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# मेघालय चुनाव 2018: उग्रवाद और कमजोर बुनियादी ढांचे विकास में गिरावट की वजह

एलिसन सलदानहा और एंजेल मोहन,

 

मुंबई: उप-पूर्वी हिमालय क्षेत्र में एक खूबसूरत पहाड़ी राज्य मेघालय, अच्छे स्वास्थ्य परिणामों के साथ भारत के समृद्ध राज्यों की तरह है। हालांकि, उग्रवाद और गरीब बुनियादी ढांचे ने अन्य विकास संकेतकों पर प्रगति को बाधित किया है। नौ अन्य राज्यों और राष्ट्रीय औसत की तुलना में 20 विकास संकेतकों पर राज्य के प्रदर्शन पर इंडियास्पेंड के विश्लेषण से यह पता चलता है।

 

यह दुर्लभ मातृवंशीय राज्य ( जहां परिवार का वंश मां के नाम पर चलता है, पिता के नाम पर नहीं) लिंग सूचकांकों पर भी फिसल रहा है, जो एक व्यापक परिवर्तन को दर्शाता है।

 

मेघालय में 27 फरवरी, 2018 को चुनाव हुए हैं। वर्तमान कांग्रेस पार्टी के द्वारा अपनी स्थिति को बरकरार रखने की कोशिश थी और उधर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आदिवासी-प्रभुत्व, ईसाई-बहुमत (74.5 फीसदी) वाले राज्य में जीतने की कोशिश करती दिखाई दी। अगर ऐसा हुआ तो 38-वर्षीय इतिहास में पहली बार ऐसा होगा।

 

वर्ष 1972 में राज्य के अस्तित्व में आने के बाद से, 1976 से मेघालय में ज्यादातर कांग्रेस नेतृत्व वाली गठबंधन सरकारों द्वारा शासन किया गया है, जैसा कि ‘द एकोनोमिक एंड पॉलिटिकल वीकली’ ने 10 फरवरी, 2018 की रिपोर्ट में बताया है।

 

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पांच साल में मेघालय को एक आदर्श राज्य बनाने का वादा किया है। उन्होंने जीत के बाद खनन पर राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल के प्रतिबंध को उठाने और रोजगार पैदा करने का वादा किया है।

 

10 वर्षों से 2015-16 तक के सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य संकेतक पर मेघालय के प्रदर्शन पर इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि :

 

  • राज्य पहले ही केरल और गोवा जैसे सु-विकसित समकक्षों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। इन संकेतकों में से आधे से अधिक (12) में यह 2005-06 (एनएफएचएस 3) और 2015-16 (एनएफएचएस -4) के लिए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण सहित विभिन्न सरकारी आंकड़ों का इस्तेमाल पर इंडियास्पेंड द्वारा 10 राज्यों पर किए गए विश्लेषण में से टॉप पांच स्थान पर है।
  • यहां प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य व्यय (2,366 रुपये) 10 राज्यों में दूसरा सबसे ज्यादा है और केवल गोवा (2,927 रुपये) से कम है, जैसा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल (एनएचपी) 2017 को दर्शाता है।
  • 2015-16 की श्रम मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, यहां बेरोजगारी दर (4.8 फीसदी) राष्ट्रीय औसत से कम है। तमिलनाडु (4.2 फीसदी) से अधिक है, लेकिन अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों की तुलना में बहुत कम है।
  • 2006 से 2016 तक, महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर में तीन गुना वृद्धि हो कर प्रति 100,000 आबादी पर 26.7 हुई है।

 

विश्लेषण के लिए हमने उन राज्यों को चुना है, जो विकास में आगे हैं और केरल, गोवा, गुजरात और कर्नाटक जैसे प्रति व्यक्ति आय है ।हमने मध्य प्रदेश (मध्य प्रदेश), राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे कम आय वाले पिछड़े राज्य के साथ ही साथ असम और त्रिपुरा, मेघालय के पड़ोसी उत्तर-पूर्व क्षेत्र के राज्यों को भी लिया है।

 

इनमें से चार राज्य ( मध्य प्रदेश, राजस्थान, गोवा और गुजरात ) भाजपा शासन के तहत हैं। केरल और त्रिपुरा पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का शासन है, जबकि मेघालय की तरह कर्नाटक पर कांग्रेस का शासन है। हालांकि, उत्तर प्रदेश और असम में आज भाजपा की सरकारें हैं, उन पर 2016 में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का शासन था जो  हमारे विश्लेषण के लिए कट ऑफ वर्ष है।

 

मेघालय और इसकी चुनौतियां

 

दक्षिण और पश्चिम में बंग्लादेश से और पूर्व और उत्तर में असम से घिरे मेघालय की आबादी करीब दो मिलियन है जो लखनऊ के आबादी के बराबर है।

 

राज्य में तीन प्रमुख जनजाति हैं, खासी, जयंतिया और गारो, जिनमें से अधिकांश ईसाई हैं। ये आबादी का 86.15 फीसदी हैं, जैसा कि 2017 मेघालय सांख्यिकीय पुस्तिका से पता चलता है। यहां धार्मिक अल्पसंख्यकों में हिंदू (11.5 फीसदी) और मुसलमान (4.4 फीसदी) शामिल हैं।

 

एक समय में शांति और लोकतंत्र के ‘आदर्श’ मॉडल माने जाने वाला मेघालय ने 1980 के दशक के बाद से और विशेषकर 2009 के बाद से उग्र आतंकवाद देखा है, जैसा कि दिल्ली स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विश्लेषण संस्थान द्वारा इस 2016 के नीति मसौदे  से पता चलता है। असम में तीन प्रमुख जनजातियों में से प्रत्येक के लिए अलग-अलग राज्यों, असम के साथ सीमा विवाद, अवैध खनन और असम और बांग्लादेश से हथियारों के आयात की मांग के कारण अशांति का सामना करना पड़ा है, जिससे राज्य की प्रगति में बाधा हुई है।

 

 दक्षिण एशिया आतंकवादी पोर्टल डेटाबेस के अनुसार, 2007 से फरवरी 18, तक मेघालय में आतंकवादी संघर्ष में 131 नागरिक मारे गए हैं। 2018 के पहले दो महीनों में, तीन नागरिक मारे गए थे।

 

मेघालय में 64,638 रुपये प्रति व्यक्ति आय है, जो भारत के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उड़ीसा और झारखंड जैसे कम-विकसित राज्यों के साथ- प्रदर्शित यह 25वें स्थान पर है। मुख्य रूप से कृषि अर्थव्यवस्था है। 80 फीसदी आबादी आजीविका के लिए खेत पर निर्भर है।पहाड़ी इलाके कृषि क्षेत्र को 10 फीसदी क्षेत्र तक सीमित करते हैं, जबकि कृषि आधारित उद्योगों की क्षमता अप्रयुक्त रहती है, जैसा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा 2016 की इस रिपोर्ट में बताया गया है। राज्य के एक तिहाई से अधिक इलाका (34 फीसदी) सड़क से जुड़ा हो, लेकिन असमान लैंडस्केप और विशाल वन भी पहुंच में बाधा डालते हैं, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है।

 

स्वास्थ्य परिणाम

 

प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 30 मौतों की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) के साथ, मेघालय हमारे द्वारा किए गए 10 राज्यों के विश्लेषण में टॉप पांच राज्यों में है। यह गुजरात से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और यह अकांग्रेस-शासित प्रतिभागी धनी राज्य कर्नाटक (28) के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। 2005-06 में, हमारे 10 राज्यों के आईएमआर के विश्लेषण में मेघालय चौथे स्थान पर है लेकिन त्रिपुरा ने इस समय में 24 की सुधार दर दिखाया है और अब कर्नाटक और मेघालय को एक स्थान नीचे करते हुए तीसरे स्थान पर है।

 

पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर के संदर्भ में, मेघालय ने दशकों से बेहतर सुधार (30 अंक) में इन 10 राज्यों में टॉप पांच में स्थान हासिल किया है। यह राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहतर है, केवल कर्नाटक, गोवा, केरल और पड़ोसी त्रिपुरा के पीछे है। इसके विपरीत गुजरात में, प्रति व्यक्ति आय में चौथे स्थान के बावजूद, पांच साल से कम उम्र के बच्चे के लिए प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 43 मौतों की मृत्यु दर के साथ बद्तर प्रदर्शन रहा है।

 

10 राज्यों में शिशु मृत्यु दर -2015-16

Source: National Family Health Survey, 2015-16

 

एक समय था जब पूरे देश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में वेस्टिंग में वृद्धि हुई है, जैसा कि मार्च 2017 की रिपोर्ट में इंडियास्पेंड ने बताया है। 2005-06 से 2015-16 तक 10 राज्यों के विश्लेषण में मेघालय का सुधार का प्रदर्शन बहुत अच्छा है।

 

10 वर्षों से 2015-16 में, यहां वेस्टिंग दर 30.7 फीसदी से घटकर 15.3 फीसदी हुआ है – विश्लेषण किए गए 10 राज्यों में सबसे कम आंकड़े और 21 फीसदी के राष्ट्रीय औसत से बहुत नीचे है।

 

इन संकेतकों पर इसके प्रदर्शन का मतलब पूर्व प्रसवपूर्व और प्रसवपूर्व देखभाल है। मेघालय की लगभग 24 फीसदी माताओं को 2015-16 में पूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल प्राप्त हुई, जो 2005-06 में 4.2 फीसदी से ऊपर और 21 फीसदी के राष्ट्रीय औसत से ऊपर है।

 

चुनौतियां कैसे प्रभावित करती हैं परिणाम?

 

कम पहुंच और खराब बुनियादी ढांचे से राज्य की संस्थागत स्वास्थ्य देखभाल वितरण सेवा प्रभावित होती है। मेघालय संस्थागत जन्मों के निम्नतम अनुपात की रिपोर्ट करता है। 2015-16 में, यहां  52 फीसदी से कम जन्म अस्पतालों में हुए। यह 79 फीसदी के राष्ट्रीय औसत से नीचे है और हमने जिन 10 राज्यों का विश्लेषण किया उनमें से सबसे कम है।

 

2015-16 में, मेघालय की आधी गर्भवती महिलाओं तक गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार ( विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुसार न्यूनतम आवश्यकताएं ) हेल्थकेयर कार्यकर्ता ने दौरा किया था, जो राष्ट्रीय औसत और त्रिपुरा, गुजरात, कर्नाटक, गोवा और केरल से नीचे है।

 

हालांकि, 10 राज्यों में, मेघालय ने बच्चों के पूर्ण प्रतिरक्षण में उच्चतम सुधार ( 2015-16 में 28.6 प्रतिशत अंक से 61.5 फीसदी तक ) की सूचना दी है, लेकिन राज्य में प्रतिरक्षण कवरेज अभी भी 62 फीसदी के राष्ट्रीय औसत से नीचे है।

 

10 राज्यों में पूर्व और प्रसवपूर्व देखभाल, टीकाकरण, (2015-16)

Source: National Family Health Survey, 2015-16; *Full immunization: BCG, measles, and three doses each of polio and DPT vaccines

 

हमारे द्वारा किए गए 10 राज्यों के विश्लेषण में, मेघालय ने पीने के पानी के बेहतर स्रोतों तक घरेलू पहुंच को बढ़ाने में कम प्रगति की सूचना दी है। राज्य में एक तिहाई परिवार (32.1 फीसदी) के पास अभी तक पीने के पानी के बेहतर स्रोतों तक पहुंच नहीं है। यह आंकड़े राष्ट्रीय औसत से 21 प्रतिशत अंक नीचे, और असम (16.2 फीसदी), मध्य प्रदेश (15.3 फीसदी) और राजस्थान (14.5 फीसदी) जैसे गरीब राज्यों से भी बदतर हैं।

 

स्वच्छ पीने के पानी तक पहुंच न हो तो बच्चों का स्वास्थ्य को प्रभावित होता है। 2015-16 में, एनएफएचएस सर्वेक्षण से दो हफ्ते पहले 10.6 फीसदी बच्चों को दस्त का सामना करना पड़ा था। 2005-06 में यह आंकड़े 5.7 फीसदी थी।

 

मेघालय में खुले में शौच करने की दर करीब 7.6 फीसदी है, जो कि विश्लेषण किए गए अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। हालांकि राज्य के 40 फीसदी के पास अभी भी बेहतर स्वच्छता तक पहुंच नहीं है।

 

बेहतर स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच की कमी बच्चों में स्टंटिंग (उम्र के लिए कम ऊंचाई) और एनीमिया को कम करने की प्रगति में बाधा उत्पन्न कर सकती है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने अप्रैल 2017 और सितंबर 2016 की रिपोर्ट में बताया है।

 

पांच साल से कम उम्र के लगभग 44 फीसदी मेघालय के बच्चों स्टंड ( आयु के अनुसार कम ऊंचाई ) हैं। हालांकि एक दशक पहले की तुलना में 11.3 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है, जब राज्य ने 55.1 फीसदी की स्टंटिंग दर की सूचना दी थी। इस सूचक पर इसका प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत (38.4 फीसदी) से भी ज्यादा खराब है, और हमारे 10 राज्यों की तुलना में केवल उत्तर प्रदेश (46.3 फीसदी) की तुलना में बेहतर है।

 

हालांकि भारत प्रजनन उम्र (15-49 वर्ष) की महिलाओं में एनीमिया की घटनाओं को कम करने में सफल रहा है, मेघालय में, इन आंकड़ों में 5.4 फीसदी की वृद्धि हुई है। एक दशक पहले, हमारे द्वारा विश्लेषण किए गए 10 राज्यों में, मेघालय में, केरल या गोवा के बाद एनिमिक महिलाओं का कम प्रतिशत था। 2016 तक, इसका स्थान उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे कम विकसित राज्यों के साथ था।

 

अन्य विकास संकेतक -2015-16

Source: National Family Health Survey, 2015-16

 

राज्य में महिलाओं की स्थिति बढ़ती चिंता का विषय

 

महिलाओं में एनीमिया को ठीक करने में मेघालय की खराब स्थिति का प्रदर्शन, राज्य में महिलाओं की स्थिति में गिरावट की प्रवृत्ति का संकेत है।

 

प्रति 1,000 पुरुषों पर 970 महिलाओं की उच्च बाल लिंग अनुपात के लिए मेघालय देश में दूसरे स्थान पर है। यह विश्लेषण किए गए सभी राज्यों की तुलना में बेहतर और 942 की राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि, यह वास्तव में 2001 के बाद से तीन अंकों में गिरावट आई है।

 

प्रचलित विचारों के विपरीत कि भारत के बाकी हिस्सों में उनके समकक्षों की अपेक्षा महिलाएं बेहतर स्थिति का आनंद लेती हैं, इस संघर्ष क्षेत्र में महिलाएं वास्तव में पीछे हैं। एक महिला अधिकार संगठन, कहता है कि परंपरागत रूप मातृसत्ता वाले राज्य मेघालय में बलात्कार, , बलात्कार की कोशिश और घरेलू हिंसा बढ़ रही है।

 

पिछले 10 वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर तीन गुना बढ़ गई है, 2006 में प्रति 100,000 जनसंख्या पर 7.1 से 2016 में, प्रति 100,000 जनसंख्या पर 26.7, जैसा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा दिए गए आंकड़ों पर इंडियास्पेंड के विश्लेषण से पता चलता है। राज्य में बलात्कार की चौथी उच्चतम दर (प्रति 100,000 पर 13.8) दर्ज की है। इस संबंध में मेघालय केवल दिल्ली (22.6), सिक्किम (30.3) और अरुणाचल प्रदेश (14.7) से पीछे है।

 

यह अच्छी तरह से प्रलेखित है कि संघर्ष क्षेत्र में, परिवारों और समुदायों के बिखरने, विस्थापन और टूटने से महिलाओं को जनक्षेत्र, राजनीतिक बहिष्कार और पुरुष हिंसा से उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, जैसा कि हेडलबर्ग विश्वविद्यालय के ‘साऊथ एशिया इंस्ट्यूट’ के इस अध्ययन से पता चलता है।

 

2005-06 में, 12.8 फीसदी मेघालय की महिलाएं जिन्होंने शादी की थीं, उन्होंने विवाह संबंधी हिंसा की शिकायत की है। 10 राज्यों के विश्लेषण में सबसे कम अनुपात देखा गया है। 10 वर्षों के दौरान, यह संख्या  28.7 फीसदी तक दोगुनी हुई है और मेघालय को 28.8 फीसदी की राष्ट्रीय औसत के बराबर पहुंचा है। अब यह 10 राज्यों में तीसरी सबसे बद्तर है।

 

राज्य में महिला साक्षरता 82.8 फीसदी पर है और केरल और गोवा जैसे सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों के साथ तुलना की जा रही है, लेकिन राज्य में पुरुषों की साक्षरता दर अभी भी कम है। इसके अलावा, औसत भारतीय महिलाओं (35.7 फीसदी) की तुलना में मेघालय में कम महिलाओं (33.6 फीसदी) ने 10 वर्ष से ज्यादा की शिक्षा प्राप्त की है।

 

महिलाओं के स्थिति के संकेतक-2015-16

Source: National Family Health Survey, 2015-16

 

18 वर्ष से कम आयु से पहले विवाह की दर मेघालय में कम हैं। मेघालय के लिए यह आंकड़े 16.9 फीसदी हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 26.8 फीसदी है। मेघालय का स्थान गोवा (9.8 फीसदी) और केरल (7.6 फीसदी) से नीचे है। 10 वर्षों में घरेलू फैसलों में महिलाओं की संख्या का प्रतिशत बढ़ा है और 2015-16 में राज्य को चौथे स्थान पर ले जाता है। ये आंकड़े 2005-06 के दूसरे स्थान से नीचे है, क्योंकि पड़ोसी त्रिपुरा 13.8 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ तीसरे स्थान पर है, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है।

 

(सलदानहा सहायक संपादक हैं और मोहन इंटर्न हैं। दोनों इंडियास्पेंड के साथ जुडी हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 26 फरवरी 2018 में indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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