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2016 में, एनसीआरबी ने 899 सांप्रदायिक दंगों के मामले किए दर्ज; गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड में 703

Rakesh Dubbudu, Factly.in,

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हरियाणा के वल्लभगढ़ के अट्टली गांव में नष्ट हुए एक घर का एक दृश्य, जहां जून 2015 में सांप्रदायिक दंगा हुआ था। यह लगातार तीसरा वर्ष है, जब गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए सांप्रदायिक घटनाओं / दंगों के रिकॉर्ड वर्ष 2016 के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों से मेल नहीं खाते हैं।

 

वर्ष 2016 में, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा सांप्रदायिक दंगों से जुड़े 869 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि गृहमंत्रालय के रिकॉर्ड में यह आंकड़े 703 दर्ज हैं। यह जानकारी एक डेटा-पत्रकारिता पोर्टल, Factly.in ने 2 दिसंबर, 2017 की रिपोर्ट में दी है।

 

वर्ष 2014 के लिए, एनसीआरबी ने गृह मंत्रालय के आंकड़ों की तुलना में दोगुना रिपोर्ट किया है। यह अंतर वर्ष 2015 में नहीं दिखा था और वर्ष 2016 में फिर से ऐसा हुआ है।

Source: National Crime Records Bureau; Lok Sabha reply by ministry of home affairs

 

वर्ष 2014 में, एनसीआरबी ने ‘विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने वाले अपराधों’ के 336 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से 323 (अन्य चीजों में से) धर्म और जाति के आधार पर समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने के लिए अपराध हैं। 2015 में, यह संख्या 424 और 378 थी।

 

वर्ष 2016 में, एनसीआरबी द्वारा ‘विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने के अपराध’ के 478 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 447 अपराध ऐसे थे, जो धर्मों और जातियों पर (अन्य बातों के बीच) आधारित समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देते थे।अगर सांप्रदायिक दंगों के मामलों और एनसीआरबी द्वारा रिपोर्ट किए गए समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के मामलों को जोड़ा जाता है तो एनसीआरबी डेटा और गृह मंत्रालय के आंकड़ों के बीच अंतर आगे बढ़ता है।

 

दंगों पर एनसीआरबी डेटा संग्रह

 

एनसीआरबी गृह मंत्रालय का हिस्सा है और इसका काम अपराध, अपराधियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर एक सुरक्षित राष्ट्रीय डेटाबेस का संग्रह करना और प्रसार करना है। हर साल, एनसीआरबी राज्य स्तर पर पुलिस विभागों से डेटा एकत्र करता है, और उन्हें भारत की अपराध रिपोर्ट में संकलित करता है। रिपोर्ट में विभिन्न अपराधों पर विस्तृत जानकारी है।

 

अपराध संबंधी आंकड़ों के संग्रह के लिए वर्तमान टेम्पलेट में दंगों पर एक खंड है, जैसा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के धारा 147,148, 149, 150, 151 और 153 ए के तहत परिभाषित किया गया है।

 

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आईपीसी की धारा 153-ए और 153-बी के तहत परिभाषित विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने वाले अपराधों पर डेटा एकत्र करने के लिए एक अलग सेक्शन भी है।

 

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टेम्पलेट यह स्पष्ट करता है कि दंगों के अन्य वर्गों (धारा 147 से 151) के साथ धारा 153 ए के तहत दर्ज किए गए मामलों को दंगों की श्रेणी में दिखाया जाना चाहिए, जबकि खंड 153 ए और 153 बी के तहत विशेष रूप से दर्ज मामलों को अलग से दिखाया जाना चाहिए।

 

वर्ष 2014 से पहले, दंगों से संबंधित सभी आंकड़े ‘दंगों’ नामक एक शीर्षक के तहत इकट्ठा किए जाते थे। वर्ष 2014 से, दंगों पर डेटा उप शीर्षक में वर्गीकृत किए जाते हैं, जैसे कि सांप्रदायिक दंगों, औद्योगिक दंगे और राजनीतिक दंगे। ‘अलग-अलग समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने वाले अपराधों’ पर एक अलग खंड भी है।

 

एनसीआरबी को राज्य पुलिस विभागों से सभी आंकड़े मिलते हैं और ये आंकड़े दायर मामलों के प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में वर्णित अनुभागों पर आधारित हैं। अपराध की गिनती के लिए एनसीआरबी ‘प्रमुख अपराध नियम’ का भी पालन करता है। इसलिए, एक ही मामले में दर्ज किए गए कई अपराधों में, केवल सबसे अधिक जघन्य अपराध (अधिकतम सजा) को गिनती इकाई माना जाएगा, जिससे एक मामले का प्रतिनिधित्व किया जाएगा। कभी-कभी, यह भी संभव है कि एक ही घटना के लिए कई मामले दर्ज किए जाएंगे।

 

 

सरकार की व्याख्या क्यों नहीं ?

 

सरकार ने कई मौकों पर कहा कि एनसीआरबी राज्यों से पुलिस द्वारा पंजीकृत सांप्रदायिक दंगों के मामलों (एफआईआर) एकत्र करता है, और सांप्रदायिक हिंसा की एक ही घटना की कई एफआईआर हो सकती हैं। इसलिए, एनसीआरबी डेटा मंत्रालय के आंकड़ों से भिन्न होता है, जो कि सांप्रदायिक घटनाओं पर आधारित है और एफआईआर नहीं है।

 

 

सरकार के स्पष्टीकरण के अनुसार, एनसीआरबी संख्या हर राज्य के मंत्रालय के आंकड़ों के बराबर या उससे अधिक होनी चाहिए।
वर्ष 2014 के लिए, हरियाणा, झारखंड, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में एनसीआरबी संख्या गृह मंत्रालय द्वारा की गई सूचनाओं की तुलना में काफी अधिक थी। लेकिन कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, गृह मंत्रालय की संख्या, एनसीआरबी द्वारा रिपोर्ट की तुलना में अधिक थी और यह संकेत देते हैं कि कुछ घटनाओं में एफआईआर दर्ज नहीं किया गया है। वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश के मामले में, एनसीआरबी ने 51 सांप्रदायिक दंगों के मामलों और समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के 26 मामले दर्ज किए। एक साथ, वे एनसीआरबी रिकॉर्ड में 77 मामलों तक जोड़ते हैं, जबकि गृह मंत्रालय ने 133 घटनाओं की सूचना दी थी।

 

Source: National Crime Records Bureau; Lok Sabha reply by ministry of home affairs

 

 

यह प्रवृत्ति 2015 में दोहरायाई गई थी, जहां 24 राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में विसंगति देखी गई थी। 2016 में 25 राज्यों / संघ शासित प्रदेशों में विसंगतियां दर्ज की गई हैं।

 

Source: National Crime Records Bureau; Lok Sabha reply by ministry of home affairs

 

गृह मंत्रालय ने 2016 में राजस्थान में 63 सांप्रदायिक घटनाओं की सूचना दी थी। एनसीआरबी ने 2016 में राजस्थान में एक भी मामला दर्ज नहीं किया था जबकि समूह के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के 22 मामले दर्ज किए गए थे।

Source: National Crime Records Bureau; Lok Sabha reply by ministry of home affairs

 

गृह मंत्रालय राज्य पुलिस से सांप्रदायिक घटनाओं पर भी डेटा प्राप्त कर सकता है उस स्थिति में किसी खास राज्य के लिए एनसीआरबी आंकड़ों में कम संख्या का सुझाव है कि सांप्रदायिक घटनाओं के कुछ मामलों में मामला दर्ज नहीं किया गया। गृह मंत्रालय और एनसीआरबी द्वारा सामंजस्य इस तरह के मुद्दों का समाधान करने में सहायता कर सकता है।

 

गृह मंत्रालय राज्य पुलिस से सांप्रदायिक घटनाओं पर भी डेटा प्राप्त कर सकता है, उस स्थिति में, किसी खास राज्य के लिए एनसीआरबी आंकड़ों में कम संख्या का सुझाव है कि सांप्रदायिक घटनाओं के कुछ मामलों में मामला दर्ज नहीं किया गया। गृह मंत्रालय और एनसीआरबी द्वारा सामंजस्य इस तरह के मुद्दों का समाधान करने में सहायता कर सकता है।

 

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(एक दशक से सूचना के अधिकार से संबंधित मुद्दों के अलावा, दुब्बदु डाटा, सूचना एवं नीतिगत मुद्दों पर लगातार काम कर रहे हैं। Factly.in आंकड़ों पर आधारित एव वेब पोर्टल है।)

 

यह लेख अंग्रेजी में 7 दिसंबर 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

 

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