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स्टंटिंग बच्चों पर विश्व बैंक की चेतावनी – भारत को करनी चाहिए चिंता

प्राची सालवे,

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स्टंटिंग के पीछे मेरे ज़ोर देने का कारण यह है कि हमने विकासशील देशों में आर्थिक विकास की संभावित रास्तों को देखने में बहुत समय बिताया है। भारतीय सरकार को यह हमारा सुझाव है कि वो हमारे साथ स्टंटिंग पर काम करें। यह आधार रेखा है: यदि आपकी 40 फीसदी श्रम शक्ति जो स्टंटिंग बच्चों के रुप में हैं, और उनके साथ भविष्य अर्थव्यवस्था में चलते हैं तो आप प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं हैं।

जिम योंग किम विश्व बैंक के अध्यक्ष , जून 2016 को अपनी नई दिल्ली की यात्रा पर कही थी-

 

किम की चेतावनी समय पर थी : वास्तव में भारत के लिए भविष्य में अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो जाएगा यदि यह वर्तमान पीढ़ी के बच्चों को उत्पादक वयस्कों में विकसित होने में सहायता नहीं कर पाते हैं।

 

कम से कम 39 फीसदी भारतीय बच्चे, जिनकी उम्र पांच या इससे कम है, स्टंटिंग (अविकसित) के हैं – अपने आयु से कम कद –  जोकि 24 फीसदी के वैश्विक औसत से अधिक है। यह जानकारी ग्लोबल न्युट्रीशन रिपोर्ट, 2015 में सामने आई है, जो कि कम साक्षरता, कम संज्ञानात्मक कौशल, स्वास्थ्य जोखिम और गरीब होने की अधिक संभावना के साथ अगली पीढ़ी के लाखों लोगों के लिए चेतावनी है।

 

दक्षिण एशिया में, भारत की तुलना में केवल नेपाल (41 फीसदी) और पाकिस्तान (45 फीसदी) में स्टंटिंग बच्चों का अनुपात अधिक है।

 

भारत में 5 वर्ष की आयु के भीतर के बच्चों का स्टंटिंग दर, अन्य देश

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Source: Global Nutrition Report 2015

 

उपमहाद्वीप में, श्रीलंका में स्टंटिंग या अविकसित बच्चों की सबसे कम प्रतिशत है: 15 फीसदी। भारत की तुलना में बांग्लादेश और भूटान का स्टंटिग दर अधिक है, जो इसके पूर्वी पड़ोसी द्वारा आगे निकला है। 1997 में, जब भारत के 46 फीसदी बच्चे अविकसित थे, जब 59.7 फीसदी के साथ बांग्लादेश का दर अधिक था।

 

ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत , चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों में भारत का स्टंटिंग दर सबसे अधिक था। 24 फसदी के साथ दक्षिण अफ्रीका दूसरे स्थान पर है।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्टंटिंग या अविकसित होने से कम संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास , कम उत्पादक क्षमता और बुरे स्वास्थ्य और मधुमेह जैसी अपक्षयी रोगों का खतरा बढ़ने सहित व्यक्तियों और समाज पर दीर्घकालिक असर पड़ता है।

 

बच्चों पर रैपिड सर्वे, 2013 के अनुसार पांच या कम वर्ष के आयु के 61.8 मिलियन या 6.18 करोड़ भारतीय बच्चे अविकसित हैं। जैसा कि हमने बताया यह इस आयु वर्ग में 39 फीसदी है।

 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) 2005-06 के अनुसार, यह 48 फीसदी के अविकसित बच्चों में सुधार है। 2011 में,पांच या कम वर्ष की आयु के भीतर के बच्चों की संख्या 158.8 मिलियन या 15.81 करोड़ थी, जेकि 2001 के 163.8 मिलियन या 16.38 करोड़ के आंकड़े से 3.1 फीसदी कम है।

 

यदि मौजूदा प्रवृति जारी रहती है तो, 2025 में पांच वर्ष से कम आयु के 127 मिलियन बच्चे अविकसित हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार, यह सतत विकास लक्ष्यों के तहत तय किए गए 100 मिलियन के लक्ष्य की तुलना में अधिक है। लक्ष्य पूरा नहीं किए जाने के मुख्य कारण विश्व और स्थानीय स्तर पर धन की कमी है।

 

ब्राजील, ग्वाटेमाला, भारत, फिलीपींस और दक्षिण अफ्रीका से बच्चों के हाल के अनुदैर्ध्य अध्ययन (जहां कई वर्षों से बच्चों की प्रगति ट्रैक की जाती है) स्टंटिंग या अविकसित को स्कूल में साल की कमी के साथ सम्बद्ध किया है।

 

2010 में अटलांटा विश्वविद्यालय द्वारा किए गए इस अध्ययन के अनुसार, वयस्क, जो दो साल की उम्र में अविकसित थे, वे सामान्य लोगों की तुलना में एक साल कम स्कूल गए हैं।

 

इसी तरह, ग्वाटेमेले वयस्कों के एक अध्ययन में पाया गया है कि, जो बच्चे के रुप में अविकसित हुए हैं उन्होंने कम स्कूली शिक्षा प्राप्त किया है, कम परीक्षण प्रदर्शन, प्रति व्यक्ति खर्च कम घरेलू और गरीब होने की अधिक संभावना होती है। 2008 विश्व बैंक के एक अध्ययन के अनुसार, महिलाओं के लिए, प्रारंभिक जीवन में अविकसित का संबंध कम उम्र में पहले जन्म, अधिक गर्भधारण और बच्चों से है।

 

विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, बचपन स्टंटिंग के कारण वयस्क ऊंचाई में एक 1 फीसदी की कमी का संबंध आर्थिक उत्पादकता में 1.4 फीसदी कमी के साथ है। सामान्य व्यक्तियों की तुलना में अविकसित बच्चे, वयस्क के रूप में 20 फीसदी कम कमाते हैं।

 

(सालवे इंडियास्पेंड के साथ विश्लेषक हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 11 जुलाई 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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