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बढ़ता व्यय: फिर भी, संकट में भारत की सैन्य

अभीत सिंह सेठी,

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भारत का रक्षा बजट- विश्व में  सबसे अधिक हथियार आयातक– पिछले एक दशक में 80,500 करोड़ रुपये से वित्त वर्ष 2014-15 में 229,000 करोड़ रुपये तक दुगने से अधिक हो गया है।

 

फिर भी, रक्षा बल में हथियार, और आर्मी में पुरुषों और महिलाओं की गंभीर रूप से कमी है।

 

लोकसभा में पेश किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार,  सेना, नौसेना और वायु सेना में क्रमशः 17% (7,989), 17% (1,499) और 3% (357) अधिकारियों की कमी है। अब तीनों सेनाओं में हथियारों के घाटे पर विचार करते हैं:

 

– भारतीय वायु सेना (आईएएफ) (जैसा कि यह इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट बताती है ) में 272-306 लड़ाकू विमान और 56 मध्यम परिवहन विमानों की कमी है।

 

– भारतीय सेना में 3000 से 3600 तक  तोपें, 66,0000 असॉल्ट राइफलों, 2लाख एंकल लैदर बूट और 66,000 राउंड लौह छेदक गोला बारूद की जरूरत है।

 

– नौसेना में 12 डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों, 6 परमाणु सक्षम पनडुब्बियों और 7 स्टेल्थ फ्रिगेट की जरूरत है।

 

तीनों रक्षा अंगो को  भी सम्मिलित रूप  से 1,000 से अधिक हेलीकाप्टरों की जरूरत है। यह एक सांकेतिक सूची है: रक्षा में आवश्यकताओं और कमियों  की वास्तविक सूची काफ़ी लंबी है।

 

फिर भी, रक्षा मंत्रालय के बाद  वित्त मंत्रालय, को भारतीय बजट के दूसरे सबसे बड़े शेयर भाग के लिए ज़िम्मेदार है ।

 

रक्षा सेवा बजट, वित्त वर्ष 2006-वित्त वर्ष 2015

 

Source: Ministry of Finance

 

अमित कौशिश, रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण (आईडीएसए)  संस्थान में प्रतिष्ठित फेलो का कहना है कि  रक्षा बजट भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के  1.78% और कुल केंद्रीय सरकारी खर्च के  12.76% के लिए ज़िम्मेदार है।

 

रक्षा बजट में राजस्व-पूंजी अनुपात 60:40 है। राजस्व व्यय, वेतन भुगतान और रक्षा ठिकानों और उपकरणों के रखरखाव के लिए होता है। पूंजीगत व्यय,  उपकरणों की खरीद और आधुनिकीकरण के लिए होता है।

 

2014-15 में भारत का  पूंजीगत व्यय 94,587.95 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है पिछले साल में किए गए 78,872.23 करोड़ रुपये से  20% अधिक की वृद्धि।

 

इण्डिया स्पेंड से एक साक्षात्कार में कौशिश ने कहा ” धन की आवश्यकता (रक्षा खरीद के लिए) सीधे सीधे शेष प्रतिबद्ध देनदारियों और नए अनुबंध बनाने से  संबंधित है,”। नतीजतन, सेना  2015-16 के बजट में इससे संबंधित वृद्धि की उम्मीद कर सकता है “अगर – और यह एक महत्त्वपूर्ण अगर है -नई परियोजनाओं जैसे कि नए लड़ाकू विमान की योजना को मंजूरी मिल जाती है “।

 

हम अब रक्षा बजट में  क्षेत्रवार आवंटन पर नजर डालते हैं।

 

रक्षा सेवाओं पर व्यय, वित्त वर्ष 2013-वित्त वर्ष 2015

 

2desk
Source: Ministry of Finance

 

तीन रक्षा अंगों में सेना को लगातार उच्चतम निधि मिलती रही है। 2014-2015 में, यह 92,601.32 करोड़ रुपये  थी जो कि कुल व्यय का 40% है जिसके उपरांत  वायु सेना और नौसेना का स्थान रहा  क्रमश: 20,506.84 करोड़ रुपये (9%) और 13,975.79 करोड़ रुपये (6%) के साथ ।

 

पेंशन का प्रश्न

 

बजट आवंटन में रक्षा पेंशन पर ध्याननहीं दिया जाता  है क्योंकि यह  एक अलग बजट मद  के अंतर्गत आती है। रक्षा मंत्रालय ने 2013-14 में रक्षा पेंशन के लिए 50,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं जो 2014-2015 में आवंटित 45,500 करोड़ रुपये की तुलना में 9% अधिक हैं।

 

पिछले साल के बजट में पूर्व सैनिकों की एक रैंक-एक पेंशन योजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे ।  इस साल के एक अनुमान के अनुसार यह राशि बढ़ कर 8000 करोड़ रुपये तक हो सकती है जैसा कि  टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है।

 

भारत में दो लाख से अधिक पूर्व सैनिक एक रैंक-एक पेंशन, की मांग कर रहे हैं जो यह सुनिश्चित करेगी कि सभी एक ही रैंक और समान अवधि की सेवा वाले सेवानिवृत्त कर्मियों को एकसमान पेंशन का भुगतान किया जाएगा चाहे उनकी सेवानिवृति की तारीख कुछ भी हो

 

अनुसंधान और विकास के लिए अनुदान

 

रक्षा अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) में निवेश द्वारा भारत के स्वदेशी हथियार उद्योग को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने की उम्मीद है। लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2013-2014 में भारत सरकार ने  रक्षा पूंजीगत व्यय का 42.7% हथियारों के आयात में खर्च किया।

 

हमने पहले भी उल्लेख किया है कि  एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्थान  स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) जो संघर्ष, आयुध, हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण पर शोध करता है , के अनुसार भारत पूरे विश्व में हथियारों का सबसे बड़ा आयातक है।

 

रक्षा मंत्रालय ने 2013-2014 में लगभग 5,257.60 करोड़ रुपये से 2014-2015 में 9,298.25 करोड़ रुपये के साथ, अनुसंधान एवं विकास के लिए पूंजी खर्च को दोगुना कर दिया है। इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय ने वेतन और अनुसंधान केन्द्रों के रखरखाव के लिए 5,984.67 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं।

 

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