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राजस्थान का ऐतिहासिक शहरी भूमि विधेयक कर सकता है कोर्ट का बोझ हलका

श्रेया देब,

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यदि लाखों लोगों के लिए स्पष्ट संपत्ति दस्तावेज़ उपलब्ध कराने का राजस्थान का नया ऐतिहासिक कानून सफल होता है तो यह अन्य कई राज्यों के लिए एक मॉडल हो सकता है, संपत्ति के बाजार को बदल सकता है, और यदि ठीक प्रकार लागू होता है तो देश की अदालत मुक्त हो सकते हैं।

 

एक्सेस टू जस्टिस सर्वे, देश भर से 9,000 से अधिक वादियों का एक अध्ययन, जो कि दक्ष, एक बेंगलुरु स्थित डेटा संचालित कानूनी संस्था, द्वारा अप्रैल 2016 में जारी किया था, उसके अनुसार नागरिक मामलों में, 66 फीसदी हिस्सेदारी भूमि और संपत्ति से संबंधित मामलों की है।

 

किस तरह के मामले होते हैं वादियां मामले

Source: Daksh Access to Justice Survey 2016

 

कम से कम 74 फीसदी राजस्थान उत्तरदाताओं ने जमीन और संपत्ति से संबंधित मामलों की बात कही है, जोकि 66 फीसदी के राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

 

राज्य अनुसार ज़मीन और संपत्ति से संबंधित मामले

Source: Daksh Access to Justice Survey 2016

 

राजस्थान शहरी भूमि (सर्टिफिकेशन ऑफ टाइटिल्स) विधेयक, 2016 के पारित होने के साथ राजस्थान लैंड टाइटिल बिल पेश और पारित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस विधेयक का उद्देश्य मामूली शुल्क लेकर स्वामित्व का प्रमाणपत्र जारी कर शहरी इलाकों में गैर– कृषि भूमि की खरीद और बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी के मामलों को कम करना है। जैसा कि फिलीपींस और कोलंबिया के उद्हारण से हम बाद में विस्तार से बताएंगे कि समस्या के आकार को देखते हुए नई तकनीक का उपयोग करने के लिए बिना प्रशिक्षित अधिकारियों और और निजी क्षेत्र को शामिल किए बिना ऐतिहासिक कानून पर्याप्त नहीं हो सकता है।

 

राजस्थान अपने नए कानून का इस्तेमाल वास्तव में संपत्ति के अधिकार के मुद्दे को बदलने के लिए कर सकता है तो यह प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर पर दोहराया जा सकता है।

 

जब भी किसी भारतीय राज्य में खरीददार आज एक संपत्ति बिक्री विलेख पंजीकृत करता है, राजस्व विभाग लेनदेन रिकॉर्ड करता है लेकिन इसकी प्रामाणिकता की गारंटी नहीं देता है या यह प्रमाणित नहीं करता कि विक्रेता वास्तव में संपत्ति का मालिक है। खरीददार अक्सर ठगे जाते हैं, संपत्ति खरीदने के बाद पता चलता है कि वे बेनामी है और लेनदेन असली मालिक द्वारा विवादित है।

 

राजस्थान सरकार संपत्ति के लेन-देन के आसपास अनिश्चितता को समाप्त करने और टाइटल के उत्पादन जो संपत्ति का असली मालिकों को प्रमाणित करती है, की उम्मीद करती है।

 

ब्रिटिश राज के जमाने के हैं लैंड रेकॉर्ड, नवीनीकरण हुआ लेकिन बिना जांच पड़ताल

 

कई राज्यों में आखिरी बार जमीन के सर्वे 1947 से पहले ब्रिटिश राज में ही हुए थे।

 

आधुनिकीकरण का काफी हद तक मतलब है कागजी रिकॉर्ड का अब कंप्यूटर में जमा होना है, स्वामित्व और अन्य डेटा के सत्यापन लगभग न के बाराबर होता है। सरकार केवल परिमाण और लाखों  की संपत्ति के प्रतिचित्रण द्वारा ही निवारण करती है बल्कि संपत्ति बाजार के कमज़ोर और अशांति का डर भी शामिल है।

 

स्पष्ट संपत्ति टाइटल, जिसकी मालिकाना हक की गारंटी सरकार द्वारा दी जाती है, भारत की भूमि बाजार बदल सकते हैं। व्यक्ति और कंपनी अधिक विश्वास के साथ भूमि खरीद और बेच सकते हैं और ऋण के प्रवाह को प्रोत्साहित, विरासत में सुधार और मकानों का विस्तार कर सकते हैं।

 

लेकिन हमेशा की तरह मुख्य बाधा कार्यान्वयन का विवरण है। राजस्थान सरकार ने अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से सीख सकती है जिसने इसी तरह से चुनौतियों का सामना किया है।

 

फिलीपींस से क्या सीख सकते हैं राजस्थान और भारत

 

फिलीपींस के संपत्ति टाइटल के प्रशासन का सरलीकृत करने से पहले प्रक्रिया कठिन और महंगी थी। लोग वकीलों को काम पर रखते थे, भूकर सर्वेक्षण (नक्शा और संपत्ति सीमाओं की स्थापना के लिए सर्वेक्षण) के लिए भुगतान करते थे और फिर टाइटल प्राप्त करने के लिए नौकरशाहियों के चक्कर काटते थे। अपनी संपत्ति के टाइटल के लिए परिवार को सालों लग जाते थे।

 

2010 में फिलीपींस सरकार ने आवासीय फ्री पेटेंट अधिनियम पारित किया था और एक-दो सालों में 102,000 नए टाइटल जारी किए गए थे जबकि 2010 से पहले विभिन्न सरकारी विभागों और न्यायिक प्रणाली द्वारा औसतन 5,000 आवेदनों पर कार्रवाई की जाती थी।

 

इस गति से, यहां तक ​​कि जगह में एक समर्थकारी विधान के साथ, बिना टाइचल वाले आठ मिलियन फिलिपिनो आवासीय भूखंडों को रजिस्टर करने के लिए एक सदी से भी अधिक समय लगने की संभावना है।

 

गतिरोध जारी रहने के दो कारण हैं: नई प्रक्रिया के बारे में अधिक लोग नहीं जानते हैं, और सरकार के पास ऐसे अधिकारी नहीं है जो इस पैमाने पर भूकर सर्वेक्षण कर सकें।

 

इसलिए, कानून को सक्रिय करना केवल संपत्ति टाइटल सुधार की दिशा में पहला कदम है।

 

राजस्थान सरकार को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी यह लाखों शहरी भूखंडों के मानचित्र और वास्तविकता को प्रतिबिंबित करने के लिए रिकॉर्ड को अद्यतन करेगी।

 

समय और सर्वेक्षण की लागत को कम करने में प्रौद्योगिकी एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

 

फिलीपींस में एशिया फाउंडेशन, मानव रहित हवाई वाहन , या ड्रोन के इस्तेमाल पायलट के लिए, शहरी भूखंडों नक्शा करने के लिए स्थानीय सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है और उच्च संकल्प, भू- टैग छवियों (जमीन , अक्षांश और देशांतर पर जिसका स्थान मानचित्र पर पहचाना जा सकता है)  तेज और सामान्य से अधिक तेजी से बना रहा है।

 

संघर्ष से तबाह हुए कोलम्बिया से सबक

 

निजी क्षेत्र को शामिल कर सरकार पत्ति सर्वेक्षणों में तेजी ला सकती है, जैसा कि कोलम्बिया की लैटिन अमेरिकी देश कर रहा है।

 

कोलम्बिया एक दशक से लंबे आंतरिक संघर्ष से ग्रसित है, जिसने अक्सर जमीन और संपत्ति अधिकारों के उल्लंघन के लिए प्रेरित किया है।

 

1997 में, कोलंबिया सरकार भूमि शीर्षक और कडेस्टर (संपत्ति सर्वेक्षण नक्शे) की रजिस्ट्री के आधुनिकीकरण के लिए एक कार्यक्रम शुरु किया था जिसका उदेश्य चार वर्षों में 150,000 शहरी भूखंडों और 1,00,000 ग्रामीण भूखंडों को टाइटल प्रदान करना था।

 

संपत्ति शीर्षक सेवाओं की एक श्रृंखला की पेशकश के लिए यह प्रमाणित तीसरे पक्ष को निजी प्रदाताओं की अनुमति देता है।

 

उभरते प्रौद्योगिकी के घटनाक्रम के साथ, स्टार्टअप व्यापार मॉडल विकसित कर रहे हैं जो कम आय वाले परिवारों की कागजी कार्रवाई के सहायता के लिए पट्टी और भू- स्थानिक नक्शे का उत्तोलन करता है।

 

राज्य की क्षमता बढ़ाने के लिए, सर्वेक्षण और शीर्षक सेवाओं की पेशकश करने के लिए निजी क्षेत्र के उद्यमियों को अनुमति दी जानी चाहिए।

 

अनौपचारिक बस्तियों का क्या?

 

राज्य सरकार के लिए एक प्रमुख समस्या है बस्तियां, जिसमें 2011 की जनगणना के अनुसार, अनुमानित तौर पर राजस्थान में दो मिलियन लोगों का घर है। यङ बस्तियां सरकार या निजी भूमि पर अतिक्रमण हो सकता है, और वहां निवासी दशकों से रह रहे हैं।

 

2012 राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन के सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के करीब 70 फीसदी बस्तियां सार्वजनिक भूमि पर हैं; 21 फीसदी बस्तियां निजी भूमि पर हैं।

 

Source: Urban Slums in India, 2012 (NSS 69th Round)

 

इन भूमि के के शीर्षक की स्थापना के लिए कोई भी प्रयास के लिए सरकार को इन दो प्रशनों के साथ समझौता करने की आवश्कता होगी: भूमि का मालिक कौन है? उन कम-आय वाले परिवारों का क्या होगा जो दशकों से वहां रह रहे हैं?

 

(देब भारत में संपत्ति के अधिकार पर ओमिड्यार नेटवर्क से साथ जुड़ी हैं। ओमिड्यार नेटवर्क उन संगठनों में निवेश करता है जो आर्थिक अवसर पैदा करते हैं और आजीविका में सुधार करते हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 15 जुलाई 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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