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खुलासा: डॉकलैंड्स का पुनरुद्धार, मुंबई के लिए आखिरी मौका

एलिसन सलदान्हा,

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आधी सदी से अधिक समय से  मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के अवांछनीय प्राचीर भारत के ढहते, वित्तीय बृहन्नगर की रहस्य्मयी, दक्षिण-पूर्वी सीमा को चिह्नित करते आए हैं।

 

बेलार्ड एस्टेट के आलीशान, औपनिवेशिक युग के भवन, हाल ही में पुनर्निर्मित सड़को पर धातु की बनी रेंगती रेल की पुरानी पटरियाँ , और गोदामों की नुकीली  छतों की अंतहीन पंक्तियाँ,   भारत के तत्कालीन प्रमुख वैश्विक बंदरगाह मुंबई हार्बर,दरगाह की भव्यता की थोड़ी सी झलक भर देती हैं।

 

अपने  भव्य, पुराने बंदरगाह से घिरा , मुंबई,  शहर के इस प्रवेश द्वार की शहर के लिए  और भारत की 20 वीं सदी की अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक भूमिका और योगदान से अनजान है।

 

इस प्राचीर के पार की दुनिया में रूचि अभी हाल  ही में कुछ बढ़  गई अचल सम्पत्ति उद्योग की तलाशती आँखे  विश्व के सबसे भीड़ भरे शहरों में उपलब्ध  विकल्पों से थक कर इस पर आ कर थम गईं । एक दशक से अधिक समय से इस 142 साल पुराने बंदरगाह को उसके पारंपरिक उपयोग से हटा कर उसके पुनरुद्धार का प्रस्ताव उठता है और फिर वापस ले लिया जाता है।

 

पोर्ट ट्रस्ट – डॉकलैंड्स , मुंबई का सबसे अमीर भूमि बैंक का मालिक – किसी भी अन्य उपयोग के लिए अपनी जमीन देने की मात्र सोच पर अपनी मुट्ठी भींचने के लिए प्रसिद्ध है।

 

नई सरकार आने के कगार  पर है और  भरभराते हुए इस शहर के विशाल पुनरुद्धार की नई उम्मीद के साथ,  दरवाज़ों पर एक नई हलचल हो रही है। ऎसी एक दस्तक को हौसला मिला है उस ऊंचे  पूर्वी फ्रीवे से जिसका हाल ही में अनावरण हुआ है और जिसे वे लोग इस्तेमाल कर रहे हैं जिन्हे  मुंबई से जल्द बाहर निकलना  होता है और जो  अब तक  छिपे  पूर्वी समुद्र तट और इससे जुडी संभावनाओं की पहली निरंकुश  झलक प्रस्तुत करता है।

 

 

मुंबई के बंदरगाह की  ऐतिहासिक छवियाँ

स्रोत: मुंबई पोर्ट ट्रस्ट द्वारा ” पोर्ट ऑफ बॉम्बे” (1937), शहर के  इतिहासकार दीपक राव द्वारा प्रदान की गई

नोट: छवियों को ब्राउज़र में लोड होने में एक या दो मिनट लग सकते हैं ।

 

 पूर्वी तट के वादे

 

सामूहिक रूप से, पोर्ट ट्रस्ट की भूमि 752.24 हेक्टेयर में फैली  हुई  है या मोटे तौर पर कहा जाए तो, मुंबई के दक्षिणी मूल भाग की ओर  द्वीप शहर के एक आठवें हिस्से में , जो कभी पुराने  बंबई शहर की सीमा होती थी। डॉकलैंड्स दरअसल 14 किमी तक सागर तट के साथ साथ सड़क और रेल के जाल के रूप में फैला हुआ है ।

 

यह अभी भी भारत का सबसे बड़ा बहु प्रयोजन प्रमुख बंदरगाह है और  थोक तरल पदार्थ से कंटेनर माल तक किसी भी तरह के सामान  की शिपिंग से निपटने में सक्षम है । लेकिन फिर भी आज, यह देश के समुद्र जनित व्यापार का महज 10 फीसदी ही संभालती है।

 

लगभग तीन दशक पहले शहर की सीमा के बाहर औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने से और  1989 में  मुंबई पोर्ट से खाड़ी के पार, जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह के आरम्भ होने के कारण , बंदरगाह और शहर के संबंध टूटने लगे  और पोर्ट (पत्तन) का तीव्रता से क्षय होता चला गया ।

 

शहरी डिजाइन अनुसंधान संस्थान (UDRI) और वास्तुकला के कमला रहेजा विद्यानिधि संस्थान (KRVIA), द्वारा  मुंबई के पूर्वीतट पर किए एक अध्ययन में बंदरगाह के एक ऐतिहासिक विश्लेषण के अनुसार बंदरगाह की भूमिका में आई यह गिरावट  शहर की औद्योगिक क्रांति के बाद के समय की ओर प्रगति का संकेत है ।

 

“भूमि उपयोग अब काफी हद तक बंदरगाह संचालन क्षेत्र, कार्गो भंडार और बड़े विनिर्माण इकाइयों तक सीमित रह गया है जो शहर की अन्य गतिविधियों से संबंधित नहीं हैं,” 2005 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार । तीव्रता से फलते फूलते अचल संपत्ति उद्योग से प्रभावित मुंबई शहर  वाणिज्यिक और सेवा गतिविधि  पर केंद्रित  है और पूरी तरह से भारत की वित्तीय राजधानी के रूप में अपनी भूमिका में लीन है।

 

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Timeline of Mumbai Port development: Click the image above to see the full version.
Source: A Study on the Eastern Water Front of Mumbai by UDRI and KRVIA

 

मुंबई के घुटते  दायरे का विस्तार करने के लिए तट को मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार की मंशा  के बारे में केंद्रीय नौवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा की गई  घोषणा को कुछ  उत्साह और  कुछ घबराहट के साथ लिया गया था।

 

डॉकलैंड्स को  खोलना यह मुंबई का पहला प्रयोग नहीं है खुद को पुनर्निर्मित करने का। आखिरी प्रयास एक अच्छा अनुभव नहीं रहा।

 

मिलों की भूमि के दुखी मामले

 

1990 में, बंद पड़ी कपड़ा मिलों की भूमि (दक्षिण-मध्य मुंबई के बीचों बीच लगभग 600 एकड़)  ने मुंबई की मुक्त एकीकृत शहरी योजना के लिए जगह के रूप में मे पहला मौका  प्रदान किया था। विश्व के सभी शहर खुद को पुनर्निर्मित करते रहते हैं और यह एक भारतीय शहर के लिए पहला महान अवसर था।

 

मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने प्रख्यात वास्तुकार चार्ल्स कोरिया के तहत एक विस्तृत प्रस्ताव दिया था जिसमे तीन भागों में समान रूप से सरकारी आवास, खुली जगह और वाणिज्यिक गतिविधि के लिए भूमि को विभाजित किया गया था ।

 

हालांकि, कमज़ोर  राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण इस  योजना ने निजी हितों के लिए आगे घुटने टेक दिए और एक और शहर एक और अनियमित निर्माण  के भंवर में फंस गया।  ज्यादातर भूमि या तो मिल मालिकों ने हड़प ली या  व्यावसायिक हितों के लिए डेवलपर्स को बेच दी गई । 250,000 से अधिक मिल मजदूरों अपनी  आजीविका और आवास के स्रोत से विस्थापित हो गए ।

 

वास्तुकार और शहरी योजनाकार नीरा अदरकर जिन्होंने मिल मजदूरों के अधिकारों के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है,  का कहना है कि “मिलों की भूमि बंबई की सम्पन्नता की जड़ थीं” । “यह एक संसक्त मिश्रित उपयोग वाला प्रतिवेश था-  एक निवास परिवेश , काम , सहायक उद्योगों एवं सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के लिए एक स्थान जो स्थानीय जीवंत  गिरणगाव(शाब्दिक अर्थ में , मिलों का गांव) के  प्रदर्शन और दृश्य कला संस्कृति  का पोषण करता था “।  जमीन और रोजगार के विनियोग ने जीवन के इस सूक्ष्म जगत को मिटा दिया। ”

 

अपनी दुसरे अवसर के लिए सरकार ने  मुंबई पोर्ट भूमि विकास समिति (MPLDC) का गठन किया है जो एक तट उत्थान प्रस्ताव का ऐसा खाका तैयार करेगी जिससे मुंबई में गिरती जीवन गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके ।  पोर्ट ट्रस्ट की पूर्व अध्यक्ष रानी जाधव, जो शहरी नियोजन विशेषज्ञों की एक टीम का नेतृत्व करते हुए इस  क्षेत्र के सर्वेक्षण के बाद इसकी जरूरतों और हितधारकों की मांग का आकलन कर एक योजना , नौवहन मंत्री को प्रस्तुत की  है।

 

इण्डिया स्पेंड ने इस रिपोर्ट को देखा है जो अभी तक जनता तक नही पहुंची है और इसमें पुनरोद्धार के लिए  पोर्ट ट्रस्ट भूमि के 721.24 हेक्टेयर का नक्शा दिया गया है।  इसमें से अधिकांशतः  अनौपचारिक बस्तियों, भंडारण और विनिर्माण शेड  के कब्ज़े में हैं; शहर भर में ट्रस्ट के अन्य भूखंडों को (टिटवाळा, कल्याण, थाल घुंडी और टोनी अल्तमाउंट रोड में अध्यक्ष का बंगला) इससे बाहर रखा गया है।

 

खुली ,हरी और सबसे जुड़ी हुई -मुंबई के लिए आखिरी अच्छा मौका

 

चक्की-भूमि योजना बिगड़ने के बाद, बंदरगाह न्यास योजना भारत की वित्तीय राजधानी के लिए अपने नागरिकों को काम और खेलने के लिए खुले स्थान की सुविधा प्रदान करने का आखिरी, सुनहरा अवसर  है।

 

यह योजना मुंबई की आगामी 2014-2034 विकास योजना के साथ एकीकृत है और यह प्रस्तावित करती है कि पूर्वी समुद्र तट को पुनर्निर्मित किया जाए उन मूल्यों के साथ जिसे  “बुद्धिमान शहरीकरण” कहते हैं ,जिसको समझने के लिए कुछ प्रमुख शब्दों जैसे खुला, हरा और सब तरफ से जुड़ा हुआ पर बल देने की ज़रूरत है।

 

‘खुला’ यानि सार्वजनिक उपयोगों के लिए खुला जैसे मनोरंजन, संस्कृति, पर्यटन और सामुदायिक सुविधाओंके संदर्भ में । जुड़ा हुआ यानि एकाधिक परिवहन साधनों के माध्यम से ‘कनेक्टेड’: पैदल पथ , साईकिल रास्तों,मेट्रो ,घाट और बस द्वारा रैपिड ट्रांजिट से  । ‘हरा ‘, पर्यावरण की दृष्टि से भूमि का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा ।

 

योजना के अनुसार डॉकलैंड्स का 30% खुले स्थान के लिए छोड़ दिया जाएगा , एक और 30% परिवहन और अवसंरचना के लिए और 40%  मिश्रित व्यवसायों के  उपयोग जैसे विकास, मत्स्य पालन उद्योग, कार्यालय और खुदरा बाजार और एक वित्त केन्द्र के लिए रखा जाएगा।

 

कैसे मुंबई के पूर्वी तट का अभी उपयोग किया जाता है (हेक्टेयर में)

 

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Source: MPLDC report

 

रानी जाधव समिति के एक सदस्य के मुताबिक, यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहता है  तो मुंबई में खुली जगह का प्रति व्यक्ति अनुपात  आज के 0.99 वर्ग मीटर प्रति व्यक्ति से लगभग तीन गुना हो जाएगा ।

 

सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमने विशिष्ट 300 एकड़ जमीन तक खुले स्थानों के लिए योजना बनाई है … और हमे खुली जगह  प्रति व्यक्ति अनुपात में 3 वर्ग मीटर तक की वृद्धि करने की उम्मीद है – जो 13 और अधिक अंडाकार मैदान (मुंबई शहर के बीचों बीच एक विशाल, हरी 22 एकड़ जगह ) जोड़ने के बराबर है।

 

प्रस्ताव में  इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी प्रावधान किया गया है जैसे लंदन आई -लाइक वेधशाला पहिए का  निर्माण, 500 कमरों का एक अस्थायी होटल, एक लक्जरी क्रूज टर्मिनल, एक मरीना, या पानी के नीचे एक मछलीघर का निर्माण करना ।

 

योजना में राज्य और केंद्र सरकारों को 1,000 करोड़ रुपये की प्रारंभिक कोष जुटाने के लिए एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) का भी प्रस्ताव दिया गया है। सदस्य का  कहना है कि, “सार्वजनिक वस्तुओं के कुप्रबंधन से बचने के लिए अवसंरचना विकास के लिए काफी सार्वजनिक धन का प्रावधान होना आवश्यक है । हम मेट्रो की तरह पीपीपी परियोजनाओं में  नाक में दम कर देने वाले  विवादों का सामना नहीं करना चाहते हैं “।

 

एमपीएलडीसी ने भी पूर्वी समुद्र तट पर राजहंस (फ्लेमिंगो) से भरी कीचड़युक्त भूमि , और औपनिवेशिक युग की विरासत संरचनाओं जैसे और घड़ियाल गोदी  क्लॉक टॉवर, बेलार्ड इस्टेट  (19 वीं सदी में बनाया गया है मुंबई का पहला व्यवसायिक जिला) सेवरी किला और अन्य औद्योगिक विरासत संरचनाऍ को संरक्षित करने की योजना बनाई है ।

 

“हम  10 साल तक के कार्यान्वयन चरण को  देख रहे हैं,और इसमें  पोर्ट ट्रस्ट भूमि पट्टेदारों के साथ मुकदमेबाजी से होने वाली प्रत्याशित देरी नहीं  जोड़ रहे हैं ” एमपीएलडीसी के एक सदस्य ने कहा। “हम साथ-साथ (बजाय एक के बाद एक) निष्पादन का प्रस्ताव कर रहे हैं; भौतिक प्रगति को देखकर विश्वास पैदा होगा और परियोजना को अधिक समर्थन मिलेगा। ”

 

प्रचुर ग्लोबल उदाहरण तो हैं , लेकिन मुंबई अद्वितीय है

 

लंदन, न्यूयॉर्क, टोरंटो, सिडनी, सिंगापुर, बार्सिलोना

 

दुनिया भर के उन शहरों की सूची जिन्होंने क्षय होते हुए डॉकलैंड्स का पुनरुद्धार किया है बहुत लंबी है। यह प्रक्रिया, 1960 के दशक में  वैश्विक वाणिज्य और  शिपिंग के विस्तार से शुरू हुई और शहरों के भीतर बसे बंदरगाहों से बहुत आगे निकल गई। जैसे जैसे नए, विशाल बंदरगाहों का निर्माण होता गया, पुराने डॉकलैंड्स अनुपयोग का शिकार होते गए।

 

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Source: (1) & (2) for London, (3) New York, (4) Sydney, (5) Toronto

 

इसकी योजना तैयार करने में, एमपीएलडीसी ने पूर्व की ओर ‘स्मार्ट सिटी’ के उदाहरणों की तरफ देखा जहां हांगकांग, सिंगापुर, कुआलालंपुर और (कुछ हद तक) ऑस्ट्रेलिया जैसे डिजिटल प्रौद्योगिकी दक्षता के द्वारा लागत और संसाधन उपयोग में कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है ।

 

मुंबई का प्रति व्यक्ति घनत्व 270 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर है जबकि यह  न्यूयॉर्क में 106 , सिंगापुर में 83  और हांगकांग में  64  है।

 

” विश्व के अन्य विकसित देशों के शहरों के विपरीत जहाँ  वृहत खली इलाकों में सुविधाएँ  बनाई जाती हैं ताकि आबादी उन क्षेत्रों  की तरफ रहने के लिए प्रोत्साहित हो हमारे देश की आबादी स्थानांतरण  के लिए जगह की तलाश में रहती है, ” समिति सदस्य ने कहा। “कनेक्टिविटी यहां सबसे बड़ा आकर्षण है। इसलिए आवास और वाणिज्य के अवसर पैदा करने की जगह  सार्वजनिक परिवहन  के लिए बुनियादी ढांचे और खुली खुली जगह पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। और ऐसे ही उस  क्षेत्र में आर्थिक हितों का अपने आप विस्तार होता जाएगा । ”

 

सदस्य ने बताया कि मुंबई  मुख्य रूप से दो रेलवे लाइनों के साथ साथ, विस्तृत होती चली गई है, दक्षिणी छोर पर घाट के पास से दो तरफ़  निकलती गई है ।

 

शहर के लिए पहली क्षेत्रीय योजना 1973 में बनी जिसमें मुंबई की बढ़ती भीड़ से निपटने के लिए नवी (नई) मुंबई के सृजन की परिकल्पना की गई, लेकिन इसके विपरीत तेजी सेवसई-विरार, मीरा-भायंदर, कल्याण आदि  रेलवे गलियारों के साथ साथ  अनियोजित विकास होता देखा गया ।

 

अतः, डॉकलैंड्स योजना इससे  बेहतर समय पर नहीं आ सकती थी । फिर भी, यह सिर्फ एक योजना ही है। इसके आगे बहुत सी गंभीर बाधाएँ  हैं।

 

तत्काल उत्थान के लिए उपलब्ध भूमि: 3%

 

पोर्ट ट्रस्ट द्वारा किराए पर दी गई भूमि पर फिर से कब्ज़ा करना इस भव्य डॉकलैंड्स-कायाकल्प योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

 

भार रहित भूमि के कुछ छोटे पार्सल के अतिरिक्त अधिकृत  किरायेदारी समझौतों के पट्टे अधिकांशतः 15 महीने से 99 साल तक के हैं , ज्यादातर भूमि पर या तो अनधिकृत (उप-दो) किरायेदारी समझौते हैं या केंद्रीय एजेंसियों और निगमों का कब्ज़ा है। पट्टेदारों में से कुछ हैं: बंबई यॉट क्लब, रेडियो क्लब, टाटा समूह का  ताज महल पैलेस और टॉवर, हिंदुस्तान यूनिलीवर, और रिलायंस समूह (अनिल अंबानी)। इनमें से कोई भी आसानी से या बिल्कुल, जल्दी ही स्थानांतरण नहीं  करने वाला है ।

 

विभिन्न पट्टों के तहत मुंबई पोर्ट ट्रस्टकी भूमि (हेक्टेयर में)

 

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Source: MPLDC report

 

भूमि का मात्र 3 प्रतिशत टुकड़ों में बटा हिस्सा , तत्काल उत्थान के लिए खाली और उपलब्ध है।

 

रिपोर्ट के अनुसार कई  पट्टेदारों ने बहुत सी संविदात्मक शर्तों का उल्लंघन किया है और उन पर  भुगतान की राशि भी बकाया है।

 

सदस्य का कहना है कि “ट्रस्ट इन उल्लंघनों के लिए नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पहले से ही कर रहा है और होने वाली पुनर्विकास योजना से  पट्टेदारों को अवगत कर रहा है। “कानूनी उलझनों की वजह से होने वाली देरी को कम करने के लिए, हम एक विशेष फास्ट ट्रैक अदालत में लीज समाप्ति के उल्ल्ंघन करने  वाले ऐसे सभी मामलों को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव कर रहे हैं।”

 

क्यों गोदी के कर्मचारियों और निवासियों को शक है ?

 

जैसे जैसे योजना बढ़ रही है वैसे वैसे, इस क्षेत्र के कर्मचारियों और निवासियों के बीच भय और संदेह भी बढ़ रहा है।

 

“बॉम्बे शहर बनने से पहले एक बंदरगाह था,” मारुति विश्वासराव , मुंबई पोर्ट ट्रस्ट डॉक्स और जनरल कर्मचारी संघ के सचिव कहते हैं । ” इसके बावजूद कि पिछले कुछ दशकों में, हमारी कर्मचारियों की संख्या 40,000 कर्मचारियों से कम कर महज 11,500 कर दी गई है ,हम फिर भी राष्ट्रीय स्तर पर बंदरगाह की चौथी रैंक बनाए रखने के लिए 60 लाख टन कार्गो का सालाना प्रबंध कर रहे हैं।”

 

संघ ने अब मांग की है कि  तीन बंदरगाहों (प्रिंस पत्तन , विक्टोरिया पत्तन  और इंदिरा पत्तन) पर कार्य जारी रखा जाए और तट-उत्थान योजना में 250 एकड़ जमीन पर  सभी कर्मचारियों और 36,000 पेंशनरों को घर आवंटित किया जाए ।

 

हालांकि समिति सोचती है इतने आवासों  की मांग के कारण  भूमि का एक बड़ा हिस्सा इसी में चला जाएगा और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए बहुत कम जगह रह जाएगी। पोर्ट ट्रस्ट ने पहले से ही सामाजिक संस्थानों (स्कूलों / अस्पतालों) की स्थापना के साथ-साथ अपने कर्मचारियों के (7,000 कर्मचारियों के लिए 122 एकड़) आवास के लिए काफी इंतजाम किया हुआ  है।

 

विश्वासराव कहते हैं यूनियन समझौता करने के लिए हमेशा तैयार हैं। “हम जनता की भलाई के लिए किए जाने वाले विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन मरीना , फ्लोटल्स , और क्रूज टर्मिनल [जो केवल] जो सिर्फ अल्पसंख्या में विशिष्ट – अमीर ही इस्तेमाल कर सकते हैंके निर्माण के बदले में इन  कर्मचारियों की अपनी  कुशल आजीविका खोने का मामला है ” उन्होंने कहा।

 

योजना बहुत समय से  तट से कुछ दूरी पर किनारे की ओर कंटेनर टर्मिनल का निर्माण करने के एक  2,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को बरकरार रखे हुए है, लेकिन जिनकी नौकरियाँ  इस वजह से खत्म हो जाएंगी उनकी पुनरकौशल निर्माण  के लिए योजनाएँ  अस्पष्ट  है।एमपीएलडीसी सदस्य यह आश्वासन ज़रूर देते हैं कि   इस तरह के  प्रावधान ज़रूर किए जाएंगे ताकि उन कारोबारों को बढ़ावा मिले जिनमे इन्हीं  “क्लीनर” उद्योगों के समान  कौशल  इस्तेमाल किए जा सके।

 

रिपोर्ट केवल बहुत तीखे शब्दों में  कहती है कि अवैध  और प्रदूषण फ़ैलाने वाले चल रहे, पोत प्रभांजक , कोयला हैंडलिंग और रॉक फॉस्फेट जैसे  उद्योगों को बंद कर दिया जाएगा

 

” लेकिन यह बहुत लापरवाहीवाली बात होगी अगर जीविका और शहर की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले गहरे प्रभावको देखे बिना इन उद्योगों को  बंदकरने की बात की जाए,” यह कहना है अरविंद उन्नी का, जो एक  गैर सरकारी संगठन हमारा शहर विकास नियोजन (हमारे शहर की प्रगति समिति)  से हैं, यह संस्थान डॉकलैंड्स से  प्रभावित वंचित दलों के साथ जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है ।

 

मिल मजदूरों की मांगों को याद करते हुए अदरकर कहते हैं  , “उस समय, कार्यकर्ताओं ने प्रस्ताव रखा था कि  चार्ल्स कोरिया समिति एक  औद्योगिक एस्टेट बनाने के लिए 50 प्रतिशत मिल-मालिकों को एक-तिहाई भूमि पर कब्जे आवंटित कर दे । इसमें  भारी पूँजी लगाने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन तब भी  ‘मिल्स बंद होने से खोए कौशल समूह  में वृद्धि कर सकता था। इस बात का ध्यान गोदी कर्मचारियों के पुनर्वास की बातचीत करते समय रखना चाहिए। ”

 

हालाँकि रानी जाधव रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर झुग्गी बस्तियों का ज़िक्र नहीं करता है, लेकिन अनुमान है कि  मोटे तौर पर 14,000-16,000 अनधिकृत संरचनाए इतने वर्षों में बंदरगाह में उग आई हैं ।  इस प्रकार इस योजना के अंतर्गत  इस क्षेत्र में 150,000 से अधिक निवासियों का पुनर्वास करना होगा ।

 

“हम पिछली पुनर्विकास योजनाओं की गलतियों,  जिनके कारण खराब गुणवत्ता वाले आवासों का पेचीदा निर्माण हुआ है, उनसे बचना चाहते हैं,” एमपीएलडीसी के एक ने कहा। “हम  झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोगों को परियोजना से प्रभावित व्यक्तियों के रूप में देखते हैं जिन्हे  शहर की सीमा के भीतर,उनके कार्यस्थल के समीप  और सामाजिक संस्थाओं के आसपास उपयुक्त पुनर्वासित  करने की आवश्यकता है।”

 

नई  विकास संहिता : क्या यह  वास्तव में संभव हैं?

 

तटीय नियम।   फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई)। राजहंस।

 

जब डॉकलैंड्स योजना वास्तव में प्रभाव में आएगी तब कई परस्पर विरोधी कानून और ज़रूरतें सामने आएँगी।

 

कुछ बहुत प्रभावशाली रूप से उग्र  भी हैं जैसे एफएसआई कानून को त्यागने का प्रस्ताव , वह कानून जो भूमि खंडो पर निर्माण की हद निर्धारित करता है और एक तरह से बहुत महत्त्वपूर्ण विनियमन है।

 

परिवेश के आधार पर  यानि ” स्वरूप के आधार पर, ऊंचाई के आधार पर, घनत्व के आधार पर इमारत नियंत्रण”भवन अनुमतियाँ प्रदान करने की प्रणाली के साथ एफएसआई को बदलने की योजना  है ।   इस योजना में खेल के मैदान, मनोरंजन के लिए मैदान, पानी के किनारों, पैदल रास्तों और शहरी चौराहों को अनुल्लंघनीय माना है और इन्हे जनता के लिए खुले रखे जाने पर बल दिया है और एक नए शहरी संहिता बनाने के लिए कानून पर ज़ोर दिया है ताकि  सार्वजनिक स्थलों, अर्द्ध सार्वजनिक स्थलों और निजी संपत्तियों को “असंगत तरीकों से ” विकसित किया जा सके।

 

” शहर को एक बार फिर कंक्रीट जंगल की तरह बढ़ता देखने की अपेक्षा इस बार हम एक अच्छा सुनियोजित विकास देखना  चाहते हैं ”  एक सदस्य ने कहा।

 

एक बार अपने बंदरगाह के कार्यों से मुक्त होने के बाद अधिकांश भूमि तटीय नियामक क्षेत्र (सीआरजेड) I और  II के अंतर्गत आ जाएगी जहां कोई संशोधन की अनुमति नहीं है  (सीआरजेड II) या निर्माण  (सीआरजेड I) निषेध है।   समिति ने ,सार्वजनिक सुविधाओं के विकास, और मौजूदा झुग्गी बस्तियों और किरायेदारों  के पुनर्वास के लिए  एफएसआई,सीआरजेड कानूनों, में  ढील देने की सिफारिश की है ।

 

बढ़ता हुआ निर्माण, हालांकि, काफी हद तक आस-पास के संवेदनशील पर्यावरण क्षेत्रों, सेवरी की तटीय झीलों और वनस्पतियों को प्रभावित कर सकता है।

 

” हमारे 12 वर्षों के अनुसंधान में हमने एक वर्ष के अंतराल में पक्षियों की 150 से अधिक विभिन्न प्रजातियों को नियमित रूप से इन तटीय झीलों में देखा है,” बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) के अतुल साठे कहते हैं । “इसके अलावा एमपीएलडीसी को भूमि उपयोग की योजना बनाते समय पानी, सीवरेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के मामले में  भूमि की  ‘भार वहन क्षमता’ पर भी विचार करना चाहिए।”

 

अपने सुझावों में, बीएनएचएस खुली जगह में प्राकृतिक निवास के संरक्षण की मांग की है। “खुले रिक्त स्थान का मतलब  केवल सुस्सज्जित लॉन  और खेल के मैदान नहीं  हो सकता ,” साठे कहते हैं । “इस तरह के प्राकृतिक स्थलीय निवास, जैसे की सेवरी किले के आस पास के वन अवशेष भी संरक्षित किए जाने चाहिए।”

 

सबसे कठिन प्रश्न : क्या इसके लिए राजनैतिक इच्छाशक्ति  है ?

 

हालाँकि  समिति का प्रस्ताव  केवल जनहित के सिद्धांतों पर आधारित प्रतीत  होता है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति का आश्वासन नहीं के बराबर ही है। हमे याद रखना चाहिए की मुंबई की मिलों की भूमि की पुनर्विकास योजना भी इसी तरह के महानगरीय परिवर्तन के वायदे के साथ शुरू हुई थी ।

 

तट की योजना अभी अपने रेखाचित्र चरण से बाहर भी नहीं  आई थी की  उससे पहले ही  जनवरी में पोर्ट ट्रस्ट ने आधे से भी कम दिन का जगह खली करने के लिए  नोटिस दे कर अपनी भूमि पर बने अनधिकृत घरों को ढहा दिया था ।

 

पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन आर एम परमार ने कहा कि  उन्हें डॉकलैंड्स कायाकल्प पुनर्वास योजना के प्रस्ताव के बारे में कोई जानकारी नही थी ।

 

” हम तोड़फोड़ केवल मौजूदा कानूनों  के तहत करते हैं जब भी हमे उस तरह के अतिक्रमण मिलते हैं जो या तो सुरक्षा की दृष्टि से खतरा हों या फिर बंदरगाह की गतिविधियों ने बढ़ा बन रहे हों ”  परमार ने इण्डिया स्पेंड को बताया ।  यदि हम कानून तोड़ रहे होए तो कोर्ट हम पर रोक लगा सकता था लेकिन हम सिर्फ नियमों का ही पालन कर रहे हैं ।

 

पोर्ट ट्रस्ट ने वायदा किया है कि  वह एक इंच वर्ग  भूमि भी निर्माताओं को नही बेचेगा लेकिन निजी कम्पनियों को भूमि खंड पट्टे  पर देने से वह इंकार नही करता ।

 

” हम भूमि को सार्वजनिक (जनता की )  भलाई के लिए देने के लिए तैयार हैं लेकिन इसका मतलब यह नही कि  हम अपनी वित्तीय और वाणिज्यिक गतिविधि को सीमित कर देंगे ” परमार कहते हैं ।

 

डॉकलैंड्स विकास प्रस्ताव भी केंद्रीय सरकार द्वारा बनाए गए अन्य  प्रस्तावों जैसे धारावी मुंबई की विशाल झुग्गी बस्ती के विकास की योजना और हवाई अड्डे के पुनर्विकास की योजना की  तरह एक विशेष योजना प्राधिकरण एक स्वायत्त निकाय- जैसे की मुंबई पोर्ट भूमि विकास प्राधिकरण (एमपीएलडीए ) का हस्तक्षेप मांगता है , हालांकि राज्य को इस प्रस्ताव को पारित करने की मंजूरी देनी होगी ।

 

समस्या अब यह है कि अधिकारी ,  निर्वाचित शहरी निकायों के साथ भिड़ गए हैं । धारावी परियोजना प्रस्तावित हुए  12 साल हो गए हैं , लेकिन उस पर कार्य शुरू नहीं किया गया है, और हवाई अड्डे से विस्थापित बस्तियों का अभी तक पुनर्वास नहीं हुआ है।

 

जहां मुंबई विभिन्न वैश्विक तट पुनरोद्धार मॉडलों  से प्रेरणा ले सकती है, वहीं कई के सरकार की  ऊपर से नीचे योजना बनाने की पद्धति की आलोचना भी करते हैं।

 

अब तक,एमपीएलडीसी ने अपने परियोजना प्रस्ताव के अंतिम पन्नों  में  सार्वजनिक प्रतिक्रिया को भी शामिल किया  है। कई बिंदुओं के बीच हितधारकों और शहरी पहल समूहों ने कार्यालयों के प्रयोग लिए भूमि के उपयोग पर और  भूमि के वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग के विरोध में जोरशोर से आवाज़ उठाई है। एक टिप्पणी में तो यह भी कहागया है कि ” विकसित  क्षेत्र में किसी भी शॉपिंग मॉल  को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए” ।

 

“ईमानदारी से देखा जाए तो एक सहभागितापूर्ण योजना प्रक्रिया के लिए सरकार की पहल बहुत हल्की रही है,” उन्नी कहते हैं । “राय और जानकारी के लिए अनुरोध एक वेबसाइट और अखबार नोटिस में दिए जा रहे थे जबकि प्राथमिक हितधारक (यानी गोदी मजदूर, कोली मछुआरे , स्लम निवासी ) अँधेरे में रहे क्योंकि वे सामान्य रूप से इनका  उपयोग नहीं करते हैं … भूमि का एक बड़ा हिस्सा खुले स्थानों के लिए समर्पित किया गया है – शहर के उच्च वर्गों की सोर से एक मांग- बिना नागरिकों की बुनियादी चिंताओं के समाधान की ओर पहल किए हुए  ”

 

अदरकर  कहते हैं कि योजना में अप्रतिबंधित सार्वजनिक स्थलों जैसे अस्पतालों, स्कूलों, नाटक थिएटर, पुस्तकालयों और कला आदि अन्य सामाजिक संस्थाओं के लिए जगह काअभाव  है।

 

” एफएसआई से मुक्ति सिर्फ  आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार के लिए नहीं दी जा सकती ,” उन्होंने  कहा। “हम अगर जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं तो सामर्थ्य अनुसार कल्याण संस्थाओं के उपयोगिता के लिए विस्तृत योजना तैयार करना महत्वपूर्ण है।”

 

जैसा मुंबई के साथ, वैसा ही बंदरगाह के साथ

 

विश्व स्तर पर, बंदरगाह अपने  शहर के सत्ता संघर्ष और वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करते हैं।

 

” नए आत्म चित्र की खोज करते या पूँजी विकास की स्पर्धा की समस्याओं का समाधान ढूंढते या पर्यटन डॉलर खीजते हुए बीमार शहरों में अपने बंदरगाहों को एक रामबाण समाधान के रूप में देखने की प्रवृत्ति होती है”  ,  वैश्विक वास्तु और शहरी डिजाइन फर्म पर्किन्स + के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रणनीति निदेशक ,रिचर्ड मार्शल अपनी पुस्तक पोस्ट-इंडस्ट्रियल शहरों में बंदरगाह (2001) में लिखते हैं , “हालांकि, तट विकास को बनाते समय उसके अंत -उत्पाद पर तो ध्यान केंद्रित हित है लेकिन शहरों में पेश आ रही समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता है ।”

 

लंदन डॉकलैंड्स (बंदरगाह) के पुनर्विकास के दौरान मूल तटीय निवासियों और गोदी कर्मचारियों को बाहर धकेल दिया गया । सिडनी में, (मोटे तौर पर जिसे एक  सफलता के रूप में देखा जाता है ) डार्लिंग हार्बरको  विकास पर नियंत्रण से मुक्त रखे जाने और सिडनी के मौजूदा प्रारूप से एकीकृत करने में नाकाम रहने के लिए  आलोचना की गई है।

 

“हमारे शहर इतनी तेज़ी से बदले हैं कि  हम उनकी तुलना में ठीक से अपनी सोच को भी समायोजित भी नहीं  कर सके हैं ”  पूर्व हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मार्शल, लिखते हैं। “हमारी समस्या स्मृति नहीं है; अपितु यह है की हम अपने विचारों को किस प्रकार समायोजित करते हैं कि  किस तरह शहरी प्रारूप  समाज और संस्कृति की वर्तमान वास्तविकता के अनुसार  उपयुक्त रहेगा। ”

 

(एलिसन सलदान्हा एक स्वतंत्र पत्रकार हैं जो अपन लेखन से  मुंबई की शहरी विकास समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करती हैं )
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