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2015 में साम्प्रदायिक दंगों में गिरावट लेकिन अन्य दंगों में वृद्धि

अभिषेक वाघमारे,

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मई 2015 में हरियाणा के बल्लभगढ़ शहर में जले हुए वाहन। 2015 में कृषि समृद्ध राज्य, हरियाणा में सबसे अधिक साम्प्रदायिक दंगे (789 में से 201) हुए हैं। हालंकि पिछले वर्ष, 2014, की तुलना में देश में हुए कुल साम्प्रदायिक दंगों में 33 फीसदी की गिरावट हुई है।

 

बल्लभगढ़, हरियाणा, में जब 150 मुसलमानों ने एक पुलिस स्टेशन में शरण मांगी उस समय का धार्मिक तनाव; गणेश उत्सव के जुलूस के दौरान बेलगाम, कर्नाटक में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हुआ संघर्ष और मडिकरी , कर्नाटक में मध्ययुगीन शासक टीपू सुल्तान की जयंती समारोह के दौरान हुए दंगे जैसी घटनाएं 2015 में भारत की धार्मिक उतार-चढ़ाव का प्रतिनिधित्व करते हैं।

 

हालांकि, देश में सांप्रदायिक दंगों के मामलो में  एक तिहाई की गिरावट हुई है। इस संबंध में यह आंकड़े 2014 (जिस वर्ष नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रुप में शपथ ली थी) में 1,227 से गिरकर 2015 में 789 हुए हैं। यह जानकारी राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों में सामने आई है।

 

2014 के मुकाबले 2015 में, साम्प्रदायिक दंगों के दौरान 40 फीसदी कम भारतीयों की मौत हुई है या घायल हुए हैं। गौर हो कि 2014 में मरने या घायल होने वालों की संख्या 2,001 थी जबकि 2015 में यही आंकड़े 1,1,74 दर्ज हुए हैं।

 

2015 में, हरियाणा में (जो जनसंख्या की दृष्टि से भारत का 17वां सबसे बड़ा राज्य है) सबसे अधिक साम्प्रदायिक मामले (201) दर्ज किए गए हैं जिसमें 200 लोग मारे गए हैं या घायल हुए हैं। इस संबंध में कर्नाटक में 163 मामले दर्ज हुए हैं जिसमें पीड़ितों की संख्या 203 रही है, महाराष्ट्र में 80 मामले एवं 104 पीड़ित और बिहार में 79 मामले एवं 146 पीड़ितों की संख्या दर्ज हुई है।

 

हरियाणा में दंगों की दर प्रति मिलियन आबादी पर 7.5 दंगों के मामलो पर अपरिवर्तित रहा है। जबकि कर्नाटक में दंगा घटनाओं के मामलों में वृद्धि दर्ज हुई है। कर्नाटक में यह आंकड़े प्रति मिलियन 0.6 दंगे मामलों से बढ़ कर प्रति मिलियन 2.6 दंगे मामले हुए हैं, जबकि मामलों में चार गुना की वृद्धि हुई है, 2014 में 38 से बढ़ कर 2015 में 163 हुए हैं।

 

किसी भी अन्य राज्य की तुलना में केरल में सबसे अधिक “राजनीतिक दंगे” हुए हैं। गौर हो कि देश भर में होने वाले मामलों में से आधे के अधिक मामले केरल में हुए हैं।

 

झारखंड में दंगों की दर में गिरावट हुई है। यह आंकड़े प्रति मिलियन 10 दंगे के मामले से कम हो कर प्रति मिलियन 2 हुए हैं। यह घना आदिवासी राज्य 2014 की तुलना में 2015 में पांच गुना अधिक सांप्रदायिक शांतिपूर्ण हुआ है। गौर हो कि राज्य में साम्प्रदायिक दंगों के मामले में 80 फीसदी की गिरावट हुई है। यह आंकड़े 349 से गिर कर 68 हुए हैं।

 

अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण दशक के बाद देश भर में दंगों में हो रही है वृद्धि

 

1980, जब देश में प्रति मिलियन आबादी पर 160 दंगे की दर के साथ सबसे चरम पर था, उसके पैंतीस वर्ष बाद, देश ने सांप्रदायिक हिंसा के संबंध में अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण दशक देखा है, विशेष रूप से 2003-2012 की अवधि के दौरान जब दंगा दर गिरकर प्रति मिलियन आबादी पर 50 मामलों तक पहुंचा था।

 

पिछले तीन वर्षों में दंगों की घटनाएं बढ़ कर प्रति मिलियन आबादी पर 60 मामले या पिछले वर्ष की तुलना में 20 फीसदी अधिक तीव्र हुआ है।

 

भारत में दंगे : 60 साल का परिप्रेक्ष्य

Source: National Crime Records Bureau

 

पिछले छह दशकों में दंगों के मामलों में 251 फीसदी की वृद्धि हुई है,1953 में 20,529 से बढ़ कर 2015 में 76,131 हुआ है और यह आंकड़ा अब तक का सबसे अधिक है। 2014 और 2015 के लिए हमने “दंगों” में “अवैध सभा” के अंतर्गत सूचीबद्ध अपराधों को भी शामिल किया है क्योंकि वे पिछले वर्षों में एक साथ जोड़ा गया है।

 

भारत में दंगों के मामले में हो रही है वृद्धि

Source: Crime In India Reports, 1997 to 2015, National Crime Records Bureau

Note: For 2014 and 2015, we have included in “riots” crimes listed under “unlawful assembly” because they were clubbed together in previous years.

 

2015 में दर्ज 76,131 मामलों में से 65,255 मामले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की 147 से 153 धाराओं के तहत दर्ज किए गए हैं जिसका अर्थ है कि दंगों से संबंधित अपराध के तहत दर्ज हुए हैं जबकि 10,876 मामले भारतीय दंड संहिता की 141 और 142 धारा के तहत दर्ज किया गया है यानि कि अवैध सभा से संबंधित अपराध के तहत दर्ज हुए हैं। 2012 में कम से कम 74,633 मामले और 2013 में 72,126 मामले दंगे और अवैध सभा ते तहत दर्ज किए गए हैं।

 

2014-15 के बीच केवल “दंगों” के तहत दायर मामलों में गिरावट हुई है जबकि “अवैध सभा” से संबंधित मामलों में वृद्धि हुई है।

 

2015 में अवैध सभा मामलों में वृद्धि

Source: Crime in India 2015, National Crime Records Bureau

Note: For 2014 and 2015, we have included in “riots” crimes listed under “unlawful assembly” because they were clubbed together in previous years.

 

2015 में प्रमुख जाति समूहों (गुजरात में पटेल और हरियाणा में जाटों) द्वारा राष्ट्रव्यापी जनसंघ अशांति के परिणाम के रुप में “अवैध सभा” के मामलों में वृद्धि होने की संभावना है।

 

बिहार और केरल : भारत में अधिक दंगे होने वाले राज्य

 

निरपेक्ष संदर्भ में, 2015 में 13,311 दर्ज मामलों के साथ बिहार में किसी भी अन्य राज्य की तुलना में सबसे अधि दंगे हुए हैं। इस संबंध में 8336 आंकड़ों के साथ महाराष्ट्र दूसरे,  6,813 के आंकड़ों के साथ उत्तर प्रदेश तीसरे और 6,602 के साथ कर्नाटक चौथे स्थान पर है।

 

2015 में बिहार में विधानसभा चुनाव और  25 साल पुराने जनता दल (नाइटेड) और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन के टूटने के परिणामस्वरुप पिछले तीन वर्षों में हिंदी भाषी राज्य में दंगों के मामलों में वृद्धि हुई है, जैसे कि इंडियन एक्सप्रेस ने अगस्त 2015 में बताया है।

 

केरल में प्रति मिलियन जनसंख्या पर 164 दंगे के मामलों का दर है जोकि देश में सबसे अधिक है। इस संबंध में 129 के आंकड़ों के साथ बिहार दूसरे और 126 के साथ कर्नाटक तीसरे स्थान पर है।

 

झारखंड में जहां प्रति मिलियन की आबादी पर आठ जाति आधारित दंगे मामले दर्ज हुए हैं वहीं तमिलनाडु में छह मामले दर्ज हुए हैं।

 

किसी भी अन्य राज्य की तुलना में बिहार में सबसे अधिक “कृषि दंगों” के मामले (1,156) दर्ज हुए हैं जोकि देश के कुल मामलों का 43 फीसदी है।

 

(वाघमारे इंडियास्पेंड के साथ विश्लेषक हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 15 सितम्बर 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 
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