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भारत की राजनैतिक रूप से प्रभावी जातियों ने ‘आरक्षण ‘ पर हक जमाया

चैतन्य मल्लापुर और प्राची सालवे,

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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च को  जाटों को नौ राज्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की एक केंद्रीय सूची में शामिल करने के केंद्र सरकार के निर्णय  को रद्द कर दिया, इंडिया स्पेंड के एक विश्लेषण से पता चलता है कि इन जातियों ने अधिकांशतः आरक्षण की सकारात्मक-कार्रवाई पर कब्ज़ा कर लिया है ।

 

ओबीसी, केंद्र सरकार द्वारा सभी विविध जातियों के लिए प्रयुक्त वह शब्द है ,जो सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित मानी  जाती  हैं , जो शैक्षिक, आर्थिक और  राजनीतिक रूप से भारत के विकास की सीढ़ी के अंतिम पायदान पर खड़ी अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (अजजा), की तुलना में बेहतर हैं।

 

1980 के मंडल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार,  देश की आबादी का 52% भाग ओबीसी हैं । एक राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन  की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमे  41% तक गिरावट आई थी लेकिन वे  राजनीतिक रूप से शक्तिशाली हैं जैसा कि  जाट- एक उत्तर भारतीय मार्शल और कृषक समुदाय जो पारम्परिक रूप से    पिछड़ा नही माना जाता है – के आरक्षण की मांग से इंगित होता है।

 

जैसा कि  यह  तालिका इंगित करती है  तीन में से छह विशाल भारतीय राज्यों में,  अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजाति की तुलना में अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी ) के पास अधिक सरकारी नौकरियों में आरक्षण है। आकंड़ों में , तमिलनाडु में  वंचित समूहों में अलग से सभी सरकारी नौकरियों में 69% आरक्षण के साथ , उच्च संयुक्त प्रतिशत भी दिखाई देती है  :

 

सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में आरक्षण (%)

 

reservation
Sources: (1) for Tamil Nadu, (2) for West Bengal, (3) for Bihar, (4) for UP, (5) for Maharashtra, (6) for Madhya Pradesh

 

हम भारत में अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अन्य जातियों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति पर एक नजर डालते हैं:

 

शहरी / ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए संकेतक

 

indicators
Source:Lok Sabha

 

आर्थिक रूप से, ओबीसी, अनुसूचित जातियों से ,जो वंचितों की श्रेणी में उनसे नीचे हैं , बेहतर करते हुए दिखाई देते हैं। ग्रामीण और शहरी भारत में , उनकी उपभोग क्षमता अनुसूचित जातियों से  बेहतर है, बहुत कम हैं जो गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं ,वे बेहतर रूप से शिक्षित हैं।
 

भारत में आरक्षण हमेशा से राजनीतिक रूप से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है जिसे वोट बैंक की राजनीति के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया है, कोटे के अाधार पर सकरात्मक कार्रवाई के माध्यम से चुनावी लाभ पाने की प्रक्रिया मात्र।

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ओबीसी की सूची में जाट को शामिल करने पर दिल्ली सहित नौ राज्यों में रोक लग गई। यह राज्य हैं , बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश,मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान(भरतपुर और धौलपुर के दो जिलों से),  उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा सामाजिक पिछड़ापन, पिछड़ेपन का निर्धारण करने में एक महत्वपूर्ण कारक है और सिर्फ जाति आरक्षण देने के लिए एकमात्र कारण नहीं हो सकती है, वह कारक ,जिसकी  केंद्रीय सरकार ने एक दशक पुरानी खोज जो जाट को पिछड़ा घोषित करती है, का इस्तेमाल करते समय अनदेखी की है।

 

पिछले साल अगस्त में, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने अपने पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन द्वारा  लिए गए इस निर्णय का समर्थन किया कि  जाटों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किया जाना चाहिए ।

 

ओबीसी के लिए आरक्षण, 1993 में शुरू  हुआ जब भारत सरकार ने इन जातियों के लिए अपने नागरिक नौकरियों में 27% आरक्षण किया था ।एक और 15% अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5% आरक्षण है।

 

वर्तमान में  1 जनवरी 2013 की स्थिति के अनुसार,ओबीसी, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए केंद्रीय सरकार की नौकरियों में प्रतिनिधित्व, क्रमशः 17.74%, 17.57% और 7.73% है।

 

जैसा कि नीचे दी गई तालिका में बताया गया है, अधिकांश जातियों को अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी)की केंद्रीय सूची में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

 

List of Castes under consideration for inclusion in the Central List of OBCs.
S.No. State Name of the Caste
1 Himachal Pradesh (i) Choharka other than SC/ST living in Malana revenue village of Kullu District (HP) (ii) Bangahalias residing since time immemorial in Chhota Bhangal and Bara Bhangal area of Kangra District (HP)
2 Karnataka All Muslims except the following categories: (i) Cutchi Memon (ii) Navayat (iii) Bohra or Borah (iv) Sayyid (v) Shiek (vi) Pathan (vii) Mughal (viii) Mahdiva/Mahdavi (ix) Konkani or Jamayanthi Muslims
3 Madhya Pradesh Panka
4 Jharkhand (i) Bagti (ii) Late (iii) Kunai (iv) Pushpanamit (v) Jhora (vi) Laxmi Narayan Gola
5 Gujarat Sipai, Patni, Jamat or Turk Jamat (all Muslims)
6 Maharashtra Mhali
7 Telangana “Mutatis Mutandis” applicability of Central List of OBC for the State of undivided Andhra Pradesh to the newly created State of Telangana.
8 Jammu & Kashmir Labana and Sheer Gojrie

Source: Lok Sabha

 

भारत में आरक्षण पर बहस जारी रहेगी।

 

हाल ही में, महाराष्ट्र राज्य में मराठा और मुस्लिम आरक्षण पर विवाद उठा था। महाराष्ट्र राज्य विधानमंडल ने मराठा आरक्षण विधेयक को मंजूरी दे दी जिसके अनुसार शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठा समुदाय को 16% आरक्षण मिलेगा। लेकिन उन्होंने  मुसलमानों के लिए इसी आरक्षण  5% की कमी कर दी।  यह  मामले में मुंबई उच्च न्यायालय के पास लंबित है। राज्य सरकार  मराठा कोटा के अंतर्गत 16% नौकरियाँ  रिक्त रखेगी।

 

महाराष्ट्र में दोनों आरक्षण पिछली कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सरकार द्वारा लाए गए एक  अध्यादेश के माध्यम से मोड़े गए थे,  जो अब भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित है।

 

(प्राची साल्वे और चैतन्य मल्लापुर इंडिया स्पेंड के साथ विश्लेषक के रूप में कार्यरत हैं)

 

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