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साइबर अपराध में बेंगलुरु देश में सबसे ऊपर,निशाने पर महिलाएं ज्यादा

एलिजाबेथ मणि,

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बेंगलुरु: साइबर अपराध को लेकर हाल ही में एक कन्नड़ फिल्म अभिनेत्री खबरों में रही । अभिनेत्री ने पुलिस में अज्ञात लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर उनकी ‘नग्न’ तस्वीरे डालने की शिकायत दर्ज कराई थी। कुछ महीने पहले, बेंगलूर के पास के एक निर्वाचन क्षेत्र के एक विधायक ने हैकर्स के खिलाफ पुलिस से संपर्क किया था। हैकर्स ने उनके बैंक खाते से 190,000 रुपए निकाल लिए थे।

 

इन मामलों की खबर लोगों को इसलिए मिल पाई कि पीड़ित लोग उंचे कद वाले थे। अन्यथा, भारत की आईटी राजधानी कहे जाने वाले इस शहर में साइबर अपराध आम बात हो गई है।

 

आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2015 में साइबर अपराध के1,001 मामले दर्ज किए गए । यानी प्रति दिन तीन मामलों का औसत रहा है। ज्यादातर शिकायतें प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी की दर्ज की गई । इसके अलावा पहचान चोरी की शिकायतें ज्यादा दर्ज हुईं।

 

सूचना के अधिकार के तहत मिले वर्ष 2015 के पुलिस आंकड़ों पर 101reporters.com और इंडियास्पेंड द्वारा हाल ही में एक विश्लेषण किया गया। विश्लेषण पर आधारित तीन लेखों की श्रृंखला का यह अंतिम लेख है। इस लेख में  हम बेंगलुरु महानगर में साइबर अपराध का विश्लेषण करेंगे।

 

 

साइबर अपराध में बेंगलुरु देश में सबसे ऊपर

 

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) ने बेंगलुरू में 1,041 में दर्ज साइबर अपराधों की संख्या का अनुमान लगाया है। हम बता दें कि ये आंकड़े बेंगलुरु पुलिस के आंकड़ों से ज्यादा हैं और इन आंकड़ों के साथ आईटी शहर साइबर अपराध के मामले मे सबसे ऊपर है। 354 मामलों के साथ हैदराबाद दूसरे और 111 के आंकड़ों के साथ कोलकाता तीसरे स्थान पर है। जबकि दिल्ली 90, मुंबई 26 और चेन्नई 29 मामलों के साथ क्रमश: चौथे, पांचवें और छठे स्थान पर है। कुल मिलाकर वर्ष 2015 में पूरे देश में 11,592 साइबर अपराध दर्ज किए गए थे, इनमें से 8.9 फीसदी बेंगलुरू में दर्ज हुए हैं।

 

बेंगलुरु पुलिस कहती है कि अधिक शिकायतें दर्ज होने का अर्थ है, लोग यहां ज्यादा जागरुक हैं और पुलिस में शिकायत दर्ज करने के लिए आगे आ रहे हैं।

 

हालांकि, कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वरा ने 8 जून, 2017 को राज्य विधानसभा में स्वीकार किया था कि पिछले ढाई वर्षों में दर्ज किए गए 3,552 साइबर अपराध के मामलों में एक में भी किसी को सजा नहीं हुई है, क्योंकि जांच अधिकारी ‘समस्या की जड़ तक पहुंचने में’ नाकाम रहे। इससे पता चलता है कि साइबर अपराध को रोकने और हल करने के लिए पुलिस को और अधिक निपुण होने की जरूरत है।

 

प्रतिरूपण, पहचान की चोरी सबसे आम

 

बेंगलुरु में दर्ज की गई अधिकांश शिकायतें प्रतिरूपण के माध्यम से धोखे की है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 डी के तहत आने वाली 574 ऐसे मामले वर्ष 2015 में दायर किए गए थे। अपराध की दूसरी सबसे बड़ी संख्या पहचान चोरी की दर्ज की गई है। इसमें किसी और के नाम पर सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाना भी शामिल है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 सी के तहत इस तरह के 336 मामले दर्ज किए गए।

 

करीब आधे से ज्यादा अपराध (550 मामले) शाम के 6 बजे से लेकर सुबह के 6 बजे के बीच होने की सूचना दी गई है।  शहर के आईटी कार्यालय वाला इलाका, शारजापुर लेआउट में सबसे ज्यादा साइबर अपराध दर्ज किए गए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस इलाके में 131 मामले दर्ज किए गए हैं।

 

एचसीआर लेआउट एक अन्य इलाका है, जहां आईटी आबादी ज्यादा है। इस इलाके में 116 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए हैं। पुराने बेंगलुरु इलाके जयनगर में साइबर अपराध की 53 रिपोर्टें दर्ज हुई हैं।

 

स्टार्टअप केंद्र- कोरमंगला में साइबर अपराध के 29 मामले दर्ज हुए हैं। जबकि भीड़-भाड़ वाले सब्जी बाजार क्षेत्र कलासीपल्यम में साइबर अपराध के 5 मामले दर्ज हुए हैं। यह दर्शाता है कि साइबर अपराध होने और रिपोर्ट करने के बीच स्पष्ट सहसंबंध नहीं है। भीड़-भाड़ वाले इलाके जैसे कि के.आर. मार्केट, यशवंतपुर औद्योगिक क्षेत्र और बापूजी नगर में एक भी साइबर अपराध के मामले की सूचना नहीं है।

 

साइबर अपराध और इलाके

 

पुलिस बताती है कि जिस इलाके में शिकायत दर्ज की गई है, उसी इलाके का साइबर अपराधी भी हो,ऐसा जरूरी नहीं है।

 

रेसकोर्स रोड पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के पुलिस अधीक्षक एम. डी. शरथ ने इंडियास्पेंड से बात करते हुए बताया कि, “सिर्फ इसलिए कि एचएसआर लेआउट में मामलों की उच्च संख्या दर्ज हुई है, इसका मतलब यह नहीं है कि यह एक असुरक्षित क्षेत्र है। एचएसआर लेआउट में भले ही अपराध हुआ हो, लेकिन अपराधी किसी दूसरे स्थान पर बैठकर भी अपराध को अंजाम दे सकता है। “

 

पुलिस क्या कर रही है?

 

साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस ने जो कदम उठाए हैं, उसके बारे में शरथ बताते हैं, “साइबर अपराध पीड़ित ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हमारे पास दो साइबर अपराध पुलिस स्टेशन हैं जो 24 × 7 काम करते हैं। ”

 

हालांकि, कुछ आईटी विशेषज्ञों का मानना ​​है कि साइबर अपराध को रोकने और हल करने के लिए पुलिस पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने वाली बेंगलुरु स्थित एक गैर लाभकारी संस्था ‘आईटी फॉर चेंज’ की अनीता गुरुमूर्ति कहती हैं, “साइबर हिंसा को एक वास्तविक अपराध नहीं माना जाता है और कई पुलिसकर्मियों इस विषय के साथ अपरिचित हैं और आईटी अधिनियम से भी अवगत नहीं हैं। पुलिस अफसरों को यह समझना चाहिए कि ऑनलाइन हिंसा छोटी चीज नहीं है। उन्हें आईपीसी में संशोधन के बारे में पता होना चाहिए और आईटी अधिनियम के विशिष्ट प्रावधानों को ऐसे मामलों में लागू किया जाना चाहिए। ”

 

(मणि स्वतंत्र लेखक हैं और बेंगलुरु में रहती हैं। मणि 101reporters.com की सदस्य भी हैं। 101Reporters.com जमीनी स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों का राष्ट्रीय नेटवर्क है। 101Reporters.com के प्रमुख सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमोल ढेकेने ने रिपोर्ट के लिए मैप तैयार किया है।)

 

वर्ष 2015 में बेंगलुरु में होने वाले अपराध आंकड़ों के विश्लेषण पर तीन लेखों की श्रृंखला का यह अंतिम भाग है। पहला और दूसरा भाग आप यहां  और यहां पढ़ सकते हैं।

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 22 जून 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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