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दो गांव परिषदों द्वारा भारत के लिए प्रशासन सबक

माधवी राजध्यक्षा,

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जहां बेहतर शासन  के लिए एक देश भर में एक शोर उठ रहा है, वहीं इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक कड़ी मेहनत और योजना का एक बेहतरीन उदाहरण दक्षिणी भारत के ग्राम क्षेत्र में मिलता है ।

 

पिछले चार वर्षों में, कर्नाटक के  कोलार जिले में ऊरकुंटे मित्तुर और चिक्कबल्लपुर जिले में दिब्बुरहल्ली , इन दो ग्राम पंचायतों (ग्राम परिषदों) में एक मौन परिवर्तन हो रहा है।

 

कर्नाटक को विकेन्द्रीकरण क्षेत्र में एक चैंपियन माना जाता है; यह 30 राज्यों के बीच में उन सात राज्यों में से है जिन्होंने सभी  29 कार्यों को पंचायत स्तर तक न्यागत कर लिया  है। कई अन्य राज्यों में , यह शक्तियां अभी भी राज्य सरकार तक सीमित हैं।

 

पंचायत कार्यालय, जो कभी निष्क्रिय हुए करते थे, अब गतिविधियों का केंद्र बने हुए हैं। ग्राम पंचायत  के लिए  एक मासिक निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है जो  वार्षिक गांव-विकास योजनाओं की देखरेख करती है। कई अनिवार्य समितियों ने , जो एक समय में निष्क्रिय थीं, जैसे  बाल विकास समितियाँ  (बच्चों के विकास के लिए समिति) और स्कूल निगरानी समितियाँ ,  अब फिर से बाल विकास पर नजर रखने के लिए लगन से बैठकें शुरू कर दीं हैं ।

 

नागरिकों के लिए, यह परिवर्तन, बेहतर सार्वजनिक सेवाओं के माध्यम से आया है।

 

इन दोनों  ग्राम पंचायतों के अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले गांवों में अब चालू स्ट्रीट लाइट हैं। राशन की दुकानों में  सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), रियायती खाद्य नेटवर्क के बारे में अनिवार्य जानकारी प्रदर्शित की जाती है । नागरिकों की पानी से संबंधित शिकायतों को हल करने के लिए 24 × 7 अधिकारी उपलब्ध रहते हैं।

 

2013-14 में, उरकुन्ते मित्तुर ग्राम पंचायत ने  शौचालय निर्माण के लिए शुरू हुए एक तत्कालीन राष्ट्रीय कार्यक्रम , निर्मल भारत अभियान, के तहत सबसे अधिक संख्या में  शौचालय का निर्माण किया।

 

अर्घ्यम , एक गैर सरकारी संगठन द्वारा नियोजित, ग्राम पंचायत संगठन विकास (जीपीओडी), जिसे बाद में गैर लाभ संस्थान ,अवंतिका फाउंडेशन ने पूरा किया की परिवर्तनात्‍मक संरचना  ही इस प्रणालीगत परिवर्तन का कारण रही है। ग्राम पंचायतों ने खुद भी  इस प्रणाली को  बनाने में योगदान दिया और इसे अपना कर अपने गांवों में लागू किया ।

 

जीपीओडी का ढांचा  इस सिद्धांत पर टिका हुआ है कि ग्राम पंचायतों में  स्वाभाविक रूप से जबरदस्त क्षमता होती है और वे एक  मजबूत संस्था के रूप में कार्य कर सकती है ।

 

अवंतिका फाउंडेशन इन दो ग्राम पंचायतों के साथ उनकी क्षमता को एक प्रणालीगत तरीके से निर्मित करने के लिए काम कर रही है ताकि उनके उद्देश को उनके मिशन, भूमिकाओं और संरचनाओं, संसाधनों और प्रोत्साहन के साथ एकसार किया जा सके।

 

उदाहरण के लिए ऊरकुंटे मित्तुर में जैसे , पंचायत के सदस्यों ने  सामूहिक रूप से “पारदर्शी और अच्छे प्रशासन के माध्यम से समग्र सतत विकास” अपने उद्देश को व्यक्त किया है और इसी अनुसार मिशन के बयानों को रेखांकित किया है।

 

प्रबंधन के इस सिद्धांत से कि ज़िम्मदारियों को बाँटा  जा सकता है लेकिन जवाबदेही किसी एक व्यक्ति की होनी चाहिए  पंचायत सदस्यों को  अलग-अलग विभागों को ग्रहण किया है ।

 

उदाहरण के लिए, एक पोर्टफोलियो बनाया गया था उत्पादन-प्रमुख  जिसके अंतर्गत कृषि, पशुपालन और नौकरी कार्यक्रम जैसे सभी आजीविका कार्य आते हैं । यह व्यवस्था सरपंच बहुल व्यवस्था के खिलाफ ,वितरित नेतृत्व परिणत हुई और पंचायत शासन में उच्च स्तर की पारदर्शिता आई। उन पंचायत सदस्यों  ने महसूस किया कि स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त भूमिकाऐं  और जिम्मेदारियों की वजह से उनमे  स्वामित्व और जवाबदेही की भावना आने लगी है

 

प्रशासनिक पहिए की सभी छड़ियों के संरेखण के परिणामस्वरूप सेवा में सुधार हुआ है जैसा कि  हम नीचे देख रहे हैं :

 

दिब्बुरहल्ली ग्राम पंचायत की कुछ व्याख्यात्मक उपलब्धियां

 

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ऊरकुंटे मित्तुर के लिए कार्यक्रम उपलब्धि और फंड ट्रैकिंग (रिपोर्ट कार्ड नमूना  )

 

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Source: Gram Panchayat Organisation Development-A process document, Avantika Foundation

 

उनकी यह सफलता काफी प्रभावी रही और इस ढांचे को अपनाने के लिए कर्नाटक में 15 अन्य ग्राम पंचायत सामने आई ।

 

अभी हाल ही में कर्नाटक सरकार ने अगले दो वर्षों में, कोलार जिले के मुल्बगल तालुके  के  450 गांवों की  30 ग्राम पंचायतों में जीपीओडी ढांचे को अपनाया है। इसका उद्देश्य  शासन के आखिरी मील  पत्थर तक सुधार लाना है। दरअसल, यह राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान के तहत देश की पहली नवीनीकरण परियोजना (पंचायत सुदृढ़ीकरण योजना) के रूप में मंजूर की गई है।

 

“संभावित रूप से  उनके पास जितनी निधि है और जितना वे उत्तोलन कर सकते हैं, जितनी  शक्तियां वे इस्तेमाल कर सकते हैं और जितने व्यक्ति संसाधन का वे उपयोग और  भर्ती कर सकते हैं  उतने से  ग्राम पंचायते ,ग्रामीण भारत का चेहरा बदलने के लिए सक्षम होनी,” ऐसा कहना है  विकेंद्रीकृत स्थानीय प्रशासन केंद्र,अवंतिका फाउंडेशन की  प्रमुख सोनाली श्रीवास्तव का जो मुल्बगल में  इस  पहल की मुहिम चला रही हैं।

 

“हमें निर्वाचित सदस्यों द्वारा किए गए योगदान का सम्मान करने की आवश्यकता है, और उन्हें प्रोत्साहित करने और उनके लिए ऐसा वातावरण बनाने की ज़रूरत है जिससे वे प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम हों सकें ,” श्रीवास्तव कहते हैं ।

 

“यह परियोजना ग्राम पंचायतों में अधिक संस्थागत दक्षता लाने का वादा करती है और पंचायती राज व्यवस्था में नागरिकों के विश्वास को बढ़ाने की ओर  प्रयासरत है। यह विकेन्द्रीकरण को बढ़ावा देने में बहुत महत्त्वपूर्ण साबित होगी, ” पंचायत राज,निर्देशक- कर्नाटक सरकार, एसएम ज़ुल्फ़िक़ारुल्ला कहते हैं।

 

एक अचकचाते नौसिखिये से अनुभवी प्रशासक की तरफ़

 

नीचे से ऊपर तक देखने पर लगता है कि  पर ग्राम पंचायतों अक्सर उन्हें प्रदान की गई जिम्मेदारियों का ठीक से प्रबंधन करने में असक्षम होती हैं।

 

कर्नाटक में ऊरकुंटे मित्तुर ग्राम पंचायत से एक ग्राम पंचायत सदस्य भारती(वह केवल एक ही नाम का उपयोग करता है)कहती हैं ,  “पांच साल पहले पहली बार जब मैं चुनी गई ,मुझे  पंचायती राज संस्थाओं या उनमे मेरी भूमिका से क्या उम्मीद होगी , इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी,”। “आंगनवाड़ी (क्रेच ) ठीक बगल में मेरे घर के पास ही था, लेकिन मैंने वहाँ  जाना कभी ज़रूरी नहीं समझा।”

 

Picture of Bharati, GP member from O Mittur GP

 

कर्नाटक में ऊरकुंटे मित्तुर ग्राम पंचायत से एक ग्राम पंचायत सदस्य भारती पहली बार  ग्राम पंचायत में  चुने जाने के अपने अनुभव सुनाती हैं। छवि क्रेडिट: अवंतिका फाउंडेशन

 

उसने एक किस्सा सुनाते  हुए बताया कि  कैसे एक बार उसे स्कूल के शिक्षकों को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया था  “मैं पंचायत के कार्यों और कर्तव्यों के विषय में इतनी अनजान थी कि  मैं सारे समय उनसे आंगनवाड़ियों के बारे बात करती रही  ,” भारती कहती है  “जबकि इस विषय से उन सभी को कुछ भी लेना देना नही था ।”

 

भारती को अपनी पंचायत के संगठनात्मक विकास और उसमे उसकी अपनी भूमिका के रेखांकन से काफी लाभ हुआ । उसने  पोषण, खाद्य सुरक्षा और शिकायत समाधान के कार्यों सहित सामाजिक न्याय संविभाग का कार्यभार संभाल लिया ।

 

“मुझे अपनी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों में जबरदस्त विश्वास प्राप्त होने है,” उसने कहा। “मुझे विशेष रूप से इस बात पर बहुत गर्व है कि मैं  दोपहर भोजन योजना में भारी सुधार लाने में  सक्षम रही हूँ।”

 

भोजन की गुणवत्ता और मात्रा अच्छी हुई है। कुछ ऐसे वाकये हुए थे कि  खाना खाद्य बाजार में बेचा जा रहा है जिसके कारण खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा एक जांच की गई और उसके बाद व्यवस्था  में सुधार किया गया।

 

भारती की  ग्राम पंचायत, कर्नाटक के उन   5631 गांव निकायों के बीच में  से एक है जिनमे इस साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। लेकिन उसी की तरह, ज्यादातर ग्राम-पंचायत के सदस्यों में अपनी भूमिका संभालने की क्षमता और जानकारी की कमी है।

 

कर्नाटक में पंचायती राज संस्थाओं की संरचना

 

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Source:www.lgdirectory.gov.in, National Informatics Centre

 

पंचायत की कहानी 

The Panchayat story

 

हालांकि, यह चुनौती कर्नाटक की ही ग्राम पंचायतों के लिए अनूठी नहीं है। भारत भर में लगभग 239,000 ग्राम पंचायतों हैं; इनमे से बहुत सी कमज़ोर पूँजी  विकेन्द्रीकरण, पदाधिकारियों और कार्यों की कमियों  से ग्रस्त हैं।

 

भारत में ग्राम पंचायतों का भौगोलिक वितरण

 

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Source: Ministry of Panchayati Raj, Government of India

 

ग्रामीण विकास मंत्रालय के पास  80,043 करोड़ रुपए का वार्षिक बजट है जिसमे से पंचायती राज मंत्रालय के लिए  7000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

 

स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के रूप में, ग्राम पंचायतों को संविधान के 73 वें संशोधन अधिनियम, 1992. के तहत बहुत सी  ज़िम्मेदारियाँ दी गई हैं। इसका प्रयोजन केंद्रीकृत नियोजन युग का जीर्णोद्धार करना और लोगों को  प्रशासन के करीब लाना था।

 

संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची ने अतः ग्राम पंचायत के स्तर पर पानी, स्वच्छता, ग्रामीण आवास और कृषि पीने, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित 29 प्रशासनिक कार्यों को न्यागत किया ।

 

73 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1993 में जनादेश द्वारा प्रमुख राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के लिए पंचायती राज संस्थाओं को दिए गए कार्यों  की स्थिति

 

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Source: As presented by former Minister of Panchayati Raj Shri V. Kishore Chandra Deo in a written reply in the Rajya Sabha, December 2012–http://www.pib.nic.in/archieve/others/2012/dec/d2012121302.pdf, *Note: Delhi has no panchayats. Data related to J & K and Jharkhand is not clear. Mizoram, Meghalaya and Nagaland are exempt. Independent reports claim Chattisgarh, Rajasthan and West Bengal have subsequently devolved all 29 functions, but this could not be verified.

 

इन कार्यों को करने के अलावा ग्राम पंचायत और भी कई कर्तव्यों का पालन करती हैं । वह,  इंदिरा आवास योजना (ग्रामीण आवास कार्यक्रम), समन्वित बाल विकास सेवा, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन सहित कई केंद्रीय रूप से प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 

ग्राम पंचायतों के ऊपर रोज़मर्रा में भी की ज़िम्मेदारियाँ हैं जैसे कि  गांव के लिए वार्षिक योजना उपक्रम ,पानी की कमी ,राशन की दुकानों  की समस्या, वार्ड समिति की बैठकें आयोजित करना और कर संग्रह जैसी  नागरिकों की सामान्य समस्याएँ  सुनना और सुलझाना।

 

लेकिन जैसा कि ऊर कुंटे और दिब्बुरहल्ली के उदाहरण  से स्पष्ट होता है  , इससे पहले कि वे सही मायनों में ग्राम स्वराज (गांव स्वतंत्रता) को प्राप्त कर सकें , ग्राम पंचायतों को निश्चित रूप से बहुत संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण की जरूरत है।

 

नोट: जीपीओडी की संरचना अर्घ्यम में हुई थी, लेकिन बाद में यह अवंतिका फाउंडेशन द्वारा कार्यान्वित किया गया है।

 

(माधवी राजध्यक्षा, बंगलौर में स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन ,अवंतिका फाउंडेशन, जो स्थानीय शासन को मजबूत बनाने के लिए प्रयासरत है,में  एक पत्रकार और भागीदारी एवं वकालत की प्रमुख नीतिज्ञ हैं )

 
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