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मोदी का पहला साल- कितना अलग मनमोहन से

इंडियास्पेंड टीम,

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भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (बाएँ), प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ(दायें) तत्कालीन मुख्य मंत्री गुजरात अहमदाबाद में 29 अक्टूबर 2013 को एक म्यूज़ियम के उद्घाटन के अवसर पर |

 

मोदी सरकार का एक साल पूरा होने जा रहा है। ऐसे में यूपीए सरकार और एनडीए सरकार के बीच तुलना होना लाज़मी है। एक नज़र डालते हैं इस एक साल देश की व्यवस्था में क्या उतार-चढ़ाव आए।

 

  • अर्थव्यवस्था में उछाल
  • आयाल-निर्यात में कमी
  • विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि
  • कोयला खनन, विद्युत उत्पादन और पेट्रोलियम खपत में बढ़ोत्तरी
  • बैंकिंग में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों ( एनपीए) की बढ़त

 

गौरतलब है कि मोदी और मनमोहन के प्रथम वर्ष कार्यकाल में काफी समानताएं नज़र आती हैं। इंडियास्पेंड ने अपने विश्लेषण में पाया कि 12 में से 7 संकेतक लगभग समान ही है।  हालांकि वैश्विक मंदी के बावजूद भारत में संतोषजनक और संतुलित आर्थिक दौर के लक्षण दिखते हैं।

 

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Source (1- 2009-10, 2- 2014-15) : GDP 1, 2; Agriculture 1, 2; Industrial Production 1, 2; Coal Production 1, 2; Foreign Exchange Reserves 1, 2; Exports 1, 2; Imports 1, 2; Non Performing Assets 1, 2; Petroleum 1, 2; Electricity 1, 2; Nuclear 1, 2; Renewable Energy 1, 2. *NPAs for 2014-15 calculated up to December 2014.

 

मनमोहन- मोदी के प्रथम वर्ष कार्यकाल में हुए कार्यों के परिणाम :-

 

  • औद्योगिक उत्पादन: मोदी सरकार के पहले साल ( 2014-15 ) में ही आठ प्रमुख क्षेत्रों के लिए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 5 फीसदी की वृद्धि हुई है। इससे पूर्व यह आंकड़े 4.2 प्रतिशत थे। कोयला, कच्चा तेल , प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात , सीमेंट और बिजली इन आठ क्षेत्र के भीतर आते हैं। मनमोहन सरकार के पहले साल के दौरान भी छह प्रमुख उद्योगों के लिए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 10.4 % बढ़त दर्ज की गई थी जबकि 2008-09 में यह आंकड़ा 2.8 % था।  ·

 

  • निर्यात और आयात: डॉलर , निर्यात-आयात की दृष्टि से साल 2013-14 के मुकाबले साल 2014-15 में 2% और 0.5% गिरावट दिखी है। मनमोहन सरकार ( दूसरे कार्यकाल) के प्रथम वर्ष में निर्यात और आयात में कहीं अधिक तेजी से गिरावट हुई थी। साल 2008-09 के मुकाबले साल 2009-10 में आयात और निर्यात में 4% और 5% की गिरावट दर्ज की गई थी।  ·     

 

  • परमाणु उर्जा: दिसंबर 2014 में तमिलनाडु में 1,000 मेगावाट क्षमता की कुडनकुलम-1 इकाई शुरु होने के साथ देश की कुल स्थापित परमाणु बिजली क्षमता 2014-15 में 5,780 मेगावाट हो गई, जो 2013-14 के 4,780 मेगावाट से 21 फीसदी अधिक है। वहीं 2009-10 में यह आंकड़े, साल 2008-09 के मुकाबले 10.6% बढ़ता देखा गया था। मोदी और मनमोहन के कार्यकालों की सीधी तौर पर तुलना कर पाना कठिन है क्योकि मनमोहन अपने दूसरे कार्यकाल में थे | मोदी ने विरासत में सिंह के कार्यकाल के ऊपर पड़ी वैश्विक मंदी और मनमोहन सरकार की कठपुतली (परोक्ष रूप से राजनीतिक) योजनाओं के अवरोधों को भी झेला है |

 

लेकिन दिए गए उपरोक्त संकेतक मोदी और यूपीए 2 के पहले साल का एक व्यापक सांख्यिकीय अवलोकन प्रदान करते हैं।

 

सांख्यकीय अंको के जरिये एक अर्थव्यवस्था की कहानी

 

  • आर्थिक विकास : साल 2009-10 में, स्थिर मूल्यों पर, सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी ) में 8.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। जबकि साल 2014-15 में जीडीपी का विकास दर 7.4% होने का अनुमान है।

 

  • कृषि: भारत की 600 मिलियन जनता कृषि पर निर्भर है। साल 2014-15 में, कृषि क्षेत्र में 1.1% की वृद्धि दर्ज की गई है। 2009 – 10 में यह आंकड़े 0.8% थे।

 

  • विदेशी मुद्रा भंडार: फोरेक्स भंडार में 341 बिलियन डॉलर के साथ 12 % की वृद्धि दर्ज की गई। साल 2013-14 में यह आंकड़ा 304 बिलियन डॉलर था। मनमोन सिंह के यूपीए2 के प्रथम वर्ष कार्यकाल (2009-10) में यह आंकड़े 254.9 बिलियन डॉलर से 5.4 फीसदी बढ़े थे। जबकि उसके पिछले वर्ष यह आंकड़ा 241.7 बिलियन डॉलर था|

 

  • कोयला : साल 2014 -15 में कोयले के खनन में 8.2 % की वृद्धि दर्ज की गयी| बाद में यूपीए सरकार के दौरान हुए कोयला आवंटन को लेकर भारी विवाद भी हुआ। कोयला आवंटन मामले से यूपीए2 की छवि पर काफी दुष्प्रभाव पड़ा। 2009-10 में कोयले का खनन 8.1% बढ़ा | अब सरकार को दुबारा नीलामी के माध्यम से 67 कोयला ब्लॉकों के पुन: आवंटन के साथ सुधार की काफी उम्मीद है। हालांकि मोदी की 2 लाख करोड़ (डॉलर 31.25 बिलियन) की उम्मीद के बारे में कोयले के विशेषज्ञ शंकित हैं|

 

  • पेट्रोलियम : 2014-15 में पेट्रोलियम उत्पादों (डीजल, पेट्रोल , रसोई गैस आदि) की खपत में 3.1 % की वृद्धि हुई है। साल 2009-10 में यह आंकड़े 3.2% दर्ज किए गए थे। भारत के तेल मंत्रालय के अनुसार  अगले वित्तीय वर्ष में पेट्रो आधारित प्रोडक्टस की खपत में 3.3% तक बढ़ जाने की उम्मीद है|

 

  • बिजली: साल 2014-15 में भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ समझे जाने वाले ऊर्जा क्षेत्र की स्थापित क्षमता वर्ष 2013-14 से 2014-15 तक 15% बढ़ जाने की उम्मीद है। 2013-14 में यह आंकड़ा 10% ही था। वहीं 2009-2010 में, उसके पिछले वर्ष के मुकाबले बिजली क्षेत्र में 7.7% की वृद्धि दर्ज की गई थी।

 

  • वैकल्पिक ऊर्जा: कार्बन उत्सर्जन को कम करने कि वैश्विक मुहिम के चलते, मनमोहन और मोदी दोनों के ही कार्यकाल के दौरान विकास दर उंचे रहे। वैकल्पिक ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता 2014-15 में 7.56 % की वृद्धि और 2009-10 में 17.20 % की वृद्धि दर्ज की गई।

 

  • बैंकों के बढ़ते नॉन परफोरमिंग एसेट्स : इस क्षेत्र में मोदी कार्यकाल में भी कोई विशेष बदलाव देखने को नहीं मिला। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एनपीए 17 % यानि कि मार्च 2014 में 2.27 लाख करोड़ से बढ़कर दिसंबर 2014 में 2.73 लाख करोड़ हो गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एनपीए पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2009-10 में 23 % की वृद्धि हुई थी। इतने विशाल स्तर के एनपीए बैंकिंग सैक्टर को असंतुलित कर अर्थव्यवस्था को झकझोर सकते हैं|

 

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