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हमारे जीवनकाल के लिए सीओ2 स्तर 440 पीपीएम के ऊपर

जीबीएसएन वर्मा,

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चंडीगढ़ शहर के बाहरी इलाके में कचरा प्रसंस्करण संयंत्र की चिमनी से निकलता धुआं। इस वर्ष सीओ2 में रिकॉर्ड वृद्धि – 2.1 पीपीएम की वार्षिक औसत के खिलाफ 3.1 पीपीएम – के  प्राकृतिक और मानव दोनों मूल है।

 

हवाई में माउना लोआ वेधशाला, (1950 के दशक के बाद से कार्बन उत्सर्जन के वैश्विक रिकॉर्ड रखनेवाला), के वैज्ञानिकों के अनुसार, लगातार दूसरे वर्ष, वातावरण में सीओ 2 एकाग्रता का स्तर 440 पीपीएम (प्रति मिलियन भाग) के ऊपर पहुंच गया है। लेकिन इस बार यह हमारे जीवनकाल तक साथ रहेगा।

 

ब्रिटेन के मौसम विभाग ने हैडली सेंटर से वैज्ञानिकों और ला जोला, कैलिफोर्निया, में समुद्र विज्ञान स्क्रिप्स इंस्टीट्यूशन के राल्फ कीलिंग, द्वारा हाल ही में आयोजित और प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, “हमारा पूर्वानुमान सुझाव का समर्थन करता है  कि हमारे जीवनकाल में माउना लोआ कभी प्रतीकात्मक 400 पीपीएम से नीचे सीओ 2 सांद्रता नहीं देख पाएगा।”

 

सीओ2 का स्तर पिछले वर्ष भी 400 पीपीएम के स्तर के पार गया था लेकिन जब वैज्ञानिकों ने अंतिम बार पिछले साल सितंबर और अक्टूबर 2015 के दौरान आंकड़ों का अध्ययन किया जब माउना लोआ में सीओ2 400 पीपीएम के नीचे था (26 जून को समाप्त हुए सप्ताह के लिए नवीनतम रीडिंग 406.23 था)।

 

मौसम विभाग के हैडली सेंटर के प्रोफेसर रिचर्ड बेट्स और एक्सेटर विश्वविद्यालय और अध्ययन के प्रमुख लेखक ने इंडियास्पेंड से बात करते हुए बताया कि “यह जानते हुए कि सीओ 2 का स्तर इस सीमा को पार कर चुका है, यह गंभीर रुप से लगता है कि मनुष्यों ने पृथ्वी की जलवायु पर अपनी छाप छोड़ी है। मेरी पहली प्रतिक्रिया में पुरानी यादें ताज़ा हो गई और जब यह एहसास हुआ कि शायह यह संख्या अंतिम बार मापी जाएगी तो थोड़ी उदासी भी आई।”

 

पेपर में वातावरण में सीओ 2 एकाग्रता में वृद्धि की गई है। सीओ 2 और अन्य गैसों के उच्च स्तर – मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, ओजोन – और जल वाष्प वातावरण को ग्रीन हाउस में बदल देता है।

 

अमेरिका के नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन के पृथ्वी वेधशाला के अनुसार, 1906 और 2005 के बीच, ग्रीन हाउस के यह प्रभाव पृथ्वी की सतह का औसत तापमान को बढ़ाया है, 0.6 से 0.9 डिग्री सेल्सियस तक।

 

400 पीपीएम के स्तर का तत्काल निहितार्थ नहीं है। बेट्स कहते हैं, “हम महसूस करते है कि यह एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण क्षण था।”

 

मासिक औसत सीओ2 एकाग्रता; अवलोकन और पूर्वानुमान

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Monthly mean CO2 concentrations: Observed from 1957 to 2015 (black line); forecast (and back-tested with actuals) for 2015 and 2016 (orange line).

 

CO2 एकाग्रता 440 पीपीएम के पार

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Expected changes in CO2 levels in the absence of El Nino, the warming of the Pacific Ocean near the equator. Dashed black lines indicate an educated guess of trends in annual maximum and minimum monthly values from previous years. Black and orange stars and central solid lines indicate observed and backtested (estimated inputs for past events) or forecast annual mean concentration since 2010.

Source: Richard A. Betts et al

 

ग्राफ में दिखाया गया कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कीलिंग कर्व के रुप में जाना जाता है। पूर्व औद्योगिक समय में, सीओ 2 सांद्रता 280 पीपीएम पर थे। उद्योग के विकास के साथ उनमें वृद्धि हुई और जैसा कि कीलिंग कर्व दिखाता है 20 वीं सदी के दौरान और बढ़ा है। कर्व दांतेदार है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में मौसम के अनुसार उतार-चढ़ाव होते हैं। कुछ मौसम में  प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित द्वारा पौधे बढ़ते हैं और कुछ मौसमों में वे पत्ते गिराते हैं जो खराब होते हैं और जीवित नहीं रहते।

 

2016 का रिकॉर्ड सीओ2 वृद्धि प्राकृतिक और मानव मूल है

 

अध्ययन के अनुसार, इस वर्ष सीओ2 की रिकॉर्ड वृद्धि – 2.1 पीपीएम की वार्षिक औसत के खिलाफ 3.1 पीपीएम – में प्राकृतिक और मानव मूल दोनों हैं।

 

अतिरिक्त 1 पीपीएम मोटे तौर पर अल नीनो के प्रभाव का परिणाम है, इक्वेटोरियल प्रशांत का वार्मिंग जो वर्षा को प्रभावित करता है, उष्णकटिबंधीय भूमि सूखा दिया है और जंगल में आग को सुलगाता है जो सीओ2 छोड़ती है।

 

यहां तक कि हाल ही में प्रति वर्ष सामान्य 2.1 पीपीएम वृद्धि आमतौर से अधिक है, जो मानव गतिविधि का परिणाम है।

 

सीओ 2 एकाग्रता के समग्र प्रवृत्ति ऊपर की ओर है – एक बार यह वातावरण में मिल जाता है तो सीओ 2 सैकड़ों वर्षों के लिए रह जाता है।

 

यह पहली बार नहीं है जब सीओ 2 का स्तर र 400 पीपीएम के पार हुआ है। पिछले वर्ष भी स्तर थोड़ा ऊपर गया था और फिर नीचे आया। पेपर क्या सुझाव देते हैं कि 2015-16 के दौरान मजबूत एल नीनो के कारण सीओ2 अब 440 पीपीएम के नीचे कभी नहीं आएगा।

 

आने वाली चीज़ों का पूर्वानुभव

 

बेट्स समझाते हैं कि, पिछले कुछ वर्षों की तुलना में, हाल ही में अल नीनो ने इस साल सीओ2 में तेजी से वृद्धि किया है, यह पिछली बार 1997-98 में दुनिया द्वारा किए मजबूत एल नीनो की अनुभव की तुलना में भी काफी तेज़ है क्योंकि तब से उत्सर्जन में 25 फीसदी की वृद्धि हुई है।

 

सागर धारा, हैदराबाद में स्थित एक स्वतंत्र पर्यावरण इंजीनियर और ऊर्जा विशेषज्ञ, जो वर्तमान अध्ययन के साथ शामिल नहीं है, कहते हैं, “दत्त बिंदु 280 पीपीएम है । यह 400 पीपीएम को पार कर गया है। हम पूरी बात के निर्माण की प्रक्रिया में हैं। यदि हम इससे नीचे जाते हैं, ज़ाहिर है कि प्रभाव दिखाई देगा।”

 

सीओ 2 का उत्सर्जन और मानव गतिविधियों के द्वारा जारी किया गया अन्य ग्रीन हाउस गैसें जैसे कि जलता तेल और कोयला, प्राकृतिक गैस और वनों की कटाई, से हर दशक पुथ्वी गर्म हो रही है।

 

वैश्विक समुद्र का जल स्तर (बर्फ पिघला देता है और इसके गर्म होने के साथ पानी फैलता है) में वृद्धि, स्थानों में परिवर्तन और कई प्रजातियों की मौसमी व्यवहार और चरम मौसम के बढ़ते उद्हारणों में इसका प्रभाव दिखाई देता है।

 

उदाहरण के लिए, मध्य भारत में चरम वर्षा की घटनाएं, मानसून प्रणाली की कोर, बढ़ रही हैं और मध्यम वर्षा कम हो रही है – स्थानीय और विश्व मौसम में जटिल परिवर्तन के भाग के रुप में – यह जानकारी अप्रैल 2015 में इंडियास्पेंड द्वारा क्लच ऑफ इंडियन एवं ग्लोबल अध्ययन की समीक्षा में सामने आई है।

 

बेट्स ने कमज़ोर देशों जैसे कि भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका और अन्य की चर्चा करते हुए कहते हैं कि, “हालांकि यह एक ही साल का अतिरिक्त CO2 वृद्धि का अपनेआप में प्रभाव नहीं होगा, यह जलवायु में चल रही परिवर्तन की याद दिलाते हैं जिससे बाढ़, सूखा और रोग के जोखिम में वृद्धि की संभावना है जो कि गरीबी में रहने वाले गरीब लोगों की ज़िंदगी को और कठिन बनाता है।”

 

(वर्मा आंध्र प्रदेश स्थित एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। वर्मा विज्ञान संबंधित विषय पर लिखते हैं एवं इनकी जलवायु विज्ञान , पर्यावरण और पारिस्थितिकी में विशेष रुचि है।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 29 जून 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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