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बजट में कटौती से 5 जल जनित रोगों में बढ़ावा हो सकता है

देवानिक साहा,

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नई दिल्ली अब, आठ केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में से उस एक राष्ट्रीय योजना को  जिसके द्वारा  ग्रामीण भारत को स्वच्छ पानी की आपूर्ति होनी थी,  समर्थन नही दे सकेगी , इससे बीमारी फैलने का डर और जान का खतरा बढ़ जाएगा ।

 

भारत  पानी से संबंधित रोगों की वजह से  200 करोड़ व्यक्ति दिन और 36,600 करोड़ रुपये हर साल खो देता है।

 

जिस तरह भारत एक काफी समय से निरंतर स्वास्थ्य संकट के साथ संघर्ष कर रहा था , उससे स्वास्थ्य पर खर्च को बढ़ाए जाने की उम्मीद थी , लेकिन इसके विपरीत स्वास्थ्य संबंधी बजट में 15% की कटौती की गई, जैसा कि इंडिया स्पेंड ने रिपोर्ट किया था।

 

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यू पी ),जिसका शुभारम्भ 2009 में किया गया था, को  2013-14 में 11,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जब मई 2014 में सरकार का कार्यभार संभाला तब  सम्पूर्ण भारत में 20,000 गांवों और बस्तियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की योजना में 3600 करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई  ।

 

दूषित पानी की वजह से होने वाली पांच बीमारियों का हमारा विश्लेषण इस प्रकार है:

 

अतिसार (डायरिया): 2014 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार,15 उच्च बोझ देशों के बीच, भारत दस्त और निमोनिया से मरणासन्न बच्चों  के लिए अपने जीवन रक्षक हस्तक्षेप प्रयासों के संदर्भ में नीचे से तीसरे स्थान पर है। हालाँकि 2013 में अतिसार रोग के मामलों में 8% की कमी हुई है और यह  2012 में 11.7 मिलियन  से घट कर 10.7 रह गए हैं लेकिन अभी इस क्षेत्र में बहुत कुछ किया जाना बाकी है ।  2014 में की गई गणना के अनुसार , 7.6 लाख मामले पंजीकृत किए गए थे।

 

भारत में तीव्र अतिसारीय रोग के मामले , 2008-14   (मिलियन में)

भारत में तीव्र अतिसारीय रोगों से होने वाली मौतें, 2008-14 

 

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Source: National Health Profile 2013, Lok Sabha; *2014 figures are up to September

 

टाइफाइड : टायफॉइड में मामलों में 65 % की वृद्धि हुई है वर्ष 2008  में 0.93 मिलियन से 2013 में 1.53 मिलियन बढ़ोतरी हुई हालाँकि टाइफाइड के कारण होने वाली मृत्यु की संख्या  350-से- 450 की सीमा के आसपास रही।  2014 में इसके, 1.09 मिलियन मामले दर्ज किए गए थे।

 

भारत में टाइफाइड के मामले, 2008-14

भारत में टाइफाइड से होने वाली मृत्यु ,  2008-14 में

 

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Source: National Health Profile 2013, Lok Sabha; *2014 figures are up to September

 

एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम: तीव्र इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम(एईएस) के मामले और इसके कारण होने वाली मृत्यु  भारत में एक बढ़ती हुई समस्या है। 2014 में, एईएस मामलों में  159% की वृद्धि हुई। वर्ष  2008 में  3,855 से बढ़कर यह मामले  2014 में 9, 99615 तक हो गए , जबकि इससे मृत्यु के  मामलों में 122% की वृद्धि हुई और जो  2008 में 684 से बढ़कर 2014 में 1,518 तक हो गए।

 

भारत में तीव्र इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम के मामले , 2008-14

भारत में तीव्र इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम से होने वाली मृत्यु , 2008-14

 

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Source: National Health Profile 2013, Lok Sabha; *2014 figures are up to September

 

वायरल हेपेटाइटिस: वायरल हेपेटाइटिस के मामलों में 12% गिरावट आई है,  वर्ष 2012 में 0.104 मिलियन से 2013 में 0.118 मिलियन हुए हैं, लेकिन यह बीमारी एक खतरा है और पुनः बढ़ सकती है: 2014 में की गई पिछली गणना में , 0.09मिलियन मामले दर्ज किए गए थे।

 

भारत में वायरल हेपेटाइटिस के मामले , 2008-14

भारत में वायरल हेपेटाइटिस से होने वाली मृत्यु , 2008-14

 

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Source: National Health Profile 2013, Lok Sabha; *2014 figures are up to September

 

हैजा: भारत ने पिछले कुछ दशकों में हैजा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। हैजा से  होने वाली मृत्यु नगण्य हैं और हैजा के मामलों में 77% की कमी हुई, जो 2010 में 5004 से  2013 में 1127 तक कम हुए, लेकिन 2014 में की गई आखिरी गणना में 137% की वृद्धि सामने आई है ।

 

भारत में हैजा के मामले ,  2008-14

भारत में हैजा से होने वाली मृत्यु , 2008-14

 

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Source: National Health Profile 2013, Lok Sabha; *2014 figures are up to September

 

स्वास्थ्य एक राज्य स्तर का विषय है और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकारों पर होती है, हालांकि, केंद्र सरकार का समर्थन भी इन समस्याओं के  समाधान के लिए  महत्वपूर्ण है।

 

(देवानिक साहा द पॉलिटिकल इंडियन में सांख्यिकी संपादक पद पर कार्यरत हैं।)

 

छवि आभार : विकिमिडिया कॉमन्स

 

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