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32% बुज़ुर्ग भारतीयों के नाम का 71% सरकारी धन खर्च

निष्ठा भारती,

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पांच राज्य, जहां भारत के वरिष्ठ नागरिकों की जनसंख्या के 32 फीसदी बुज़ुर्गों (60 वर्ष से अधिक आयु) से अधिक नहीं रहते हैं, उन राज्यों को पिछले चार वर्षों में केंद्र द्वारा वृद्धाश्रम के रखरखाव के लिए दिए गए 34 करोड़ रुपए में से 71 फीसदी दिया गया है। सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण में यह जानकारी सामने आई है।

 

भारत अपनी जनसांख्यिकीय लाभांश के लिए जाना जाता है, लेकिन देश के आयु बढ़ने के साथ, पिछले 10 वर्षों में वरिष्ठ नागरिकों की आबादी 36 फीसदी बढ़ी है। केंद्र द्वारा बुजुर्गों की देखभाल कार्यक्रम का बिखरा हुआ वित्त पोषण संकेत देता है कुछ राज्य, अन्य राज्यों की  –  सबसे गरीब और सबसे बद्तर तरीके से व्यवस्थित – तुलना में बेहतर तैयार है।

 

34 करोड़ रुपए में से 24 करोड़ रुपए (71 फीसद) आंध्र प्रदेश (एपी) , कर्नाटक, तमिलनाडु , ओडिशा और पश्चिम बंगाल को दिए गए हैं जहां भारतीय वरिष्ठ नागरिकों की जनसंख्या के एक-तिहाई लोग रहते हैं। यह आंकड़े सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के आंकड़ों पर किए गए विश्लेषण में सामने आए हैं।

 

इन आंकड़ों में पूरे चार वित्त वर्षों 2012-13 , 2013-14 , 2014-15 और 2015-16 (26 नवंबर , 2015 तक) के दौरान, वृद्धजनों के लिए समेकित कार्यक्रम (आईपीओपी) के तहत लक्षित वृद्धआश्रम को दी गई सहायता, वित्त पोषण और लाभार्थियों की संख्या शामिल है।

 

भारत में बुज़ुर्ग जनसंख्या, टॉप 15 राज्य

Source: Census 2011

 

आईपीओपी के माध्यम से सरकारी निधीकरण में वृद्धि आश्रम, डे केयर केंद्र और गरीब वरिष्ठ नागरिकों के लिए मोबाइल चिकित्सा इकाइयों के निर्माण एवं रख-रखाव का 90 फीसदी खर्च शामिल है। यह सामाजिक न्याय मंत्रालय के सामाजिक रक्षा ब्यूरो द्वारा प्रबंधित किया जाता है।

 

2011 के अंत तक भारत में 60 वर्ष की आयु से ऊपर लोगों की संख्या 103.8 मिलियन या 10.38 करोड़ थी। गौर हो कि 2001 में यही आंकड़े 77 मिलियन या 7.7 करोड़ थे। इन आंकड़ों में वृद्धि का कारण प्रजनन दर में गिरावट एवं जीवन प्रत्याशा में वृद्धि होना है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने मई 2016 में बताया है।

 

बुजुर्ग आबादी में वृद्धि से सरकार और नागरिक समाज संगठनों पर आवास, भोजन और स्वास्थ्य सेवा प्रदान कराने के अतिरिक्त ज़िम्मेदारी बढ़ी है। वर्तमान में, बिखरा हुआ वित्त पोषण इस ओर ध्यान की कमी को दर्शाता है।

 

वृद्धा आश्रम के लिए निधीकरण, टॉप 15 राज्य

 

Source: Lok Sabha

 

7 मिलियन वरिष्ठ नागरिकों के साथ आंध्र प्रदेश को मिला उत्तर प्रेदश के आठ गुना अधिक राशि

 

उत्तर प्रदेश, भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य, किसी भी अधिक राज्य की तुलना में 60 वर्ष से अधिक आयु वाले बुज़ुर्ग हैं (15 मिलियन या 14.86 फीसदी) लेकिन वृद्ध आश्रम के रखरखाव के लिए उत्तर प्रदेश को केंद्र से 3.22 फीसदी से अधिक राशि प्राप्त नहीं हुई है। वहीं आंध्र प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक उम्र की लोगों की संख्या 7.97 फीसदी (8 मिलियन) है – आंकड़ों में तेलंगना भी शामिल है – और आंध्र प्रदेश को उत्तर प्रदेश की तुलना में 8 गुना अधिक राशि मिली है।

 

तीन दक्षिणी राज्य – आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु- जहां 60 वर्ष के अधिक आयु के 20.77 फीसदी लोग रहते हैं, चार वित्तीय वर्षों के दौरान आईपीओपी धन राशि 52.16 फीसदी प्रप्त हुआ है।

 

बुजुर्गों की देखभाल अनुदान के लाभार्थी, टॉप 15 राज्य

Source: Lok Sabha

 

देश भर में, आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक आईपीओपी लाभार्थी हैं (5,100)। यह आंकड़े उत्तर प्रदेश के 700 लाभार्थियों से छह गुना अधिक हैं। राशि के विसंगत वितरण से सबसे गरीब और सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों को अधिक प्रभावित करता है।

 

7 मिलियन या 0.7 करोड़ बुज़ुर्ग लोगों के साथ बिहार को राष्ट्रीय कोष का केवल 0.70 फीसदी प्राप्त हुआ है। गौर हो कि वरिष्ठ नागरिकों की आबादी के संबंध में बिहार पांचवें स्थान पर है।राजस्थान में बुज़ुर्गों की 5 मिलियन आबादी है एवं राष्ट्रीय कोष का 1.1 फीसदी ही प्राप्त हुआ है।

 

बालकृष्ण मूर्ति , पीपुल्स एक्शन फॉर सोशल सर्विस – एक गैर सरकारी संगठन जो चित्तूर , आंध्र प्रदेश में दो वृद्ध आश्रम एवं एक मोबाइल चिकित्सा इकाई चलाती है – के महासचिव कहते हैं, “आईपीओपी के तहत कोई भी बजटीय प्रस्ताव, जिला, राज्य और केंद्र सरकार के बीच कई डेस्क के माध्यम से हो कर गुज़रता है जो अत्यधिक देरी का कारण बनता है एवं समय पर राशि न उपलब्ध होने के कारण स्वैच्छिक क्षेत्र की मदद करने का सरकार का उद्देश्य फीका रहता है।”

 

कर्नाटक और मध्य प्रदेश में 60 वर्ष से ऊपर के लोगों का अनुपात समान है – 5.57 फीसदी और 5.50 फीसदी – लेकिन पिछले चार वर्ष के दौरान आईपीओपी राशि के 13.88 फीसदी के साथ कर्नाटक को मध्यप्रदेश की तुलना में 13 गुना अधिक राशि प्राप्त हुआ है। इसी अवधि के दौरान मध्यप्रदेश में 1.25 फीसदी आईपीओपी लाभार्थी पाए गए हैं जबकि कर्नाटक में यही संख्या 12 फीसदी है।

 

वृद्ध आश्रम को मिली सहायता, टॉप 15 राज्य

 

Source: Lok Sabha

 

टॉप 10 वित्त पोषित राज्यों में असम एवं मणिपुर – 2.18 फीसदी वरिष्ठ नागरिकों का घर

 

ओडिशा, जो वरिष्ठ नागरिक आबादी वाले टॉप 10 राज्यों में नहीं है, को पिछले चार वर्षों में वृद्ध आश्रम के लिए दी गई राशि में से 12.53 फीसदी प्राप्त हुआ है एवं लक्षित लाभार्थियों और वित्त पोषित वृद्ध आश्रम, दोनों के ही संबंध में दूसरे स्थान पर है।

 

टॉप 10 वित्त पोषित राज्यों में असम और मणिपुर शामिल हैं जिन्हें सामूहिक रूप से राशि का 10.59 फीसदी प्राप्त हुआ है लेकिन इन दोनों राज्यों में भारत के वरिष्ठ नागरिकों की कुल आबादी में से केवल 2.18 फीसदी ही रहते हैं।

 

वरिष्ठ नागरिकों की सूची में, 4 मिलियन या 0.4 करोड़ बुज़ुर्ग आबादी के साथ गुजरात दसवें स्थान पर है लेकिन पिछले चार वर्षों में बुज़ुर्गों की सहायता के लिए गुजरात को कोई राशि नहीं प्राप्त हुई है। इसी संबंध में केरल 11वें स्थान पर है एवं  2012-13 और 2014-15 में कोई राशि नहीं मिली है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि, नई शुरू की ऑनलाइन अनुदान सहायता आवेदन तंत्र से कागजी कार्रवाई में कटौती नहीं हुई है; इससे पहले से ही  “थकाऊ” प्रक्रिया में संभावित बिचौलियों का काम शुरु हो गया है।

 

सुखविंदर सिंह, ज्ञानदीप शिक्षा समिति के प्रबंधक है कि भटिंडा, पंजाब में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक डे केयर सेंटर चलाते हैं। सिंह का कहना है, “मुझे परामर्श फर्मों से लगातार फोन कॉल और ई-मेल आते हैं जो मेरे आवेदन को आनलाईन दाखिल करने नौकरशाही के विभिन्न स्तरों पर मेरे लिए लॉबी का प्रस्ताव देते हैं।”

 

पिछले कुछ वर्षों में आईपीओपी के तहत वृद्धा आश्रम की संख्या में गिरावट आई है : ​​वर्ष 2012-13 में केंद्र सरकार द्वारा 269 केंद्र वित्त पोषण मिला था, जबकि 2013-14 में यह गिरकर 207 एवं 2014-25 में 187 हुआ है।

 

पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार की ओर से दायर एक जनहित याचिका के जवाब में, सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2016 में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को नोटिस जारी किया था जिसमें ज़ोर दे कर कहा गया था कि हालांकि बुज़ुर्गों के लिए तमाम कानून और नीतियां हैं लेकिन उन्हें अनुचित तरीके से लागू किया गया है।

 

(भारती अजमेर, राजस्थान स्थित स्वतंत्र शोधकर्ता है।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 07 जून 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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