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644 या 1227? गृह मंत्रालय के आंतरिक आंकड़ों में मतभेद

राकेश दुब्बुदु,

Factly 620

 

गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में भारत में 644 साम्प्रदायिक दंगों एवं घटानाएं हुई हैं। लेकिन यदि इसी संबंध में राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो ( एनसीआरबी) – गृह मंत्रालय का एक सहायक – द्वारा जारी आंकड़ों पर नज़र डालें तो 2014 में साम्प्रदायिक दंगें एवं घटनाओं की संख्या 1227 बताती हैं।

 

Factly.in , एक डाटा- पत्रकारिता पोर्टल, द्वारा रिपोर्ट की गई यह आकंड़ों की विसंगति महत्वपूर्ण है क्योंकि मौजूदा समय में  असहनशीलता एक गरम मुद्दा है एवं इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है कि मई 2014 में नरेंद्र मोदी के देश की कमान संभालने के बाद से साम्प्रदायिक घटनाओं की संख्या में वृद्धि हुई है या कमी आयी है।

 

अब गृह मंत्रालय ने सांप्रदायिक दंगों पर अपने एवं एनसीआरबी के आंकड़ों में अंतर पाए जाने के कारणों का पता करने लिए जांच के आदेश दिए हैं।

 

लोकसभा में पेश आंकड़ों के आधार पर इंडियास्पेंड ने पहले ही अपनी रिपोर्ट में बताया है कि किस प्रकार कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश भारत में सांप्रदायिक घटनाओं का गढ़ है।

 

क्या जिस प्रकार भड़काऊ भाषण को सूचीबद्ध किया जाता है वह ही आंकड़ों में है अंतर का कारण?

 

भड़काऊ भाषणों का ” घटनाओं” के रूप में देखा जाना एवं एनसीआरबी के आंकड़ों में हुए दंगों के तहत सूचीबद्ध होना अधिक संख्या का कारण हो सकता है। जबकि हो सकता है कि ऐसी घटनाओं का कोई ज़िक्र एमएचए के गृह मंत्रालय डिवीज़न में नहीं किया गया हो।

 

फिर भी, एनसीआरबी की संख्या हर राज्य में अधिक होनी चाहिए।

 

आंकड़ो में विसंगति का केवल एक विश्वसनीय कारण राज्य पुलिस और खुफिया विभागों द्वारा दोषपूर्ण रिपोर्टिंग है जिससे सरकारी आंकड़ों की शुद्धता पर सवाल उठ रहे हैं।

 

उत्तर प्रदेश में है आंकड़ों में सबसे अधिक अंतर

 

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में साम्प्रदायिक घटनाओं की संख्या 1227 दर्ज की गई है जिसका शिकार 2,000 लोग बने हैं।

 

साम्प्रदायिक घटनाओं की सूची में 349 घटनाओं के साथ झारखंड सबसे पहले स्थान पर है, 207 घटनाओं के साथ हरियाणा दूसरे, 120 के साथ तमिलनाडु तीसरे, 104 के आंकड़ों के साथ पश्चिम बंगाल चौथे स्थान पर है। महाराष्ट्र में ऐ घटनाओं के आंकड़े  99 , बिहार में 59 और गुजरात में  57 दर्ज की गई है।

 

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड, हरियाणा , तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में साम्प्रदायिक घटनाओं की संख्या अधिक दर्ज नहीं की गई है।

 

दरअसल, गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इन प्रत्येक राज्य में साम्प्रदायिक दंगों की संख्या 20 से भी कम दर्ज की गई है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों को माने तो उत्तर प्रदेश में दंगों की संख्या सबसे अधिक, 133 दर्ज की गई है जबकि 51 सांप्रदायिक दंगों की संख्या के साथ एनसीआरबी सूची में उत्तर प्रदेश आठवें स्थान पर है।

 

हरियाणा, तमिलनाडु , पश्चिम बंगाल, तेलंगाना , गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में स्पष्ट रुप से आंकड़ों में अंतर पाए गए हैं।
 
2014 में हुए दंगों (एनसीआरबी डाटा)
 

 

दोनों के ही आंकड़ों में पीड़ितों की संख्या समान बताई गई है: गृह मंत्रालय 2016 ; एनसीआरबी , 2001। समानता के दूसरे अंक भी हैं।

 

गृह मंत्रालय और एनसीआरबी के आंकड़ों में 13 राज्यों में किसी प्रकार के दंगे नहीं होने पर सहमती

 

गृह मंत्रालय और एनसीआरबी के आंकड़ों में केवल एक बात पर सहमती है। दोनों के ही आंकड़े 13 राज्यों में किसी भी प्रकार के दंगे नहीं होने की सूचना देते हैं।

 

दोनों के आंकड़ों के बीच 11 राज्यों में दोहरे अंक का अंतर है एवं 10 राज्यों में महत्वपूर्ण अंतर है। गृह मंत्रालय ने झारखंड में केवल 10 दंगों के होने की सूचना दी है जबकि एनसीआरबी ने इसी समय में झारखंड में 349 घटनाएं होने की सूचना दी है।

 
सांप्रदायिक घटनाएं 2014 – गृह मंत्रालय के आंकड़े बनाम एनसीआरबी डेटा
 

 

Source: National Crime Records Bureau and Ministry of Home Affairs data.

 

किस प्रकार एनसीआरबी ने आंकड़ों के संग्रह का बदला है तरीका

 

एनसीआरबी , अपराध, अपराधियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का एक सुरक्षित राष्ट्रीय डेटाबेस अनुरक्षण करती है। एनसीआरबी राज्य पुलिस विभाग से आंकड़े एकत्रित कर भारत में होने वाले अपराध का वर्षिक संकलन करती है।

 

2014 में एनसीआरबी ने संग्रह और अपराध के आंकड़ों के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं।

 

अपराध के आंकड़ों के संग्रह के लिए अपनी नई टेम्पलेट में, धारा 147, 148, 149, 150 और भारतीय दंड संहिता ( आईपीसी) की 151 के तहत परिभाषित रूप में दंगों पर एक खंड है।

 

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धारा 153 ए और भारतीय दंड संहिता की 153B के तहत परिभाषित अपराधों पर डेटा के लिए एक अलग अनुभाग है।

 

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2014 से पहले,  दंगों से संबंधित सभी डेटा एक ही शीर्ष , दंगों, के तहत एकत्र होते थे। 2014 के बाद से दंगों के आंकड़े कई अलग-अलग उप-शीर्ष जैसे कि सांप्रदायिक दंगे, औद्योगिक दंगों और राजनीतिक कारणों से दंगों आदि के तहत वर्गीकृत किए जाते हैं।

 

धारा 153 ए और 153B के तहत एकत्र किए गए आंकड़ों को सांप्रदायिक दंगों के रूप में गिना जाता है।

 

एनसीआरबी को आंकड़े राज्य पुलिस विभाग से मिलते हैं। यह आंकड़े से प्रथम सूचना रिपोर्ट ( एफआईआर) में उल्लेख कानून के वर्गों पर आधारित होती हैं।

 

एनसीआरबी, अपराधों की गिनती के लिए प्रिंसिपल ऑफेंस रुल का भी अनुसरण करती है। इसलिए, एक ही मामले में दर्ज की गई कई अपराधों में से केवल सबसे जघन्य अपराध को ही गिनती में लिया जाएगा जो कि हुए केवल एक ही अपराध को दर्शाता है।

 

( दुब्बदु एक दशक से सूचना के अधिकार से संबंधित मुद्दों पर काम कर रहे है।  Factly.in सार्थक सार्वजनिक डेटा बनाने के लिए समर्पित है। )

 
यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 07 दिसंबर 2015 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 
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