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10,000 एनजीओ पंजीकरण रद्द, विदेशी पोषण में गिरावट की संभावना

अभिषेक वाघमारे,

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हैदराबाद में आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दरवाजे पर, मेडक ज़िले में असनिकुंता झील से निकाले करीब एक टन विषाक्त कूड़े को डंप करते ग्रीनपीस के कार्यकर्ता। ग्रीनपीस 10,000 गैर-सरकारी संगठनों में से एक है जिसका पंजीकरण, विदेशी योगदान नियमन अधिनियम पंजीकरण के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा रद्द कर दिया गया था।

 

विदेशी योगदान पर ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में, वर्ष 2014-15 में भारतीय गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के लिए विदेशी धन दोगुनी हुई है, लेकिन 2015 में 10,000 एनजीओ पंजीकरण के रद्द होने के साथ ही विदेशी योगदान में गिरावट होने की संभावना है।

 

26 जुलाई, 2016 को लोकसभा में पेश हुए आंकड़ों से पता चलता है कि, भारत को मिलने वाली विदेशी अनुदान में से 65 फीसदी हिस्सेदारी सामुहिक रुप से दिल्ली, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश (एकीकृत), कर्नाटक और केरल की है।

 

इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि चार वर्षों के दौरान – 2011-12 से 2014-15 – भारतीय गैर सरकारी संगठनों को विदेशी अनुदान के रूप में मिली 45,300 करोड़ रुपए में से 29,000 करोड़ रुपए राष्ट्रीय राजधानी और इन चार राज्यों (तेलंगना के बाद पांच) को प्राप्त हुआ है।

 

पिछले चार वर्षों के दौरान, दिल्ली में संगठनों को 10,500 करोड़ रुपए मिले हैं जबकि प्रत्येक पांच राज्यों को – तमिलनाडु , आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र –  को 5,000 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं।

 

विदेशी सहायता का चौथाई दिल्ली को प्राप्त

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Source: UNSTARRED QUESTION NO. 1603, July 26th 2016, Lok Sabha, figures in Rs crore

 

अप्रैल 2015 में गृह मंत्रालय द्वारा 10,000 गैर सरकारी संगठनों के पंजीकरण रद्द करने के बाद,  विदेशी धन प्राप्त करने के लिए, 33,091 गैर-सरकारी संगठन पंजीकृत हैं – विदेशी योगदान के (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के तहत।

 

गैर सरकारी संगठन के पंजीकरण को रद्द करने के लिए कारणों में हैं : रिटर्न दाखिल नहीं करना, धन का गलत उपयोग और और “निषिद्ध गतिविधियों” के लिए धन स्वीकार करना जिसमें जमानत के कानूनी खर्च के वित्त पोषण, भारतीय गैर सरकारी संगठनों और उनके कार्यकर्ताओं की रिट याचिकाएं और विदेशी कार्यकर्ताओं को विदेशी गैर सरकारी संगठनों द्वारा अज्ञात भुगतान करना शामिल हैं।

 

वर्ष 2013-14 में विदेशी अनुदान 12,000 करोड़ रुपए थी जोकि 2014-15 में यह दोगुनी, 22,137 करोड़ रुपए – हुई है।

 

2014-15 में भारतीय गैर सरकारी संगठनों के लिए विदेशी अनुदान सबसे अधिक

Source: UNSTARRED QUESTION NO. 1603, July 26th 2016, Lok Sabha

Note: For NGOs with contributions more than Rs one crore

 

भारतीय गैर सरकारी संगठनों को 165 देशों से अनुदान, अधिकतर सामाजिक क्षेत्र के लिए

 

विश्व बैंक द्वारा की पहचान की गई 200 देशों में से 165 देशों से भारत अनुदान प्राप्त करता है।

 

वर्ष 2011-12 में प्राप्त 12,000 करोड़ रुपए में से स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल – कल्याण क्षेत्रों को कुल 4,500 रुपए प्राप्त हुए हैं। यह जानकारी विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के वर्ष 2011-12 की वार्षिक रिपोर्ट, (नवीनतम डाटा उपलब्ध) पर इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आई है।

 

विदेशी निवेश : स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल कल्याण

Source: Annual Report of FCRA, 2011-12

 

वर्ष 2011-12 में, धार्मिक गतिविधियों के साथ जुड़े गैर सरकारी संगठनों को 870 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं जबकि अनुसंधान गतिविधियों से जुड़े गैर सरकारी संगठनों 539 करोड़ रुपए मिले हैं।

 

अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन भारत में निधि के लिए मुक्त लेकिन केवल सरकार के लिए

 

संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, विश्व स्वास्थ्य संगठन , अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व व्यापार संगठन और एशियाई विकास बैंक की विभिन्न शाखाएं सहित कम से कम 109 अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भारत में परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए विदेशी स्रोत के रूप में नहीं माना जाता है।

 

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर), एक संस्था, के प्रो त्रिलोचन शास्त्री अपने इस ब्लॉग पोस्ट में लिखते हैं, “वर्ष 2013-14 में विश्व बैंक का वित्त पोषण 33000 करोड़ रुपए था। यह धन किसी एनजीओ को नहीं बल्कि सरकार को जाता है।”

 

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम , 2010 के प्रवर्तन प्रशासन के लिए एक स्वतंत्र निकाय का गठन करने के लिए एडीआर द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। फिलहाल मामले पर सुनवाई चल रही है।

 

(वाघमारे इंडियास्पेंड के साथ विश्लेषक हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 29 जुलाई 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 

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