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वर्ष 2017 में भारत के 4 मुख्य लक्ष्य: भरोसंमंद बिजली, इंटरनेट का विस्तार, ऱाष्ट्रीय पहचान प्रणाली और नवीकरणीय ऊर्जा

मुक्ता पाटिल,

 

बीते वर्ष 2016 में ऊर्जा, तकनीकी प्रगति और बिजली की पहुंच के संबंध में भारत की प्रगति देखने के लिए इंडियास्पेंड ने कई संकेतकों पर चर्चा की है। हमने तब से प्रगति का विश्लेषण किया है और नवीकरणीय ऊर्जा पर बढ़ते फोकस, गांवों के लिए और अधिक भरोसेमंद बिजली की आपूर्ति, आधार कार्ड के बढ़ते प्रसार- राष्ट्रीय पहचान प्रणाली- और 2017 में इंटरनेट के अधिक प्रसार और उपयोग का पूर्वानुमान किया है।

 

नीचे चार मुख्य लक्ष्य दिए गए हैं, जिसे भारत वर्ष 2017 में प्राप्त कर सकता है।

 

1. ऊर्जा क्षमता में वृद्धि और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर झुकाव

 

हमने क्या कहा था : 2016 में अक्षय ऊर्जा प्रतिष्ठानों को बढ़ावा मिलेगा, जो कोयले पर देश की निर्भरता को संतुलित करेगा। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने पिछले साल जनवरी में विस्तार से बताया है।

 

क्या हुआ: भारत ने कहा है कि वर्ष 2022 तक अक्षय ऊर्जा क्षमता को 175 गीगावॉट तक पहुंचने के उद्देश्य के साथ इस साल अक्षय ऊर्जा क्षमता में 16 गीगावॉट की वृद्दि होगी।

 

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2016 तक 3.9 गीगावाट से अधिक अक्षय उर्जा स्त्रोत में बढ़ोतरी नहीं हो पाई है।

 

विद्युत मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 30 नवंबर, 2016 तक भारत की कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता 309 गीगावॉट थी, और इसमें लगभग 15 फीसदी नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त हुआ है। सितंबर, 2015 से सितंबर 2016 के बीच, देश भर में अक्षय ऊर्जा का 8.5 गीगावॉट स्थापित किया गया है। जबकि पिछले साल की तुलना में स्थापित हवा उर्जा क्षमता में 15.2 फीसदी या 3.7 गीगावॉट की वृद्धि हुई और सौर ऊर्जा क्षमता में लगभग 4.2 गीगावाट या 96 फीसदी की वृद्धि हुई है।

 

पवन ऊर्जा क्षमता में धीमी वृद्धि के बावजूद, यह वृद्धि भारत को विश्व भर में चीन, अमरीका और जर्मनी के बाद चौथे स्थान पर रखता है।

 

अक्षय ऊर्जा: संस्थापित क्षमता

Source: Central Electricity Authority

 

भारत ने वर्ष 2016-17 में पवन ऊर्जा क्षमता में 4 गीगावॉट और सौर क्षमता में 12 गीगावॉट की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा था।   नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में ये दो सबसे बड़े स्रोत हैं।

 

वित्तीय वर्ष के आठ महीने बीतने के बाद पवन ऊर्जा क्षमता लक्ष्य का 40 फीसदी और सौर ऊर्जा लक्ष्य का केवल 17.5 फीसदी ही प्राप्त किया जा सका है। वर्ष 2017 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार और निजी कंपनियों को पवन ऊर्जा क्षमता में 2.35 गीगावॉट और सौर ऊर्जा क्षमता में 11.8 गीगावॉट की बढ़ोतरी के लिए संयत्र स्थापित करना पड़ेगा।

 

सौर ऊर्जा प्रतिष्ठान (2010-16)

Source: Ministry of New and Renewable Energy

 

भारत के पास 750 गीगावॉट की सौर ऊर्जा क्षमता है और साल में 300 दिनों के लिए सौर विकिरण उपलब्ध है। हम बता दें कि भारत की सौर क्षमता भारत के थर्मल पावर क्षमता से 3.5 गुना ज्यादा है। वर्तमान में उर्जा के तमाम स्रोतों में से थर्मल पावर की 70 फीसदी की हिस्सेदारी है। क्या है उम्मीद: वर्ष 2010 के बाद से भारत में सौर ऊर्जा प्रतिष्ठानों में लगातार वृद्धि हो रही है, केवल वर्ष 2012-13 में थोड़ी गिरावट देखी गई है।

 

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की वर्ष 2015-16 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 तक सरकार 100 गीगावाट सौर ऊर्जा प्राप्त करने की उम्मीद कर रही है जो कि 175 गीगावॉट की अक्षय ऊर्जा लक्ष्य का 57 फीसदी है।

 

भारत की अक्षय ऊर्जा प्रगति

Source: Ministry of New and Renewable Energy; *As on November 30, 2016

 

अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने अगले दो वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 के लिए एक रोड मैप बनाया है। अगले दो वर्षों में, भारत अपने उर्जा भंडार में  42.6 गीगावॉट जोड़ेगा जो कि आज की तारीख से अपनी संचयी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के बराबर है।

 

अक्षय ऊर्जा लक्ष्य, 2017-19

Source: Ministry of New and Renewable Energy; figures in MW

 

2. ग्रामीण विद्युतीकरण में वृद्धि, लेकिन बिजली की आपूर्ति संदिग्ध

 

हमने क्या कहा: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार जून 2016 तक सभी गांवों में 98.1 फीसदी तक विद्युतीकरण हुआ है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने अगस्त 2016 की इस रिपोर्ट में बताया है।

 

क्या हुआ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 15 अगस्त, 2015 को अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान यह घोषणा की है कि मई 2018 तक देश के सभी अविद्युतीकृत गांवों(लगभग18452 गांव)  तक 1,000 दिनों के भीतर बिजली बिजली पहुंचाई जाएगी।

 

किसी गांव को विद्युतीकृत मानने के लिए केवल 10 फीसदी ग्रामीण घरों का विद्युतीकरण करने की आवश्यकता है लेकिन फिर भी बिजली की आपूर्ती संदिग्ध है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 23 अगस्त 2016 को बताया है।

 

विद्युत मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी रिलीज के अनुसार, अब तक 11429 गांवो का विद्युतीकरण किया गया है।

 

बचे हुए 7023 गांवों में से 698 गांव निर्जन हैं, 3775 गांवों को ग्रिड विद्युतीकरण के लिए निर्धारित किया गया है, भौगोलिक बाधाओं के कारण 2502 गांवों को ‘ऑफ ग्रिड’ किया गया है और 48 गांवों का राज्य सरकारों द्वारा विद्युतीकरण किए जाने की उम्मीद है।

 

जुलाई 2015 में शुरु किए गए दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजेवाई) के हिस्से के रुप में सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 4.2 करोड़ ग्रामीण परिवारों (बीपीएल) को मुफ्त बिजली कनेक्शन प्रदान करने का प्रस्ताव रखा।

 

बिजली मंत्रालय की इस रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च, 2016 तक 2.32 करोड़  (50 फीसदी से अधिक) बीपीएल परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन प्रदान किया गया है।

 

क्या है उम्मीद:  ग्रिड से जुड़े गांवों को संभवतः वर्ष 2018 के अंत तक विद्युतीकृत किया जा सकता है। हालांकि, बिहार, असम और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों के करीब 60 फीसदी ग्रामीण परिवारों तक बिजली की पहुंच न होने की रिपोर्ट के साथ यह देखने वाली बात होती कि वास्तव में कितने परिवारों तक बिजली की पहुंच होती है।

 

3. उत्तर-पूर्व के राज्यों में आधार पर सरकार का ध्यान

 

क्या कहा हमने: 2016 में, आधार नामांकन के 100 करोड़ पार होने की संभावना थी, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 2 जनवरी 2016 की रिपोर्ट में बताया है।

 

क्या हुआ: अप्रैल में आधार नामांकन 100 करोड़ के पार हो गया है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने अप्रैल 21, 2016 की रिपोर्ट में बताया है।

 

अप्रैल 2016 में आधार नामांकन 100 करोड़ के पार

Source: Unique Identification Authority of India

 

18 वर्ष की आयु से अधिक 73.4 फीसदी और पांच और 18 की उम्र के बीच 22.75 फीसदी आधार कार्ड धारकों के साथ दिसंबर 2016 तक नामांकन की संख्या 109.5 करोड़ पहुंच गई है।

 

क्या है उम्मीद: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के आंकड़ों के अनुसार, 15 संबर 2016 तक बिहार, मणिपुर, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, मेघालय और असम में 75 फीसदी से कम लोगों के पास आधार कार्ड था। 2017 में यह क्षेत्रों, विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्य कार्यक्रम का फोकस हो सकते हैं। हम बता दें कि मेघालय में 9 फीसदी और असम में 6 फीसदी से ज्यादा लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है।

 

4. भारत का इंटरनेट उपयोगकर्ता समुदाय में तेजी से वृद्दि, सिर्ऱ एक राष्ट्र आगे

 

क्या कहा हमने: जून 2016 तक 46.2 करोड़ भारतीय ऑनलाइन होंगे, जैसा कि इंडियास्पेंड ने जनवरी 2016 की रिपोर्ट में बताया है।

 

क्या हुआ: भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2016 तक, भारत में कुल 36.748 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता थे।

 

भारत में इंटरनेट उपभोक्ता

Source: Telecom Regulatory Authority of India

 

संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2016 के अंत तक या वर्ष 2017 में कि इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 50 करोड़ के पार हो जाएगी।

 

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में प्रति 100 की आबादी पर भारतीय इंटरनेट उपयोगकर्ता की संख्या 26 थी, जबकि वैश्विक औसत 43.9 थी।

 

क्या है उम्मीद: व्यापार संघ, नेश्नल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनी (नैसकॉम) के अनुसार, अगले पांच साल में अपने आधार में लगभग 40 करोड़ उपयोगकर्ताओं को जोड़ने के साथ वैश्विक औसत की तुलना में भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में तीन गुना ज्यादा वृद्धि होगी।

 

नैसकॉम के अध्यक्ष आर चंद्रशेखर कहते हैं, “भारत की इंटरनेट की खपत पहले ही अमरीका से आगे हो गया है और विश्व में दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2020 तक देश के ग्रामीण इलाकों पर इंटरनेट पहुंचने की उम्मीद है।”

 

नैसकॉम रिपोर्ट कहती है कि टियर 1 शहरों में सेवाओं की संतृप्ति के साथ कम से कम 75-80 फीसदी नए उपयोगकर्ता बेहतर जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों से आएंगे।

 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, अधिक ग्रामीण उपयोगकर्ताओं के ऑनलाइन आने के साथ क्षेत्रीय भाषा सेवाओं में वृद्धि होगी, क्योंकि नए उपयोगकर्ताओं में से 75 फीसदी स्थानीय भाषा में बात करेंगे।

 

(पाटिल विश्लेषक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़ी हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 02 जनवरी 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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