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12 वर्षों में बंगलूरु में हो सकता है पीने का पानी समाप्त !

भास्कर त्रिपाठी,

 

ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (बीबीसी) ने 11 फरवरी, 2018 को, बेंगलुरु को आधुनिक युग के उन 11 प्रमुख शहरों की सूची में रखा है, जहां पीने का पानी समाप्त होने की आशंका है।

 

कर्नाटक की राजधानी, बेंगलुरू तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है और भारत का पांचवां सबसे बड़ा महानगरीय क्षेत्र है। यह सूची में एकमात्र भारतीय शहर है, हालांकि कई बड़े शहर पहले से पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं और 2030 तक भारत में ताजे पानी की जरूरत में से सिर्फ 50 फीसदी ही हम पूरी कर पाएंगे, ऐसी आशंका है। एशियाई विकास बैंक द्वारा वर्ष 2010 के एक अध्ययन में भी ऐसी बात सामने आई है।

 

बीबीसी ने इसका कारण जनसंख्या वृद्धि और नई संपत्ति के विकास में वृद्धि, बेंगलुरू के जल और सीवेज सिस्टम के प्रबंधन में संघर्ष और खराब नालियों कारण पीने के पानी में भारी अपशिष्ट की मात्रा बताया है। आइए आंकड़ों पर त्वरित नजर डालते हैं।

 

बढ़ती आबादी और पानी की मांग

 

अपने प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए दुनिया भर में मशहूर बेंगलुरु भारत में सबसे तेजी से बढ़ते महानगरीय शहरों में से एक है। शहर की आबादी 2001 में 5 मिलियन से बढ़ कर 2017 में दोगुनी, करीब 12 मिलियन हुई है। विश्व बैंक समर्थित 230 जल संसाधन समूह (230WRG) द्वारा एक 2016 शहर-प्रोफ़ाइल अध्ययन में अनुमानों के अनुसार 4.23 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर पर, 2030 तक बेंगलुरू की जनसंख्या 21.15 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। यानी की श्रीलंका की वर्तमान आबादी के बराबर।

 

230WRG के अनुसार, 2030 में बेंगलुरू की पानी की उपलब्धता प्रति वर्ष लगभग 51.38 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसी) ( 530,000 ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल भरने के लिए पर्याप्त ) की आवश्यकता से तीन गुना कम होगी।

 

प्रदूषित जल निकाय

 

शहर-आधारित पर्यावरण प्रबंधन और नीति अनुसंधान संस्थान (ईएमपीआरआई) द्वारा 2016 में तैयार किए गए शहर के जल निकायों की पहली गहन सूची के अनुसार, बेंगलूर के सर्वेक्षण किए गए 85 फीसदी जल निकायों जिसमें 398 झीलें, मवेशियों और सूक्ष्म तालाबों के लिए मध्यम आकार के जल-पुलों का पानी शामिल थे, उनमें इस तरह का पानी था,  जिसका उपयोग सिंचाई और औद्योगिक ठंडा करने के लिए किया जा सकता था।

 

दो साल की परियोजना राज्य सरकार द्वारा समर्थित थी। बेंगलुरु में एक भी झील का पानी पीने या स्नान के लिए उपयुक्त नहीं था। घरेलू कचरे (44.5 फीसदी) और निर्माण मलबे (33 फीसदी) को जल निकायों के प्रदूषण के प्रमुख कारणों के रूप में उद्धृत किया गया है।

 

बेंगलुरु में जल निकायों के प्रदूषण की पहचान योग्य स्रोत

इसके अलावा, केवल 30 फीसदी सीवेज को उपचार संयंत्रों पर संसाधित किया जाता है और शेष मौजूदा झीलों में बहता है।

 

वितरण घाटा

 

ज्यादातर कावेरी नदी से घरेलू उपयोग (लगभग 30 टीएमसी) के लिए प्राप्त पानी का करीब आधा बेंगलुरू बर्बाद करता है। यह नुकसान दो प्रकार की है: पहला, जल आपूर्ति प्रणाली में नुकसान और रिसाव; और, दूसरा, अनधिकृत जल कनेक्शन, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 16 सितंबर 2016 की रिपोर्ट में बताया है।

 

श्रेणी के अनुसार बेंगलुरू का जल उपभोग

एक विपरीत दृश्य

 

एक और विचार यह है कि बेंगलुरू के पास कावेरी और भरपूर बारिश से पर्याप्त आपूर्ति है। यदि जल संचयन के विस्तार, अपशिष्ट जल का उपचार करने और बेहतर भूजल का प्रबंधन करने के लिए उपयुक्त हस्तक्षेप किया जाए तो  बेंगलुरु को पानी की कमी का सामना नहीं करना होगा, जैसा कि एक बेंगलुरु स्थित समुदाय-वित्त पोषित मीडिया मंच ‘सिटिजन मैटर्स’ ने 14 फरवरी, 2018 को बताया है।

 

बेंगलुरु को कम से कम 800 मिमी औसत वर्षा मिलती है। इससे प्रति दिन 2,740 मिलियन लीटर ( अगर 60 बारिश के दिनों में 800 मिमी 365 दिनों में फैला हुआ है ) प्राप्त होता है। इसका अर्थ है प्रति दिन प्रति व्यक्ति 10 लीटर पानी (जनसंख्या = 2.5 करोड़ पर विचार करते हुए) मिलता है, जैसा कि रिपोर्ट में कहा गया है।

 

(त्रिपाठी प्रमुख संवाददाता हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 20 फरवरी, 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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