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भारत की मायानगरी मुंबई नगर निगम के कुछ आवंटित धन के बयोरे अंधकार में

अनुराग गुम्बेर,

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ग्रेटर मुंबई नगर निगम (एमसीजीएम) के आयुक्त द्वारा प्रस्तुत 2014-15 के बजट के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि 75% से अधिक अर्जित या प्राप्त राजस्व  और 50% से अधिक कुल खर्च का ब्यौरा अस्पष्ट रहता है ।

 

मुंबई बजट  के अंतर्गत जो चार बजट शीर्ष  अर्थात् ए, बी, ई और जी शामिल हैं  जो आगे नीचे उल्लेखित निधि कोड में विभाजित हैं । हालाँकि यह विभाजन की यह  राशि किन किन  विभिन्न  सेवाओं पर खर्च की जाती  है, होना बहुत आवश्यक  है, लेकिन एमसीजीएम ने नागरिकों को प्रदान की गई सभी सेवाओं का  विस्तृत विभाजन प्रदान करने में केवल आधा अधूरा सा काम किया है।

 

 मुंबई के बजट का विश्लेषण (को समझते हैं ) 

 

 

महाराष्ट्र में संविधान की अनुसूची 12 के अंतर्गत  उल्लेखित 18 कार्यों को 1994 में शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए न्यागत किया गया है।  एमसीजीएम द्वारा यह कार्य मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 के तहत किए जाते हैं  जबकि अन्य शहरी स्थानीय निकायों में यही कार्याधिकार, बंबई प्रांतीय नगर निगम अधिनियम, 1948 के अंतर्गत दिए गए हैं ।

 

बजट मदों के तहत, केवल चार प्रमुख कार्य, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल आपूर्ति और सीवरेज और स्लम क्लीयरेंस  स्पष्ट रूप से दिखते (उल्लेखित ) हैं। अन्य कार्य जैसे पर्यावरण, पैतृक सम्पत्ति और योजना आयोजन वगैरह निधि कोड 11. के तहत आम बजट के साथ कर दिया गया है।  हालाँकि एमसीजीएम बजट के अंत में शीघ्रता से समझने के लिए एक पाई चार्ट के रूप में राजस्व के स्रोत और खर्च का ब्यौरा दिया जाता है लेकिन बजटीय जानकारी छुपाने की प्रथा नागरिकों को सरकार से दूर रखती है और एक तरह से भागीदारी बजट पर प्रतिबंध लगा देती है ।

 

इस तरह के व्यवहारों को  राज्य सरकार द्वारा नगर निगम अधिनियमों में संशोधन के माध्यम से या एमसीजीएम के भीतर ही कार्यकारी कार्रवाई के माध्यम से,  संशोधित किया जाना चाहिए। प्रदान की गई सेवाओं पर राजस्व और व्यय का विस्तृत विश्लेषण ना केवल भागीदारी शासन में सुधार लाने के लिए,अपितु  शहर के लिए ऐसी योजना के आयोजन के लिए आवश्यक है जिससे (दीर्घकाल ) लम्बे समय ( लम्बे अंतराल ) में जीवन की गुणवत्ता में सुधार आएगा ।

 

 मुंबई नगर आय, 2013 से 2015

 

 

मुंबई नगर व्यय, 2013 से 2015

 

 

(अनुराग गुम्बर नागरिकता और लोकतंत्र के लिए काम कर रहे जनाग्रह केंद्र में  एक एसोसिएट वकील  के रूप में कार्यरत हैं। जनाग्रह बंगलुरु में आधारित  एक गैर-लाभकारी संस्था है जो  भारत के कस्बों और शहरों में जीवन की गुणवत्ता को बदलने की दिशा में प्रयास कर रही है।)
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