सत्तारूढ़ गठबंधन छोड़ दिया है। गठबंधन छोड़ने का कारण अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के लिए सरकारी धन को वापस लेने की उनकी मांग को नजरअंदाज करना था।

 

(सालवे विश्लेषक हैं और सलदनहा सहायक संपादक हैं। दोनों इंडियास्पेंड के साथ जुड़ी हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 04 फरवरी 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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