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शिशु मृत्यु दर घटाने में उत्तर प्रदेश आखिरी स्थान पर खिसका

इंडियास्पेंड टीम,

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भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश  शिशु और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर कम करने के मामले में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से पिछड़ गया है। जारी हुए नए स्वास्थ्य आंकड़ों से ये पता चलता है।

 

हालांकि, उत्तर प्रदेश में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में सुधार हुआ है और ये दस साल पहले के प्रति 1000 पर 73 मौतों से घटकर 2016 में 64 पर है। शिशु मृत्यु दर में अन्य राज्यों और देशों का प्रदर्शन सुधरा है। उत्तर प्रदेश का आईएमआर अब पश्चिमी अफ्रीका के हिंसाग्रस्त देश मॉरिटानिया (65) के बराबर है, साथ ही दूसरे गरीब और अराजक अफ्रीकी देश बुर्किना फासो (61) से खराब है और अफगानिस्तान (66) के मुकाबले थोड़ा बेहतर है।

 

शिशु मृत्यु दर: केरल= अमेरिका, उत्तर प्रदेश= मॉरिटानिया

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Source: National Family Health Survey, 2015-16, World Bank

 

उत्तर प्रदेश में नई सरकार के शपथ लेने से पहले, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 (एनएफएचएस-4) द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य अब पांच साल से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर के मामले में भी बुरी स्थिति में है। इस आयु वर्ग में यहां शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 में 78 है, जो कि उस अफ्रीकी देश मोजम्बिक (79) के बराबर है, जिसका प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद भारत का आधा है। पिछले 10 साल की तुलना में देखें तो पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का ये आंकड़ा प्रति 1000 में 96 से 18 कम हुआ है।

 

पांच साल से कम आयु के बच्चों में मृत्यु दर: केरल= अमेरिका, उत्तर प्रदेश = मोजम्बिक

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Source: National Family Health Survey, 2015-16, World Bank

 

जारी इन नए आंकड़ों से भारत का आईएमआर (41) और पांच साल से कम आयु के बच्चों में मृत्यु दर (50) बढ़ सकती है, जिसमें पिछले 10 सालों में सुधार हुआ है। इस बारे में इंडियास्पेंड में मार्च 2017 की एक रिपोर्ट में बताया गया था।

 

इंडियास्पेंड की फरवरी 2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य जरूर है, लेकिन यह राज्य प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर 452 रुपये खर्च करता है, जो भारत के औसत से 70% कम है।

 

राज्य में दो में से एक बच्चे का पूरी तरह से टीकाकरण नहीं होता है और राज्य मातृ मृत्यु दर (जन्म देने वाली प्रति एक लाख माओं में 258) के मामले में भारत में दूसरे स्थान पर है।

 

एक दशक पहले जब पिछला एनएफएचएस सर्वेक्षण हुआ था, तब छत्तीसगढ़ में शिशु मृत्यु दर प्रति हजार 71 थी, जो 2015-16 में घटकर 54 पर आ गई है। मध्य प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर प्रति हजार 93 थी, जो कि वर्ष 2015-16 में घटकर 65 पर आ गई है।

 

भारत में सभी राज्यों का प्रदर्शन बुरा नहीं है। शिशु मृत्यु दर सुधार के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने वाले सर्वश्रेष्ठ पांच राज्य केरल, गोवा, तमिलनाडु, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश हैं, जिनका आईएमआर अमेरिका, ईरान, अल्जीरिया, फिलीपींस और इंडोनेशिया के बराबर है।

 

शिशु मृत्यु दर 2015-16

Source: National Family Health Survey, 2015-16

 

पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर के मामले में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले पांच राज्य केरल, गोवा, मणिपुर, तमिलनाडु और महाराष्ट्र हैं, जहां पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर अमरीका, इराक, इंडोनेशिया, अजरबैजान और ब्राजील के बराबर है।

 

पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर, 2015-16

Source: National Family Health Survey, 2015-16

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 16 मार्च 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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