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हैती की तरह गरीबी से जूझते झारखण्ड को नई सरकार की प्रतीक्षा

सौम्या तिवारी ,

 

भारत के  लगभग 40% खनिज संसाधनों से सुसम्पन्न राज्य होते हुए भी , गरीबी से त्रस्त झारखंड का प्रदर्शन कमज़ोर ही रहा है।

 

झारखंड की प्रति व्यक्ति आय हैती के सामान है जो कि  दुनिया के सबसे गरीब, सबसे अराजक देशों में से एक है।

 

इंडियास्पेंड की एक पूर्व रिपोर्ट में बताया गया था की 2000 में बनाए गए तीन नए राज्यों  -झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड – में से पिछले दो राज्यों की विकास दर अपने मूल राज्यों उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की तुलना में बेहतर रही है।

 

जबकि , झारखंड, अपने मूल राज्य बिहार की तुलना में, पिछड़ा रहा।

 

झारखंड का  राजनीतिक  परिदृश्य अपने गठन के बाद से ही अस्थिर रहा  है। वहाँ 14 साल में नौ सरकारें आईं और तीन बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है।

 

राज्य में  अंधिकाँशत: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में  ही सरकार बनी है ।  चुनाव प्रक्रिया 20 दिसंबर को खत्म हो रही है और 23 दिसंबर  को गणना होनी है ,  इस पृष्ठभूमि  के साथ, हम राज्य के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य की ओर  एक नज़र डालते हैं।

 

झारखंड के मुख्यमंत्री, 2000 से 2014 

 

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Source: Various News Reports

 

इंडियास्पेंड  की पूर्व रिपोर्ट में सूचित किया गया था  कि  कैसे छत्तीसगढ़ , एक स्थिर सरकार होने के बावजूद, मानव विकास संकेतकों (एचडीआई) में बेहतर  विकास नही कर रहा था । झारखंड भी एचडीआई में  पिछड़ गया है। झारखंड और छत्तीसगढ़, दोनों ही क्षेत्र गरीबी और बड़ी जनजातीय आबादी के पहलू से  तुलनीय हैं।

 

परन्तु छत्तीसगढ़ में झारखण्ड की अपेक्षा वर्ष 2000 से एक स्थिर सरकार रही है।

 

विधानसभा के विश्वास को बनाए रखने के अलावा भी , नई झारखंड सरकार के सामने कई चुनौतियों होंगी ।

 

 नक्सली हिंसा

राज्य अनुसार नक्सली घटनाएँ

 

पिछले 5 वर्षों में, झारखंड में सबसे अधिक संख्या में नक्सली घटनाएँ  और  अधिकतम संख्या में गोलीबारी के कारण मृत्यु हुई हैं । जाहिर है, राज्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती वामपंथी उग्रवाद है।

 

Source: Ministry of Home Affairs, Government of India  

 

आर्थिक विकास

 

झारखंड की वृद्धि दर में 2005-06 में 3.2% तक की गिरावट के बाद, पिछले पांच वर्षों में सुधार आया है। नई सरकार के लिए मुख्य चुनौती है कि विकास की दर को किस तरह बनाए रखा जा सकता है ।

 

Source: Planning Commission

 

मानव विकास संकेतक

झारखंड विकास दर 2014 2005-( प्रतिशत में )

 

झारखंड, भारत के सबसे कम  विकसित राज्यों में छटे स्थान पर है। जहां साक्षरता दर राष्ट्रीय दर से कम है , वहीं झारखंड में लिंग अनुपात राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहतर रहा है। जिसका मुख्य कारण है कि आबादी का अधिकांश भाग ग्रामीण है । 25 लाख से अधिक झारखंडी गांवों में रहते हैं; 7 लाख से अधिक शहरों में रहते हैं। बुनियादी स्वास्थ्य संकेतक, शहरीकरण की कमी से प्रभावित होते हैं । राज्य में बुनियादी सुविधाओं की दशा भी बहुत खराब है ;केवल 12 %  परिवारों को ही पाइप द्वारा पीने का पानी उपलब्ध है।

 

भारत की तुलना में झारखंड एचडीआई

 

Source: Jharkhand Economic Survey 2013-14, NFHS-3, Census 2011

 

जनजातीय मुद्दे

 

झारखंड की आबादी का लगभग 26%,आदिवासी है जो भारत में ऐसी छठी सबसे बड़ी आबादी है । क्योंकि राज्य के सभी विकास संकेतक इतनी अधिक आदिवासी आबादी से प्रभावित हैं, नई सरकार को जनजातीय कार्यों की तरफ अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता होगी।

 

युवा

 

जैसा की हमने अपनी पूर्व रिपोर्ट् में कहा  है , झारखंड में भारत के युवा मतदाताओं की प्रतिशत सबसे अधिक है । 2014 के लोकसभा चुनाव में झारखंड में  कुल मतदाता आबादी में से 9 प्रतिशत ,  18 से 19 साल के बीच की थी।

 

झारखंड में साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम है और रवांडा के बराबर है।

 

प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ देने की दर भी राष्ट्र्रीय औसत से काफी ज्यादा हैं। झारखंड में बेरोजगारी की दर 2.6% है और वर्ष 2004-05 के बाद से यह बढ़ी है जबकि  भारत के बाकी हिस्सों में इसमें  गिरावट आई है।

 

तो, झारखंड की राजधानी और भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के गृह नगर रांची, में  नई सरकार के लिए दिया गया एक स्पष्ट जनादेश,क्या इन समस्याओं का समाधान कर सकता है?

 

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