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स्वच्छता पर विफलता का कुप्रभाव उत्तर प्रदेश और 4 अन्य राज्यों के बच्चों पर

प्राची सालवे,

 

सबसे ताजा उपलब्ध राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंकड़ों पर इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार देश में साफ-सफाई की स्थिति बदतर हो रही है। हालांकि इसमें कुछ सुधार भी देखा गया है। लेकिन इसका प्रभाव निश्चित रुप से देश के विकास पर पड़ रहा है । प्रयाप्त स्वच्छता न होने की की वजह से देश में लाखों बच्चों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है।

 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 (एनएफएचएस -4) के अनुसार, “बेहतर साफ-सफाई” के अभाव के कारण भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, असम और छत्तीसगढ़ में पांच वर्ष की उम्र के बच्चों में सबसे उच्च मृत्यु दर, स्टंट ( उम्र के अनुसर कम कद ) की दर और बच्चों में डायरिया होने की संभवना बहुत ज्यादा है।

 

दूषित पानी, साफ-सफाई को लेकर खराब आदतें और बढ़ती गंदगी से अतिसार जैसी बीमारियों का प्रकोप तो बढ़ता ही है, गंदगी की वजह से पांच वर्ष की आय़ु के भीतर के बच्चों में निमोनिया, नवजात विकार और पोषण की कमी देखने को मिलती है। जाहिर है,इससे मृत्यु दर बढ़ती चली जाती है। यूनिसेफ की 2016 की रिपोर्ट गंदगी और बाल मृत्यु दर के बारे में बहुत कुछ बताती है।

 

हम बता दें कि स्वच्छता का मतलब आमतौर पर एक ऐसे घर से है, जहां का शौचालय सीवर या सेप्टिक टैंक से जुड़ा होता है। खराब स्वच्छता के कारण बच्चों में पानी से होने वाली बीमारी जैसे कि दस्त, पीलिया और हैजा होने की संभावना ज्यादा बढ़ती है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने 6 जनवरी 2016 को अपनी खास रिपोर्ट में विस्तार से बताया है।

 

बेहतर स्वच्छता का मामला घर के शौचालय से जुड़ा है, जो एक पाइप युक्त सीवर प्रणाली या सेप्टिक टैंक में फ्लश, शौचालय के लिए फ्लश, हवादार गड्ढे / बायोगैस शौचालय, स्लैब के साथ गड्ढे शौचालय, जुड़वां गड्ढे / खाद बनाने का शौचालय से से जुड़ा होता है।

 
बेहतर स्वच्छता वाले परिवार के कम अनुपात से पांच वर्ष के आयु के भीतर का मृत्यु दर अधिक

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Source: National Family Health Surveys 2005-06 and 2015-16Under-five mortality rate: deaths of children under the age of five per 1,000 live births

 

भारत में पांच वर्ष की आयु के भीतर की मृत्यु दर (प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर होने वाली मृत्यु ) वर्ष 2005-06 में 74 से गिर कर वर्ष 2015-16 में 50 हुआ है।

 

इसी अवधि के दौरान, बेहतर स्वच्छता वाले घरों के लिए आंकड़े 29.1 फीसदी से बढ़कर 48.4 फीसदी हुआ है।

 

बेहतर स्वच्छता के साथ वाले घरों का सबसे कम अनुपात बिहार में है। वर्ष 2015-16 में राज्य में पांच वर्ष की आयु के भीतर प्रति 1,000 जीवित जन्मों में 58 मौतों की मृत्यु दर दर्ज किया गया है। दिल्ली स्थित एक संस्था  पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया  द्वारा वर्ष 2015 के एक अध्ययन के अनुसार, पांच वर्ष की आयु के भीतर मृत्यु दर का एक मुख्य कारण डायरिया है, जो ज्यादातर गंदगी  के कारण होती है।

 

इस संबंध में बिहार के बाद दूसरा स्थान छत्तीसगढ़ का है। छत्तीसगढ़ में केवल 32.7 फीसदी परिवारों ने स्वच्छता सुविधाओं में सुधार की सूचना दी है। उत्तर प्रदेश में पांच वर्ष की आयु के भीतर मृत्यु दर सबसे उच्च है। यहां के लिए यह आंकड़े प्रति हजार जीवित जन्मों में 78 का है।

 

भारत सरकार द्वारा 2 अक्टूबर 2019 तक देश को खुले में शौचालय मुक्त बनाने के लिए एक केंद्रीय कार्यक्रम ‘स्वच्छ भारत अभियान’ (ग्रामीण) के तहत अक्टूबर 2016 तक उत्तर प्रदेश में केवल 44 फीसदी ग्रामीण घरों में शौचालय होने की सूचना दी गई है।

 

करीब 77 फीसदी ग्रामीण परिवार खुले में शौच जाते हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 55 फीसदी का है। इस बारे में इंडियास्पेंड ने 1 अक्टूबर, 2016 को अपनी रिपोर्ट में बताया है।

 
बेहतर स्वच्छता के साथ परिवारों का कम अनुपात से दस्त के मामले अधिक होने की संभावना

Source: National Family Health Survey 2015-16; *Reported in the 2 weeks preceding the survey

 

पुडुचेरी के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा वर्ष 2015 के अध्ययन के अनुसार, भारत में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु के लिए तीसरा प्रमुख कारण डायरिया है।

 

पांच वर्ष की कम आयु के भीतर 78 के मृत्यु दर के साथ उत्तर प्रदेश  ने सर्वेक्षण से पहले डायरिया से पीड़ित बच्चों की उच्चतम प्रसार (15 फीसदी) की सूचना दी है।

 
बेहतर स्वच्छता के साथ परिवारों का कम अनुपात से स्टंड बच्चों के उच्च अनुपात की संभावना

Source: National Family Health Survey 2015-16

 

ब्रिटेश स्थित एक विचार मंच ‘इन्स्टिटूट ऑफ फिसकल स्टडीज’ द्वारा किए गए वर्ष 2015 के एक अध्ययन के अनुसार, बच्चों में डायरिया स्टंटिंग ( उम्र के अनुसार कम कद ) का एक कारण होता है।

 

अध्ययन में कहा गया है, “विकास की कमी (स्टंटिंग), जो अक्सर खराब पोषण से जुड़ा है ही, इसका रिश्ता परिवार की कमजोर शैक्षणिक स्थिति और बाजार में श्रम की योग्यता के साथ भी है।”

 

(सालवे विश्लेषक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़ी हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 26 अप्रैल 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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